मंगलवार, 14 जुलाई 2020

yuganda

एक बुरा सपना था तानाशाह इदी अमीन 
एक बुरे सपने की तरह याद किए जाने वाले इदी अमीन के शासनकाल को युगांडा के इतिहास का काला अध्याय कहा जाता है ... अपोलो मिल्टन ओबोटे के बाद और युसुफ लुले से पहले इदी अमीन ने बतौर राष्ट्रपति युगांडा पर शासन किया था ... लगभग 50 साल पहले 1971 में युगांडा की सत्ता पर इदीअमीन काबिज हुआ था और तभी उसने युगांडा के इतिहास में अपना नाम हमेशा के लिए लिखवा लिया ... 
इदी अमीन इंसानियत का कितना बड़ा दुश्मन था इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ब्रिटिश विदेश सचिव डेविड ओवेन ने इदीअमीन की मौत के बाद ये खुलासा किया था कि उन्होंने एक बार इदीअमीन की हत्या किए जाने के बारे में सोचा था ... डेविड ने इदीअमीन की तुलना कंबोडिया के तानाशाह पोल पोट से की थी और हत्या कराए जाने के विचार पर कहा .. "I'm not ashamed of considering it, because his regime goes down in the scale of Pol Pot as one of the worst of all African regimes"
अमीन ने चौथी तक की ही पढ़ाई की थी इसीलिए कई बार वो पढ़े लिखे लोगों के सुझाव पर जानबूझकर अमल नहीं करता था ...हालांकि जानने वाले कहते थे कि सारी बुराइयों के बाद उसके कई ऐसे काम किए जिसमें उसने अपनी काबिलियत साबित की .. 1946 में इदीअमीन ने ईम्पीरियल ब्रिटिश आर्मी ज्वाइन कर ली ..उस वक्त युगांडा कोलोनियल रूल के तहत चल रहा था कुक के तौर ब्रिटिश आर्मी ज्वाइन करने वाले इदीअमीन को बहुत जल्द आर्मी में एक सैनिक के तौर पर शामिल कर लिया गया ... 6 फीट 4 इंच लंबे इदीअमीन को 1959 तक अफांदे का रैंक दिया गया जो कोलोनियल ब्रिटिश आर्मी में किसी भी ब्लैक अफ्रीकन को दिया जाने वाला highest rank था.. आर्मी में रहते हुए इदीअमीन ने सोमालिया में हुए विद्रोह को दबाने के लिए किए गए ब्रिटिश आर्मी की कार्रवाई में अहम भूमिका निभाई थी .. इसके बाद केन्या में मऊ-मऊ विरोध को कुचलने में भी इदीअमीन ने अपने क्रूरतम तरीकों का उपयोग कर कामयाबी हासिल की ... हालांकि 1962 में युगांडा को कोलोनियल रूल से आज़ादी मिल गई थी जिसके बाद इदीअमीन युगांडा में कमीशन प्राप्त अधिकारी बन गया .. 1966 में इदीअमीन को युगांडा की सेना और एयरफोर्स का मुखिया भी बना दिय़ा गया था ... 
डॉ अपोलो मिल्टन ओबोटे के शासनकाल में इदीअमीन उनके सबसे भरोसेमंद अधिकारियों में से एक था लेकिन जल्द ही इदीअमीन ओबोटे के खिलाफ जाने वाला था ..... एक मिलिट्री कूप के जरिए अमीन ने डॉ मिल्टन ओबोटे को सत्ता से उखाड़ फेंका और दलील दी कि ओबोटे अपने ट्राइब्स लांगी और ओचोली को छोड़कर बाकी सभी ट्राइब्स डिस्आर्म कर रहे हैं ... हालांकि सच्चाई कुछ और थी ... इदीअमीन ने आर्मी के फंड में कुछ गड़बड़ियां की थीं और ओबोटे इसकी जांच करवाने जा रहे थे... इदीअमीन के कज़िन आइज़ैक मलियामुंगु इस बात की खबर इदीअमीन को दे दी ..इसके बाद ही सत्ता पलट की तैयारी शुरू हो गई थी ... अमीन अपनी वफादार आर्मी तैयार कर रहा था ... ओबोटे उसके इरादे भांप चुके थे …. उन्होंने सशस्त्र बलों की कमान अपने हाथ में ले ली थी लेकिन कॉमनवेल्थ देश की मीटिंग में भाग लेने गए ओबोटे की गैरमौजूदगी में इदीअमीन ने मिलिट्री कूप के जरिए सत्ता हथिया ली... ... सत्ता हथियाने के एक हफ्ते बाद फरवरी 1971 में अमीन ने खुद को युगांडा का राष्ट्रपति, सभी सशस्त्र बलों का प्रमुख कमांडर, आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ और चीफ ऑफ एयर स्टाफ घोषित कर दिया था... 
इसके कुछ ही दिन बाद इदीअमीन ने कहा था कि मैं उन अफ्रीकन नेताओं में से नहीं हूं जिसमें सत्ता की भूख है .... इदीअमीन ने कहा कि मेरा काम एक क्लीन सरकार हैंडओवर करना है ... और जब अगली सरकार आएगी तो उसे सारी जानकारी होगी ..और जब ऐसा होगा तो मैं वापस अपने बैरक में चला जाउंगा ... हालांकि ऐसा नहीं हुआ ... इदीअमीन ने इसके बाद लगभग 8 साल तक युगांडा पर शासन किया.. और अपने इस शासनकाल में ऐसे फैसले लिए जिसने उसे दुनिया के सबसे क्रूर तानाशाहों की कतार में ला खड़ा किया ... 



इदीअमीन ने एक बार कहा था कि युगांडा के सभी लोग उससे प्यार करते हैं.. मैं उनका हीरो हूं ... देश का हीरो हूं .. इसीलिए देश के सारे लोग मेरी सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है .... युगांडा के ये लोग इदीअमीन के सत्ता संभालने पर खुश भी हुए थे लेकिन इन्हें इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि उन्होंने एक सनकी को अपना मसीहा मान लिया है .... इदीअमीन के सत्ता से बेदखल होते होते देश में 5 लाख से ज्यादा लोग मारे जा चुके थे ... इदीअमीन को बुचर ऑफ युगांडा यानि युगांडा का कसाई कहा जाने लगा था ... इतिहासकार ने इसे 100 साल के इतिहास का सबसे क्रूर तानाशाह करार दिया .. 
काक्वा इस्लामिक कबीले से ताल्लुक रखने वाले इदीअमीन ने कभी भी औपचारिक तालीम हासिल नहीं की थी ... कहते हैं दुनिया में चल रहे शीत युद्ध के दौर में जब इदीअमीन ने युगांडा में तख्तापलट की साजिश रची तो इसमें पश्चिमी देशों की मौंन सहमति थी .. दरअसल पश्चिमी देशों को उस वक्त के युगांडा के राष्ट्रपति ओबोटे का झुकाव सोवियत संघ की तरफ दिख रहा था.. ऐसे में ओबोटे के सत्ता से बेदखल होने की घटना उन्हें मनमाफिक लग रही थी ... बकिंघम पैलेस में अमीन का स्वागत भी किया गया था ... 
लेकिन उस दौरान उन्हें अंदाजा नहीं था कि इदीअमीन ना सिर्फ युगांडा के लोगों बल्कि मानवता के लिए खतरनाक साबित होने जा रहा है .. इदीअमीन ने सेना के जरिए पूरे देश पर अपना नियंत्रण हासिल कर लिया था लेकिन विरोधियों को डराने और उन पर जुल्म ढाने के लिए उसे सेना के दुरुपयोग से भी कोई परहेज़ नहीं था... उसने खासकर अचोली और लांगो समुदाय के लोगों पर कहर ढाना शुरू कर दिया... इस समुदाय के करीब 5000 सैनिकों का नरसंहार कर दिया गया... इस दौरान करीब 10 हज़ार सिविलियन भी मारे गए ... फिर इदीअमीन ने राजनैतिक विरोधियों का भी शिकार करना शुरू किया... उसके खिलाफ लिखने वाले पत्रकार भी मारे जाने लगे.. मारे गए सबसे प्रमुख लोगों में पूर्व प्रधानमंत्री और बाद में मुख्य न्यायाधीश बनने वाले बेनेडिक्टो किवानुका, अंग्रेज बिशप जनानी लुवुम, सेंट्रल बैंक के भूतपूर्व गवर्नर जोसेफ मुबिरू, मकेरेरे यूनिवर्सिटी के कुलपति फ्रैंक कलिमुजो, एक प्रमुख नाटककार बायरन कवाडवा शामिल थे ... इनके अलावा इदीअमीन ने अपनी ही कैबिनेट के दो मंत्री एरिनायो विल्सन ओर्येमा और चार्ल्स ओबोथ ओफुम्बी की भी हत्या करा दी थी ... 
इदीअमीन ने 1972 में एशियाई मूल के लोगों को युगांडा से बाहर निकालने का आदेश दिया ... इस फैसले का असर तकरीबन 80 हज़ार एशियाई मूल के लोगों पर हुआ... इसमें ज्यादातर भारतीय शामिल थे.....ये वो भारतीय थे जिन्हें कोलोनियल रूल के तहत युगांडा में बसाया गया था...कहते हैं युगांडा की कुल आबादी का 1 फीसदी होने के बावजूद वहां की कुल संपत्ति के 20 फीसदी पर भारतीय मूल के लोगों का कब्जा था ...  इदीअमीन के आदेश के मुताबिक एशियाई मूल के लोगों को युगांडा छोड़ने के लिए 90 दिन का वक्त दिया गया .. उन्हें सिर्फ दो सूटकेस और 55 पाउंड की रकम ले जाने की इजाज़त दी गई ...  इदीअमीन के इस फैसले को युगांडा के लोगों का भारी समर्थन मिला .. लेकिन इससे युगांडा की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो गई ...
एशियाई मूल के युगांडा से निकाले जाने के बाद वहां सैकड़ों फैक्ट्रियां बंद हो गईं ... हजारों लोग बेरोजगार हो गए ... एशियन लोगों को देश से निकालने के अमीन के आदेश के खिलाफ कई देशों ने युगांडा पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए .. धीरे धीरे देश में भुखमरी के हालात पैदा हो गए... 1970 से पहले जहाँ युगांडा में 1 पाउंड की कीमत 20 Ugandan Shilling (युगांडन शिलिंग) थी वो 1979 तक 700 Ugandan Shilling तक पहुंच गई ... जातीय संघर्ष और बर्बादी होती अर्थव्यवस्था ने देश में गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा कर दिए ... उस वक्त इदीअमीन के सैनिकों के हाथ से बच निकले लोगों ने बाद में दुनिया को अपनी दास्तान सुनाई जिससे लोगों की रूह कांप गई ... एमनेस्टी इंटनेशनल के मुताबिक इदीअमीन के कार्यकाल में युगांडा में 5 लाख से ज्यादा लोग मारे गए.. हालांकि स्थानीय लोगों ने कहा कि ऐसे लोगों का आंकड़ा 10 लाख के आसपास था ... 1977 में इदीअमीन के हेल्थ मिनिस्टर रहे ... हेनरी काएम्बा ने देशद्रोह कर दिया और ब्रिटेन में जा कर बस गए.. बाद में उन्होंने 'ए स्टेट ऑफ़ ब्लड' नाम की किताब लिखी जिसमें इदीअमीन के खूनी नियमों के सारे राज़ का ज़िक्र है ...
इदीअमीन शुरुआत में अपने देश की जनता में काफी लोकप्रिय था... लोगों के नेता की तरह इदीअमीन जनता के साथ कबीलाई डांस किया करता था... उसे हावभाव देश के बाकी नेताओं की तरह फॉर्मल नहीं थे ..इदीअमीन ने अपनी छवि पीपुल्स लीडर की बनाई हुई थी... 
6 फीट 4 इंच लंबा इदीअमीन एक अच्छा स्पोर्स्ट्समैन था ..वो अच्छा रग्बी खेलता था और 9 साल कर लाइट हेवीवेट चैंपियन भी रहा था ... उसे स्वीमिंग का एक्सपर्ट भी कहा जाता था ... इदीअमीन ने देश के अलग-अलग ट्राइबल ग्रुप्स की महिलाओं से शादी की थी... उसकी 6 बीवियां थीं .. कहते हैं इसके अलावा कम से कम इदीअमीन के 30 महिलाओं के साथ विवाहेतर संबंध थे ... इदीअमीन ने एक बार कहा था कि वो देश में बहुत पॉपुलर है और इसीलिए उसे ओबोटे पसंद नहीं करते ... इदीअमीन को जानने वाले लोगों के मुताबिक उसने कई लड़कियों के प्रेमियों की हत्या करा दी थी... कहते हैं उसे जो लड़की पसंद आती थी उसके प्रेमी को मारकर उस लड़की को अमीन अपने हरम में शामिल कर लेता था ... 
इदीअमीन से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं जिसने दुनिया को हिला दिया.. अमीन के मंत्री रहे हेनरी काएम्बा ने अपनी किताब में 'ए स्टेट ऑफ़ ब्लड' में लिखा .. ‘अमीन ने अपने दुश्मनों को न सिर्फ़ मारा बल्कि उनके मरने के बाद उनके शवों के साथ भी बर्बरता पूर्ण व्यवहार किया. युगांडा के मेडिकल समुदाय के बीच ये बात आम थी कि मुर्दाघर में रखे बहुत से शवों के साथ छेड़छाड़ की गई थी और उनके गुर्दे, लिवर, नाक, और होंठ गायब मिलते थे.... जून 1974 में जब विदेश सेवा के एक अधिकारी गॉडफ़्री किगाला को गोली मारी गई तो उसकी आँखें निकाल ली गईं और उनके शव को कंपाला के बाहर जंगलों में फेंक दिया गया.''
काएम्बा के इदीअमीन के आदमखोर होने के इस दावे पर इदीअमीन ने खुद मुहर भी लगाई... एक बार इदीअमीन ने कहा था ... मैंने इंसानों का मांस खाया है ये चीते के मांस से भी ज्यादा नमकीन होता है ‘ … काएम्बा लिखते हैं कि इदीअमीन कहा करता था कि लड़ाई के दौरान अक्सर होता है कि आपका साथी सैनिक घायल हो जाता है. ऐसे में उसको मार कर खा जाने से आप भुखमरी से बच सकते हैं.''
कहते हैं इदीअमीन ने अपने ही देश के शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को क्रोकोडाइल से भरे नील नदी में फिकवा देता था... वो अपने घर में फ्रिज में मरवाए गए लोगों के सिर काटकर रखा करता था... शायद इसीलिए इदीअमीन को 20वीं सदी का सबसे बड़ा दरिंदा कहा जाता है ... 
इदीअमीन को कई तरह के टाइटिल रखना भी पसंद था.... 1976 के अंत के पास, अमीन ने आधिकारिक तौर पर खुद को "स्कॉटलैंड का बेताज बादशाह" घोषित किया .. अमीन कभी-कभी यह तर्क देता था कि वह "स्कॉटलैंड का अंतिम राजा" था..उसने ये भी दावा किया उसने ब्रिटिश को हराया है .. वो खुद को कॉन्कवेरर ऑफ दी ब्रिटिश एंपायर कहा करता था ...उसे खुद को His excellency, President for life , फील्ड मार्शल अल हाजी डॉक्टर इदीअमीन दादा कहलवाना पसंद था ... अमीन के इस तरह के दावों की वजह से युगांडा के बाहर की मीडिया ने उसका मज़ाक बनाना शुरू कर दिया था ... जुलाई 1976 में एक फ्रेंच एयरलाइनर के हाइजैकिंग में अमीन खुद शामिल था ... उसके सैनिकों ने इजरायली लोगों से भरे एक प्लेन को हाईजैक कर लिया था लेकिन इज़रायल के काबिल सैनिकों की मदद से ज्यादातर लोगों को बचा लिया ... खिसियाए अमीन ने इस हाईजैकिंग में घायल हुई एक बुजुर्ग महिला की हत्या करवा दी जिसका युगांडा के अस्पताल में इलाज चल रहा था... 
इस घटना ने अमीन के खात्मे की स्क्रिप्ट तैयार कर दी थी .. लेकिन इस पर आखिर मुहर उसके तंजानिया को हथियाने की कोशिशों के बाद लगी ... 

तंजानिया पर हमले की प्लानिंग में समर्थन ना मिलने पर इदीअमीन ने इज़रायल से दूरियां बना ली थीं ... इदीअमीन को उस वक्त लीबिया के तानाशाह रहे कर्नल गद्दाफी का भी समर्थन मिल गया .. इदीअमीन हिटलर को भी एडमायर किया करता था ... एक बार इदीअमीन ने कहा था .. छह मिलियन यहूदियों को जलाकर मार डालने वाला हिटलर सही था... 
अक्टूबर 1978 में इदीअमीन ने तंजानिया पर हमले के आदेश दे दिए थे ... लेकिन इस लड़ाई में इदीअमीन से त्रस्त हो चुके लोगों ने ही उसका साथ नहीं दिया लिहाजा तंज़ानिया की आर्मी ने 1979 में युंगाडा की राजधानी कंपाला पर कब्जा कर लिया ... गद्दाफी के समर्थन के बावजूद इदीअमीन को मुंह की खानी पड़ी और वो अपना ही देश छोड़कर भागने पर मजबूर हो गया ... भागकर इस तानाशाह ने लीबिया में शरण ली .. जिसके बाद वो सऊदी अरब चला गया ... 16 अगस्त 2003 में किडनी फेल हो जाने की वजह से इदीअमीन जैसे दरिंदे तानाशाह का अंत हो गया ... 
अपने 8 साल के शासन काल में लाखों लोगों के मरवाने का इदीअमीन को कभी पछतावा नहीं हुआ ... अपनी मौत के पहले अपने आखिरी इंटरव्यू में उसने कहा कि युगांडा को उसकी ज़रूरत है .. उसने एक बार युगांडा लौटने की कोशिश भी की थी लेकिन उस वक्त जायरे के प्रेसीडेंट रहे मोबुटू ने उसे वापस सउदी अरब लौटने पर मजबूर कर दिया...युगांडा लौटने की ख्वाहिश लिए हुए ही इदीअमीन की मौत हो गई ... जिसके बाद जेद्दा में उसे दफना दिया गया .... इसके बाद इसकी जिंदगी पर कई फिल्में बनाई जा चुकी हैं ... जिसमें इसके सनक और पागलपन को दिखाया गया है,.,,

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें