गुरुवार, 25 फ़रवरी 2021

Rahul gandhi

राजनीति के  समुद्र में गोता लगाते राहुल गांधी —————————————-
गोता लगाते राहुल गांधी ।आख़िर कब तक सत्य की खोज में भटकते रहेंगे ?
राहुल सक्रिय राजनीति में आने से पहले से पूरे देश और दुनिया का भ्रमण कर चुके है ।देश और दुनिया की समस्याओं से रूबरू होते रहें हैं ।
राहुल का dialogue with people अभियान अब और कब तक जारी रहेगा अपनी defocused, inconsistent aur escapist tendency के लिए मशहूर राहुल गांधी को अगर भारतीय जनता पार्टी सहित उनके विरोधी अगर मज़ाक़ उड़ाते हैं तो इसके लिए काफ़ी हद तक वे खुद ज़िम्मेदार हैं 
अभी हाल में south india के दौरे पर गए राहुल गांधी का मछुआरों के साथ समुद्र में छलांग लगाना एक 136साल पुरानी कांग्रिस पार्टी के नेता के रूप में उनके गम्भीर छबी के मुनासिब नहीं है 
भारत और रुस के राजनैतिक और सामाजिक हालात अलग हैं रुस के president Putin इस तरह के करतब दिखते रहते है कभी जिम में वरजिस करते हुए अपनी विडीओ रिलीज़ करना तो कभी वर्फ़िलीग्राउंड पर हॉकी खेलना 
लेकिन भारतीय जनमानस को इस तरह की हरकतें पसंद नहीं आती हैं
भारत के जिस भी नेता ने अपनी विलासिता और दिल फेंक आचरण का प्रदर्शन किया जनता ने उसे पसंद नहीं किया यह अलग बात है की उसकी सत्ता और police के चलते जनता चुप्पी साधे रही और सही वक्त पर अपनी नाराज़गी जताती रही 1977  के चुनाव परिणाम हम सबके सामने हैं
यह सच है की राहुल विरोधियों ने सोशल मीडिया के ज़रिए उनकी छबि को ख़राब करने की भरपूर कोशिस की है लेकिन इसके लिए राहुल खुद भी ज़िम्मेदार हैं
देश के हालात और मीडिया तथा जूडिशीएरी की भूमिका पर भी लोगों की अलग अलग राय है 
राहुल सहित भाजपा विरोधियों का आरोप है कि मीडिया की निस्पछता सवालों के घेरे में है
लेकिन यह भी सच है की औरों के मुक़ाबले भाजपा की सक्रियता ज़्यादा है 
भाजपा पंचायत से लेकर संसद तक सभी चुनाओ को जिस आक्रामक और परिश्रम से लड़ती है उस तरह की मेहनत बाक़ी लोगों की तरफ़ से देखने को नहीं मिलती 
जिन धूड्डा तीन पाइयाँ 
गहरे पानी पैठ 
मैं बपुरा बुड़न डरा 
रहा किनारे बैठ 
ऐसा लगता है कि देश के मौजूदा हालात में सभी राज नेताओं को इस कालजयी दोहे से सबक़ लेकर अपनी रणनीति बनानी चाहिए

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