शुक्रवार, 18 दिसंबर 2020

crisis of credibility

Trali times का प्रकाशन आज़ादी के वाद हुए आंदोलनो में एक नया अध्याय जोड़ दिया है 
दिल्ली बॉर्डर पर पंजाब और हरियाणा से आकर बैठे किसानो ने मुख्य धारा की मीडिया को चुनौती देते हुए अपनी बात अपनी भाषा में प्रकाशित और प्रसारित करने की शुरुआत कर दी है 
उनका आरोप है की मुख्यधारा की मीडिया सरकारी propaganda में जुटी है सरकारी दबाव और स्वार्थ के चलते उनके आंदोलन को बदनाम किया जा रहा है 
Trali times के प्रकाशन का मक़सद आंदोलनकारी किसानो को सच से रुबरु कराना है 
वास्तव में किसानो का यह फ़ैसला मुख्यधारा की मीडिया की गिरती credibility और objectivity के लिए चुनौती है 
मीडिया को इस मुद्दे को गम्भीरता से लेनी चाहिए 
इस तरह के समानांतर अख़बारों के publication तो फ़्रीडम movement के दौरान अंग्रेज़ी हुकूमत के ख़िलाफ़ हुआ करता था 
उससमय हिंदुस्तान की अवाम को जागरूक बनाने के लिए महात्मा गांधी से लेकर तमाम revolutionaries ने अख़बार और पत्रिकाएँ निकाली थी 
इस समय हम आज़ाद हिंदुस्तान के नागरिक हैं हर नागरिक को क्रेडिबल aurhentic fair free जानकारी हासिल करने का अधिकार है 
लोकतांत्रिक भारत में मीडिया से इसी तरह की जानकारी की उमीद है 
अगर भारतीय मीडिया वक्त रहते अपनी साख बचाने की कोशिस नहीं करेगा तो वह दिन दूर नहीं जब भारतीय जनमानस भारतीय मीडिया को ख़ारिज कर देगा

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