शनिवार, 28 अगस्त 2021

Afghanistan crisis and Taliban

देश में इन दिनों दो मुद्दों पर बहस छिड़ी हुई है
पहला है हमारे पड़ोसी देश अफगानिस्तान में तालिबान शासन। 
दूसरा भारत में सरकार द्वारा सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने या निजीकरण का।
इन दोनों मुद्दों पर देखिए खास बात चीत 
भारत सरकार के पूर्व सचिव विजय शंकर पाण्डेय और वरिष्ठ पत्रकार वासिंद्र मिश्र के बीच

‘‘भारत को तालिबानियों से डरने या वार्ता की जरूरत नहींः विजय शंकर पाण्डेय
भारत को अपनी सेनाओं की ताकत बढ़ाने पर देना चाहिए ध्यानः विजय शंकर पाण्डेय
हमें अपने देश, अपने लोग और कश्मीर की सुरक्षा अपने दम पर करनी चाहिएः पूर्व सचिव
भारत को अपनी वैश्विक ताकत दिखानी चाहिएः पूर्व सचिव
कमजोर देशों को हमेशा अन्याय और अत्याचार सहना पड़ाः विजय शंकर पाण्डेय
‘‘वास्तव में कोई भी देश किसी दूसरे देश का मित्र नहीं होता’’ 
‘‘इंटरनेशनल लेवल पर सभी देश अपने हितों को देते हैं प्राथमिकता’’
‘‘अमेरिका का अफगानिस्तान छोड़ने का तरीका सही नहीं था’’
‘‘अफगानिस्तान संकट से भारत नहीं रह सकता अछूता’’
’’भारत का अफगानिस्तान में करीब 250 बिलियन डालर का निवेश’’
’’दुर्भाग्य से भारत अपनी शक्ति दिखाने में रहा पीछे’’
’’दुनिया में अनुरोध से कभी कुछ नहीं हुआ’’
’’सरकार की रक्षात्मक नीति से भारत को आंखें दिखा रहे पड़ोसी देश’’
’’पाकिस्तान से वार्ता नहीं तो उसके पिट्ठू तालिबान से वार्ता क्यों’’
’’किसी आतंकी संगठन के साथ को समझौता भारत की नीति के खिलाफ’’ 
’’पाकिस्तान ने ही तालिबान को जन्म दिया और पालन पोषण किया’’ 
’’अपने दम पर पाकिस्तानियों और तालिबानियों का सामना करे भारत’’
’’सार्वजनिक संपत्तियों को बेचना या निजीकरण गलत नहीं’’
’’संपत्तियों को बेचने या निजीकरण के नाम पर होने वाली लूट गलत’’
‘’भारत में संपत्तियों को बेचने या निजीकरण में हमेशा की गयी लूट‘’
‘’सीमेंट मिल, चीनी मिल, बीएसएनएल और शिवाय होटल के प्राइवेटाइजेशन में हुई लूट‘’
‘’केन्द्र सरकार के पास पैसों की कोई कमी नहीं‘’
‘’चीन की आर्थिक प्रगति से सबक क्यों नहीं लेता भारत‘’
‘’सरकारी नीतियों का अनुचित लाभ उठा रहे कुछ औद्योगिक घराने‘’ 
‘’कौड़ी के दाम पर जनता की संपत्ति बेचने वालों के खिलाफ हो कार्रवाई‘’
‘’परियोजनाओं में लागत से दो से तीन गुना ज्यादा का बनता है बजट‘’
‘’सरकारी कामों व परियोजनाओं में चोरी, लूट रोकने से सुधरेंगे हालात‘’
‘’भ्रष्टाचार ने हमारे देश की जड़ें साफ कर कर दी हैं‘’
‘’उत्तर प्रदेश में सभी राजनीतिक दलों को बारी-बारी से मिला सत्ता‘’
‘’जनता की समस्याओं के लिए सब एक-दूसरे पर फोड़ रहे ठीकरा‘’
‘’लूट-खसोट कर खूब बनाए अपने बैंक-बैलेंस, रिपोर्ट कार्ड रहा जीरो‘’
‘’काले धन में पूरी तरह डूब चुकी है भारतीय राजनीति‘’

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