गुरुवार, 10 सितंबर 2020

west bengal

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस का ‘अधीर’ अस्त्र
पश्चिम बंगाल में सोमेन मित्रा के निधन के बाद खाली हुई कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी के लिए कांग्रेस ने एक बार फिर अपनी पार्टी से सांसद अधीर रंजन चौधरी पर भरोसा जताया है... अधीर रंजन चौधरी पश्चिम बंगाल के बहरामपुर से ही लोकसभा सांसद हैं और पहले भी फरवरी, 2014 से लेकर सितंबर 2018 तक प्रदेश में कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं ... पश्चिम बंगाल में अगले साल यानि 2021 के अप्रैल-मई में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को देखते हुए अधीर रंजन की नियुक्ति को काफी अहम माना जा रहा है ... ऐसे में ये तो तय है कि पश्चिम बंगाल में टिकट के बंटवारे से लेकर गठबंधन तक में अधीर रंजन चौधरी की भूमिका अहम होने जा रही है ... 
हालांकि अधीर रंजन चौधरी की अध्यक्ष पद पर तैनाती से ये बात साफ हो रही कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने तृणमूल से किनारा कर लिया है और कड़ी चुनौती देने की तैयारी कर रही है ... ऐसा इसीलिए माना जा सकता है कि अधीर रंजन के ममता बनर्जी से मतभेद जगजाहिर हैं .. अधीर रंजन चौधरी ने बीते कुछ महीनों में ममता बनर्जी को कठघरे में खड़ा करने का कोई मौका नहीं छोड़ा है ... प्रवासी मजदूरों के मसले पर अधीर रंजन ने ममता बनर्जी पर प्रवासियों और गैर-प्रवासियों के बीच दरार पैदा करने का आरोप लगाया था ... अधीर रंजन ने कहा था कि ममता बनर्जी कोरोना वायरस के संक्रमण के लिए भी गलत तरीके से प्रवासी मजदूरों को जिम्मेदार ठहरा रही हैं .. इससे पहले मार्च के महीने में नागरिकता संशोधन कानून के मसले पर भी अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी पर बीजेपी से गोपनीय तालमेल करने के आरोप लगाए थे ... अधीर रंजन चौधरी 2013 में बंगाल पंचायत चुनावों के दौरान ममता बनर्जी को पागल हाथी तक कह चुके हैं .. 
ये अदावत दोनों तरफ से है ... कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी को जब 2012 में केंद्र में सत्ता संभाल रही यूपीए ने रेल राज्य मंत्री बनाया था तो यूपीए से अलग हो चुकीं ममता बनर्जी ने आरोप लगाए थे कि कांग्रेस ने जानबूझकर उनके विरोधी को मंत्रिमंडल में जगह दी है ... दरअसल 1996 में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान भी उस वक्त कांग्रेस में रहीं ममता बनर्जी ने मुर्शिदाबाद सीट से अधीर रंजन चौधरी को टिकट दिए जाने का विरोध किया था ... हालांकि तब अधीर रंजन चौधरी रंजन का ना सिर्फ टिकट मिला बल्कि वो जीत भी गए .. तब से लेकर अब तक वो चुनाव जीतते आ रहे हैं ... पिछली बार पश्चिम बंगाल के बरहामपुर से लोकसभा का चुनाव लगातार पांचवी बार जीते .. 
ममता बनर्जी ने कांग्रेस छोड़ दी .. बाद में अपनी पार्टी तृणमूल का समर्थन भी कांग्रेस से वापस ले लिया... 2019 के लोकसभा चुनावों में ममता बनर्जी से शरद पवार को साथ लेकर तीसरा मोर्चा बनाने की कवायद भी की... ममता बनर्जी राहुल गांधी को नकार ही चुकी हैं ... कई मौकों पर उनके खिलाफ बयान देकर ममता ने कांग्रेस का विरोध ही किया है .. ऐसे में अब अधीर रंजन चौधरी को आगे कर कांग्रेस ने भी ममता बनर्जी को साफ संदेश दे दिया है ... 
वैसे भी माना जा रहा है कि राहुल गांधी जोड़-तोड़ की राजनीति को आगे बढ़ाने के मूड में नहीं हैं ... राहुल ने उन सभी पार्टियों या नेताओं से किनारा करना शुरू कर दिया है जो ना तो नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी का साथ दे रहे हैं, ना हीं उनके खिलाफ जाकर अपना स्पष्ट मत दे रहे हैं ... ऐसे सभी मिडिल पाथ बनाकर चलने वाली पार्टियों और नेताओं से राहुल गांधी ने किनारा करना शुरू कर दिया है ..
ये बात राहुल गांधी और कांग्रेस के फैसलों से भी साफ हो रही है ... कांग्रेस में रहकर कई दशकों तक सत्ता की मलाई खाने वाले नेताओं की पिछले कुछ वक्त  में सामने आई बेचैनी को राहुल गांधी ने भांप लिया है ... ऐसा लगता है कि राहुल गांधी समझ चुके हैं कि कपिल सिब्बल, आनंद शर्मा और गुलाम नबी आज़ाद सरीखे नेता Compromised हैं .. इसीलिए आज के दौर में जब जनाधार खोती जा रही कांग्रेस को दोबारा जमीन पाने के लिए फाइटर नेताओं की ज़रूरत है तो पार्टी अधीर रंजन चौधरी जैसे नेताओं को आगे कर रही है और उन नेताओं से किनारा किया जा रहा है जो  liaisoner, Fixer या फिर फ्लोर मैनेजर की भूमिका में रहे हैं ... ऐसे नेताओं को पीछठे किया जा रहा है जो अपने व्यवसायिक हितों को साधने की वजह से सरकार से सीधे confront करने की हालत में नहीं हैं .. इसी रणनीति के तहत केंद्र और राज्यों में कांग्रेस की नई लीडरशिप को प्रोमोट किया जा रहा है ... यही रणनीति है जिसके तहत Compromised gang of Congress को पीछे कर अधीर रंजन चौधरी, रणदीप सुरजेवाला जैसे नेताओं को आगे किया जा  रहा है .. अब ये अलग बात है कि ऐसे ही कुछ यंग नेता सत्ता और पॉलिटिकल फ्यूचर बदलने के लालच में पार्टी छोड़कर भाग गए हैं ...

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