गुरुवार, 25 नवंबर 2021

operation modi-mamta va congress

क्या ममता दीदी ने कांग्रेस मुक्त भारत बनाने की चुनौती स्वीकार कर ली है ?या यूँ कहें कि मोदी जी अधूरे कार्यों को पूरा करने की ज़िम्मेदारी अब ममता जी के कंधों पर है ।कांग्रेस मुक्त भारत का सपना तो मोदी जी ने देखा था ।लेकिन कांग्रेस को तोड़ने में दीदी जुटी हैं।
क्या दीदी और मोदी जी संयुक्त रूप से कांग्रेस को भारतीय राजनीति में अप्रासंगिक बनाने का समझौता किया है ? दीदी तो पहले भी भाजपा के साथ अटल जी की सरकार में मंत्री रह चुकी हैं।
भाजपा दीदी की natural ally है ।north east दोनो की प्रतिद्वंदिता कांग्रेस से है । शायद यही कारण है की दोनो मिलकर कांग्रेस को निपटाने में लगे हैं।
मसलन दिल्ली में केजरीवाल और भाजपा , उत्तराखंड पंजाब गोवा में भी केजरीवाल भाजपा ममता -अमरिंदर मिलकर  कांग्रेस के ख़िलाफ़ मोर्चा खोले हैं ।
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी , बहुजन समाज पार्टी ,बिहार में लालू और नीतीश कभी साथ रहकर और कभी एक दूसरे के विरोध में रहकर कांग्रेस का ही नुक़सान करते रहे हैं।दिलचस्प आँकड़े तो उ.प्र. के रहे हैं।
समाजवादी पार्टी और भाजपा दोनो एक दूसरे को राजनैतिक ताक़त देते रहे हैं ।
उत्तर भारत में operation lotus aur operation mamta didi पूरी तरह कांग्रेस के ख़िलाफ़ हैं।ऐसा लगता है की alliance ki politics का सर्वाधिक नुक़सान कांग्रेस का हुआ है ।
पार्टी को एक बार फिर गांधी -नेहरू की विचार धारा पर चल कर अपनी राजनैतिक ताक़त बडानी चाहिए ।लेकिन जल्दीबाज़ी में पार्टी का वाम पंथीकरण committed party workers aur voters को पार्टी से दूर कर सकता है ।
इतिहास गवाह है । हर पार्टी और उसके कार्य कर्ताओं का अपना मिज़ाज होता है ।ज़्यादा radical experiments लाभकारी नही होता ।
जनता पार्टी के विघटन और सत्ता की दौड़ में लगातार पिछड़ते रहने पर अटल जी ने भी gandhian socialism के रास्ते पर भाजपा को ले जाने की विफल कोशिस की थी ।लेकिन प्रयोग निराशाजनक रहा ।और बाद में आडवाणी जी के नेतृत्व में पार्टी अपने मूल सिद्धांत संघ और जनसंघ , पर लौट कर सत्ता के शीर्ष तक पहुचने में कामयाब रही ।

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