शुक्रवार, 22 अक्तूबर 2021

an era of copy-paste

फिर भी दिल है हिंदुस्तानी 
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लम्बा वक्त और संघर्ष ज़रूर हुआ लेकिन भारतीय स्वयं सेवक संघ ने अपने आनुवंशिक संघटनो के ज़रिए  भारतीय राजनीति की दशा और दिशा बदल दिया।इसकी बानगी मौजूदा वक्त में प्रयोग होने वाली शब्दावली और narratives में देखने को मिल रही है ।
आज के राजनैतिक दलों के slogans और कार्यक्रमों में इसकी झलक साफ़ तौर पर दिखायी दे रही है ।
शुरुआत केजरीवाल से करते है । उनकी पार्टी जनाधार बड़ाने के लिए तिरंगा यात्रा निकाल रही है ।उनकी सरकार अपने स्कूलों में छात्रा छात्राओं को देश भक्ति के syllabus पड़ा रही है ।
कांग्रेस पार्टी न्याय यात्रा प्रतिज्ञा यात्रा  निकाल रही है ।राहुल और प्रियंका ज़्यादातर 
भाषण हिन्दी में देते हैं।हाल के वर्षों में पाश्चात्य संस्कृति से ओतप्रोत कांग्रेस पार्टी एक बार फिर गांधी भारतीयता के रास्ते पर चलने की कोशिस कर रही है ।
समाजवादी पार्टी के कार्यक्रमों में भी संघर्ष के बजाय समावेशी संस्कृति की छाप है ।देश की बाक़ी पार्टियों की पहचान तो पहले से ही composit culture की रही है ।
कार्य संस्कृति के इस बदलते दौर में भाजपा भी अच्छूती नहि है ।भाजपा सरकार की ज़्यादातर योजनाओं के नाम अंग्रेज़ी भाषा से शुरू होते हैं।
मसलन - make in india ,start up india , stand up india , vocal for local ,new india etc 
समय के साथ बदलाव अछी बात है ।संघ परिवार ने भी अपने पोशाक में बदलाव किया है ।बदलाव प्रकृति का नियम है ।शास्वत सत्य है ।
इसका एहसास जितना जल्दी हो अच्छा होता है ।लेकिन बदलाव और नक़ल की अंधी दौड़ में अपनी मौलिकता बचाए रखनी चाहिए ।
समायोजन संयोजन और सर्व ग्राही आवस्यक है ।
इस संदर्भ में राज कपूर की मशहूर फ़िल्म श्री 420 का एक गाने की कुछ पंक्तिया सामयिक लगती हैं….
मेरा जूता है जापानी
पतलून इंग्लिस्तनी 
सर पर लाल टोपी रूसी 
फिर भी दिल है हिंदुस्तानी ।

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