मंगलवार, 9 मार्च 2021

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उत्तराखंड के मुख्य मंत्री पद से त्रिवेंद्र सिंह रावत की विदाई हो गयी ।उनकी विदाई के पीछे वहाँ की जनता से ज़्यादा साधु संतों की नाराज़गी बतायी जा रही है 
त्रिवेंद्र जी का विरोध तो वहाँ के विधायकों और जनता उनके मुख्य मंत्री बनने के दिन से ही कर रही थी ।लेकिन पार्टी आला कमान के डर से कोई सामने आने को तैयार नहीं था ।
त्रिवेंद्र जी ने मुख्य मंत्री रहते हुए देव स्थानम  बोर्ड का गठन किया था और उत्तराखंड के जिन 52 मंदिरों का अधिग्रहण किया गया था उनके ज़्यादातर पुजारी ब्राह्मण समाज के थे ।रावत जी पर ब्राह्मण के ख़िलाफ़ काम करने के आरोप थे ।
उत्तराखंड की राजनीति ब्राह्मण और ठाकुर , गढ़वाल और कुमाऊँ मंडलों के बीच वर्चस्व की रही है इनके बीच में संतुलन बनाने में भी रावत जी विफल रहे ।
मुख्य मंत्री के रूप में रावत जी के पास 55 से अधिक विभागों की ज़िम्मेदारी थी । वावजूद इसके governance के मामले में भी रावत जी को सबसे फिस्सडी मुख्य मंत्री का तमग़ा मिला था ।
अब विधान सभा चुनाव में महज़ एक साल का वक्त बचा है पार्टी आला कमान के सामने सबसे वडी चुनौती ऐसे। व्यक्ति को मुख्य मंत्री   बनाने की है जो सबको साथ लेकर चलने की कूबत रखता हो ।

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