शनिवार, 25 सितंबर 2021

Bjp -congress

देश के दोनो राष्ट्रीय दल अपने परम्परागत वोट बैंक को छोड़ कर नए मतदाताओं को अपने पाले में लाने में जुटे हैं।
हा बात कर रहे हैं कोंग्रेस और भाजपा की ।कोंग्रेस अपने खोए दलित वोट बैंक को वापस लाना चाहती है और भाजपा obc vote bank को ।
ब्राह्मण मुस्लिम और दलित कोंग्रेस के परम्परागत वोट बैंक रहे हैं।बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद देश के मुसलमान कोंग्रेस से नाराज़ हो गए ।मायावती और कांशी राम ने उत्तर भारत के दलितों को कोंग्रेस से अलग कर दिया ।इसके साथ ही पंडित अटल बिहारी जी के वजह से देश के ज़्यादातर ब्राह्मण भी भाजपा में चले गए ।
वोट बैंक के विमुख होने की सबसे बड़ी वजह कोंग्रेस नेतृत्व की कार्य शैली भी रही है ।कोंग्रेस नेतृत्व अपनी जमा राजनैतिक पूजी बचाए रखने के बजाय नए वोट बैंक जुटाने में लगा रहा ।
नेतृत्व को शायद इतिहास की जानकारी नहि है ।देश का पिछड़ा वर्ग आज़ादी के बाद से ही कोंग्रेस विरोधी रहा है ।डॉक्टर लोहिया ने पिछड़ों को लामबंद करके कोंग्रेस को राजनैतिक चुनौती दी थी ।बाद में मंडल पॉलिटिक्स ने कोंग्रेस की जमा पूजी पर ही क़ब्ज़ा कर लिया ।
अब कोंग्रेस पार्टी एक बार फिर umbrella politics के उसी दौर को वापस लाना चाहती है ।लेकिन दिशा विहीन ,नेतृत्व इस राजनैतिक लक्च्च्य को हासिल करने में असहाय लग रहा है ।पंजाब गुजरात उत्तर प्रदेश और राजस्थान में प्रयोग ज़रूर किए जा रहे है ।
ठीक इसी तरह भाजपा भी प्रयोग में जुटी  है ।ब्राह्मण बनिया और शहरी इलाक़े की पार्टी अपना तेवर और कलेवर बदल कर make over में लगी है ।अपने committed vote bank के अलावा नए वोट बैंक की तलाश में पार्टी नित नए प्रयोग में व्यस्त है ।

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