सोमवार, 18 जनवरी 2021

Tug of war

उत्तर प्रदेश का अपना अलग इतिहास और पहचान रहा है 
आज़ादी से लेकर अब तक उत्तर प्रदेश का राजनैतिक नेतृत्व हमेसा केंद्रीय सत्ता के समानांतर अपनी सत्ता चलाता रहा है 
इसकी शुरुआत पंडित जवाहर लाल नेहरू  और पंडित गोविंद बल्लभ पंत के बीच चले खिच तान हुई ।चंद्रा भान गुप्ता कमला पति त्रिपाठी चौधरी चरण सिंह सुचिता कृपलानी विश्व नाथ प्रताप सिंह हेमवती नंदन बहुगुणा बीर बहादुर सिंह कल्याण सिंह मुलायम सिंह मायावती और अखिलेश यादव ने मुख्य मंत्री रहते हुए केंद्रीय सत्ता से अपनी अलग राय और अलग पहचान बनाए रखने की कोशिस की 
उत्तर प्रदेश कभी भी पिछलग्गू बन कर नहीं रहा देश के ज़्यादातर प्रधान मंत्री उत्तर प्रदेश से हुए है राजनैतिक तौर पर उत्तर प्रदेश हमेशा देश को दिशा देता रहा है 
शायद यही कारण है की उत्तर प्रदेश का मुख्य मंत्री खुद को first among equal के रूप में मानता है 
उत्तर प्रदेश ke mukhya mantriyon का यही attitude हमेसा केंद्रीय सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों की आँख में किरकिरी बना रहा है

गुरुवार, 7 जनवरी 2021

Trump. violence

अमेरिका में ट्रम्प समर्थकों द्वारा किया गया हंगामा और violence दुनिया के तमाम democratic countries के लिए एक सबक़ है ।ऐसे वारदातों और इस सोच के नेताओं से अन्य लोकतांत्रिक देशों की जनता को सावधान रहना चाहिए ।
अमेरिकी इतिहास पर अगर नज़र डालें तो इस तरह का हंगामा 1812 में अंग्रेज़ी हुकूमत के ख़िलाफ़ हुआ था 
अमेरिका पूरी दुनिया में araenal of democracy ke नाम से मशहूर रहा है पूरी दुनिया लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए अमेरिका का उदाहरण देती रही है 
लेकिन जो दुर्गति पिछले कुछ वर्षों में ट्रम्प के नेतृत्व में अमेरिका की हुई है वह शायद ही इसके पहले कभी देखने को मिली हो 
Industrialist turn politician donald trump ने अपने whimsical abd short sighted policies की वजह से पूरी दुनिया में अमेरिका की फ़ज़ीहत करवाई है 
और अब जाते जाते भी Washington d c में हंगामा और हिंसा करवाकर अमेरिकी इतिहास में अपना नाम एक निहायत ना समझ  
बददिमाग़ president के रूप में दर्ज करवा लिया 
ट्रम्प के इस कृत्य का विरोध पूरी अमेरिका की  पोलिटिकल जमात के अलावा दुनिया के दूसरे मुल्कों के उनके पुराने मित्र  नेताओं ने भी की है जो कल तक उनके साथ गल बहियाँ करते दिखायी दे रहे थे 
अभी भी दो हफ़्ते का वक्त है ट्रम्प को graceful  तरीक़े से अपनी हार मानकर president की ज़िम्मेदारी newly elected Biden और उनकी टीम को सौंप देनी चाहिए 
और Washington d c में कराए गए हंगामा और हिंसा के लिए अमेरिका सहित दुनिया के सभी democratic countries की जनता से माफ़ी माँगनी चाहिए

मंगलवार, 5 जनवरी 2021

brahmins

कर्नाटक की सरकार ने गरीब ब्राह्मण बालिकाओं को कर्मकांड से जुड़े ब्राह्मण बालकों के साथ विवाह करने पर आर्थिक मदद का ऐलान किया है 
वहाँ पर स्थापित brahmin development board की तरफ़ से दो योजनाएँ शुरू की गयी हैं 
दूसरी तरफ़ असम की सरकार ने फ़र्ज़ी मदरसों और संस्कृत विद्यालयों को बंद करने का फ़ैसला किया है
वेदिक education और भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए कर्नाटक सरकार का फ़ैसला स्वागत योग्य है 
संस्कृत सभी भारतीय भाषाओं की जननी है 
बग़ैर संस्कृत के विकास के अन्य भारतीय भाषाओं का विकास नहीं हो सकता और ना ही भारतीय संस्कृति को बचाया जा सकता है 
संस्कृत को रोटी रोज़ी से जोड़कर उसका विकास और संस्कृति की हिफ़ाज़त की जा सकती है 
ब्राह्मण तो हमेसा से संस्कृत के माध्यम से समाज संस्कृति और देश की सेवा करते रहे हैं
इसलिए  ब्राह्मण के लिए शुरू की गयी योजनाएँ समाज संस्कृति और देश हित में है
तेलंगना की सरकार ने भी पहले से गरीब ब्राह्मण के लिए welfare schemes चला रखी है 
ख़ास बात यह है की brahmins के ख़िलाफ़ सामाजिक आंदोलन की शुरुआत south indian states से हुई थी उसका नक़ल north india में कांशी राम ने किया था 
लेकिन अब बदली परिस्थित्यों में southern states me welfare scheme चलाए जा रहे हैं 
North indian states में भी इस पर विचार किया जाना चाहिए 
उत्तर प्रदेश में मायावती जी को कई बार चीफ़ मिनिस्टर डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी और ब्रह्म दत्त द्विवेदी ने बनवाई थी 
उत्तर प्रदेश में भाजपा  समाज वादी पार्टी और bsp की सरकारों को पूर्ण बहुमत दिलाने में भी इस समाज की भूमिका रही है 
ब्राह्मण सबसे ज़्यादा समायोजन संयोजन और सम रसता भई चारा में विस्वास करता है 
ब्राह्मण बसुधैव कूतुम्बकम world is my family के सिद्धांत पर चलता रहा है

रविवार, 3 जनवरी 2021

union budget

देश की राजधानी दिल्ली की सीमा पर जहां एक तरफ़ ऐतिहासिक किसान आंदोलन चल रहा है वही दूसरी तरफ़ भारत सरकार का फ़ाइनैन्स मिनिस्ट्री फ़रवरी में पेश होने वाले बजट की तैयारी में जुटा है 
मंत्रालय के सामने सबसे बड़ी चुनौती वितीय घाटे की है 
अकड़ों के मुताबिक़ december 2020 तक का वितीय घाटा 11 लाख करोड़ था जो मार्च 2021 तक बड़ कर 14 लाख करोड़ हो सकता है 
पिछले साल डूबते बैंकिंग सेक्टर को बचाने के लिए सरकार ने 30 lakh करोड़ का पैकिज दिया था इस पैकिज का सर्वाधिक लाभ corporate सेक्टर को मिला 
Covid 19 महामारी के चलते केंद्र सरकार की आमदनी में गिरावट आयी है इसका सीधा असर राज्यों की आर्थिक स्थिति पर भी देखने को मिला है 
राज्यों को केंद्र सरकार से मिलने वाला टैक्स का हिस्सा उनको समय से नहीं मिल सका इस मुद्दे को लेकर राज्यों और केंद्र सरकार के बीच  खींच तान और आरोप प्रत्यारोप भी लगे 
देश की वितीय हालत आज भी बेहतर नहीं है ग़रीबी बेरोज़गारी आर्थिक मंदी शीर्ष स्थान पर है 
ऐसे हालात में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती समाज के कमजोर वंचित लोगों के लिए पहले से घोषित welfare schemes को जारी रखने की है 
इन योजनाओं को जारी रखने के लिए संसाधन जुटाने की  चुनौती है
समझा जाता है की सरकार public सेक्टर की companies में अपनी हिस्सेदारी  बेच कर संसाधन जुटाने की कोशिस में लगी है 
सरकार अपने इस मुहिम में कितना कामयाब होगी इस पर कोई भविस्यवाणि मुनासिब नहीं है 
लेकिन इतना तय है की मौजूदा हालात में pro people budget तैयार करके पेश करना finance ministry ke liye himalayan task hai