शुक्रवार, 18 दिसंबर 2020

constitution

भारत में सब कुछ संविधान के नाम पर हो रहा है 
संविधान के दायरे में supreme कोर्ट २२ दिनों से चल रहे किसान आंदोलन पर सुनवाई कर रहा है 
संविधान के तहत केंद्र सरकार ३ कृषि क़ानून बना चुकी है जिसको वापस करवाने के लिए आंदोलन चल रहा है 
संविधान के तहत ही पंजाब की congress सरकार उन क़ानूनों के खिलफ विधान सभा से प्रस्ताव पारित करके मंज़ूरी के लिए राज्यपाल  को भेज चुकी है 
पंजाब के राज्यपाल संविधान के तहत ही राज्य विधान सभा से पारित प्रस्तावों को रोके हुए हैं 
अब दिल्ली के chief minister भी आपदा में अवसर की तलास में जुट गए हैं उनको किसान आंदोलन में vote बैंक नज़र आ रहा है 
आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में उपवास कर चुके है आज उन्होंने एक कदम आगे बड़कर किसान क़ानूनों की प्रतियाँ भी फाड़ने का नाटक किया 
किसान आंदोलन को सभी ग़ैर भाजपा दलों और संघठनो का समर्थन हासिल है 
मज़ेदार बात यह है की सरकार से लेकर विरोधी तक सभी संविधान की दुहाई दे रहे है 
आख़िर हम किस तरह के federal india को मज़बूत कर रहे हैं
संविधान में प्राप्त अधिकारों का प्रयोग सभी कर रहे हैं लेकिन उसके सम्मान पर ध्यान कौन देगा 
क्या हम सच में cooperative federalism के वजाय coercive federalism की तरफ़ जा रहे है इस तरह के हालात healthy democracy के लिए अछे साबित नहीं होंगे

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