शुक्रवार, 11 जून 2021

Defection

वर्ष 2017 विधान सभा चुनाव वाला राजनैतिक समीकरण बनाने की कोशिश में जुटी है भाजपा ।
उत्तर प्रदेश में सरकार बनने के बाद से भाजपा के कुछ सहयोगी दलों के नेताओ में नाराज़गी रही है ।
अब पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उस नाराज़गी को कम करने की मुहिम में लगा है ।
हिंदी में एक बहुत ही मशहूर कहावत है 
कहीं का ईंट 
कहीं का रोड़ा 
भानुमति का 
कुनबा जोड़ा 
आज कल भारत की राजनीति पूरी तरह सिद्धांत विहीन रास्ते पर है 
सत्ता हर क़ीमत के सिद्धांत पर चल चुकी पार्टियाँ  कुछ दिन के लिए भले ही सत्ता में आ रही हैं लेकिन उनकी मौजूदगी का गुड़ातमक असर शासन प्रशासन पर दिखायी नहि देता ।
शायद यही कारण है की देश और समाज का भला करने में ज़्यादातर पार्टियों की सरकारें विफल रही हैं ।
एक चुनाव ख़त्म होते ही दूसरे चुनावों की तैयारी हमारे देश के नेताओं को दीर्घ क़ालीन दूरदर्शी नीतियों को बनाने में बाधक साबित होबरहे हैं ।
चुनावों को जीतने के मक़सद से जनता से लेकर अपने राजनैतिक सहयोगियों से किए गए झूठे वायदे सत्ता में आने के बाद गम्भीर चुनौती पैदा करते हैं।
आज की तारीख़ में देश के किसी भी नेता के पास वह नैतिक साहस नहि है जो अवाम के बीच में जाकर मूल भूत मुद्दों के आधार पर जनादेश हासिल करने की कोशिस करे ।
यही कारण है की चुनाव ख़त्म होते ही दलों के अंदर सिर फूटौल शुरू हो जाता है ।
यहाँ पर गोस्वामी तुलसी दास जी द्वारा रचित चौपायी का उलेख करना मुनासिब लगता है 
सुर नर मुनि जन की यही रीति 
स्वार्थ लागी करें सब प्रीति 
इसलिए दल बदल , आया राम गया राम , और अब कपिल सिब्बल के मुताबिक़ परसादम की संस्कृति को लेकर अब कोई आश्चर्य नहि हो रहा है ।
दल बदलूँ नेताओ ने साफ़ कर दिया है की राजनीति अब सेवा का नहि रोज़गार का माध्यम है ।

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