सोमवार, 1 नवंबर 2021

Jinnah muhammad ali

मुहम्मद अली जिन्ना ।
आडवाणी जी के जिन्ना या अखिलेश यादव के जिन्ना।
पहले आडवाणी जी ने जिन्ना का ज़िक्र करके अपना राजनैतिक career चौपट कर लिया था ।
अब अखिलेश यादव ने जिन्ना की चर्चा की है ।
भाजपा ने अखिलेश यादव के जिन्ना वाले बयान की तीखी निंदा की है ।
उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले हे । देखना है इसका सर्वाधिक राजनैतिक नफ़ा नूक्शान किसको होता है ।
फ़िलहाल अभी तो भाजपा का पलड़ा भारी दिखायी दे रहा है ।देश और प्रदेश में राजनैतिक मुद्दों की कमी नहि है । 
पता नहि क्यों अखिलेश यादव पॉज़िटिव और सीरीयस मुद्दों के बजाय जिन्ना और योगी जी के मोबाइल और कम्प्यूटर ज्ञान पर सवाल उठा रहे हैं ।
दूसरी तरफ़ भाजपा भी अपनी सरकार की उपलब्धियों के बजाय एक बार फिर नमाज़ और मुसलमान को ही अपना  चुनावी मुद्दा बनाने लगी है ।
पिछले चुनावों में भी क़ब्रिस्तान और शमसान मुद्दा बना था ।और इस गेम में भाजपा ने अपने विरोधियों को शिकस्त देते हुए उत्तर प्रदेश में 2017 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनायी थी ।
समाजवादी और भाजपा एक दूसरे के पूरक माने जाते रहे हैं।राजनीति में ये एक दूसरे से शक्ति हाशिल करते रहें हैं।
आरोप तो ये भी है की उत्तर भारत में भाजपा की राजनैतिक ताक़त बड़ाने में इनकी महत्व पूर्ण भूमिका रही है।जाति और धर्म के आधार पर सामाजिक और राजनैतिक ध्रुवीकरण का सर्वाधिक नुक़सान कांग्रिस और वामपंथी दलों का हुआ ।अखिलेश विरोधी नेता जिन्ना से जुड़े उनके वयान को भी इसी रूप में देख रहे हैं।

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