रविवार, 27 जून 2021

Loktantra ki loot

लोकतंत्र की लूट तो हमेशा होती रही है ।कभी धन बल तो कभी जन बल ।कभी जज़्बाती मुद्दों को उछाल कर तो कभी छेत्रियता को बडावा देकर।
इसीलिए तो कहा गया है कि अपरिपक्व लोकतंत के ख़तरे बहुत हैं।

इस समय उत्तर प्रदेश के ज़िला पंचायत  चुनावों की चर्चा कुछ ज़्यादा है ।
चुनावों में कई तरह के आरोप लग रहे हैं ।सरकार और सत्ता धारी पार्टी पर ग़लत तरीक़े से। चुनाव जीतने के आरोप भी हैं।
इस तरह के आरोप तो पहले भी लगते थे ।यह अलग बात है की तब आज का सत्ता धारी दल विपछ में हुआ करता था।
एक बार तो मायावती और मुलायम सिंह के बीच टकराव का कारण ही ज़िला पंचायत चुनाव था ।उत्तर प्रदेश में पहली बार मुलायम और मायावती -कांशीराम की पार्टी के बीच तालमेल से सरकार चल रही थी ।
लखनऊ के ज़िला पंचायत चुनाव में बसपा अपना प्रत्यासी नही उतार पायी । उसके प्रत्यासी को बताया जाता है की जबरन रोक दिया गया था परचा भरने से ।
दोनो दलों के नेताओं में इस मुद्दे को लेकर कई दिनो तक तनाव बना रहा । बयानबाज़ी होती रही ।एक दूसरे के ख़िलाफ़ ।
बग़ैर राजनैतिक जागरूकता और ईमानदारी के परिपक्व लोकतंत्र सम्भव नही है ।इसके लिए जनता को ईमानदार होना पड़ेगा ।जब तक ऐसा नहि होगा तब तक जनता और लोकतंत्र को धन जन और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के दम पर लूटा जाता रहेगा ।

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