शनिवार, 8 अगस्त 2020

south africa

अफ्रीका का एक छोटा सा देश है चाड .. जहाँ की जनसंख्या एक करोड़ अड़सठ लाख के आसपास है... गोल्ड और युरेनियम के साथ साथ यहाँ तेल का भी भंडार है .. ऐसे में इस देश को समृद्ध औऱ संपन्न होना चाहिए लेकिन प्रभावी नेतृत्व के अभाव में ये देश गरीबी से जूझ रहा है .. हालांकि मौजूदा इदरिसी डेबी की सरकार एक तानाशाह के शासन को खत्म कर सत्ता में आई थी और ऐसा लगा था कि अब देश के हालात बदल जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ ... 
इदरिस डेबी ने 1990 में एक नाटकीय तरीके से देश की सत्ता हासिल की थी .. चाड उस वक्त हिसेन हाब्रे की तानाशाही से त्रस्त था ... आर्मी कमांडर रहे इदरिस डेबी ने 1989 में  हिसेन हाब्रे की तख्तापलट की नाकाम कोशिश थी ... हालात बिगड़े तो इदरिस ने सूडान में जाकर शरण ली और लीबिया की मदद से अपने समर्थकों के साथ मिलकर पैट्रियॉटिक साल्वेशन मूवमेंट चलाया .. इस मूवमेंट के तहत इदरिस डेबी ने अपने समर्थकों औरप हाब्रे के विरोधियों के साथ मिलकर चाड की सीमा पर हमले करने शुरू किए ... आखिर 1990 के दिसंबर इदरिस डेबी ने हाब्रे का तख्तापलट कर दिया और सत्ता पर काबिज हो गया ... तब से लेकर अब तक चाड में इदरिस डेबी की सरकार है .. और इन तीन दशकों में प्राकृतिक संपदाओं से भरपूर चाड आंतरिक संकट से जूझ रहा है .. आम लोग गरीबी की मार झेल रहे हैं और इन सबकी वजह है चाड की सत्ता पर काबिज इदरिस डेबी 
इदरिस डेबी का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था ...बिदायत वंश के इदरिस डेबी के पिता एक चरवाहे थे .. डेबी ने हालांकि एक इस्लामिक स्कूल में शिक्षा ली और आगे चलकर साइंस में ग्रेजुएशन किया ... इसके बाद 1976 आते आते इदरिस डेबी प्रोफेशनल पायलट का भी कोर्स कर चुके थे ... कहते हैं 1979 तक इदरिस डेबी देश की आर्मी और प्रेसीडेंट के लिए Loyal  रहे .. लेकिन 1979 में देश में कई छोटे छोटे हथियारबंद ग्रुप बन गए थे जो देश की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे ..इन्हीं में से एक ग्रुप हिसने हाब्रे का था .. इदरिस ने हिसने हाब्रे का ग्रुप ज्वाइन कर लिया .. इसीलिए जब 1982 में हिसने हाब्रे ने तख्तापलट कर अपनी सरकार बना ली तो इदरिस डेबी को कमांडर इन चीफ बनाया गया ... तब हिस्ने हाब्रे को ये भनक नहीं रही होगी कि यही इदरिस डेबी आगे चलकर उसकी सरकार गिरा देगा ... हिसने हाब्रे खुद एक तानाशाह था जिसके 8 साल के कार्यकाल में देश में 40 हज़ार से ज्यादा लोग मौत के घाट उतार दिए गए ... और जिसने अपनी आर्मी को लोगों के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई की छूट दे दी थी जिसमें महिलाओं के साथ रेप करना भी शामिल था ... देश में चल रही इस तरह की कार्रवाई को इदरिस डेबी का नेतृत्व हासिल था ... 1986 आते आते इदरिस डेबी हिसने हाब्रे का चीफ मिलिट्री एडवाइजर बन चुका था..... 1987 में इदरिस डेबी ने लीबिया-चाड युद्ध में लीबिया की सेना को भारी नुकसान पहुंचाया ... कहा जाता है कि इसमें इदरिस डेबी को फ्रांस का समर्थन मिला हुआ था .. हालांकि इस दौरान और इसके आने वाले सालों में इदरिस डेबी और हिसने हाब्रे के बीच मतभेद उभरने लगे थे ... इसकी वजह थी हिसने हाब्रे की वो सेना जो देश में उसके विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही थी .. कहा जाता है कि हिसने हाब्रे मानवाधिकार को ताक पर रखकर अपने ही देश में कत्लेआम मचा रखा था .. जिसका निशाना इदरिस के समुदाय के लोग भी हो रहे थे .. लिहाजा इदरिस हिस्ने हाब्रे के खिलाफ हो गया ... आने वाले तीन सालों में दोनों के बीच की दुश्मनी इतनी ज्यादा बढ़ गई कि इदरिस ने हिस्ने हाब्रे का तख्तापलट कर सत्ता पर काबिज हो गया ... हालांकि उस दौरान देश में हाब्रे के समर्थको का समूह मौजूद था लिहाजा कई बार इदरिस को सत्ता से बेदखल करने की कोशिश की गई .. लेकिन विरोधियों को इसमें कामयाबी हासिल नहीं हुई और इदरिस अभी तक चाड की सत्ता पर काबिज है .. 
चाड एक ऐसा देश है जो स्वतंत्र होने के बाद से ही अस्थिरता का शिकार रहा है ... देश कई कबीलों में बंटा हुआ है और इनमें आपस में झड़पें होती रहती हैं .. देश में मुस्लिमों और क्रिश्चियंस की आबादी है .. इदरिस डेबी के सत्ता संभालने के वक्त भी देश में मुश्किलें कम नहीं थीं .. हाब्रे के समर्थक नई सरकार के लिए मुश्किलें पैदा कर रहे थे ... खासकर तेल का मुद्दा गर्माता जा रहा था ... डोबा बेसिन से तेल निकाले जाने पर सरकारी कब्जे को लेकर देश मे विरोध तेज हो रहा था .. लोगों में ये भावना घर कर गई थी कि डेबी की सरकार इससे फायदा उठा रही है.... और देश की इस प्राकृतिक संपदा पर राष्ट्रपति ने अपना नियंत्रण कर लिया है ... इसके विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए.. तेज हो रहे प्रदर्शनों को डेबी की सरकार ने पूरी ताकत से दबाने की कोशिश की .. माना जाता है कि इसमें सैकड़ों लोग मारे गए ... हालांकि कुछ साल में इदरिस डेबी ने देश में प्रदर्शनों पर काबू पा लिया और वर्ल्ड बैंक और इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड के साथ मिलकर देश में आर्थिक सुधारों पर काम करने लगा ... 
1996 में चाड में नया संविधान लागू किया गया जिसके बाद देश में राष्ट्रपति चुनाव हुए और इदरिस डेबी ने सेकेंड राउंड में बहुमत हासिल कर ली .. डेबी को उनहत्तर फीसदी वोट मिले थे ... 
2001 में देश में एक बार फिर चुनाव हुए.. इसी साल देश में बहुदलीय लोकतंत्र की स्थापना की गई थी... चुनाव हुए  जिसमे डेबी ने बहुमत हासिल किया और एक बार फिर देश की राष्ट्रपति बनने में कामयाब रहा लेकिन आने वाले दिनों में देश में गृहयुद्ध शुरू होने वाला था... शांति और स्थिरता का माहौल बस 2003 तक चला ... देश में चाड की नीतियों के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा था ... संयुक्त मोर्चा फॉर डेमोक्रेटिक चेंज, डेवलपमेंट एंड डेमोक्रेसी के लिए संयुक्त मोर्चा जैसे अलग अलग समूह बन गए .. .. कहते हैं इदरिस डेबी ने अपने वंश और जाति को देश से भी ऊपर रखा था लिहाजा लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही थी ... 2005 में देश में मुस्लिम और क्रिश्चियन के बीच सिविल वॉर शुरू हो गई ... पड़ोसी देश सूडान के साथ भी तनाव बढ़ चुका था ... लिहाजा इदरिस को सत्ता से बेदखल करने की कोशिशें होने लगीं ...कहते हैं 2006 में इदरिस के विमान को भी निशाना बनाया गया … इदरिस एक समिट में भाग लेकर देश लौट रहे थे तभी सूडान के दारफुर इलाके से उसके विमान को निशाना बनाया गया था .... दारफुर वो इलाका था जिसमें चाड के विद्रोहियों ने शरण ले रखी थी .... इस मामले में इदरिस के कई करीबियों पर ही आरोप लगे ... आर्मी के दो सीनियर अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया ... ये वो दौर था जब इदरिस की अपनी आर्मी के कई लोग उसके खिलाफ साजिश कर रहे थे और विद्रोहियों से मिलकर इदरिस को सत्ता से बेदखल करने की कोशिशों में लगे थे ... इस घटना के बाद इदरिस से सूडान के साथ किया गया शांति समझौता भी तोड़ दिया ... इसी साल यानि 2006 के अगस्त में चाड में एक बार फिर राष्ट्रपति चुनाव हुए थे जिसमें इदरिस डेबी को कामयाबी मिली ..2005 में संविधान में संशोधन कर दिया गया था ... इसी संशोधन की बदौलत तीसरी बार भी इदरिस चुनाव लड़ पाए थे ... 2008 में इदरिस को एक बार फिर अपने ही देश में बड़े विद्रोह का सामना करना पड़ा .. विद्रोही देश की राजधानी तक पहुंच गए .. हालांकि इदरिस की सेना ने उनपर काबू पा लिया ... इदरिस ने सूडान पर विद्रोहियों की मदद करने के आरोप लगाए और ऐलान किया कि अब उसकी सेना ना सिर्फ राजधानी बल्कि पूरे देश को टोटल कंट्रोल में ले चुकी है ... 
कहने को चाड लोकतांत्रिक देश है लेकिन कमान इदरिस डेबी के हाथ में आने के पहले से ही देश में लोकतंत्र की जड़े बहुत गहरी नहीं थीं .... कई कबीलों में बंटे इस देश में हमेशा आंतरिक शांति को पर खतरा मंडराता रहता था ... खुद इदरिस भी ऐसी ही अशांति के बाद जन्मे नेता थे...सेना के कमांडर के तौर पर देश में मौजूद अशांति को खत्म करने का एक्सपीरियंस इदरिस पहले ही हासिल कर चुके थे ... ऐसे में देश में लोकतंत्र और मानवाधिकार की उम्मीद करना बेमानी साबित हो रहा था 
2011 में इदरिस डेबी चौथी बार देश के राष्ट्रपति चुने गए थे .. इस दौरान देश में तेल का भंडार सामने आ गया था .. चाड एक तेल निर्यातक देश बन चुका था .. इसने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को जन्म दिया ...आरोप लग रहे थे कि इदरिस डेबी की सरकार तेल से पैदा होने वाले रेवेन्यू का इस्तेमाल सेना की शक्तियां बढ़ाने के लिए कर रही थी .... भ्रष्टाचार इतना बढ़ चुका था कि 2006 में फोर्ब्स पत्रिका ने दुनिया के भ्रष्टतम देशों की कैटेगरी में चाड को सबसे ऊपर रखा था ... 2012 आते आते ये अपने चरम पर पहुंच गया ... सरकार की छवि हद से ज्यादा खराब हो गई इसे ठीक करने के लिए इदरिस डेबी ने देश में ऑपरेशन कोबरा की शुरुआत की ... मकसद था भ्रष्टाचार पर काबू पाना और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना ... हालांकि आरोप लगे कि इस बहाने इदरिस ने अपने सभी विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई करनी शुरू कर दी ...और भ्रष्टाचार में अपने साथी रहे लोगों को इससे फायदा पहुंचाया... 
इसी दौरान कट्टर इस्लामिक आतंकी संगठन बोको हरम ने भी अपने पैर पसारने शुरू कर दिए थे .... इदरिस ने इससे निपटने के लिए मल्टीनेशनल टास्क फोर्स में चाड को भी शामिल कर लिया.. अफ्रीका के कई देशों ने मिलकर बोको हरम के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया था ... डेबी अपनी सेना को सूडान में विद्रोहियों के ठिकाने दारफुर और माली में इस्लामिक संगठन से निपटने के लिए भी भेजना शुरू कर दिया था ... 2015 में इदरिस ने ऐलान किया था कि मल्टीनेशनल टास्क फोर्स ने बोको हरम के अस्तित्व को खत्म कर दिया है ... हालांकि बोको हरम अभी तक आतंकी गतिविधियों को चला रहा है... अपनी सेना के दम पर इदरिस डेबी ने अपना प्रभाव अफ्रीकी देशों में काफी बढ़ा लिया था ...शायद इसीलिए इदरिस को 2016 में अफ्रीकन युनियन का चेयरमैन भी बनाया गया .. इदरिस ने  जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे की जगह ली थी ... चेयरमैन बनाए जाने पर इदरिस ने कहा था कि अफ्रीका में चल रहे विद्रोहों को खत्म करना ही होगा फिर चाहे ये रणनीति की बदौलत हो या फिर बल प्रयोग से ... इसी साल इदरिस ने मल्टीनेशनल टास्क फोर्स में सैनिकों की संख्या बढ़ाकर 10 हज़ार करने पर सहमति बना ली थी ... 
2016 आते आते चाड में बदलाव की मांग तेज होने लगी थी ... भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरी सरकार को लोग सत्ता से बेदखल करना चाहते थे .. वहीं देश में आर्थिक संकट भी गहराने लगा था लेकिन देश को अभी भी इसके लिए इंतजार ही करना होता ... आने वाले चुनाव में भी सत्ता पर इदरिस ही काबिज होने वाले थे ... 
देश में सरकार विरोधी सुर तेज हो रहे थे ... देश में तमाम तरह की पाबंदियां थीं ... 2008 में ही सरकार फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया अकाउंट्स पर पाबंदी लगा चुकी थी ... अभी तक चाड में सोशल मीडिया का इस्तेमाल चुनिंदा लोग ही कर पाते हैं .... मीडिया पर सरकार का हमेशा से नियंत्रण रहा है ... रेडियो औऱ टेलीविजन पर सरकार के पक्ष में ही खबरें दिखाई जाती रही हैं.. सरकार की नीतियों के खिलाफ लिखने वाले पत्रकारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होती रही है .. इन सबके बीच 2016 में चाड में एक बार फिर राष्ट्रपति चुनाव हुए थे... इस चुनाव में भी इदरिस डेबी ने खुद को उम्मीदवार बनाया .... इदरिस ने चुनाव में राष्ट्रपति के टर्म लिमिट को भी मुद्दा बनाया था ... चाड ने कहा We must limit terms, we must not concentrate on a system in which a change in power becomes difficult.... हालांकि चाड खुद पांचवी बार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ रहे थे जिसमें उन्हें 10 उम्मीदवारों से टक्कर मिली... इदरिस डेबी 2016 में भी चुनाव जीत गई .. कहते हैं मीडिया और सरकारी संस्थानों पर नियंत्रण ही चाड के काम आया था ... हालांकि 2018 में इदरिस डेबी ने संविधान में एक और बदलाव किया जिसकी बदौलत अब वो 2033 तक राष्ट्रति रह सकते हैं ... 
लगभग एक करोड़ अड़सठ लाख की आबादी वाले उत्तरी अफ्रीकी देश चाड के ज़्यादातर लोग अपनी जीविका कृषि से ही चलाते हैं...  जबकि इस देश में ऊपजाऊ ज़मीन कम और रेगिस्तान अधिक है....  हालाँकि चाड के पास खनिज भंडार की कमी नहीं है, यहाँ सोना तो है ही यूरेनियम भी है लेकिन बुनियादी सुविधाओं का काफ़ी अभाव है....
प्राकृतिक संपदा से समृद्ध इस देश ने आर्थिक तरक्की भी नहीं की है ….संयुक्त राष्ट्र के आकलन के मुताबिक़ चाड दुनिया के सबसे पिछड़े देशों में से एक है... यहाँ की 40 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे बसती है .... कहते हैं परोक्ष रूप से देश के सभी संसाधनों पर सरकारी कब्जे की वजह से देश की ये दुर्दशा है ... 2017 तक देश की बजट डेफिसिट 400 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया था ... 
अक्सर लोगों को सैलरी तक नहीं मिल पाती .. हाल ही में देश में सैलरी की मांग को लेकर सिविल सर्विसेज से जुड़े लोगों ने हड़ताल भी की थी ... यहां तक कि अस्पताल और स्कूल भी बंद रहे ... देश नकदी की समस्या से भी जूझ रहा है ... सरकार बोनस और भत्तो में पहले ही पचास फीसदी तक की कटौती कर चुकी है ... पिछले कुछ साल में तेल निर्यात की कीमत में गिरावट आने के बाद से चाड की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। देश की ज्य़ादातर आबादी गरीबी में जी रही है। सियासी अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता के मामले में चाड सबसे बुरे देशों में शामिल है ...

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