रविवार, 20 जून 2021

Bjp

उत्तर प्रदेश भाजपा में क्या सही में गुट वाजी है? या आनेवाले विधान सभा चुनावों के मद्देनज़र पार्टी नेताओं को परस्पर विरोधी बयान बाज़ी करने की छूट दे दी गयी है। 
पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की रणनीति 2017 की तरह राजनैतिक सामाजिक छेत्रिय समीकरण को मज़बूत करके 2022 में फिर सत्ता में वापसी करनी है ।
शायद यही कारण है की निषाद मौर्य रजभर अनुसूचित जाति के नेताओं को बयानबाज़ी की इजाज़त मिल गयी है ।
इस  अभियान के तहत ये नेता राज्य के नेतृत्व पर भी सवाल खड़े करते दिखायी दे रहे हैं । इनमे केशव मौर्य स्वामी प्रसाद मौर्य सहित निषाद पार्टी के नेता ज़्यादा मुखर हैं।
इसके अलावा पार्टी और सरकार में ख़ाली पदों को भी भरने की मुहिम चल रही है ।पिछले एक हफ़्ते में सरकार और संघटन के दर्जनो पदों पर नियुक्तियाँ कर दी गयी हैं।
भाजपा की कोशिस विपछी दलों को चकमा देकर चुनाव जितने की है ।भाजपा नहि चाहती की 2022  के चुनाव में 2017 के चुनावी वायदों को याद दिलाया जायँ ।जनता की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़े मुद्दों पर चुनाव हो ।
पार्टी की तरफ़ से तीन तलाक़ लव जेहाद जैन संख्या क़ानून गो  वंस की हिफ़ाज़त राम मंदिर निर्माण काशी मथुरा जैसे मुद्दों के आधार पर आगामी चुनाव में जाने की कोशिस हो सकती है ।
अब देखना है की ग़ैर भाजपा पार्टियाँ खुद को कैसे भाजपा के ट्रैप से बचाकर जनता के मुद्दों को लेकर जनता के बीच में जा पाती हैं।विपछ में तमाम ऐसे दल हैंजो परोछ रूप से भाजपा की मदद में लगी हैं।
भाजपा एक अनुशासनिक पार्टी हैं।इसमें बाक़ी दलों की तरह बयान बाज़ी की इजाज़त नहि होती ।
इसलिए इस समय नेताओं के बयान स्वभाविक रूप से सवाल खड़ा करते हैं।

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