सियासत की बात



`भ्रष्टाचारियों को सक्रिय राजनीति से अलग किया जाए`
30 अप्रैल, 2013 को की गई बातचीत 
वासिंद्र मिश्र : तिवारी जी, ज़ी मीडिया पर आपका स्वागत है। जो विकास का मॉडल आपने सोचा था जिन आर्थिक नीतियों को लेकर आप चले थे, क्या आपको लगता है जो मौजूदा मॉडल है देश का, उस हालात पर खरा उतरा है?
एनडी तिवारी : मैं आपके चैनल का आभारी हूं कि आपने मुझे मौका दिया। आज देश के बारे में जब बात करते हैं, विश्व गलोबल दृष्टिकोण से चल रहा है। इकोनॉमी शेयर मार्केट पर निर्भर है, विकास के जो नए-नए तरीके इजाद हो रहे हैं उसको कौन ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल कर सकता है उस पर देश की प्रगति निर्भर है। वैश्विक दृषिकोण में जो जहां सफल है उसकी सफलता का हमें क्या लाभ मिल सकता है, अपनी सफलता बनाने में ये आज एक मुख्य प्रश्न है। अभी आप देखेंगे यहां वालमार्ट बनाया, ये विश्व की टेक्नोलॉजी का तमाम प्रभाव जो उत्पादन पर पड़ा है वो वालमार्ट पर दिखाई दे रहा है। जहां-जहां वालमार्ट बने है वहां पर महंगाई पर नियत्रंण हुआ है क्योकि विदेशों से उसी कीमत पर उनको माल मिलता है, जिस कीमत पर वो अपने देश में है। इसलिए हमने एफडीआई का सहयोग किया कि एफडीआई भारत में आए और मनमोहन सिंह की नीति इस बारे में रही वो देश की हित में है ये स्पष्ट हो गया।

वासिंद्र मिश्र : आपका जो राजनीतिक सफर रहा है वो एक समाजवादी आंदोलन से शुरू हुआ। आपके तमाम समाजवादी नेता एफडीआई का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि एफडीआई को लागू किया तो इससे बेरोजगारी बढ़ेगी और जो कारोबारी है उनका अस्तित्व खतरें में आ जाएगा लेकिन आप बता रहे है कि एफडीआई से महंगाई पर काबू होगा, लेकिन महंगाई पर लगाम लगाना ज्यादा जरूरी है या जो छोटे कारोबारी है उनका बचाना जरूरी है?
एनडी तिवारी: ये प्रचार हो रहा है कि खाली एफडीआई खुलने से या वालमार्ट आने से छोटे रोजगार वालों को नुकसान हो रहा है। हो सकता है जो नहीं जानते हैं कि उनको मालूम होना चाहिए कि जो कुछ वालमार्ट से लेंगे वो उसी रेट पर ले सकते हैं। होलसेल के रूप में जैसे कि वालमार्ट में हो रहा है इससे नुकसान होने का कोई संभावना नहीं है।

वासिंद्र मिश्र : आजादी के बाद से लेकर जो सबसे सफलतम प्रधानमंत्री माने जाते हैं, इंदिरा जी, पंडित नेहरू, और कुछ दिनों तक आपने राजीव गांधी के साथ काम किया। आपकी नजर में जो नीतियां रही, पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी की, राजीव गांधी की और आज जिन नीतियों पर सरकार चल रही है आपको लग रहा है उन नीतियों का पालन हो रहा है उनमें डायवर्जन नहीं है?
एनडी तिवारी: पंडित जवाहर लाल नेहरू एक दूर दृष्टि वाले नेता थे। महात्मा गांधी जी ने, उनको अपना पॉलिटिकल सक्सेसर बताया था। स्प्रिचुअल सक्सेसर विनोबा भावे को बताया था तो जवाहर लाल नेहरू ने जो किया वो दुनिया के सामने स्पष्ट है। जो उनकी स्पीच रही कि हमारा देश है वो न्यू इरा ऑफ फ्रीडम है। जो उनका भाषण था उसमें नई टेक्नॉलॉजी और दृष्टिकोण था। देखिए प्लानिंग कमीशन का नाम कहीं विधान में नहीं है। फाइनेंस कमीशन का नाम है। लेकिन प्लानिंग कमीशन का कितना महत्व है, ये किसी से छिपा नहीं है। आज हम प्लान के हिसाब से चल रहे हैं और आगे बढ़ रहे हैं?

वासिंद्र मिश्र : आप प्लानिंग कमीशन में भी रहे हैं और जिम्मेदार पद पर रहे हैं। आपने सोवियत यूनियन की भी बात की उसका असर भी दिखाई देता है जबकि संविधान में फाइनेंस कमीशन की बात कही गई प्लानिंग कमीशन की नहीं। आज जो प्लानिंग हो रही है जो नीतियां बन रही हैं आपको नहीं लग रहा है कि कैपिटलिस्ट इकोनॉमी का ज्यादा प्रभाव है। गरीबों का ज्यादा ध्यान नहीं रखा जा रहा है। पूरा का पूरा जो अमीर देश हैं उनकी नीतिया हैं। प्लानिंग कमीशन के जरिए भारत पर जबरदस्ती थोपने की कोशिश हो रही है।
एनडी तिवारी: ये सौ फीसदी गलत है क्योंकि इससे जो गरीब किसान है, नई टेक्नोलॉजी आने के साथ गरीब की संख्या जो बढ़ रही है। उसमें ये देखना है कि बढ़ती आबादी पर नियंत्रण होना चाहिए जो कि बहुत जरूरी है। जिसके लिए गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व में फैमिली वेल्फेयर कार्यक्रम चल रहा है। मेरा ख्याल है कि लोग समझ गए हैं कि जो प्रचार हो रहे हैं उसमें भी कहा गया है कि एक या दो बच्चे ही काफी हैं। उनसे ही काम चलाइए। इस तरह के जो विज्ञापन निकलते हैं उससे भी प्रभाव पड़ रहा है।

वासिंद्र मिश्र : आबादी को ताकत के तौर पर इस्तेमाल करके चीन दुनिया का सबसे ताकतवार मुल्क बन कर उभरा है और हमारे यहां आबादी को आभिशाप माना गया है आपकों नहीं लगता है कि इंडिया की जो आबादी है, अगर हम चीन के रास्ते पर चलें तो इंडिया की जो हालत है वो चीन की तरह पेश कर सकते हैं?
एनडी तिवारी : ब्रिक्स नाम का एक संगठन बन चुका है जिसमें दुनिया के बड़े देश है जिसमें उनके आर्थिक सवालों पर बातचीत होती है।

वासिंद्र मिश्र : दुनिया के बाकी मुल्क की तुलना में हमारे देश में जिस तरह से भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, चाहे वो आर्थिक भ्रष्टाचार हो, राजनैतिक भ्रष्टाचार हो या प्रशासनिक भ्रष्टाचार। उस भ्रष्टाचार को लेकर जो नीतियां किसी तरह से बन भी जाती है, जनहितकारी, लोकहितकारी। उनका क्रियान्‍वयन उस प्रभावी तरीके से, ईमानदारी के साथ निचले स्‍तर यानी गहराई तक नहीं हो पा रहा है।
एनडी तिवारी: ये जो भ्रष्टाचार की बात है, पहले भ्रष्टाचार की परिभाषा देखनी होगी। अगर भ्रष्टाचार की परिभाषा को देखा जाए तो वो कोई भी बातें जो हो रही है वो भ्रष्टाचार के परिधि में आ जाती है। मैं आप से बातचीत कर रहा हूं, कोई कह सकता है कि मैं अपना प्रचार कर रहा हूं, ये भ्रष्टाचार है। कोई ये कह सकता है कि हम जो बैठे हैं उत्‍तराखंड भवन में तो ये भवन इतना मजबूत अच्छा बना है। ये भी गरीबों की झोपड़ी के मुकाबले में बहुत अच्छा बना है। असल बात ये है कि गरीबी से लड़ाई लड़ना, इसके लिए जरूरी है कि बहुमुखी विकास हो जिसमें खेती का विकास, नए तरीके का विकास, पेयजल से लेकर सिंचाई जल का विकास। आज शारदा सहायक योजना के जरिये शारदा नदी जैसी ही नेपाल से आती है उसका पानी मिर्जापुर से इलाहाबाद तक जाता है। ये सब काम हो रहा है लेकिन अभी बहुत कुछ करना है। क्योंकि जो समय चल रहा है, आबादी बढ़ रही है। जितना हम सोचते हैं, मुझे याद है कि जब बाबू राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रपति हुए थे तो उन्होंने कंपनी बाग में एक भाषण दिया था। उन्होंने कहा था कि 33 करोड़ भारतीय हैं और 33 करोड़ रुपये ही हमारी इनकम है। टैक्स की नजर से देखा जाए तो एक भारतीय पर एक रुपया आया। तो कहां 33 करोड़ और आज की आबादी देखिए। तो ये सब इतिहास से जो आ रहा है, हर क्षेत्र से हर राज्य को केंद्र की सहायता योजना बनानी चाहिए।

वासिंद्र मिश्र : आपने अपनी पार्टी के निर्देश को दरकिनार किया, संवैधानिक मर्यादा को बचाए रखने की कोशिश की, जब आपके हाथ में सत्ता रहती थी। कैग संवैधानिक संस्था है और कैग ने पिछले चार सालों से जितने तरह के भ्रष्टाचार उजागर किए हैं, उसको देखते हुए ऐसा लगता है कि नेचुरल रिसोर्सेज का बड़े पैमाने पर बंदरबांट हुआ है। चाहे कोलगेट स्कैम हो, टूजी स्कैम हो, कॉमनवेल्थ गेम स्कैम हो। इतने भ्रष्टाचार के बावजूद आपको लगता है कि देश में सब कुछ ठीक चल रहा है। इसमें किसी तरह के सुधार की ज़रूरत नहीं है?
एनडी तिवारी: भ्रष्टाचार की परिभाषा होनी चाहिए। भ्रष्टाचार की तमाम परिभाषाएं हो सकती हैं। व्यक्तिगत भ्रष्टाचार, जिसको सीबीआई के जरिए देखा जाता है। जिसको देखने के लिए इनकम टैक्स भी है। अगर इनकम टैक्स अथॉरिटी ठीक से काम कर रही है, भ्रष्टाचार को रोकने के लिए संवैधानिक व्यवस्थाओं का भी सही काम करना जरूरी है। भारत का संविधान ऐसा है कि दुनिया में इसका सम्मान है। तीन साल तक कॉन्स्टीट्युएंट असेंबली मिलती रही और सारे राज्यों के विद्वानों ने भाग लिया। डॉक्टर अंबेडकर से लेकर कृष्णस्वामी, जवाहर लाल नेहरू, मौलाना आजाद, अरुणा आसफ अली, जयप्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया। सब इनके विचारों का समन्वय हमारे संविधान में हुआ है। इस संविधान को हम ठीक ढंग से चलाएं और उसको लागू करें। ये सबसे बड़ी बात है।

वासिंद्र मिश्र : सबसे बड़ी जिम्मेदारी संविधान को ठीक से चलाने की है। संविधान में जो बातें कही गई हैं, उसको ठीक से लागू कराने को सरकार है। जो ज्यूडिशियरी है, उसका जो अधिकार है उसका जनता के हित में एक्सरसाइज करें। ये जिम्मेदारी जो लोग सत्ता में हैं, उनकी ज्यादा है और मुख्य विपक्षी पार्टियों की भी है। आपने अभी व्यक्तिगत भ्रष्टाचार की बात कही, अगर भ्रष्टाचार व्यक्तिगत है, तो गंभीर है। आप नहीं लगता है कि भ्रष्टाचार को इंस्टीट्यूशनलाइज्‍ड कर दिया गया है। आज की तारीख में देश के 4 ऐसे पूर्व मुख्यमंत्री हैं, जिनके विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा चल रहा है। केंद्रीय जांच एजेंसियां जांच कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कर रही है। जांच एजेंसियां पॉलिटिकल दबाव में या केंद्र सरकार के दबाव में अपनी ही जांच रिपोर्ट की स्टेटस रिपोर्ट बदलती रहती है। क्या आपको लगता है ऐसे लोग जो सत्ता में हैं, जिनके दबाव में सत्ता चल रही है और सरकार चल रही है। जो मौजूदा तौर तरीका है, उससे देश का भला होने वाला है? क्या भ्रष्टाचार का खात्मा हो सकता है। आप सभी महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं, आपके ऊपर आपके समर्थक और विरोधी आर्थिक भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा पाए। क्या कारण है कि आपके साथी, आपके मित्र जो अलग-अलग राजनीतिक दलों में हैं, जो आपके प्रशंसक भी हैं और आपका आदर भी करते हैं। जो दो बार मुख्यमंत्री रहते हैं, तो 2 हजार करोड़ के आर्थिक भ्रष्टाचार में फंस जाते हैं। क्या कारण है उसी कुर्सी पर आप भी रहे?
एनडी तिवारी: ये तो उनसे पूछने की बात है। सीधी सी बात ये है कि ईमानदार होना। जो भी राजनैतिज्ञ हैं, ब्लॉक स्तर से लेकर, ग्राम स्तर से लेकर केंद्र स्तर तक जहां-जहां शासन होता है तो उसमें भ्रष्टाचार न हो इसके लिए विरोधी दल होते हैं। जो विरोधी दल आवाज उठाते हैं, वो फौरन प्रेस कॉन्फ्रेंस करने लगते हैं, प्रेस की आज़ादी का बड़ा लाभ है और टीवी चैनल भी एक बहुत बड़ा माध्यम है। उसके जरिए भी कोई रोक नहीं, किसी प्रकार की। वो खुद सेंसर करती है, बाकी कोई दूसरा सेंसर नहीं कर सकता।

वासिंद्र मिश्र : हम विनम्रतापूर्वक ये जानना चाहते हैं कि जिस तरह से भ्रष्टाचार का इंस्टीट्यूशनलाइजेशन हो रहा है, उसको रोकने के क्या उपाय हैं?
एनडी तिवारी: उसके लिए जितने भी कानून बने हैं, उन्हें ठीक से लागू किया जाए। अब लोकायुक्त है, इसकी वजह से भ्रष्टाचार में कमी आई है। इस पर और ज्यादा सख्ती की जरूरत है। इसमें हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन जी देश के लिए मिसाल हैं। जितने भी शासन करने वाले हैं, वो प्रधानमंत्री के रास्ते पर चलें।

वासिंद्र मिश्र : लेकिन, मनमोहन जी के पास ही कोयला मंत्रालय था। तो इतना बड़ा घोटाला कोयला मंत्रालय में हो गया है। तो, क्या आप इस बात को मानते हैं कि इस तरह के लोग जिनके ऊपर आर्थिक भ्रष्टाचार के आरोप हैं। जिनके विरुद्ध अलग-अलग राज्यों में मुकदमे चल रहे हैं। उनको सक्रिय राजनीति से हट जाना चाहिए?
एनडी तिवारी: आर्थिक भ्रष्टाचारियों को सक्रिय राजनीति से बिल्कुल हटना चाहिए। बल्कि, उनको हटा देना चाहिए। उसके लिए तमाम राजनैतिक दल एक-दूसरे की आलोचना करते हैं संसद में। फ्रीडम ऑफ स्पीच, सूचना का अधिकार अधिनियम लगा हुआ है। हर एक व्यक्ति सूचना मांग सकता है। ये सब अधिकार दुनिया के हर देशों में नहीं है, वो अधिकार यहां दिया हुआ है। मैं समझता हूं कि सारे अधिकारों का प्रयोग ठीक ढंग से हो, तो फिर भ्रष्टाचार जिसकी परिभाषा अभी ढंग से नहीं हो पाई है, वो रुक सकता है।

वासिंद्र मिश्र : राजनीति के स्तर पर भी काफी तेज़ी से गिरावट आ रही है। आप लोगों का जो दौर था, उसमें पंडित नेहरू और फिरोज गांधी दोनों एक दूसरे की आलोचना करते नजर आते थे। संसद के अंदर नीतियों के आधार पर, वैचारिक प्रतिबद्धता के आधार पर, लेकिन आज नई तरह की राजनीति दिखाई दे रही है। स्टिंग ऑपरेशन करके, गलत तरीकों का इस्तेमाल करके, अपने विरोधियों को अगर चित करना है तो उसको गलत तरीके से षड़यंत्र करके, फंसा के। ये जो राजनीति में गिरावट आई है, इसके लिए आप किसको जिम्मेदार मानते हैं?
एनडी तिवारी: मैं ये जानना चाहूंगा उन लोगों से जो ये कहते हैं कि ये भारत तक सीमित है। आज किस देश में है दुनिया में कि जहां पर किसी न किसी प्रकार की कोई आलोचना भ्रष्टाचार की नहीं होती है और वहां इंपीचमेंट तक हुआ है। राष्ट्रपतियों का उनको हटाने के लिए। और ये आज वैश्विक दुनिया ग्लोबल इकॉनॉमी हो गई है और ग्लोबल थिंकिंग हो गई है। सारा रूप ही बदल गया है और वहां दूसरे के शेयर मार्केट अगर गिरते हैं, अमेरिका में डाऊ जोंस या कोई और। या इधर जापान में गिरती है तो इसका असर चीन पर भी पड़ता है। आज चीन कितना बदल गया है, माओत्से तो जो पाजामा पहना करते थे, आज बिल्कुल शूटेड-बूटेड टाई लगाकर बैठते हैं। कितनी खुशी होती है कि वो अब खुलेआम आलोचना भी करते हैं और ऐसा लगता है जैसे आप कहीं इंग्लैंड या यूरोप में बैठे हों। सब टाई लगाकर चीन के लीडर बैठे हैं। मैंने देखा है चीन पहले भी और बाद में भी, तो ये सब बदल रहा है। दुनिया बदल रही है और ये बदलती दुनिया में हम सबको अपने को तैयार रखना है कि जो रोजाना बदलाव हो रहा है, उसमें हम कहां फिट होते हैं।

वासिंद्र मिश्र : पंडित जी, बदलाव अगर बेहतरी के लिए हो तो ठीक है। लेकिन, बदलाव अगर सोवियत रूस की तरह हो। तो क्या उसको उचित मानते हैं? जिस तरह से गोर्वाचोब ने पेरेस्त्रोइका ग्लासनोत के जरिए पूरे सोवियत रूस को ही तहस-नहस कर दिया और आज सोवियत रूस अलग-अलग राज्यों में विभाजित दिखाई दे रहा है। जो दुनिया का एक सुपरपावर था, आज अपनी सत्ता बचाने को मोहताज है दुनिया के सामने। आप इस तरह के बदलाव के पक्षधर हैं या बदलाव बेहतरी के लिए हो इसके पक्षधर हैं?
एनडी तिवारी: देखिए, समय के साथ सियासत में भी लगातार बदलान आते रहे हैं। ये शाऊपिंग के समय में जो पोलित ब्यूरो परिवर्तन हुआ और जिसमें ग्लोसनोस्त और पेरेस्त्रोइका की बात आई और माओत्से तुंग की विचारधारा को बदल दिया। माओ आज महात्मा गांधी की तरह माने जाते हैं, लेकिन उनका नाम लेते हैं। और जो आज सुधार हो गया वो माओवाद के खिलाफ है। ये दुनिया देख रही है।

वासिंद्र मिश्र : यहां भी वही हो रहा है कि गांधी का नाम लेकर तो सरकारें बनती हैं। लेकिन, गांधी का जो जीवन दर्शन था, गांधी की नीतियां जो थीं, वो कहीं भी सरकारी नीतियों में उसका रिफ्लेक्शन नहीं दिखाई देता। भारत के कॉन्टेक्स्ट में आप इस बात को मानते हैं?
एनडी तिवारी: न तो। बिल्कुल नहीं मानता। क्योंकि गांधी जी ने जवाहर लाल नेहरू को अपना पॉलिटिकल सक्सेसर बताया कि ये हमारे राजनीतिक शिष्य हैं और इनको हम मानते हैं भारत का। तो जवाहर लाल नेहरू ने जो किया वो दुनिया के सामने है।

वासिंद्र मिश्र : नहीं, आज की सरकार जो कर रही है उसको आपको लगता है कि जो गांधीयन सोशलिज्म था, जो गांधीयन फिलॉसफी थी, जो गांधी दर्शन था, जो गांधी का ग्राम स्वराज था, वो कहीं दिखाई दे रहा है, मौजूदा सरकार के कामकाज में।
एनडी तिवारी: देखिए। मेरे पहनावे को देखिए। मैं आज भी बिल्कुल खद्दर पहनता हूं।

वासिंद्र मिश्र : मैं आपकी बात नहीं कर रहा हूं।
एनडी तिवारी: नहीं, मैं कह रहा हूं कि लोग अपनी मर्जी से खद्दर पहनें, न पहनें। इसकी आजादी है। ये हर चीज़ की आजादी है। बोलने की भी आजादी है। गाली देने की भी आजादी है। हाउस में अगर कोई गाली देने लगे तो फौरन स्पीकर रूल करेगा कि ये निकाल दिया जाए प्रोसीडिंग से। तो ये तमाम होता है। ये आदर्श हमारे भारत का है कि हम पार्लियामेंट्री डेमोक्रेसी के जरिए संविधान के जरिए हम भारत को चला रहे हैं। ये बड़ी खुशी की बात है। राज्यों में भी हो रहा है यही। जो उत्तराखंड राज्य में, जिसमें बैठे हैं हम और आप। ये राज्यों का बना दफ्तर है, बिल्डिंग है।

वासिंद्र मिश्र : पंडित जी, एक बड़ी खुशी की बात है कि एक अरसे तक अस्वस्थ रहने के बाद आप फिर सक्रिय हैं। हम सबकी शुभकामनाएं हैं आपके साथ। हम लोग चाहते हैं कि आप और पहले की तरह ज्यादा सक्रिय रहें। सक्रिय राजनीति में रहें। आपकी इधर कुछ दिनों की गतिविधियों को लेकर तरह-तरह की राजनीतिक अटकलबाजी शुरू हो गई है। मुलायम सिंह जी लगातार आपके संपर्क में हैं। आपने सोनिया जी से मुलाकात की है। सुना जा रहा है कि आप मनमोहन सिंह से भी मिलने वाले हैं।
एनडी तिवारी: विकास के लिए जहां भी काम करता है, जो भी विकास का काम है, हम उसके साथ हैं। विकास जिससे हो और बढ़े, उसके लिए हमारा जीवन समर्पित है। और विकास में रखा क्या है। विकास हो, अगर हमारी कोई इनकम टैक्स देखता है कि क्या है सच्चाई, देखता है कि हर एक किसी की आमदनी क्या है, क्या नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अभी भी ऑर्डर लगा रखा है। कोर्ट अलग है। लोग ज्युडिशियरी पर भी आरोप लगाते हैं।

वासिंद्र मिश्र : हम ये जानना चाह रहे हैं, हम अपने चैनल के माध्यम से दर्शकों तक ये बात बताना चाहते हैं सीधे आपके माध्यम से कि आपकी भावी रणनीति क्या है? क्या फिर आप पहले की तरह पूर्ण रूप से सक्रिय राजनीति करने जा रहे हैं।
एनडी तिवारी: देखिए, मैं विकास की राजनीति में हूं। और जो अच्छा विकास जहां करेगा उसका समर्थन करूंगा।

वासिंद्र मिश्र : आप कांग्रेस पार्टी के अभी भी सदस्य हैं?
एनडी तिवारी: कांग्रेस पार्टी तो है ही, लेकिन विकास किसी पार्टी का नहीं होता। विकास सारी जनता के लिए होता है। किसी पार्टी द्वारा विकास हो हम उसका समर्थन करते हैं।

वासिंद्र मिश्र : देश की जो मौजूदा सरकार है, उसका कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। 2014 में फ्रेश मैन्डेट के लिए जाने वाली है सरकार। कांग्रेस के नेतृत्व में जो साझा सरकार है वो चल रही है। आप विकास के हिमायती है। विकास के लिए आप प्रयासरत हैं। क्या कांग्रेस पार्टी की तरफ से 2014 के लोकसभा के लिए आप पार्टी के हित में आम जनता में जाएंगे कि इस पार्टी को एक बार फिर जनादेश दे जनता ताकि जो विकास का अधूरा काम रह गया है उसको पूरा कर पाए कांग्रेस पार्टी, जिसमें आपने पूरा जीवन लगा दिया?
एनडी तिवारी: देखिए कांग्रेस पार्टी आज की पार्टी नहीं है। सर डेविड ह्यूम ने बनाया इटावा में, जब वो कलेक्टर थे। उन्होंने एक एसोसिएशन बनाया पॉलिटिकल एसोसिएशन। उन्होंने उसका नाम इंडियन नेशनल कांग्रेस रखा था शुरू में। तब अंग्रेज आईसीएस ने रखा था लेकिन तब से कितना बदल गया। लोकमान्य गंगाधर तिलक और पुराने जो नेता थे डेविड ह्यूम, उनके बाद तमाम कितना परिवर्तन हुआ राजनीति में। देश की, दुनिया की वो हम देख रहे हैं। अमेरिका में क्या था, अमेरिका में जिस तरह आप देखते हैं कि यहां राज्य बने, उतने झंडे में तारे बढ़ते चले गए। तो अमेरिकन कंस्टीट्यूशन अलग है, लेकिन वहां सफलता मिली है। राज्यों के माध्यम से उन्होंने केंद्र को राष्ट्रपति का चुनाव भी आम जनता करती है।

वासिंद्र मिश्र : पंडित जी, मैं विशेष कर आपसे उत्तर चाहता हूं कि कांग्रेस पार्टी के लिए आप 2014 के चुनाव में कैंपेन करेंगे या इटावा के ही एक दूसरे नेता हैं जो आपका छोटा भाई अपने को कहते हैं श्री मुलायम सिंह यादव। अगर वो आपसे आग्रह करते हैं तो समाजवादी पार्टी के लिए आप काम करेंगे? दो पार्टियों में आप किसको चुनेंगे?
एनडी तिवारी: ऐसा सवाल न पूछिए मुझसे कि जिसका उत्तर देने में मुझे नहीं कहना पड़े या हां कहना पड़े। मैं तो कार्य को देखूंगा, अगर विकास के लिए कर रहे हैं, जो अच्छा कर रहे हैं, चाहे समाजवादी पार्टी हो, चाहे साम्यवादी पार्टी हो, चाहे वो कोएलेशन हो, तो हम उसके साथ हैं।

वासिंद्र मिश्र : तो ऐसा कैसे हो सकता है कि उत्तर प्रदेश में आप समाजवादी पार्टी के लिए...?
एनडी तिवारी: नहीं-नहीं। उत्तर प्रदेश नहीं, विकास के काम का हमने जिक्र किया हैं।

वासिंद्र मिश्र : अच्छा विकास के ही काम में उत्तर प्रदेश में श्री मुलायम सिंह यादव जी की पार्टी की सरकार चल रही है और देश में मनमोहन सिंह की सरकार चल रही है। और दोनों अगर विकास के काम को कर रहे हैं तो उसमें आप?
एनडी तिवारी: किनकी चल रही है?

वासिंद्र मिश्रमनमोहन सिंह जी की सरकार।
एनडी तिवारी: कहां ?

वासिंद्र मिश्र : देश में।
एनडी तिवारी: हां देश में मनमोहन सिंह जी की नही चल रही है, कांग्रेस की चल रही है।

वासिंद्र मिश्र : हां कांग्रेस की चल रही है, तो अगर मुलायम सिंह जी की सरकार और कांग्रेस की सरकार दोनों विकास का काम कर रहे हैं तो उसमें आप किसके साथ खड़े रहेंगे?
एनडी तिवारी: आप विकास के लिए पार्टियों को देख रहे हैं। मैं विकास के लिए विकास के काम को देख रहा हूं, कि जो विकास का काम कर रहा है, उसके साथ हूं। जो विकास के काम के साथ है, पार्टी के साथ नहीं।

वासिंद्र मिश्र : पंडित जी, जनादेश के लिए जब भी आप जाएंगे तो आपको बताना पड़ेगा न कि आप जनादेश किस पार्टी के पक्ष में चाहते हैं।
एनडी तिवारी: ये तो जनता तय करेगी। आम जनता देखती है। आज बहुत होशियार हो गई है आम जनता। वो पहचान जाती है कि कौन सही कह रहा है, कौन गलत कह रहा है। कौन खाली प्रचार कर रहा है। आम जनता इतनी होशियार है कि वो सत्य-असत्य के बीच में पहचान कर लेगी। जैसे सत्य को सोने के पात्र में भी छिपाया नहीं जा सकता। ऐसे ही सत्य और असत्य के बीच में जनता असत्य को पहचानती है।

वासिंद्र मिश्र : क्या आपकी सोनिया जी से, जो मुलाकात हुई थी तो आपने इस बात को बताने की कोशिश की। समझाने की कोशिश की। सत्य और असत्य में कितना फर्क है ?
एनडी तिवारी: उनको समझाने की बात मैंने नहीं की। उनसे जो ये वर्तमान स्थिति है। उसके बारे में केवल ये बातें हुईं कि जो उन्होंने मुझसे सवाल पूछे मैंने उनका उत्तर दिया और उनको समाधान करने की कोशिश की और मैंने उनसे कोई ऐसी बात नहीं की कि जिससे कोई किसी प्रकार की किसी को नुकसान पहुंचे। बल्कि कांग्रेस को मजबूत करने के बारे में जरूर जो बातें हुईं सारी पार्टियां कांग्रेस से निकली हैं। तो कांग्रेस मजबूत हो ये हमारे और देश के इंटरेस्ट में है।

वासिंद्र मिश्र : ये जनता को बताने के, जनता को बताना भी मुनासिब समझेंगे। कांग्रेस के हित में कौन सी बाते हैं, ये जनता को बताना मुनासिब समझेंगे?
एनडी तिवारी: अब ये उत्तराखंड भवन है, जो बना है। ये किसी पार्टी का तो है नहीं। उत्तराखंड में सरकार एक साल पहले बीजेपी की थी। आजकल बहुगुणा जी मुख्यमंत्री हैं, तो ये तो चुनाव में होता है। ये तो नीचे ब्लॉक से होता है। अभी निकायों के चुनाव हुए हैं। अभी रिपोर्ट नहीं आई है, कल तक मालूम होगा। ये तो जनता के ऊपर है। इससे बड़ा प्रजातंत्र क्या हो सकता है।

वासिंद्र मिश्र : आप मनमोहन सिंह से मिलकर क्या बात करने वाले हैं। मनमोहन सिंह से भी आपकी मुलाकात होने वाली है?
एनडी तिवारी: अभी नहीं होने वाली है। अभी तो ऐसा कोई एजेंडा नहीं है।

वासिंद्र मिश्र : उनकी तरफ से कोई प्रस्ताव आया है?
एनडी तिवारी: नहीं, ऐसा नहीं है। खाली मैं तो जो साथ काम कर चुका हूं प्लानिंग कमीशन में उनके साथ और खुशी है कि उनके जैसा ईमानदार व्यक्ति आज हमारे देश का प्रधानमंत्री है।

वासिंद्र मिश्र : तो उनके ऊपर जो इस तरह के आर्थिक भ्रष्टाचार, माने जो गवर्नेंस, कमजोर शासन की बात कही जा रही है?
एनडी तिवारी : बिल्कुल गलत कहा जा रहा है।

वासिंद्र मिश्र : आपके मातहत काम करते थे, तब उनका कंडक्ट कैसा था?
एनडी तिवारी: मनमोहन सिंह जी जैसा ईमानदार व्यक्ति और योग्य व्यक्ति, अर्थशास्त्री जो देश का प्रधानमंत्री हो ये खुशी की बात है।

वासिंद्र मिश्र : तो ये थे पंडित नारायण दत्त तिवारी, जिनसे हमने जानने की कोशिश की देश में मौजूदा जो हालात चल रहा है, उसके बारे में। राजनैतिक और आर्थिक भ्रष्टाचार के बारे में। और विकास को लेकर जो अलग-अलग धारणा बनी हुई है, उसके बारे में। पंडित जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
 

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नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाना आसान: नरेश अग्रवाल
 14 मई 2012 को की गई बातचीत 
वासिंद्र मिश्र- आपकी पार्टी राष्ट्रपति चुनाव को लेकर किस रणनीति पर काम कर रही है?

नरेश अग्रवाल - देखिये हम बनने की हैसियत में तो हैं नहीं, बनाने की हैं। लेकिन व्यक्तिगत सोच है कि देश का राष्ट्रपति कोई राजनीतिक व्यक्ति होना चाहिए। जो नाम चल रहे हैं और जो मैं सुन रहा हूं। हमारी पार्टी तय करेगी मुलायम सिंह जी के द्वारा। अभी हमने नाम तय नहीं किया है। ये निश्चित है कि हमारी पार्टी का महत्वपूर्ण रोल है और उसे हम जिम्मेदारी से निभाएंगें।
 
वासिंद्र मिश्र-राष्ट्रपति चुनाव में दो अड़चनें हैं। एक तो एनडीए में आम राय नहीं बन रही है। दूसरा ममता बनर्जी ने कोई ट्रंप कार्ड नहीं खोला है। और बीजेपी की तरफ से कहा जा रहा है कि अगर समाजवादी पार्टी डॉक्टर कलाम का नाम सामने लाती है तो उस पर विचार हो सकता है, समर्थन हो सकता है?

नरेश अग्रवाल- हमें बीजेपी की राय की जरुरत नहीं है। उनके सहयोग की जरुरत नहीं हैं। वो क्यों हमारे बारे में सोचते हैं। हमारी और उनकी विचारधारा में बड़ा अंतर है। हम इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। हम एक ऐसा राष्ट्रपति देना चाहते हैं जो हो भारत का और जिसका नाम हो पूरे विश्व में। और तमाम गंभीर चुनौतियां हैं देश के सामने महामहिम जी उसकी चिंता करें। ये हमारी सोच और प्राथमिकता है।

वासिंद्र मिश्र-
आप लोग इस बात के पक्षधर हैं कि राष्ट्रपति के पद पर राजनीतिक व्यक्ति को बैठाया जाए?

नरेश अग्रवाल- मैंने कहा ना कि ये मेरी व्यक्तिगत राय है। मैं इसे पार्टी की राय नहीं कहूंगा। लेकिन पार्टी से अनुरोध करुंगा कि ऐसा व्यक्ति आना चाहिए जो राजनीतिक व्यक्ति हो। जिसकी सोच राजनीतिक हो और जिससे राजनीतिक लोग मिलने जाए तो उन्हें अपनी गरिमा महसूस हो कि हम एक गरिमामई व्यक्ति से मिलने जा रहे हैं।

 
वासिंद्र मिश्र- अभी यूपी में विधानसभा चुनाव हुआ। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस आमने-सामने थी और राष्ट्रपति चुनाव को लेकर कहा जा रहा है कि दोनों पार्टियों में कोऑर्डिनेशन और मैनेजमेंट की कवायद शुरु हो गई है, ये कहां तक सच है?

नरेश अग्रवाल-देखिए ये तो अखबार और मीडिया की न्यूज़ है। हमने ना उनसे कोई बात की है, लेकिन जब समय आएगा तो बात होगी, अभी तो बहुत जल्दी है। समय आएगा तो हम ट्रंप कार्ड खोलेंगे। जब हमारा महत्वपूर्ण रोल है तो हम रोल निभाएंगे। ये हम हिन्दुस्तान की जनता को विश्वास दिलाते हैं। अभी तो नोटिफिकेशन होगा तब देखेगें।
वासिंद्र मिश्र-इस समय लोकसभा-राज्यसभा दोनों चल रहे हैं। रोजाना भ्रष्टाचार के खुलासे हो रहे हैं। उसमें समाजवादी पार्टी किस तरह से केन्द्र सरकार के साथ तालमेल भी बना रही है और उनका विरोध भी कर रही है?

नरेश अग्रवाल- हम तालमेल नहीं बना रहे हैं, हमने तो विरोध किया है। हमने कहा है कि मुद्दा आधारित समर्थन रहेगा। भ्रष्टाचार का मुद्दा आया तो हमने खुल कर विरोध किया। लेकिन भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ऐसे तमाम बिल बना दिये जाए, कानून बना दिये जाए, राजनीतिक व्यक्ति उसके कठघरे में खड़ा हो जाए, राजनीतिक व्यक्ति पर कोई आवरण चढ़ा दिया जाए तो हम इसके विरोध में है। क्योंकि राजनीतिक व्यक्ति पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाना बहुत आसान है। लेकिन राजनीतिक व्यक्ति के जीवन में कितनी कठिनाई आती है। इसको कोई नहीं लिखता है। हमको किन-किन परेशानियों से रोज गुजरना पड़ता है। हम राजनीतिक लोग रोज कपड़े पहन कर निकलते हैं, दिन भर जनता के आरोपों को सहते हैं। रात में सोते समय देख लेते हैं कि कपड़े पर कोई दाग तो नहीं लगा है और अगले दिन फिर हम जनता की सेवा में निकलते हैं। यानी हमारी चरित्र पंजिका रोज जनता द्वारा लिखी जाती है। हमको भी देखना चाहिए कुछ व्यक्ति अगर अपने को पूरी तरह ईमानदार कह कर पूरी संसदीय व्यवस्था को बेइमान कहें तो ऐसा ठीक नहीं है।
वासिंद्र मिश्र- तो इस समय जो आंदोलन चल रहे हैं चाहे वो अन्ना का आंदोलन हो, रामदेव का आंदोलन हो या रविशंकर का आंदोलन। आप इसे किस तरह से देखते हैं?

नरेश अग्रवाल- ये सब आरएसएस समर्थित हैं। भाजपा के लोग हैं। मैं तो कहता हूं कि ये आंदोलन चलाने वाले क्यों नहीं चुनाव लड़ते जनता के बीच में। यूपी में नगर पालिका के चुनाव आ रहे हैं। ये सब आंदोलनकारी अगर जनता के बीच इतने लोकप्रिय हैं तो आकर चुनाव लड़ लें। इनको पता चलेगा कि जनता क्या है, जनता की सोच क्या है? और जनता किस प्रकार के नेता को पसंद करती है।
वासिंद्र मिश्र- रामदेव ने कहा है कि संसद में जितने हैं सब रोगी है, सब बेईमान है, इस पर आपको क्या कहना है?

नरेश अग्रवाल-मैं तो कहूंगा कि सब लोग बाबा का आदर करते थे। लेकिन धीरे- धीरे उन्होंने भी खुद को राजनीतिक रुप में ढाल लिया, बाबा को सलाह है कि वो भी एक पार्टी बना लें और जिस प्रकार के आरोप लगा रहे हैं इस तरह के आरोपों में कितनी सत्यता है, जान लें। इस तरह के आरोप कमजोर केन्द्रीय सरकार की वजह से हैं। केन्द्र सरकार ने सिस्टम को कमजोर कर दिया है। अगर मजबूत सिस्टम होता तो शायद लोग इस तरह के आरोप ना लगाते।
वासिंद्र मिश्र-रामदेव के बारे में कई तरह के आरोप लगते रहे हैं उनके कई मामलों में जांच चल रही है ऐसे में क्या आप मांग करेंगे कि उसको सख्ती से निपटाया जाए?

नरेश अग्रवालजवाब-रामदेव से मेरे व्यक्तिगत संबंध हैं। उन व्यक्तिगत संबंधों के रहते मैं कुछ कहना नहीं चाहता। लेकिन गुरुजी से यही अनुरोध करना चाहते हैं कि गुरुजी योग और दवाओं का जो काम कर रहे हैं वही करें। राजनीतिक रुप से गुरुजी उपदेश ना दें तो अच्छा है, इतना ही कहना है उनसे। बाकी बोलने के लिए सब स्वतंत्र हैं वो चाहे जो बोलें।

वासिंद्र मिश्र
-सबसे बड़ा मुद्दा था चुनाव में लोकायुक्त का, लोकपाल का। उत्तराखंड सरकार ने खंडूरी जी के नेतृत्व में जो चल रही थी, उसने पास किया और उसमें मुख्यमंत्री को लोकायुक्त के दायरे में लाया था, उत्तर प्रदेश में भी एक प्रस्ताव गया था कि मुख्यमंत्री को लोकायुक्त के दायरे में होना चाहिए लेकिन चौबीस घंटे के भीतर ही उसे बदल दिय गया। वहां के मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री को इसके दायरे में नहीं लाना चाहिए, आपको क्या कहना है?
 
नरेश अग्रवाल- देखिये खंडूरी जी ने बनाया, अपने को दायरे में लाए खुद चुनाव हार गए, हमने यूपी में साफ मना किया। मैं तो प्रधानमंत्री को भी लोकायुक्त के दायरे में लाने के पक्ष में नहीं हूं। मैं इस बिल के ही पक्ष में नहीं हूं। हम राजनीतिक लोगों को अगर इन दायरों में बांध दिया जाएगा तो हम जनता की सेवा क्या करेंगे। जनता किस आशा को लेकर हम तक आती है। अगर उस आशा को पूरा करते समय हम देखने लगे कि हमारे ऊपर आरोप लग जाएंगे अगर हमने ये किया तो जनता हमें रबर का बबुआ बनकर रह जाएंगे। मैं तो इससे सहमत नहीं हूं। और मैं तो कभी भी प्रधानमंत्री, मंत्री बगैरह के लोकपाल के दायरे में लाने के पक्ष में नहीं हूं। बीते दिनों एक आईएएस मिले और कहने लगे कि नरेश जी हम लोगों ने डिसीज़न लेना बंद कर दिया है क्योंकि अगर निर्णय लेने पर आरोप लगने लगे, जेल चले जाएं तो क्या करेगें। अगर ये धारणा नेताओं और ब्यूरोक्रेसी की बन गई तो एक मंत्री से मिलने गए तो कहने लगे कि हम तो फाइल पर सीन लिख देते हैं बाकी कोई कमेन्ट नहीं लिखते हमने कहा अगर आप ऐसा करेंगे तो निर्णय कैसे होंगे। तो बोले कि निर्णय हो या ना हो इतने साल के करियर में हमें खुद को बचाना है। अगर नेताओं और ब्यूरोक्रेट्स की ये हालत हो गई। निर्णय नहीं होंगे तो देश की हालत बहुत बुरी होगी। अफगानिस्तान से बुरी होगी। जो लोग ये आंदोलन चला रहे हैं वो देश को तोड़ने की नीति बना रहे हैं।
 

वासिंद्र मिश्र
-पिछली जो सरकार थी मायावती की उसमें भ्रष्टाचार के तमाम आरोप लगे थे...और विधानसभा चुनाव में भी सबसे बड़ा मुद्दा था...भ्रष्टाचार का। आप लोगों ने वादा किया था जनता से कि सरकार बनेगी तो सभी भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कराके जो दोषी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी लेकिन डेढ़ महीना हो गया कोई टोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही क्या कारण है।

नरेश अग्रवाल-देखिए हम भी पक्ष में हैं कि आयोग बनाना चाहिये। जितनी भ्रष्टाचार की शिकायतें हैं आयोग को दे देनी चाहिए। जिससे ये भी ना लगे कि हम पक्षपातपूर्ण कार्रवाई कर रहे हैं और आयोग से जो निकल कर आए उस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, मैं इस पक्ष में हूं। और जल्द ही सरकार इसे करेगी। अभी थोड़ा समय हुआ है व्यवस्था को संभाले हुए, जल्दी में इसलिए भी नहीं कर पा रहे हैं कि बदले की कार्रवाई लगे। समाजवादी विचारधारा में बदला शब्द नहीं होता हम बदले की भावना से काम नहीं करते। सच को सच और गलत को गलत मानते हैं, धैर्य रखिए भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई होगी।

वासिंद्र मिश्र
-मौजूदा जो उत्तर प्रदेश की सरकार चल रही है पिछले चुनाव में समाज के सभी वर्गो ने समाजवादी पार्टी को वोट दिया था और तभी समाजवादी को बहुमत मिला था और सभी वर्ग के लोगों को उम्मीद थी कि यदि समाजवादी पार्टी की सरकार बनी तो सबके हित की नीति बनेगी, लेकिन जो कामकाज का तरीका है उससे लगता है क एक जाति और सम्प्रदाय विशेष के लिए काम हो रहे हैं इसके क्या कारण है?

नरेश अग्रवाल-देखिये ऐसा कुछ नहीं है। हमारी प्राथमिकता घोषणा पत्र लागू करने की है। हमने घोषणापत्र लागू करने की शुरुआत की है, इसमें समय लगेगा। लेकिन जिस तरह से इसका महौल बना कि मैं भी चिंतित हो गया। समाजवादी पार्टी को सभी वर्गों ने वोट दिया ये हम भी मान रहे हैं, वरना इतना बहुमत कहां से आता। और मैं सभी वर्गों को भरोसा दिलाता हूं कि जब तक नेता जी है, मुख्यमंत्री है, हमारी सरकार है, कहीं ऐसा नहीं होगा कि एक वर्ग को ज्यादा मिल रहा है कि किसी के साथ भेदभाव हो रहा है, समान नीति की समाजवादी विचारधारा है और वो रहेगी।
वासिंद्र मिश्र -समाजवादी पार्टी की सरकार पर सबसे बड़ा आरोप लगता है कानून व्यवस्था का। और डेढ़ महीने से फिर देखने को मिल रहा है कि पूरे प्रदेश में अपराधी बिल्कुल निरंकुश हो गए है और पुलिस बिल्कुल लाचार खड़ी है तो क्या इस बार भी जनता को वैसे ही अनुभव होंगे जैसे पहले समाजवादी पार्टी की सरकार में रहे हैं?

नरेश अग्रवाल- देखिये, आप लोगों ने बहुत जल्दी हमारा पोस्टमार्टम शुरु कर दिया। पिछली सरकार में जो मीडिया लिखने में डरती थी, मैंने पिछली सरकार में देखा मीडिया के हाथ पैर बिल्कुल जैसे कट गए हों। सत्यता लिखने में सरकार को फ्रीडम मिली तो मीडिया को भी सोचना चाहिए कि छ महीने या साल भर का समय तो दें दे। मैं रोज दिल्ली में रहता अखबार में देखता हूं कि रोज चार पांच रेप जाने कितने कत्ल जबकि दिल्ली की बहुत छोटी आबादी है उत्तर प्रदेश की तुलना में। यूपी में चार-पांच केस भी हो जाएंगे तो एसपी का कार्यकर्ता मारा गया। बीएसपी का कार्यकर्ता मारा गया। दिल्ली में रोज अपराध हो रहे हैं। मुख्यमंत्री केन्द्रीय गृहमंत्री को चिट्ठी लिख रही हैं। यहां कानून व्यवस्था का मुद्दा मीडिया नहीं उठाती। बिहार, बंगाल, एमपी, राजस्थान में क्या अमन चैन रामराज आ गया है और मीडिया को सारी गुण्डागर्दी यूपी में ही दिख रही है। ऐसा नहीं है। कौन सा ऐसा जिला है जहां कांड नहीं होते और कौन सी सरकार में नहीं होते। तो इसको बहुत जल्दी में लिख देना कि यूपी में गुंडाराज हो गया, यूपी बिल्कुल हताहत रुप में है मैं इससे सहमत नहीं हूं। हमने मीटिंग में कहा कि कानून व्यवस्था हमारी प्रथमिकता है। नीचे तक हम व्यवस्था बदल नहीं पाए हैं। पिछली सरकार की। अब कुछ व्यव्स्था बदली है पूरी व्यवस्था बदलने के बाद इतनी कड़ाई होगी कोई गुंडा आपको बाहर नहीं दिखाई देगा। जडो गुंडा होगा उसकी जहां जगह हैं, वहीं होगा।
वासिंद्र मिश्र-समाजवादी पार्टी का जो चुनावी घोषणापत्र है अगर उसको लागू किया गया। ईमानदारी से तो कई लाख हजार करोड़ रुपये की जरुरत है इस समय। मौजूदा जो वित्तीय हालत है यूपी की वो जर्जर है तो उन वादों को किस तरह से पूरा किया जाएगा?

नरेश अग्रवाल-  माननीय मुख्यमंत्री जी 14 तारीख को प्रधानमंत्री जी से मिले थे। हम लोगों के पास लेटर कॉपी आ गई है, करीब 93 हजार करोड़ की पेंडिग योजनाओं के बारे में लिखा है। उस धन की मांग की गई है। 93 हजार करोड़ रुपये में हम कुछ योजनाओं को पूरा करेंगे बाकी अपने स्रोत बढ़ाएंगे। और जो करीब पचार हजार करोड़ रुपया पार्कों, स्मारकों, मूर्तियों पर खर्च हुआ था उसे बचायेंगे और रुपए को बचाकर अपने वादों को पूरा करेंगे। आप चिंतित ना हो समय दीजिये हमको। और हमने तो राज्यसभा में भी मसला उठाया कि पीएम उत्तर प्रदेश के लिए एक अलग से बैठक बुलाते हैं जिसमें मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री मिलते हैं। पिछली सरकार में शिकायत थी कि मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री से मिलती नहीं, बात नहीं करती और नए मुख्यमंत्री से ये शिकायत नहीं होगी। वो तो खुद मिलने आए थे और प्रधानमंत्री जिस दिन यूपी की बैठक बुलाएंगे हमारे मुख्यमंत्री जी आएंगे, सारे अधिकारी आएंगे। मैं चाहूंगा जल्दी बैठक बुलाकर हमारे प्रदेश के लिए जो उसका हिस्सा है, धन है अवमुक्त करें।
वासिंद्र मिश्र-सपा जब विपक्ष में थी और बीएसपी की सरकार थी तो एसपी गंगा एक्सप्रेस वे और यमुना एक्सप्रेस वे सबका विरोध कर रही थी और अब सरकार बन गई तो उन सारी योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है तो वो विरोध महज राजनीतिक था या सत्ता तक आने के लिए?

नरेश अग्रवाल-देखिए जो योजनाएं अच्छी है जो बन गई है जैसे यमुना एक्सप्रेस वे लगभग पूरी हो गई है अब हो गई तो ठीक है। लेकिन गंगा एक्सप्रेस वे शुरु नहीं हुई थी हमने उस पर सहमति नहीं दी हम और भी तमाम सड़कों पर विचार कर रहे हैं। अभी लखनऊ से दिल्ली की एक सड़क प्रस्तावित है जिससे करीब 70-80 किलोमीटर मार्ग कम हो जाएगा, लखनऊ-दिल्ली के बीच। उत्तर प्रदेश में जब तक अच्छा इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं होगा। तब तक यूपी अच्छा विकास नहीं कर पाएगा। मैं तो इस बात का विरोधी हूं कि सरकार बदले और सब नीतियां बदल जाएं। सरकार बदले तो पिछली सरकार की जो नीतियां अच्छी हों, उसे आगे बढ़ाए। जो खराब हो उसे बदलना चाहिये। मूर्ति पार्क वगैरह से जनता का लाभ नहीं हो रहा है। तो ऐसी योजनाएं बननी चाहिये जिससे जनता का हित हो। जैसे एम्स की चर्चा हो रही है अखबारों में निकल रहा है कि यूपी में एम्स दिया जा रहा था, यूपी सरकार ने जमीन नहीं दी, इसलिए एम्स नहीं खुला। हमारे मुख्यमंत्री ने कानपुर में कहा कि हमसे कहिए हम जमीन देंगे। तो हम केन्द्र से टकराव भी नहीं चाहते, लेकिन कांग्रेस से जो हमारा विरोध है वो भी बना रहेगा। हम यूपी के विकास के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
वासिंद्र मिश्र-नरेश जी आप ऊर्जा मंत्री थे तो तमाम परियोजनाएं घोषित हुई थीं। उसके बाद लगभग ठप सी हो गई सारी योजनाएं। उत्तर प्रदेश में बिजली की डिमांड ज्यादा है, उत्पादन कम है। लाइन लॉस ज्यादा है उस दिशा में क्या मौजूदा सरकार कुछ सोच रही है करने के लिए?

नरेश अग्रवाल-हमारी प्राथमिकता है ऊर्जा, पिछली सरकार ने तमाम एमओयू साइन किये, तमाम घोषणाएं की। यूपी में हमने चालीस हजार मेगावॉट, दस हजार मेगावॉट की योजनाएं अखबारों में निकली लेकिन हम उनसे पूछना चाहते ते कि इसकी गारंटी जब आप के पास थी नहीं तो योजनाएं कैसे लगती। फाइनेंशियल क्लोजर कैसे होता। इस पर सिर्फ पापुलेरिटी बटोरी गई कि जनता का वोट उन्हें मिल जाएगा। हम पावर मिनस्टर थे तो आखिरी रोज हम कर के गए थे। उस समय बिड़ला जी से एग्रीमेंट हुआ था बाद में वो अनिल अंबानी जी को चला गया और वो लगा पावर स्टेशन। हमारे जमाने में तीन पावर स्टेशन लगे उसके बाद कोई नहीं लगा। ये बड़े दुख की बात है। हमारी सरकार प्रथमिकता पर ऊर्जा को उत्पादित और वितरित करना चाहती है। हमने जो वादा किया है कि शहर को बाइस घंटे और गांव को बीस घंटे बिजली दे। उसे पूरा करना चाहते हैं। और सेंटर से भी अपील है कि यूपी को गिडगिल फार्मूले से बिजली ना दी जाए बल्कि क्षेत्रफल और आबादी के अनुरुप बिजली दी जाये।
वासिंद्र मिश्र-जो मैसेज जा रहा है यूपी की जनता या मीडिया में कि मौजूदा सरकार में कई पावर सेंटर हैं और शायद इसीलिए मुख्यमंत्री, नेताजी को अपनी कोई भी नीति लागू करने में काफी दिक्कत हो रही है। कभी कोई चिट्ठी लिख रहा है, कभी कोई बयान दे रहा है। कभी कोई मंत्री नाराज होकर जा रहा है। आप को नहीं लगता कि इतने पावर सेंटर होने से किसी भी सीएम को काम करने में दिक्कत होगी?

नरेश अग्रवाल-कहीं ना कहीं थोड़ा सा ऐसा लगता है कि जैसे विचारों में मतभेद है। ये बात सही है। तमाम तरह के बयान आते हैं। मैने नेताजी से कहा था कि समाजवादी पार्टी में तमाम तरह के लोग हैं कैसे साथ लेकर चलते हैं, तो नेताजी ने कहा कि नरेश समझ लो शंकर जी की बारात है सबको साथ लेकर चलना है। एक बहुत बड़ी बात है कि बड़ा नेता हर एक के विचारों को सुने। आज तो मै देख रहा हूं कि रीजनल पार्टी में  जिस तरह से डिक्टेटरशिप है वो हमारी पार्टी में नहीं है। समाजवादी पार्टी में सबको बोलने की आजादी है। लेकिन मैं इतना कहूंगा कि वो स्वतंत्रता नेता से व्यक्त करें तो ज्यादा अच्छा होगा। अन्य माध्यम में व्यक्त ना हो। विचार अलग-अलग हो सकते हैं। आज भी हमने कोई बात नेताजी से कही तो उन्होंने कहा कि तुम्हें मीडिया में नहीं कहना चाहिए, पार्टी के फोरम में कहना चाहिए। तो वो मना नहीं करते कि चीजों को कहो, तो शायद इसीलिए लोगों को लग रहा है कि पावर सेंटर बहुत हैं। लेकिन पावर सेंटर अकेले नेताजी हैं। निर्णय उन्हीं का होता है। हम लोगों के पितातुल्य है, बड़े भाई है, पार्टी के मुखिया है, हम सब कुछ भी कर डालें, चाहें जितना मतभेद हो, लेकिन नेताजी का आदेश सर्वोपरि है वो जो भी कह देंगे हम लोग मतभेदों को दूर कर देगें और ये कहीं मैसेज नहीं है कि तमाम पावर सेंटर हैं। प्रशासनिक निर्णय नेताजी ले रहे हैं और बहुत सी चीजों में माननीय मुख्यमंत्री जी और नेताजी बैठकर विचार विमर्श कर लेते हैं वो निर्णय हो जाते हैं। बहुत पावर सेंटर की बात से हम सहमत नहीं है।
वासिंद्र मिश्र-उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती जी जब वो मुख्यमंत्री थीं तब भी वो चाहती थीं कि एसपीजी सुरक्षा मिले और अब जब विपक्ष में हैं तब भी वो एसपीजी सुरक्षा के लिए परेशान हैं और प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख रही है, क्या सचमुच खतरा है या इसलिए सुरक्षा चाहिए कि वह सुरक्षा सिर्फ पीएम और पूर्व पीएम को मिली है तो उनको भी मिलनी चाहिए?

नरेश अग्रवाल-मैं तो खुद ही बड़ा आश्चर्यचकित होता हूं कि किसका ऐसा बहुत भारी विरोध है पूर्व मुख्यमंत्री को। जब वो मुख्यमंत्री थीं तब भी इतनी सुरक्षा लगी थी। मेरे ख्यल से करीब 2000 लोग सिक्यूरिटी में लगे थे। माननीय मुख्यमंत्री जी को अधिकारियों ने इतना डरा दिया था कि पूरे पूरे दिन वो घर से बाहर नहीं निकलती थीं। जो पांच साल तक जनता से ना मिला हो, एमएलए, एमपी से ना मिला हो, मंत्री से ना मिला हो भय के मारे। कि पता नहीं कौन सी घटना घट जाए। तो वो नेता जनता के बीच कितने दिन चलेगा, कैसे पापुलर रहेगा, इस पर प्रश्नचिन्ह लगता है। अगर नेता ही भय खाएगा तो जनता को क्या सुरक्षा देगा। मुझे नहीं लगता कि ये क्यों किया जा रहा है। किसने उन्हें समझा रखा है। जो यूपी सरकार से मान्य सुरक्षा थी जो पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिलती है जेड प्लस वो अब दे रखी है तो एसपीजी की मांग करना, मैं उससे कही से सहमत नहीं हूं।
 
वासिंद्र मिश्र-आपको लगता है कि ये स्टेटस सिंबल हो गया है एसपीजी सुरक्षा?

नरेश अग्रवाल-कुछ मुझे भी लगता है कि मांग ज्यादा होने लगी है एसपीजी की। क्या यूपी पुलिस के कर्मचारी निकम्मे हैं क्या सिक्यूरिटी की फौज निकम्मी है। एक से एक सक्षम लोग हैं एक से एक योग्य लोग हैं उन पर विश्वास करना चाहिए। हम लोग भी तो लेकर चलते हैं। विश्वास के साथ चलते हैं और रात दिन जनता के बीच रहते हैं। नेता घबराएगा तो जनता की सेवा नहीं कर सकता।
वासिंद्र मिश्र-आप इस तरह के पक्षधर हैं कि इस तरह की जितनी लोगों को सिक्यूरिटी मिली है कमांडो या एसपीजी उनका रिव्यू तो महज आई वाश होता है, खानापूर्ती होती है। सही ढंग से उसका रिव्यू हो और अगर उनको खतरा नहीं है तो सुरक्षा वापस ली जाए?

नरेश अग्रवाल-मेरे ख्याल से ऐसे ही लोगों को मिले जिन्हें सुरक्षा का खतरा हो, देश में जो समीक्षा होती है वो राजनीतिक कारणों से नहीं होती, भारत सरकार समीक्षा में काफी ध्यान रखती है। यूपी सरकार भी काफी कुछ देखती है। समीक्षा छ-छ महीने पर होती है और इस समय जिन्हें मिली है अधिकांश ठीक है।
वासिंद्र मिश्र-आपके एक वरिष्ठ सहयोगी बृजभूषण तिवारी का पिछले दिनों देहावसान हो गया है। कार्यकर्ताओं की मांग है कि उनके परिवार के किसी व्यक्ति को दुबारा उनकी जगह राज्यसभा भेजा जाना चाहिए, समाजवादी आंदोलन में वो काफी आगे थे, नेताजी के पुराने सहयोगी रहे हैं, आपकी क्या राय ?

नरेश अग्रवाल : देखिए तिवारी जी के बेटे का फोन हमारे पास आया था, तेरहवीं के लिए भी आने को कहा है और मेरे मन की जो इच्छा है वो नेताजी से कह दूंगा। पर्सनल मिल कर मीडिया में नहीं कहूंगा। लेकिन नेताजी को मैंने देखा है कि उनका करियर में सिद्धांत रहा है कि जो उनके साथ रहा है उसका उन्होंने अंत तक साथ दिया। और परिवार का साथ दिया। बस मैं इतना ही कह सकता हूं और बाकी बात नेताजी से मिल कर करुंगा और समाजवादी पार्टी के बाकी नेताओं से करुंगा। निर्णय नेताजी को लेना है कि किसको राज्य सभा में लाएं किसको नहीं।

वासिंद्र मिश्र : बातचीत के लिए धन्यवाद

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राजनीतिक दलों की कथनी और करनी में फर्क होता है : मायावती
 22 दिसंबर , 2012 को की गई बातचीत 

 वासिंद्र मिश्र : देश में बवंडर मचा हुआ है रिजर्वेशन को लेकर। प्रमोशन में रिजर्वेशन के सवाल पर जिस तरह से आपके ऊपर आपके राजनीतिक विरोधी तरह-तरह के आरोप लगा रहे हैं उसके पीछे आप क्या देख रही हैं...आखिर क्या वजह है कि एक बार फिर पूरा देश आरक्षण के सवाल पर आपका विरोधी हो गया है?

मायावती : इस सम्बंध में सबसे पहले आपको ये बताना चाहती हूं कि इसमें एससी एसटी वर्गों के लोगों को प्रमोशन में जो रिजर्वेशन मिल रहा है, यह कोई नई बात नहीं है। सभी वर्गों को पदोन्नति में आरक्षण 1955 से मिल रहा है। लेकिन बीच बीच में जो लोग नहीं चाहते हैं कि इन वर्गों के लोग अपने पैरों पर खड़े हों तो कुछ अड़चने पैदा कर दी जाती हैं जिसकी वजह से संविधान में इसको लेकर कई बार संशोधन भी हुए हैं और इस श्रृंखला में फिर से संशोधन आया है। सही मायने में इसके लिए केन्द्र में कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में जो यूपीए की सरकार चल रही है वही जिम्मेदार है और इस संदर्भ में मैं आपको बताना चाहती हूं कि मैं बार-बार क्यों बोलती हूं कि इसके लिए केंद्र की सरकार जिम्मेदार है। वह इसलिए कि 19-10-2006 में मिस्टर नागराज बनाम भारत सरकार के केस में इस मामले को लेकर जो फैसला आया था माननीय सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने जो फैसला दिया था उसमें तीन शर्तें ऐसी लगा दी थी जिसको लेकर इनका पदोन्नति में जो आरक्षण है वो निष्प्रभावी हो गया। जब ये फैसला 2006 में आया तो उस समय केन्द्र में कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में यूपीए की सरकार चल रही थी और ये ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि केन्द्र की सरकार ने इस केस की सही तरीके से पैरवी नहीं की। जब ये फैसला आया तो कांग्रेस पार्टी की सरकार को इस केस को लेकर रिव्यू में जाना चाहिए था लेकिन सरकार रिव्यू में नहीं गई और 2006 के बाद इसी फैसले को लेकर राजस्थान के मामले में फिर हिमाचल के एक मामले में उसके बाद उत्तरप्रदेश के एक मामले में इस फैसले का प्रयोग करते हुए इन वर्गों के लोगों को पदोन्नति में जो आरक्षण मिलना था उसे निष्प्रभावी कर दिया गया। फिर पूरे देश में निष्प्रभावी हो गया। हमारी पार्टी ने संसद के अंदर और संसद के बाहर इस मुद्दे को लेकर विरोध किया। उससे पहले हमने इस संदर्भ में प्रधानमंत्री और सभी दलों के नेताओं को चिठ्ठी लिखी। जब हमारी चिठ्ठी पर ध्यान नहीं दिया गया तब हमारी पार्टी को संसद के अंदर और बाहर पिछले सत्र में काफी विरोध करना पड़ा। अब विधेयक तो बन गया लेकिन पास नहीं हो सका है।

वासिंद्र मिश्र : लेकिन राज्यसभा में यह विधेयक पारित हो गया? आपके विरोध आपके दबाव के चलते, आपकी पार्टी के दबाव के चलते, लेकिन लोकसभा में फिर ये विधेयक लटक रहा है।

मायावती : राज्यसभा में जो विधेयक पास हुआ इसके लिए भी हमारी पार्टी को बड़ा संघर्ष करना पड़ा और जब ये राज्यसभा में पास हो गया तो हम ये सोचकर चल रहे थे कि अब लोकसभा में ये विधेयक पास हो जाएगा, लेकिन आप लोगों ने खुद देखा होगा 19 दिसंबर और 20 दिसंबर को जिस तरीके से लोकसभा में नाटक किया गया उससे खासकर एससी/एसटी वर्गों के लोगों को ये साफ हो गया कि केन्द्र में कांग्रेस पार्टी की सरकार इस विधेयक को पास नहीं करवाना चाहती और मैं क्यों इस बात को कह रही हूं क्योंकि जो 19 दिसंबर को ये विधेयक लोकसभा के अंदर आया और उस समय जब ये संबधित मंत्री इस विधेयक को रख रहे थे तो सपा के एक सांसद ने उस विधेयक की कॉपी छीन ली और उसके बाद बड़ा हंगामा हुआ। जब वो कॉपी छीन ली और फाड़ कर फेंक दी तो उस समय सरकार की ये जिम्मेदारी बनती थी कि वो अपनी इच्छा शक्ति का परिचय देती। सरकार की जिम्मेदारी बनती थी कि वह इस मामले को लेकर तो माननीय स्पीकर से अपनी बात रखते और उनके माध्यम से मार्शल का इस्तेमाल करते। लेकिन केन्द्र की सरकार ने ऐसा नहीं किया जबकि आपको ये मालूम है कि जब महिला आरक्षण विधेयक राज्यसभा में प्रस्तुत किया गया था तो उस समय भी समाजवादी पार्टी के लोगों ने विधेयक की कॉपी छीन कर लोकसभा में काफी हंगामा किया था और उसके बाद राज्यसभा में मार्शल का इस्तेमाल किया गया था और विधेयक को पास कराया गया। जब महिला आरक्षण विधेयक में विधेयक की कॉपी फाड़ दी गई और वहां पर मार्शल का इस्तेमाल किया गया तो फिर एससी/एसटी वर्गों का पदोन्नति में जो आरक्षण से सम्बंधित विधेयक के मामले में ऐसा क्यों नहीं किया गया।


वासिंद्र मिश्र : आपको लगता है इस पूरे गेम को जिसे आप नाटक कह रही हैं इसमें भाजपा, सपा और जो बाकी गैर बीएसपी दल हैं सब शामिल हैं?

मायावती : भारतीय जनता पार्टी का तो मैं आपको बताना चाह रही हूं कि वह कहती कुछ है और करती कुछ है। राज्यसभा में तो उन्होने विधेयक को समर्थन देकर इस विधेयक को पास करा दिया लेकिन लोकसभा के अंदर जिस तरह की दिलचस्पी उनको लेनी चाहिए थी, नहीं ली। जहां तक समाजवादी पार्टी का सवाल है तो उसके बारे में आप लोगों को ये मालूम है कि वह शुरू से ही इस विधेयक का विरोध कर रही है। सपा को तो सर्वसमाज में केवल अपने समाज यानी यादव समाज का दिखता है। हम कोई यादव समाज के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन यादव समाज के सिवा सपा को कुछ नजर नहीं आता। राज्यसभा और लोकसभा के अंदर समाजवादी पार्टी के लोगों ने कहा कि मुस्लिम समाज के हितों को ध्यान में रखकर सच्चर कमेटी की रिपोर्ट लागू होनी चाहिए, लेकिन मैं समाजवादी पार्टी के लोगों से पूछना चाहती हूं कि हमारी पार्टी भी इसकी पक्षधर है कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट लागू होनी चाहिए। केन्द्र सरकार को ये रिपोर्ट लागू करनी चाहिए लेकिन जो सलाह दे रहे हैं केन्द्र की सरकार को पहले समाजवादी पार्टी को अपने गिरेबान में भी झांक कर देखना चाहिए कि वो उत्तर प्रदेश में जो मुस्लिम समाज के लोग हैं उनके हितों के लिए अभी तक क्या कदम उठाए है और इस संदर्भ में मैं बताना चाहती हूं कि यूपी के अंदर मुस्लिम समाज के अंदर जो बैकवर्ड क्लास के लोग है उनको सबसे पहले बैकवर्ड क्लास में शामिल कर शिक्षा और सरकारी नौकरियों में हमारी पार्टी की सरकार ने 1995 में आरक्षण की सुविधा दी थी। मुलायम सिंह यादव की सरकार ने ये सुविधा नहीं दी थी और इतना ही नहीं आपको ये भी मालूम होना चाहिए कि इस बार विधानसभा का आम चुनाव हुआ। समाजवादी पार्टी ने अपना मैनिफेस्टो जारी किया जिसमें ये लिखा था कि उत्तर प्रदेश के अंदर सभी मुस्लिम समाज के लोगों को शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में दलित वर्गों की जिस तरह से आबादी के हिसाब से रिजर्वेशन मिला है उसी तरह से मुस्लिस समाज के लोगो को भी आबादी के हिसाब से 18 प्रतिशत रिजर्वेशन मिलेगा। ये उन्होंने अपने मैनिफेस्टो में कहा लेकिन आज तक उन्होने अपनी बात को लागू नहीं कराया। जहां तक उत्तर प्रदेश का सवाल है एससी/एसटी लोगों को जो प्रमोशन में रिजर्वेशन देने की जो बात आई है इसको लेकर जो ये कहते हैं कि पूरे देश में लोग बड़े नाराज हैं तो मैं बताना चाहूंगी कि देश में कोई नाराज नहीं है क्योंकि 1955 से उनको ये आरक्षण की सुविधा मिल रही है।

वासिंद्र मिश्र : आपके ऊपर ये भी आरोप लग रहा है कि इस पूरे आरक्षण की राजनीति में जो सवर्ण लोग थे जो कमजोर थे या गरीब थे और जिनके बारे में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहते चिठ्ठी लिखा करती थी प्रधानमंत्री को, उन मुद्दों को आ आप भूल गई हैं। पिछड़े वर्ग के बारे में भी आपकी कोई राय नहीं है।

मायावती : मैं आपको बताना चाहती हूं कि राज्यसभा के अंदर भी इस विधेयक के बारे में मैंने कहा था कि पार्टी सर्वसमाज का हित चाहती है। हमारी पार्टी एससी/एसटी वर्गों का पदोन्नति में आरक्षण के लिए ही लड़ाई नहीं लड़ रही है यदि केन्द्र सरकार बैकवर्ड क्लास के लोगों को भी पदोन्नति में आरक्षण देती है तो पूरे देश के अंदर बीएसपी पहली पार्टी होगी जो उसका स्वागत करेगी। इसके साथ ही हमने ये भी कहा कि जो अपर कास्ट के लोग हैं उनमें जो गरीब लोग हैं, भारतीय संविधान में संशोधन करके आर्थिक आधार पर उनको भी आरक्षण की सुविधा मिलनी चाहिए। इस संदर्भ में हम समय-समय पर केन्द्र सरकार को चिठ्ठी लिखते रहे हैं लेकिन केन्द्र की सरकार ने आज तक इसपर कोई अमल नहीं किया। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की ने तो पिछले कार्यकाल में अपर कास्ट के लोगों की तो सरकारी नौकरियों की भर्ती पर ही रोक लगा दी थी। जब मेरे नेतृत्व में सरकार बनी 2007 में तो मैंने उस रोक को हटा दिया। मेरी हूकूमत में लगभग 30 लाख लोगों को नई नौकरियां मिली। अकेले अपर कास्ट समाज के लोगो को ही नहीं, बैकवर्ड क्लास, एससी/एसटी, अल्पसंख्यकों को भी नौकरी दी। हमने सर्वसमाज के लोगों को बराबर की भागीदारी दी। किसी के साथ अन्याय नहीं किया।

वासिंद्र मिश्र : एक और सबसे अहम सवाल ये है कि जिस तरह से कांग्रेस के नेतृत्व में चल रही सरकार ने एफडीआई के सवाल पर आपसे एक समझौता किया और आरोप ये है कि आपके साथ उन्होंने वायदा किया था कि आप एफडीआई पर राज्यसभा में उनको समर्थन करेंगे और बदले में वो प्रमोशन में रिजर्वेशन का बिल देंगे।

मायावती : नहीं, इस संदर्भ में मैं आपको बताना चाहती हूं कि एफडीआई के मामले में जब लोकसभा में चर्चा शुरू हुई थी उससे एक दिन पहले मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी और अपनी पार्टी की पूरी स्थिति स्पष्ट कर दी थी। हमने लोकसभा के अंदर बहिर्गमन किया था और राज्यसभा के अंदर हमने सरकार के पक्ष में वोट दिया था। कारण ये था कि एफडीआई में एक बात से हमारी पार्टी सहमत थी। केंद्र सरकार ने एफडीआई के मामले में ये कहा था कि ये जो एफडीआई की नीति है वो किसी भी स्टेट पर जबरन नहीं थोपी जाएगी। हमने कुछ सुझाव भी रखे थे उन्होंने हमारे सुझाव नहीं माने तो हमने वॉकआउट कर दिया। राज्यसभा में ये मामला आया तो हमें ये लगा कि यदि अगर ये बिल यहां पास नहीं होता है तो तो इसकी आड़ में ये हाउस को चलने नहीं देंगे। ये रोज राजनीति करेंगे और हमारा ये प्रोन्नति में आरक्षण विधेयक पास नहीं हो पाएगा। इसलिए फिर हमने अपने इस विधेयक के हित में एफडीआई पर सरकार के समर्थन में वोट दिया। हम एफडीआई की जो नीति है उससे बिल्कुल सहमत नहीं हैं। एक ही बात से सहमत हैं कि उन्होने किसी भी राज्य सरकार पर जबरन इसे थोपा नहीं है।

वासिंद्र मिश्र : आपको लगता नहीं कि कांग्रेस पार्टी बार-बार वायदा करती है और अपने वायदे से मुकर जाती है। ये पुराना इतिहास रहा है कांग्रेस का?

मायावती : मैं आपको बताना चाहती हूं कि कांग्रेस ही नहीं, कांग्रेस के अलावा जो दूसरी पार्टियां भी हैं भाजपा या अन्य पार्टियां ये कहती कुछ हैं और करती कुछ है। कांग्रेस ने तो आजादी के बाद लंबे अरसे तक केंद्र में भी और सूबे में भी राज किया है तो कांग्रेस इसके लिए ज्यादा जिम्मेदार है। कांग्रेस पार्टी का कल्चर रहा है शुरू से लेकर अब तक कि वो कहती कुछ है और करती कुछ और है। खासतौर सर्वसमाज में जो गरीब लोग हैं, वीकर सेक्शन के जो लोग हैं उनके मामले में आज तक उन्होंने केवल बड़े-बड़े वायदे किए हैं लेकिन जमीनी हकीकत में वायदों को अमल में नहीं लाया। जब ये अमल में ले आते तो हमें बहुजन समाज पार्टी की नींव नहीं रखनी पड़ती। इसको बनाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

वासिंद्र मिश्र : बीएसपी की बात हो रही है उसकी स्थापना की बात हो रही है और मान्यवर कांशीराम जी का भी जिक्र किया। हम लोग सुना करते थे जब पार्टी का गठन हो रहा था तब से लेकर कई साल से हम लोग आपको देखते रहे हैं। मान्यवर कहा करते थे और आप भी अपनी जनसभा में कहा करती थीं कि सरकार चाहिए कमजोर सरकार चाहिए तभी बहुजन समाज पार्टी का भला हो सकता है। अब इस समय जो देश में सरकार चल रही है आप भी मानती हैं बहुत कमजोर सरकार है?

मायावती : मैं आपको बता दूं कि जब तक हम लोग सत्ता में नहीं आते हमारे समाज का, सर्वसमाज में जो गरीब लोग हैं उनके हित में ये जरूरी है एक मजबूर सरकार रहे। हमारी जो सोच है जब तक हम लोग सत्ता में नहीं आते, और इस दौरान ये सरकार मजबूत रहेगी तो ये लोगों का ध्यान नहीं रखेगी। कमजोर रहेगी तो डर-डर कर काम करेगी और समाज के कमजोर तबके के लोगों का ध्यान रखेगी।

वासिंद्र मिश्र : और एक ये भी फिलॉसिफी थी जो हम लोग सुना करते थे कि जितनी बार चुनाव होगा उतना ही बहुजन समाज को फायदा होगा, पॉलिटिकल इम्पॉवरमेंट मिलेगा?
मायावती : हां! ये आज भी हमारी सोच है। इस पर आज भी हम कायम हैं।

वासिंद्र मिश्र : इस सरकार से समर्थन वापस क्यों नहीं लेती आप?

मायावती : हमने इस सरकार को जो समर्थन दिया था, ये सोच कर दिया था कि जो देश में साम्प्रदायिक ताकतें है उनको मजबूत न होने दिया जाए। सर्वसमाज में गरीब और उपेक्षित लोगों, किसानों, व्यापारियों और मजदूरों का भला होगा। लेकिन ये सरकार इनके हितों के लिए कोई जरूरी कदम नहीं उठाएगी। अब ये आश्वासन दे रहे हैं कि हम कर रहे हैं। ऐसा करते-करते पूरे चार साल हो जाएंगे। साढ़े तीन साल के करीब तो हो ही रहे हैं। तो अब बचा क्या...डेढ़ साल। अब डेढ़ साल के लिए समर्थन वापस लेकर क्या करेंगे। साढ़े तीन साल झेला है डेढ़ साल और देख लें। कल कांग्रेस को ये कहने का मौका नहीं मिलेगा कि पूरा मौका नहीं दिया।


वासिंद्र मिश्र : इस समय जो देश में परिदृश्य बना हुआ है आपको क्या लग रहा है कि 2013 या 2014 में जब भी चुनाव होता है किस रूप में देख रही हैं? अगले पार्लियामेंट का जो सीन होगा, जो राजनीतिक समीकरण बनेगा उसमें कांग्रेस और भाजपा को आपको लगता है ये लोग दोबारा सत्ता में आने की स्थिति में होंगे?

मायावती : मेरा ऐसा अनुमान है कि किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलने वाला नहीं है। जब ऐसी स्थिति होगी तो संभव है स्थिति कुछ और बन जाए। हालात कुछ और बन जाएं। राजनीति में आए दिन बदलाव होते रहते हैं, तब्दीली होती रहती है। अब एडवांस में मैं तो कुछ कह नहीं सकती लेकिन तब्दीली होने की ज्यादा संभावना है।

वासिंद्र मिश्र : सब लोग आपकी तरफ उम्मीद लगाकर देखते हैं न्यूक्लियर डील के समय आपने एक सख्त स्टैंड लिया था। और उस समय लग रहा था कि एक मजबूत अल्टरनेटिव आपके नेतृत्व में बनेगा देश मे?

मायावती : जो आप सोच रहे हैं वह लोगों की सोच थी। लेकिन जब कांग्रेस और भाजपा एंड कंपनी के लोगों को लगा कि एक दलित की बेटी आगे आ रही है, कहीं ये देश की प्रधानमंत्री ना बन जाए तो भाजपा एंड कंपनी के लोगों ने अपने कुछ लोगों को अंदर-अंदर समझा-बुझाकर उनके समर्थन में वोट डलवा दिया। इस तरीके के हालात बना दिए गए ताकि यूपीए की सरकार बच जाए।

वासिंद्र मिश्र : इस समय देश में कानून व्यवस्था को लेकर खासतौर पर महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर काफी डर बना हुआ है। आम जनता में महिलाओं में उत्तर प्रदेश की स्थिति भयावह बनी हुई है। आपका क्या मानना है?

मायावती : देश में जो महिलाओं की हालत है वो बहुत ज्यादा खराब है और दिल्ली देश की राजधानी है। यहां तो आए दिन महिलाओं का उत्पीड़न होता रहता है। केंद्र सरकार को सख्त से सख्त कानून बनाना चाहिए और उसको इम्प्लीमेंट भी किया जाना चाहिए। कानून व्यवस्था की खराब स्थिति पूरे देश में है और सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में। अभी आप देखेंगे लगभग एक साल होने वाला है यूपी में सपा की सरकार का। इस दौरान उत्तर प्रदेश के अंदर एक दर्जन से ज्यादा साम्प्रदायिक दंगे हो चुके हैं और कोई ऐसा दिन नहीं आता उत्तर प्रदेश में 75 जिलों के अंदर लोगो की हत्याएं नहीं होती हों, लूटखसोट और चोरी डकैती नहीं होती हो, किडनैपिंग, गुंडागर्दी माफियागर्दी बड़े पैमाने पर हो रही है और छांट-छांट कर जो शिड्यूल कास्ट में दलितों का खासकर सर्वसमाज में से दलितों का उत्पीड़न बैकवर्ड क्लास में जो मोस्ट बैकवर्ड क्लास हैं उनका उत्पीड़न, मुस्लिम समाज से जो गरीब लोग हैं उनका उत्पीड़न, अपर कास्ट समाज में से गरीब असहाय हैं उनका उत्पीड़न हो रहा है। उत्तर प्रदेश में हर मामले में सरकार फेल हो चुकी है। दो-तीन दिन पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का बयान आया कि दिल्ली में गैंगरेप की पीड़ित लड़की के इलाज के लिए वह पैसा देगी, लेकिन ऐसा कहने से पहले उसे अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए कि उत्तर प्रदेश में क्या हो रहा है। उत्तर प्रदेश में रोजाना हर किस्म का अन्याय अत्याचार होता है। उसमें जो महिलाओं के ऊपर बड़े पैमाने पर अन्याय अत्याचार हो रहा है और 90 प्रतिशत महिलाओं पर जो अन्याय अत्याचार हो रहा है उनकी एफआईआर तक दर्ज नहीं की जाती। जिस दिन मुख्यमंत्री ने ये बयान दिया उसके अगले दिन ही बुलंदशहर जिले के अंदर डिस्ट्रीक्ट हॉस्पिटल से एक विकलांग लड़की का इलाज करने से डॉक्टरों ने मना कर दिया। इसलिए मेरा कहना है कि पहले अपने गिरेबान में भी झांक कर देखें कि उत्तर प्रदेश में क्या हो रहा है।

वासिंद्र मिश्र : आखिर वजह क्या है कि वही पुलिस मशीनरी, वही सरकारी कर्मचारी, आपके टाइम में ज्यादा अच्छा काम हो रहा था?

मायावती : नहीं नहीं, वो वजह देखो। जिस पार्टी के अंदर गुंडे, बदमाश, माफिया लोगों का दबदबा हो तो ऐसी पार्टी की सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश में लॉ एंड ऑर्डर कभी भी कामयाब नहीं हो सकता। उत्तर प्रदेश की जो सरकारी मशीनरी है वो चाहती है कि लॉ एंड ऑर्डर बढ़िया हो लेकिन जिस पार्टी की सरकार है वो तो लॉ एंड ऑर्डर चाहती ही नहीं, वो तो गुंडो, बदमाशों और माफिया का राज चाहती है तो फिर अधिकारी क्या करेंगे। 

वासिंद्र मिश्र : बातचीत के लिए धन्यवाद

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पर्यावरण के नाम पर विकास रोकना गलत: खंडूरी
25 मई, 2012 को किया गया इंटरव्यू 

वासिंद्र मिश्र: लगभग दो महीने हो गए,नतीजे आए। कांग्रेस की सरकार भी बनी मतदाताओं ने आपको और कांग्रेस को लगबग बराबर वोट दिया। क्या वजह रही कि आप दो महीने तक नेता विरोधी दल नहीं चुन पाए?

बी सी खंडूरी: ये दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है उत्तराखंड के लिए देश में अच्छा संदेश नहीं गया और हमको 31 सीटें मिलींजो हमारी उस समय की आशा से ज्यादा थी लेकिन मैं समझता हूं कि ये जो जनता ने स्पष्ट बहुमत नहीं दिया ये नुकसानदायक है। मैं व्यक्तिगत रुप से इस विचार का हूं बल्कि मैने चुनाव प्रचार में कहा भी कि आप जिस राष्ट्रीय पार्टी को चुनें उसे पूर्ण बहुमत दें। दुर्भाग्य से उत्तराखंड में ये नही हुआ। 33-35-32-31 ऐसी सीटें आती हैं तो राज्य को नुकसान होता है। इसका मुख्य कारण मेरी नजर में जो 31-32 सीटें मिली हैऔर जो सात लोग दूसरे हैं। तीन स्वतंत्र है ,तीन दूसरी पार्टी के हैं, एक अन्य दल का है और दरअसल देखिये कि उन्हीं के द्वारा सरकार चलाई जा रही है। दबाव बनाया जा रहा है।एक तो ये दुर्भाग्य है कि जनमत स्पष्ट नहीं था। मुझे अच्छा लगता अगर किसी दल को पूर्ण बहुमत मिलता...दूसरा दुर्भाग्य है क कांग्रेस के भीतर इतनी खींचतान चल रही है। जिस प्रकार उनके बड़े नेता, विधायक खुलेआम सरकार के खिलाफ काम कर रहे हैंतो उससे सरकार और अधिकारियों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। 

वासिंद्र मिश्र: आपको नहीं लगता कि उत्तराखंड की इस दुर्दशा के लिए जनता से ज्यादा दोषी कांग्रेस और बीजेपी हैं और चुनाव से पहले जब आपको सत्ता सौंपी गई तो उम्मीद थी कि आपको पूरे अधिकार मिलेंगे। टिकट बंटवारे से लेकर मंत्री के चयन तक लेकिन शायद वह काम नहीं हो पाया। आपको पूरा मैंडेट नहीं मिला पार्टी आलाकमान की तरफ से।

बी सी खंडूरी: ये ठीक है। आपका आंकलन सही है। मैंनै कहा कि मतदाता को मैं दोष नहीं दे रहा। मतदाता को तो मैं बीजेपी और अपनी तरफ से धन्यवाद दे रहा हूं कि जो परिस्थितियां बनी है उसमें मतदाता कुछ भ्रमित था लेकिन उत्तराखंड का मतदाता बीजेपी को स्पष्ट बहुमत देना चाहता था और इसीलिए मैने चुनाव से पहले मीडिया से कहा था कि हमें स्पष्ट बहुमत मिलेगा। मैने फीगर भी 38-40 की दी थी। मैं ये मानता हूं कि हमे 38-40 सीटें मिलतीं। मतदाता का कोई कसूर नहीं हैं। कसूर हमारा अपना है कम से कम दस सीटें ऐसी है जहां भीतरघात हुआ और हम हारे। दूसरे टर्म में मैने तीन माह चौदह दिन कुल काम कियामैने परिवर्तन किया जिसे आप जानते हैं। बीजेपी के अपने आंकलन को भी आप जानते हैं। तीन माह चौदह दिन में बीजेपी या मैंने जो किया जनता हमारी सरकार बनाना चाहती थी। स्पष्ट बहुमत देना चाहती थी और 31 सीटे मिलीं ।अपनी आंतरिक कमजोरी की वजह से। आतंरिक मतभेद की वजह से। दूसरा जो आपने कहा कि मुख्यमंत्री मुझे बनाया गया बावजूद इसके टिकट बंटवारे में अलग अलग ग्रुप के प्रेशर रहे मेंरी इच्छा से भी नहीं हुआ फिर चुनाव के दौरान बहुत मतभिन्नता रही और ये सबको पता है जिस तरह से भितरघात हुआ।


वासिंद्र मिश्र: आपके विधायक ने इस्तीफा दिया है किरन मंडल नेऔर सुनने में आ रहा हैकि चार पांच और विधायक हैं जो कांग्रेस के संपर्क में हैं तो ये गुटबाजी का नतीजा है या धन का लालच है। चर्चा है कि आपके जिस विधायक ने इस्तीफा दिया है उसे पांच करोड़ रुपये दिये गए।


बी सी खंडूरी: हां वो मंडल हैं जिसने इस्तीफा दिया है बहुत सारी बाते चल रही है मै उस पर कहना नहीं चाहता लेकिन पहली बात कि कांग्रेस ने ये जिस तरह का खेल खेला अच्छा नहीं है ये उनके लिए भी अच्छा नहीं है हमारे लिए भी अच्छा नहीं है ।और ये राजनीति के लए भी अच्छा नहीं है वो हमको भी दोष देते हैं कि हमने ऐसा किया लेकिन उसका विस्तार से हमने जवाब दिया है कि हमने इस तरह किसी को चार पांच दिन दिन गुमराह करके, उठा कर के जैसे गैंगस्टर करते हैं। सात आठ दिन तक उसका पता नहीं चलाऔर अब वो इस्तीफा दे रहा है और आप देखिये जिन बातों के लिए वो इस्तीफा दे रहा है वो हो नहीं सकतीं। तो ये राजनीति के लिए ठीक नहीं। आयाराम गयाराम की राजनीति वैसे ही बदनाम है लेकिन अगर आप इस तरह की हरकत करेंगे तो गलत है। हमारे यहां पिछली बार टीपीएस रावत आए। वो गायब नहीं हुए थे। सबके सामने थे उन्होंने अपनी परिस्थिति के चलते पार्टी छोड़ी वो पांच छ महीने से कांग्रेस से असंतुष्ट थे लेकिन उनको किसी ने गुमराह नहीं किया था। दूसरी बात जो आप कह रहे हैं कि कांग्रेस को पछताना पड़ेगा। ये ना कांग्रेस के लिए ठीक है ना ही देश के लिए। वोतो अच्छा किया अटल जी ने जब केन्द्र में एनडीए की सरकार थी कि अब उत्तराखंड में 12 ही मंत्री बन सकते हैं। अगर ये खुला रहता तो 20-25 मंत्री बन जाते अब तक। तो इस तरह की व्यव्था करनी चाहिए। बड़ी पार्टी को जिम्मेदारी महसूस करनी चाहिए कि अपनी पार्टी को जिताने के अलावा देश के प्रति भी कुछ कर्तव्य है। वो कर्तव्य करना चाहिए। दूसरी बात ये कि कांग्रेस के संपकर्क में चार पांच लोग हैं। ये गलत है। ऐसा नहीं है। कांग्रेस की शैली ऐसी ही है वो खूब दुष्प्रचार कर रहे हैं। चार आ गए,छ आ गए। अब विधायकों ने खुले आम कह दिया कि ऐसी कोई बात नहीं है। हम छोड़ने वाले नहीं है औऱ कांग्रेस हमें गुमराह कर रही है। बदनाम कर रही है। अब ये दुर्भाग्य है कि अगर कोई जाना चाहता है तो उसे कोई रोक नहीं सकता। लेकिन आप गुमराह करें। पैसे का लालच दें। अच्छा नहीं है। राजनीति की ये बहुत निम्न कोटि की छवि है।

वासिंद्र मिश्र: खंडूरी जी क्या वजह है कि छोटे राज्यों को बनाने का जो मकसद तो वो पीछे छूट गया और सत्ता और भ्रष्टाचार का गठजोड़ अंत में हावी हो गया। सरकार कांग्रेस की हो या बीजी की भ्रष्टाचार और इस तरह की चीजों से पीछा नहीं छूट रहा है।


बी सी खंडूरी: ऐसा है कि इसकी वजह तो बहुत सारी हो सकती है लेकिन मुख्य दोष राजनीतिज्ञों का है पार्टियों का है। इस तरह का वातावरण बनाया गया। छोटे प्रदेश है जिनकी विधानसभा छोटी है हमारे यहां कुल सत्तर विधायक है ऐसा ही झारखंड में है। गोवा में भी ऐसा हो जाता है। आदमी इधर से उधर गया। तो सरकार बदल जाती है और राजनीतिज्ञ लोगों ने दुर्भाग्य से खासकर बड़ी पार्टियां ज्यादा जिम्मेदार हैं जिन्होंने इसको एक हथियार बना लिया है कि अगर आप हमारी व्यवस्था पलटने के लिए कितने आदमी हटा सकते हैं तो बजाय जनता को खुश करके जनता के हित के काम करके। विकास के काम करके उनके वोट लें। जीते कोई भी उसको बस अपनी तरफ खींच ले तो रुलिंग पार्टी अस्थिर हो जाएगी। किसी तरह से जोड़ तोड़ कर के जिसके पास बहुमत है उसे अस्थिर कर दे ये गलत है। वो तो अटल जी का धन्यवाद है कम से कम एक तिहाई के बजाय दो तिहाई का परिवर्तन किया वर्ना रोज लोग पार्टियां बदलते और उन्हें इस्तीफा भी नहीं देना पड़ता। मैं समझता हूं कि अब समय आ गया है कि उन प्रदेशों में जहां 100 के अंदर विधायक हैं उसमें कुछ निर्णय करना पड़ेगा। उसमें कोई अगर अपनी पार्टी बदलता है तो उसके लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि वो ना तो पैसे ले पाए और इस्तीफा देने के बाद भी बच ना सके। ऐसे व्यक्त को लंबे समय के लिए डिस्क्वालिफाई करना चाहिए। कुछ ना कुछ तरीका निकालना पड़ेगा नहीं तो ये बीमारी खत्म होने वाली नहीं। क्योंकि आम विधायक नहीं बल्कि राजनीतिक पार्टियां लालच देकर अपनी तरफ मिलाती हैं।

वासिंद्र मिश्र: यानी जो मकसद था कि छोटे राज्यों में विकास होगा एकतरफा विकास के जो आरोप लगते रहे अब तक छोटे राज्य नहीं बने थे वो मकसद कहीं पीछे छूट गया।


बी सी खंडूरी: वो इसलिये नहीं छूटा कि छोटे राज्यों को पीछे छोड़े ,मकसद इसलिए पीछे छूटा है क्योंकि छोटे प्रदेशो में ध्यान देने के बदले और विकास पर ध्यान देने के बजाय बल्कि जहां लोगों ने देखा कि विकास होता है। मुझे क्षमा करना लेकिन तीन माह 14 दिन के अंदर हमारी पार्टी को 31 सीटें जनता ने दी हैं। काम पर दिया है, इस आधार पर दिया है कि अगले पांच साल हम कैसी सत्ता चाहते हैं। अगर हमारी राजनीतिक पार्टियां ईमानदारी से काम करें तो छोटे प्रदेशों में बहुत संभावनाएं है और खासकर उत्तराखंड, झारखंड जहां इतने प्राकृतिक संसाधन हैं। तिवारी जी बड़े और अनुभवी नेता थे लेकिन उनके अंडर में भी पांच साल एक दिन भी स्थिरता नहीं रही। उनकी अपनी पार्टी के लोगों ने जैसा वातावरण बनाया सब लोग जाते हैं तो राजनीतिक अस्थिरता से शुरु से रही। हमारी पार्टी की सरकार बनी हमें पहले 34 सीटें मिलीं फिर 35 हुईं यूकेडी के साथ मिलकर 37-38 हो गए लेकिन अस्थिरता चलती रही और उसके नतीजे क्या हुए ज्यादा मैं बता भी नहीं सकता लेकिन सब जानते हैं कि जब तक कानून से व्यवस्था नहीं होगी। जब तक पार्टी काबू नहीं करेगी। संवैधानिक व्यवस्था नहीं होगी। ये छोटे प्रदेशों का दुर्भाग्य रहेगा। लेकिन मैं इस बात से पूर्ण रुप से सहमत नहीं हूं कि छोटे राज्य कोई समस्या है छोटे राज्य आप देखिए 13 जिले हैं। डीएम का पता है, मुख्यमंत्री, मंत्री चोटी छोटी जगह, गांव गांव तक पहुंच सकते हैं। सब बाते पता हैं। गांव में क्या होना है पता है। इसलिए प्रशासनिक दृष्टिकोण से छोटे राज्य सफल हो सकते हैं। अच्छे हो सकते हैं लेकिन जब तक राजनीति का चरित्र नहीं बदलेगा तब तक कुछ नहीं हो सकता।


वासिंद्र मिश्र: ये जो मौजूदा सरकार है विजय जी की उन्होने विकास की अपनी कुछ प्राथमिकताएं बनाईं हैं। जनता को भी बताया है। आप भी सरकार में थे आपकी भी प्राथमिकताएं थी। आपको कुछ अंतर लग रहा है।


बी सी खंडूरी: बिल्कुल, बहुत अंतर है। आप उनका चार्टर देखिए। हमारा चार्टर देखिए। जब मैं 2007 में मुख्यमंत्री बना था तो हमने ऐसी चीजें उत्तराखंड के अंदर खत्म की थीं। भ्रष्टाचार बहुत बड़ा मुद्दा था। विकास पलायन बहुत बड़ा मुद्दा था। आप उस समय के जितने कार्यक्रम देखेंगे हांलाकि अस्थिरता उस समय भी थी लेकिन मैंने सोचा था कि भ्रष्टाचार को खत्म करना है। भारत में कोई ऐसा कानून नहीं है जैसे हम भर्ती प्रक्रिया में लाए। उस समय पटवारी भर्ती घोटाला हुआ था। कांस्टेबल भर्ती घोटाले में तो सीबीआई की रेड तक हुई थी। कई बड़े लोग उसमें फंसे थे। हमने शुरु के एक महीने में ही ठीक करने की ठानी। महिलाओं विकलांगो के लिए योजना लाए। क मैसेज जा रहा था कि हम विकगास करना चाहते हैं आज कांग्रेस को देखिये क्या हो रहा है। हम लोकायुक्त बिल लाए। भारत का इकलौता ऐसा बिल है वो कहते हैं हम इसे बदल देंगे। ट्रांसफर पालिसी उत्तराखंड से ज्यादा ट्रांसपेरेंट नहीं है कहीं। मुक्यमंत्री भी सिफारिश नहीं कर सकता। भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं है। सब वेबसाइट पर है। कहां कौन ट्रांसफर होगा। सबकी राय से उसे तैयार किया था इन्होने आते ही उसको हटा दिया। क्या मतलब है क्या संदेश दे रहे हैं आप।

वासिंद्र मिश्र: आपको लग रहा है कि वो भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।

बी सी खंडूरी: बिल्कुल, मुझे कोई शंका नहीं है। जिस तरह से दो महीने में काम किए है। बीजेपी ने जो जनहित के काम किए थे उसे बदल रहे हैं। सिविल चार्टर हम लाए थे अटल खाद्यान योनजा हमने चलाई थी, ब्रष्टाचार खत्म करने के लिए कई काम किए। इन्होने आते ही वो सब बदल दिया जिससे भ्रष्टाचार बढ़े, सिफारिश बढे। मैने खुद मुख्यमंत्री से मीडिया के जरिये पूछा कि आप ने योजनाओं को निरस्त किया इससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा कि घटेगा। सिफारिश कम होगी या बढ़ेगी। कर्मचारी जो 10-10 साल से अति दुर्गम में पड़े हैं वो वहां से हितने नहीं है और जो कर्मचारी 4-5 फीसदी ही हैं। आसान जगहों पर बैठे हैं। कई साल से जो जहां जमे हुए है। आप उन्हें बढ़ावा दे रहे हैं। आप भ्रष्टाचारियों, दादागिरी करने वालों को बढ़ावा दे रहे हैं। तो संदेश तो बिल्कुल साफ है। मजबूरी दबाव जो भी हो उनका काम है भ्रष्टाचार और सिफारिश बढ़ाना। न्याय ना करना।


वासिंद्र मिश्र: आप के समय में तो आपकी पार्टी के लोग भी आपकी इस शैली से दुखी थे। हा जाता था कि जनरल साहब सिविल एडमिनिस्ट्रेशन भी आर्मी रुल से चला रहे है।

बी सी खंडूरी: ऐसा है कि मैने सीएम और मंत्रिरयों सबको लोकायुक्त में शामिल किया लेकिन मुझे कोई शंका नहीं। भ्रती वाला ही प्रकरण देखिये लोगों ने शुरु में कुछ परेशानी बताई लेकिन बाद में वो कोई भी हो राजनीतिक आदमी हो कार्यकर्ता हो। जनता हो सब खुश हैं कि हमारे पास किसी को सिफारिश के लिए नहीं आना पड़ता। मैं आपको बताऊं ट्रांसफर बिल के बाद मैं शिक्षा बिल लाया। संगठनों ने कहा इसे लागू करिए। ये सही है कि थोड़े समय कष्ट होता है। अब मैं मुख्यमंत्री बनूं। दो चार अपने को को एडजस्ट करुं। तो मैने भी अपने ऊपर भी कंट्रोल किया। आम जनता में इसके लिए सहानुभूति है। खुसशई है। पार्टी खुश है लोग जानते हैं कि अच्छा हो रहा है। ईमानदारी से थोडी देर कष्ट होता है लेकिन लंबे समय में उसका फायदा जनता को होता है।


वासिंद्र मिश्र: उत्तराखंड में पर्यावरण बचाने के नाम पर जो रानीति होती रही है उसमें आपके दल के लोग भी शामिल रहे है। आपको भी कई मुसीबतों का सामना करना पड़ा जब आप उत्तराखंड के मुख्यंत्री थे।आप इसे कितना उचित मानते हैं कि उत्तराखंड के विकास को पर्यावरण के बहाने रोक दिया जाता है। कई योजनाए हजारों करोड़ खर्च होने के बाद भी रुकी पड़ी है। क्या ये उचित बहे।


बी सी खंडूरी: मैं फौजी रहा हूं लेकिन 1991 में जब मैं सांसद बना तब भी मेरी पर्यावरण में काफी रुचि थी और मैंने लोकसभा में कई विषय रखे। मैं पर्यावरण प्रेमी हूं। लेकिन जिस प्रकार पर्यावरण के नाम पर विकास रोका जा रहा है, पर्यावरण को हथियार बनाकर लोगों से अन्याय किया जा रहा है वो ठीक नहीं है। ना तो पर्यावरण के लिए और ना ही लोगों के लिए। उत्तराखंड में 60 फीसदी तो जंगल हैं फिर नदियां हैं तो बाकी जगह कम बचती है। उत्तराखंड में बहुत से विकास के काम नहीं हुए हैं। या विलंब हुआ है पर्यावरण की वजह से। और जब आम आदमी कहता है कि पेड़ों की वजह से हमारी जिंदगी खराब हो रही है। हमारी नदियों से बिजली नहीं मिल रही तो जो उत्तराखंड के लोगों में प्रकृति के प्रति श्रद्धा थी जो सम्मान ता वो कम हो गया। ये पर्यावरण वाले इस तरह की जो हरकत कर रहे हैं ये ठीक नहीं है उन्हें समझना होगा। मैं ये इसलिए कह रहा हं क्योंकि मैं हमेशा पर्यावरण के पक्ष में रहा हूं। पेड़ों के पक्ष में रहा हूं। मैने अपने जीवन मेंलाखों की संख्या में पेड़ लगाए हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए मैने इको टास्क फोर्स की तीन चार कंपनियां उत्तराखंड में खोलीं। जिनको प्रदेश में पैसा दिया जा रहा है और उन्होंने लाखों पेड़ लगाए। लेकिन पेड़ लगाना एक बात है और पेड़ों की वजह से विकास रोकना अलग बात। उत्तराखंड में ये बहुत ज्यादा हो गया। इसलिए लोग पेड़ों के विरोधी बन गए। उत्तराखंड में जहां गौरा देवी ने एक अनपढ़ महिला ने चिपको आंदोलन चलाया। वहां के लोग भी आज पर्यावरण विरोधी हो गए। उत्तराखंड में विकास रोकना गलत है। हमारे पास सड़कें बिजली और कई अन्य समस्याएं हैं, गरीबी है, विकास होना है, तो पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए। उसे बिना क्षति पहुंचाए विकास साथ साथ चलना चाहिए। ये दोनों बातें एक साथ होनी चाहिए। इसी तरह हमारी नदियां पवित्र हैं। पानी से अगर बिजली निकालेगें तो उसका कोई गुण खराब नहीं होता। इसलिए जितनी हमारी नदियां है खासकर गंगा उनमें दो चीजें हैं। एक है पवित्रता और दूसरी गुणवत्ता। पवित्रता से बिजली का कोई संबंध नहीं है। दुनिया भर की गंदगी जो हम गंगा में फेंक रहे हैं नदियां उससे गंदी हो रही हैं। राजीव गांधी ने गंगा एक्शन प्लान चलाया कुछ नहीं हुआ। हम लोग भी चलाते रहे लेकिन गोमुख से गंगासागर तक कुछ नहीं हो रहा है। तो गंभीरता से पहले गंगा को शुद्ध कीजिए लेकिन बिजली का जहां तक सवाल है तो जो पानी में गुण हैं उसकी वैज्ञानिक जांच करा लो। अगर डैम में पानी रोकने से पानी के गुण खराब होते हैं तो डैम मत बनाओ। अगर टनल में पानी जाने से उसके गुण खराब होते है। तो टनल मत बनाओ। वैज्ञानिक परीक्षण से गुण जांचना संभव है इसलिए बिजली बनाने में कोई नुकसान नहीं है। अगर धार्मिक नजरिये से देखे तो हम गाय को माता मानते हैं तो क्या हम उसका दूध नहीं पीते। पर्यावरण के लोगों को जनहित की बात सोचनी होगी।

वासिंद्र मिश्र
: आप के कई संगठन आंदोलन चला रहे थे कि गंगा पर बांध नहीं बनने देंगे तो तब आपने क्यों बात नहीं रखी।

बी सी खंडूरी: मैने उनसे भी बात की। इन चीजों को सिर्फ भावनात्मक ढंग से देखें और लोकहित से ना देखें तो गलत है। मेरे बचपन में जंगल में आग लगती थी तो फॉरेस्ट डिपार्टमेंट कुछ नहीं करता था। उनके पास संसाधन ही नहीं था, लोग जाते थे, उन पेड़ों और जंगलों को बचाने। 1994-1995 में उत्तराखंड के जंगलों में भयंकर आग लगी। मैं गौरादेवी के गांव गया वहां लोगों से पूछा कि आग लगी है आप क्यों नहीं जा रहे तो वो बोले कि ये फारेस्ट डिपार्टमेंट का काम है। जहां लोग पेड़ बचाने के लिए उनसे चिपक कर गर्दन कटाने को तैयार थे वहां लोग कह रहे हैं कि सरकारी जमीन है। फारेस्ट वाले जानें। आप अगर गांव की महिला को घास नहीं लाने देंगे। जंगलों से सूखी लकड़ियां नहीं बीनने देंगे, औषधि नहीं लाने देंगे तो लोग जंगल के दुश्न हो जायेगें। हमने भी दो प्रोजेक्ट रोके थे। काम शुरु होने वाला था। केन्द्र से राय मांगी थी लेकिन उन्होने मदद नहीं की। मैं अब भी इस विचार का हूं कि मनुष्य की सेवा भगवान की पूजा है। ना ही पर्यावरण को नुकसान हो ना प्राणी का नुकसान हो। ऐसा रास्ता निकालना चाहिए।
 
वासिंद्र मिश्र: खंडूरी जी बातचीत के लिए धन्यवाद।
 

1 टिप्पणी:

  1. आपके माध्यम से इन विशिष्ट जनों के विचारों को जानने का अवसर मिल पा रहा हैं।। धन्यवाद

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