सोमवार, 20 जुलाई 2020

sharad pawar

शरद पवार का जीवन राजनैतिक उतार चढ़ाव का जीवन रहा है... शरद पवार के अगर राजनीतिक सफर पर नज़र डालें तो वो अपने मन के  मालिक की तरह राजनीति करते रहे हैं उनको न तो वैचारिक तौर पर और ना निजी तौर पर किसी भी दल के नेता से कभी कोई परहेज़ नहीं रहा वो अपने पॉलिटिकल मिनट के लिए अपने राजनीतिक एजेंडे को पूरा करने के लिए जहां जैसे ज़रुरत पड़ी वैसा जवाब दिया... उन्होंने कांग्रेस पार्टी के खिलाफ भी किया... और ये शरद पवार की पर्सनालिटी का ही नतीजा था कि वो एक तरफ कांग्रेस पार्टी से राजनीतिक गठबंधन रखते थे और दूसरी तरफ शिवसेना के संस्थापक बालासाहब ठाकरे के सबसे करीबी और शुभचिंतक माने जाते थे बहरहाल जब-जब उनको ज़रुरत पड़ी उन्होंने बालासाहब ठाकरे का नाम कांग्रेस नेतृत्व को दबाव में लेने के लिए हमेशा उत्तम कार्ड के रूप में इस्तेमाल किया... आज भी शरद पवार की राजनीति का तरीका वही पुराना है वही टेस्ट फॉर्मुला है जो पिछले विधानसभा के चुनाव में जब महाराष्ट्र की जनता ने किसी भी राजनैतिक दल को बहुमत नहीं दिया और मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर बीजेपी और शिवसेना के बीच में तकरार बढ़ी तो शरद पवार दोनों दलों से अलग-अलग डील करते दिखाई दिए थे... एक बार प्रधानमंत्री से किसानों के मुद्दे के बहाने मिलकर शरद पवार ने बीजेपी के साथ हाथ मिलाने का संकेत दिया... लेकिन जब वो फॉर्मुला फेल हो गया तो शिवसेना और कांग्रेस को एक मंच पर लाकर वैकल्पिक सरकार बनाने का काम किया... प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने भी शरद पवार की तारीफ करते रहे हैं... यहीं नहीं ये दोनों नेता समय समय पर एक-दूसरे की तारीफ करके अपने राजनैतिक विरोधियों को शिकस्त देते रहे हैं... भारतीय सीमा के अंदर चीन की घुसपैठ को लेकर जब प्रधानमंत्री ने ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई तो उस मीटिंग के दौरान शरद पवार ने राहुल गांधी का नाम लिए बगैर चीन के सवाल पर उनकी आलोचना कर डाली... और फिर वहीं शरद पवार ने कुछ दिन बाद मशहूर अखबार दा हिंदू में दिए गए एक इंटरव्यू में चीन के मामले में नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना की... शरद पवार राजनीति सिर्फ अपने लिए अपने परिवार के लिए और अपनी पार्टी के लिए करते हैं... शायद यही वजह है कि शरद पवार को उनके विरोधी उन्हें जवाब देने भी डरते हैं... वहीं कोरोना माहामारी को लेकर दिया गया बयान पवार की इसी राजनैतिक पैंतरेबाज़ी का हिस्सा है... पूरे देश को पता है राम मंदिर निर्माण के लिए होने वाली पूजा में प्रधानमंत्री को हिस्सा लेना है... वहीं दूसरी तरफ देश में कोरोना महामारी विकराल रूप लेती जा रही है... ऐसी स्थिति में शरद पवार का ये कहना कि मोदी सरकार राम मंदिर के एजेंडे को आगे करके कोरोना महामारी से लड़ने की कमज़ोरी छिपा रही है... ये एक गंभीर आरोप है... ऐसा लगता है कि शरद पवार का कोई काम प्रधानमंत्री के लेवल पर लटका पड़ा है... और उसको क्लीयरेंस दिलाने के लिए वो एक बार फिर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं... दूसरी तरफ ये भी हो सकता है कि महाराष्ट्र में अपने जनाधार को मज़बूत करने के लिए पवार राम मंदिर के निर्माण के सहारे कोरोना महामारी को बड़ा मुद्दा बनाने में लगे हों... मकसद चाहे जो भी हो लेकिन शरद पवार के जानने वालों का मानना है कि उनके बयान कहीं ना कही उनके राजनैतिक एजेंडे से जुड़े रहते हैं।

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