सोमवार, 28 दिसंबर 2020

Congress party

अपने गठन के 13 6 वे  साल congress पार्टी सबसे बुरे वक्त से गुज़र रही है वह पार्टी जिसने आज़ादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई आज दिशा विहीन और नेतृत्व विहीन दिखायी दे रही है 
पार्टी मुख्यालय पर आयोजित foundation day के आयोजन में सोनिया गांधी और राहुल गांधी नदारत रहे 
पार्टी सूत्रों के मुताबिक़ सोनिया गांधी की तबियत ख़राब है और राहुल गांधी अपनी निजी यात्रा पर नानी से मिलने इटली चले गए हैं 
आयोजन में प्रियंका जरुर मौजूद थी और उन्होंने किसानो का मुद्दा भी उठाया लेकिन उनकी मौजूदगी सोनिया राहुल की ग़ैर मौजूदगी की कमी को पूरा नहीं कर सकी
और राहुल गांधी पर एक बार फिर non serious whimsical politician के आरोप भाजपा की तरफ़ से लगा दिए गए 
यह बात लगभग तय है की congress पार्टी का मतलब गांधी परिवार ही होता है बग़ैर गांधी परिवार के congress पार्टी को एकजुट नहीं रखा जा सकता 
बावजूद इसके राहुल गांधी का बार बार crucial mauke पर ग़ायब होना उनकी कमजोर political personality को ज़ाहिर करता है 
राहुल गांधी के इस unpredictable behaviour के चलते पार्टी के कार्यकर्ताओं में मायूसी पैदा होती है किसी भी पार्टी की ताक़त उसके कार्यकर्ता होते हैं demoralised workers के सहारे कोई भी नेता कमजोर हो चुकी पार्टी में ऊर्जा नहीं डाल सकता 
राहुल गांधी के बारे में पहले से ही यह कहा जाता रहा है की वे power without responsibility and accountability चाहते हैं
ऐसे में राहुल गांधी का यह तरीक़ा ना तो उनके राजनैतिक future के लिए अच्छा है और ना ही congress पार्टी के लिए पार्टी leadershipको इस पर विचार करना चाहिए 
सार्वजनिक जीवन में रहने पर अपने तमाम निजी हितों की क़ुर्बानी देनी पड़ती है 
राहुल गांधी को कांग्रिस पार्टी और उसके नेताओं पंडित नेहरू इंदिरा गांधी और महात्मा गांधी के इतिहास को ठीक से पड़ना और समझना चाहिए

शुक्रवार, 18 दिसंबर 2020

delhi c m

दिल्ली के चीफ़ मिनिस्टर अरविंद केजरीवाल एक बार फिर राजनैतिक तौर पर सक्रिय हैं
इस बार उन्होंने किसानो के आंदोलन को समर्थन देकर पंजाब और हरियाणा की राज नीति पर अपनी पकड़ मज़बूत करने की रणनीति बनायी है 
केजरीवाल और उनके पार्टी के लोग किसानो के समर्थन में एक दिन उपवास रखेंगे उन्होंने देश के बाक़ी लोगों से भी एक डॉन का उपवास रखने की अपील की है 
उनका आरोप है की मौजूदा केंद्र सरकार पूर्व की congress सरकार की तरह काम कर रही है पिछली सरकार अन्ना आंदोलन को देश विरोधी कहती थी 
ऐन भाजपा सरकार भी उसी तरह किसानो के आंदोलन को anti national कह रही है 
केजरीवाल आज के दौर के सबसे चतुर नेताओं में से एक है 
राजनैतिक  पैंतरेवजी में उनको महारत हासिल है निज़ामुद्दीन मरकज़ से लेकर दिल्ली दंगों को लेकर केजरीवाल की भूमिका कुछ अलग ही दिखायी दी 
और किसानो के सवाल पर अलग केजरीवाल हर मौक़े पर राजनैतिक लाभ उठाने की कोशिस करते है अब देखना है की उनकी पैंतरेवाज़ी  का कितना लाभ आनेवाले चुनाओ में उनको मिलता है पंजाब में तो पहले से ही भाजपा को विफलता हाथ लगती रही है

constitution

भारत में सब कुछ संविधान के नाम पर हो रहा है 
संविधान के दायरे में supreme कोर्ट २२ दिनों से चल रहे किसान आंदोलन पर सुनवाई कर रहा है 
संविधान के तहत केंद्र सरकार ३ कृषि क़ानून बना चुकी है जिसको वापस करवाने के लिए आंदोलन चल रहा है 
संविधान के तहत ही पंजाब की congress सरकार उन क़ानूनों के खिलफ विधान सभा से प्रस्ताव पारित करके मंज़ूरी के लिए राज्यपाल  को भेज चुकी है 
पंजाब के राज्यपाल संविधान के तहत ही राज्य विधान सभा से पारित प्रस्तावों को रोके हुए हैं 
अब दिल्ली के chief minister भी आपदा में अवसर की तलास में जुट गए हैं उनको किसान आंदोलन में vote बैंक नज़र आ रहा है 
आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में उपवास कर चुके है आज उन्होंने एक कदम आगे बड़कर किसान क़ानूनों की प्रतियाँ भी फाड़ने का नाटक किया 
किसान आंदोलन को सभी ग़ैर भाजपा दलों और संघठनो का समर्थन हासिल है 
मज़ेदार बात यह है की सरकार से लेकर विरोधी तक सभी संविधान की दुहाई दे रहे है 
आख़िर हम किस तरह के federal india को मज़बूत कर रहे हैं
संविधान में प्राप्त अधिकारों का प्रयोग सभी कर रहे हैं लेकिन उसके सम्मान पर ध्यान कौन देगा 
क्या हम सच में cooperative federalism के वजाय coercive federalism की तरफ़ जा रहे है इस तरह के हालात healthy democracy के लिए अछे साबित नहीं होंगे

crisis of credibility

Trali times का प्रकाशन आज़ादी के वाद हुए आंदोलनो में एक नया अध्याय जोड़ दिया है 
दिल्ली बॉर्डर पर पंजाब और हरियाणा से आकर बैठे किसानो ने मुख्य धारा की मीडिया को चुनौती देते हुए अपनी बात अपनी भाषा में प्रकाशित और प्रसारित करने की शुरुआत कर दी है 
उनका आरोप है की मुख्यधारा की मीडिया सरकारी propaganda में जुटी है सरकारी दबाव और स्वार्थ के चलते उनके आंदोलन को बदनाम किया जा रहा है 
Trali times के प्रकाशन का मक़सद आंदोलनकारी किसानो को सच से रुबरु कराना है 
वास्तव में किसानो का यह फ़ैसला मुख्यधारा की मीडिया की गिरती credibility और objectivity के लिए चुनौती है 
मीडिया को इस मुद्दे को गम्भीरता से लेनी चाहिए 
इस तरह के समानांतर अख़बारों के publication तो फ़्रीडम movement के दौरान अंग्रेज़ी हुकूमत के ख़िलाफ़ हुआ करता था 
उससमय हिंदुस्तान की अवाम को जागरूक बनाने के लिए महात्मा गांधी से लेकर तमाम revolutionaries ने अख़बार और पत्रिकाएँ निकाली थी 
इस समय हम आज़ाद हिंदुस्तान के नागरिक हैं हर नागरिक को क्रेडिबल aurhentic fair free जानकारी हासिल करने का अधिकार है 
लोकतांत्रिक भारत में मीडिया से इसी तरह की जानकारी की उमीद है 
अगर भारतीय मीडिया वक्त रहते अपनी साख बचाने की कोशिस नहीं करेगा तो वह दिन दूर नहीं जब भारतीय जनमानस भारतीय मीडिया को ख़ारिज कर देगा

गुरुवार, 17 दिसंबर 2020

indian constitution

भारत में सब कुछ संविधान के नाम पर हो रहा है 
संविधान के दायरे में supreme कोर्ट २२ दिनों से चल रहे किसान आंदोलन पर सुनवाई कर रहा है 
संविधान के तहत केंद्र सरकार ३ कृषि क़ानून बना चुकी है जिसको वापस करवाने के लिए आंदोलन चल रहा है 
संविधान के तहत ही पंजाब की congress सरकार उन क़ानूनों के खिलफ विधान सभा से प्रस्ताव पारित करके मंज़ूरी के लिए राज्यपाल  को भेज चुकी है 
पंजाब के राज्यपाल संविधान के तहत ही राज्य विधान सभा से पारित प्रस्तावों को रोके हुए हैं 
अब दिल्ली के chief minister भी आपदा में अवसर की तलास में जुट गए हैं उनको किसान आंदोलन में vote बैंक नज़र आ रहा है 
आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में उपवास कर चुके है आज उन्होंने एक कदम आगे बड़कर किसान क़ानूनों की प्रतियाँ भी फाड़ने का नाटक किया 
किसान आंदोलन को सभी ग़ैर भाजपा दलों और संघठनो का समर्थन हासिल है 
मज़ेदार बात यह है की सरकार से लेकर विरोधी तक सभी संविधान की दुहाई दे रहे है 
आख़िर हम किस तरह के federal india को मज़बूत कर रहे हैं
संविधान में प्राप्त अधिकारों का प्रयोग सभी कर रहे हैं लेकिन उसके सम्मान पर ध्यान कौन देगा 
क्या हम सच में cooperative federalism के वजाय coercive federalism की तरफ़ जा रहे है इस तरह के हालात healthy democracy के लिए अछे साबित नहीं होंगे

रविवार, 13 दिसंबर 2020

केजरीवाल

दिल्ली के चीफ़ मिनिस्टर अरविंद केजरीवाल एक बार फिर राजनैतिक तौर पर सक्रिय हैं
इस बार उन्होंने किसानो के आंदोलन को समर्थन देकर पंजाब और हरियाणा की राज नीति पर अपनी पकड़ मज़बूत करने की रणनीति बनायी है 
केजरीवाल और उनके पार्टी के लोग किसानो के समर्थन में एक दिन उपवास रखेंगे उन्होंने देश के बाक़ी लोगों से भी एक डॉन का उपवास रखने की अपील की है 
उनका आरोप है की मौजूदा केंद्र सरकार पूर्व की congress सरकार की तरह काम कर रही है पिछली सरकार अन्ना आंदोलन को देश विरोधी कहती थी 
ऐन भाजपा सरकार भी उसी तरह किसानो के आंदोलन को anti national कह रही है 
केजरीवाल आज के दौर के सबसे चतुर नेताओं में से एक है 
राजनैतिक  पैंतरेवजी में उनको महारत हासिल है निज़ामुद्दीन मरकज़ से लेकर दिल्ली दंगों को लेकर केजरीवाल की भूमिका कुछ अलग ही दिखायी दी 
और किसानो के सवाल पर अलग केजरीवाल हर मौक़े पर राजनैतिक लाभ उठाने की कोशिस करते है अब देखना है की उनकी पैंतरेवाज़ी  का कितना लाभ आनेवाले चुनाओ में उनको मिलता है पंजाब में तो पहले से ही भाजपा को विफलता हाथ लगती रही है

Bjp vs Congress

क्या भाजपा congress के नक्से कदम पर चल रही है?क्या नरेंद्र मोदी जी इंदिरा जी की तरह काम कर रहे हैं?
देश में आर्थिक liberalisation (new economic policy) की शुरुआत तो p v narsimha rao ji ने ही की थी 
मन मोहन सिंह और नरेंद्र मोदी जी तो उन्ही नीतियों और कार्य क्रमों को आगे ले जाने की कोशिस कर रहे हैं 
कार्य शैली और भाषा शैली ज़रूर अलग दिखायी दे रही है 
अड़ानी अम्बानी सरीखे उद्योग पतियों की पदाईस क्या महज़ साड़े छह सालों की दे न है?
Crony capitalism को patronage तो कांग्रिस पार्टी भी देती थी 
आज कल राहुल गांधी की language और राजनीति में कॉर्ल मार्क्स से लेकर पंडित 
दीनदयाल उपाधाय जी का दर्शन दिखायी दे रहा है 
Slogans coin करने और narrative की राजनीति करने का तरीक़ा भी पुराना है 
ग़रीबी हटाओ का नारा तो इंदिरा जी ने ही दिया था ये अलग बात है की ग़रीबों की तादाद साल दर साल बड़ती रही 
राहुल गांधी और उनके पार्टी के लोगों को भाजपा से मुक़ाबला करने के लिए उतनी ही मेहनत करनी पड़ेगी जितनी भाजपा कर रही है 
दूसरी तरफ़ भाजपा को भी अपना मूल चरित्र बचा कर रखना होगा party with a difference भाजपा की असली ताक़त रही है 
ऐसा लगता है कि “कामयाबी हर क़ीमत पर “के रास्ते पर चल चुकी भाजपा धीरे धीरे अपने मूल स्वरूप और दर्शन से दूर होती जा रही है 
सिद्धांत और दर्शन विहीन कोई भी राजनैतिक दल खुद को लम्बे वक़्त तक relevant नहीं बनाए रख सकता 
समय के साथ उस दल का भी वही हश्र हो सकता है जो हश्र 135 साल पुरानी congress पार्टी का देखने को मिल रहा है