सोमवार, 17 अगस्त 2020

mayawati

Bsp supremo मायावती आज कल उपदेशक की भूमिका में ज़्यादा नज़र आती हैं 
अपने मूल स्वभाव के विपरीत मायावती जी की भाषा ज़्यादा संयमित और मर्यादित है 
अब वे सरकारों की तीखी आलोचनाओं के वजाय  सलाह दे रही हैं 
इस बदलाव के पीछे की मजबूरी चाहें जो हों लेकिन लोकतंत्र में constructive opposition aur constructive criticism बहुत ही  सराहनीय है 
उमीद है की मायावती जी की यह कार्य शैली और भाषा भविस्य में भी बरक़रार रहेगी
आज के इस दौर में जब भारतीय राजनीति के एक से बड़कर एक महा रथी और पुरोधा मुँह पर टेप लगा कर बैठ गए हैं ऐसी स्थिति में मायावती जी के प्रयास  क़ाबिले तारीफ़ हैं 
लोक तंत्र में सवाल सत्ता और सत्ता रूढ़ दल से पूछने की रही है 
भारत में लगभग 64साल तक तो इसी परम्परा का निर्वहन होता रहा है विपछ से लेकर सभी संबिधानिक संस्थाएँ और मीडिया भी यही करता रहा है 
लेकिन सही मायने में सविधान और लोकतंत्र के मुताबिक़ देश अब चल रहा है हमारे सविधान को ब्रिटिश सविधान की नक़ल करके लिखा गया था 
ब्रिटिश सविधान में सत्तारूढ़ दल और सरकार से ज़्यादा विपछ को मर्यादा में रहकर  अपनी बात कहने की अपेछा की गयी है और वहाँ के लोग इसका पालन भी करते हैं 
अब वही काम भारत में भी हो रहा है हमारे देश के सबसे शीर्ष पद पर बैठे लोग तो पहले से सविधान और संसद के समछ नतमस्तक हो कर अपनी प्रतिवधता ज़ाहिर करते रहे हैं 
सुखद बात यह है की अब इसका पालन letter and spirit में सप्रीम कोर्ट सहित सबके द्वारा किया जा रहा  है 
हम सब सबके साथ सबके विश्वास और सबके विकास के रास्ते पर चल पड़े हैं 
भारत को आत्म निर्भर बनाने का नारा तो देश के पहले प्रधान मंत्री नेहरू जी से लेकर अब तक सुनने को मिलता रहा है 
लेकिन आर्थिक और करोना महामारी ने हमें अवसर दिया है आपदा को अवसर में बदलने में हम लोग पहले से ही पारंगत है इसका लाभ उठाकर हम नया भारत ज़रूर बनाएँगे 
नया भारत जिसमें मायावती जी जैसे नेता उपदेशक बन जाएँगे और तमाम धर्म गुरु और कथा बाचक कारागारों के भीतर होंगे 
वैसे भी हमारे देश में जेल जाना सम्मान की बात हैं हमारे आराध्य और सोलह कलाओं से परिपूर्ण भगवान कृष्ण तो जेल में ही पैदा हुए थे 
नेहरू जी भी लम्बे समय तक जेल में रहने के बाद देश के प्रधान मंत्री बने थे

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