बुधवार, 10 फ़रवरी 2021

congress

दिशाहीन congress और राहुल गांधी का तुनक मिज़ाजी रवैया 

Congress पार्टी एक और विभाजन के कगार पर खड़ी है इस बार के सम्भावित विभाजन  के लिए राहुल गांधी को ज़िम्मेदार माना जाएगा 
राहुल गांधी की तुनक मिज़ाजी और एकला चलो की नीतियाँ ज़्यादा ज़िम्मेदार होंगी ।राहुल इस बात को कई बार बोल चुके है की वे अकेले लडेंग़े।
वास्तव में विभाजन की नीव तो २०१९ के चुनाव परिणामों के समय ही पड़ गयी  थी जब चुनाव में पराजय के कारणो का पता लगाने  के लिए बनी अंटोनी committee की सिफ़ारिशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था 
पार्टी में इंदिरा गांधी के वक्त हुआ विभाजन operation kamraj plan aur emergency lagu karne ki wajahon se hua tha 
Rajiv गांधी के वक्त के विभाजन की वजह शाह बानो केस और बोफ़ोर्स घोटाला था ।लेकिन इस वार के सम्भावित  विभाजन की वजह राहुल होंगे ।

हमारे देश का मिज़ाज लोकतांत्रिक है हम universal brotherhood and coexistence के सिद्धांत पर चलते रहे हैं अछे लोकतांत्रिक व्यवस्था में participatory democracy ko behtar mana jata hai 
लेकिन राहुल गांधी का तरीक़ाguerilla tactics का है आरोप लगाओ और बग़ैर जवाब सुने भाग लो 
डिबेट की चुनौती दो और जबसामने  वाला तैयार हो जाय तो भाग लो 
 चाहें वह संसद केभीतर  हो या बाहर 
संघटन और सरकार को रिमोट कंट्रोल से चलाने की सोच  इस सबसे  पुरानी पार्टी की  दुर्दशा का करण है ।!
राहुल गांधी द्वाराparliament  के दोनो सदनो में ऐसे नेताओं को आगे किया जाता रहा है जो अपने अपने होम स्टेट्स में कांग्रिस पार्टी का बर्बाद कर चुके हैं 
ज़्यादातर आधार हीन अदूरदर्शी नेता ही राहुल की पहली पसंद हैं 
राहुल अक्सर  crucial मौक़े पर विलु।प्त हो जाते है चाहे वह parliament का डिबेट हो या पार्टी के कार्य कर्म।राहुल की राजनीति में consistency ,commitment aur conviction नहीं दिखायी देता ।
कांग्रिस पार्टी के फ़ाउंडेशन डे के मौक़े पर राहुल नदारत थे किसान आंदोलन जब परवान पर था तब नदारत ।
कांग्रिस के group 23 का letter bomb पार्टी की अंदरूनी हालात को ज़ाहिर कर चुका है 
हम इस मुद्दे पर अपने पहले के लेखों में तफ़्सील से लिख चुके हैं पार्टी के नेताओं में अपने future की चिंता है ।
किसी को फिर से राज्य सभा की सीट का दरकार है तो किसी को अपने हज़ारों करोड़ रुपए के साम्राज्य को बचाने की चिंता है ।
ग़ुलाम नबी आज़ाद भीऐसे नेताओं में  से एक है ।
कश्मीर से धारा ३७०  हटाने के ख़िलाफ़ छाती पीट कर रोने वाले ग़ुलाम अब उसी कश्मीर में विकास की गंगा बहते देख रहे है ।खुद को सबसे भाग्यशाली भारतीय मुसलमान बता रहे हैं ।उनका यह भी दावा है की उन्होंने अपने पूरे राजनैतिक जीवन में कभी पाकिस्तान की यात्रा नहीं की .
ग़ुलाम नबी के इन बयानो को उनकी भावी योजनाओं के संकेत के रूप में देखा जा सकता है ।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और ग़ुलाम नबी आज़ाद का एक दूसरे के प्रति दोस्ती का इज़हार भी एक भावी राजनीति का हिस्सा है ।
वास्तव में पार्टी की मज़बूती नेतृत्व के मज़बूती से होती है ।workers aur cadres  नेता को follow करते हैं।लेकिन  राहुल के मामले में स्थिति बिल्कुल अलग है । ऐसा लगता 
है की राहुल गांधी अभी राज नीति का  tuition ही ले रहे है । 136 साल पुरानी पार्टी की इतनी दुर्गति किसी ने सोची भी नहीं थी 
देश के प्रधानमंत्री ने   सच ही कहा है कि कांग्रिस पार्टी लोक सभा और राज्य सभा में  divided है । एक ही मुद्दे पर संसद के दोनो सदनो में पार्टी के नज़रिया अलग अलग देखने को मिलता है ।
राहुल ज़्यादा तर राज्यों में अपने विरोधियों के मुक़ाबले हथियार डाले दिखायी दे रहे हैं
West bengal bihar aur north east  के राज्यों में पार्टी की हालत ठीक नहीं है ।
West bengal aur assam में चुनाव है और राहुल गांधी पूरे scene से ग़ायब है 
आख़िर इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है ।
आज की तारीख़ में congress party ka netritwa पूरी तरह confused and defocused dikhayee दे रहा है । राहुल को नेहरू और इंदिरा जी की नितियों को समझहना चाहिए ।
पार्टी का ट्रेडिशनल support base अलग रहा है ।शायद  यही कारण है की पार्टी के भीतर असंतोष बड़ रहा है ।अगर समय रहते इस पर क़ाबू नहीं किया गया तो पार्टी का एक गुट अलग होकर भाजपा का दमन थाम लेगा ।राज्यों में यह कार्य तो पहले से ही शुरू हो गया है।

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