शनिवार, 25 जुलाई 2020

north korea

उत्तर कोरिया के सनकी तानाशाह किम जोंग उन पर दुनिया के तमाम शक्तिशाली देशों की नज़रें टिकी रहती हैं ... कई तरह के आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद किम ने अपने विध्वंसक हथियारों की टेस्टिंग नहीं रोकी है ... दूसरी तरफ देश में मानवाधिकारों के हनन की बातें सार्वजनिक होती जा रही हैं ... हद ये है कि मानवाधिकार उल्लंघन की आलोचना पर किम जोंग उन संयुक्त राष्ट्र परिषद को भी धमकी देने से नहीं चूकता ... डेमोक्रैटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया के आधिकारिक नाम वाले नॉर्थ कोरिया में कभी से कोई डेमोक्रैसी नहीं रही फिर चाहे सत्ता किम जोंग उन के दादा के हाथ में रही हो या फिर किम के पिता के हाथ में....  किम जोंग उन ने भी जनता के लिए अपने खानदानी रवैये को बरकरार रखा है ... 
नॉर्थ कोरिया एक देश के तौर पर 9 सितंबर 1948 को अस्तित्व में आया था ... 1910 में कोरिया साम्राज्य पर जापाना ने कब्जा कर लिया था... सेकेंड वर्ल्ड वॉर में जापान की हार के बाद कोरिया आज़ाद हो गया ... इस के दो हिस्से हुए नॉर्थ कोरिया और साउथ कोरिया ... नॉर्थ कोरिया आधिकारिक तौर पर खुद को समाजवादी राज्य बताता है लेकिन 1948 में स्थापना के बाद से ही इस देश पर एक परिवार का ही शासन रहा है ... नॉर्थ कोरिया के पहले प्रीमियर बने किम इल सुंग .. सुंग ने लगभग 50 साल तक कोरिया पर राज किया .. जिसके बाद सत्ता 1994 में किम जोंग इल के हाथों में आ गई थी .. किम जोंग इल  के कार्यकाल में नॉर्थ कोरिया ने सदी का सबसे भयंकर अकाल देखा था जिसमें एक अनुमान के मुताबिक लाखों लोग मारे गए थे ... मौजूदा किम जोंग ने 2011 में सत्ता संभाली ... नॉर्थ कोरिया पर राज करने वाले इन तीनों नेताओं को बेरहम तानाशाह माना जाता है .. जिनके कार्यकाल में नॉर्थ कोरिया पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा खतरनाक देशों में गिना जाता रहा है ... 
किम जोंग उन उत्तरी कोरिया पर राज करने वाले अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी है .. उत्तरी कोरिया की सरकारी मीडिया के मुताबिक किम जोंग का जन्म 8 जनवरी 1982 को हुआ था ... जबकि कोरिया के इंटेलीजेंस ऑफीसर के मुताबिक किम जोंग उन का जन्म 1983 में हुआ था .,.. हालांकि अमेरिका के एक सरकारी विभाग के मुताबिक किम जोंग 1984 में पैदा हुआ था ... ये इतना विवाद इसीलिए क्योंकि उत्तरी कोरिया में हर सूचना छांट कर, जांच परखकर दी जाती है .. इसीलिए किम जोंग उन के जन्म साल को लेकर भी कई तरह की बातें कही जाती हैं ... किम जोंग उन के तीन भाई बहनों में ये दूसरी संतान था ... हालांकि किम जोंग का एक सौतेला भाई भी हुआ करता था जो इन सबसे बड़ा था और उत्तरी कोरिया के नियम कायदों के मुताबिक किम जोंग इल की मौत के बाद सत्ता उसी के हाथ में आनी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ ... शायद इसीलिए कि तानाशाही के लिए जिन गुणों की ज़रूरत थी वो सब किम जोंग उन में थीं ... 
किम की स्कूली शिक्षा स्विट्ज़रलैंड में हुई थी ... और उसके स्कूल में साथ पढ़ने वाले लोगों के मुताबिक किम जोंग उन काफी शर्मीला और पढ़ने में ठीक ठाक था ... उसे बास्केटबॉल खेलने का शौक था और राजनीति में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी ... किम के बचपन के इन दिनों के बारे में कई तरह की रिपोर्ट्स आती रही हैं ..कभी भी किसी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई ..स्विटज़रलैंड से साल 2000 में किम जोंग उन वापस बुला लिया गया था .. जिसके बाद उसने उत्तरी कोरिया की राजधानी प्योंगयांग में अपने दादा के नाम पर बने मिलिट्री स्कूल में दाखिला ले लिया था ... कहते हैं तभी से इसके कोरिया के अगले तानाशाह के तौर पर ताजपोशी होनी तय हो गई थी ... 2011 में पिता की मौत के बाद किम जोंग उन ने महज 27 साल की उम्र में सत्ता संभाल ली थी .. 
कहते हैं कि 2001 तक उत्तरी कोरिया में ऐसा लगता रहा था कि किम जोंग उन का सौतेला भाई किम जोंग नाम ही देश का अगला शासक होगा लेकिन ऐसा नहीं हो पाया था .. 2001 में फेक पासपोर्ट पर जापान जाने की कोशिश करते हुए पकड़े जाने के बाद किम जोंग नाम को देशनिकाला दे दिया गया था ... बाद में किम जोंग नाम ने कहा था कि उसे तानाशाही नीतियों के खिलाफ बोलने की सज़ा दी गई .. 2017 में किम जोंग नाम क्वालालंपुर एयरपोर्ट पर हुए रसायनिक हमले में मारा गया था ...इसकी साजिश किम जोंग उन के कहने पर ही रची गई थी ... जिस दिन किम जोंग नाम की मौत हुई उस दिन उसके पास से 1,20,000 डॉलर कैश मिला था ... कहते है कि किम जोंग नाम अमेरिका की सीक्रेट एजेंसी सीआईए के लिए काम करता था ... इसका खुलासा किम जोंग उन पर लिखी गई एक किताब the great successor  में पत्रकार और लेखिका एना फाइफील्ड ने किया .. एना के मुताबिक किम जोंग उन का आलोचक रहा किम जोंग नाम सीआईए को उससे जुड़ी जानकारियां दिया करता था.. इसीलिए उसकी हत्या करा दी गई थी ... लेकिन अपने विरोधियों या रिश्तेदारों की हत्या करवाने में किम जोंग उन के शामिल होने का ना तो पहला मामला था ना ही आखिरी होने वाला था ... 
2011 में किम जोंग उन 27 साल की उम्र में नॉर्थ कोरिया का लीडर बन गया था ... सत्ता संभालने के बाद  कई साल तक किम जोंग उन ने अपने खानदान के दिखाए रास्ते पर चलकर ही देश पर शासन करना शुरू कर दिया था .... इनमें विरोधियों को मरवाने, मीडिया को पूरी तरह कंट्रोल करने और मनमाने हुक्म देने जैसी चीजें शामिल हैं 
कहते हैं कि किम जोंग उन ने सत्ता संभालने के बाद ऐसे सारे लोगों को मौत के घाट उतार दिया था जिससे उसकी सत्ता को खतरा हो सकता था ...एक रिपोर्ट के मुताबिक 2017 आते आते 340 लोगों की हत्या कराई .. इसमें किम के अपने फूफा गैंग सोंग थाएक भी शामिल था ... गैंग सोंग थाएक की हत्या काफी दिनों तक सुर्खियां बनता रही थीं ...गैंग उत्तरी कोरिया के नेशनल डिफेंस कमीशन का वाइस चेयरमैन रह चुके थे जो किम के पिता की तबीयत खराब होने पर देश के सुप्रीम लीडर के तौर पर काम कर रहे थे .. किम जोंग उन के सत्ता संभालने के बाद दो साल तक गैंग सोंग थाएक ने किम के मुख्य सलाहकार के तौर पर काम किया था .. अचानक एक दिन गैंग सोंग थाएक पर सत्ता विरोधी होने के आरोप लगाए गए और इसके कुछ ही दिन बाद 2013 के दिसंबर में थाएक को मौत की सज़ा  दिए जाने की खबरें दुनिया भर में सुर्खियां बन गई थीं .. खबरें आईं कि थाएक को भूखे कुत्तों के सामने छोड़ दिया गया था.. कहा जाता है कि थाएक के साथ साथ उनके परिवार के कई सदस्यों की भी हत्या कर दी गई थी ... 
किम जोंग उन पर छोटी से छोटी बातों पर हत्या की सज़ा दिए जाने के आरोप लगते रहे हैं .. दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी ने एक बार खुलासा किया था कि किम की पार्टी के 10 कार्यकर्ताओं को सिर्फ इसलिए गोलियों से भून दिया गया था क्योंकि वो दक्षिणी कोरिया का टीवी कार्यक्रम देखते थे और घूस लिया करते थे... इस एजेंसी ये भी दावा किया था किम ने एक साल में 50 से ज्यादा अधिकारियों की हत्या करा दी थी .. 
किम जोंग उन को विरासत में एक ऐसा देश मिला था जिस पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तमाम तरह की पाबंदियां लगी हुई थीं ... उत्तर कोरिया पर 2006 से ही संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंध लगा रखा था ... बैलिस्टिक मिसाइल, पांच परमाणु परीक्षण और लंबी दूरी की मिसाइल के परीक्षणों के बाद संयुक्त राष्ट्र ने कदम उठाया था ...इसके बावजूद किम जोंग उन इस तरह के परीक्षण नहीं रोके ..सत्ता संभालने के बाद महज 9 साल में किम ने 80 से ज्यादा मिसाइलों का परीक्षण किया ... 
इसके बाद भी किम जोंग उन रुका नहीं है... भले ही संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका के दवाब में किम जोंग ने परमाणु कार्यक्रम रोकने पर सहमति जताई है लेकिन ये सब बहुत बड़ा झूठ साबित हुआ है ... उत्तर कोरिया में किम जोंग उन की मौजूदगी में बैलिस्टिक मिसाइल टेस्ट होते रहे हैं .. कहते हैं कि उत्तर कोरिया के पास ऐसे हथियार हैं जो पूरे अमेरिका को एक बार में तबाह कर सकते हैं ... इतना ही नहीं उत्तर कोरिया हिरोशिमा में गिराए गए परमाणु बम से 16 गुना ज्यादा शक्तिशाली बम का भी परीक्षण कर चुका है ... 
दुनिया के बाकी देश जहां परमाणु हथियारों को खत्म करने पर सहमति बना चुके हैं ... नॉर्थ कोरिया एक मात्र ऐसा देश है जिसने इस सदी में परमाणु हथियारों का परीक्षण करता आया है .... एक्सपर्ट्स के मुताबिक ये एक ऐसा मसला है उत्तर कोरिया की जनता को शक्तिशाली और सुरक्षित होने का अहसास दिलाती है ... वहीं लोग ये भी कहते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय दवाब में परमाणु हथियार हटाने वाले लीबिया के तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी की सरेआम हत्या की घटना को देखने के बाद किम जोंग उन कभी भी अपने परमाणु हथिय़ारों को खत्म नहीं करने जा रहा .. 
किम जोंग ने 2011 में सत्ता संभालने के बाद कुछ बदलाव के संकेत दिए थे ... किम ने खुद की एक उदार छवि दिखाने के लिए 2012 में मोरानबोंग बैंड के एक म्यूजिकल कंसर्ट में हिस्सा लिया ... इसी साल नॉर्थ कोरिया के एक मिसाइल परीक्षण फेल हो जाने पर किम ने पहली बार सार्वजनिक मंच पर इसे कबूल किया .. इतना ही नहीं देश में भी बदलाव दिखने लगे थे तभी किम के पिता के शेफ रह चुके जापानी मूल के केंजी फूजीमोतो ने उत्तरी कोरिया की अपनी विजिट के दौरान कहा था किम जोंग उन के सत्ता में आने के बाद से उत्तरी कोरिया काफी बदल गया है .. लेकिन क्या सच में ऐसा हो पाया था ... 
आर्थिक तौर पर उत्तरी कोरिया में बहुत बड़े बदलाव आ गए हों ऐसा नहीं लगता ... उत्तरी कोरिया की राजधानी प्योंगयांग में आसमान छूने वाली ऊंची ऊंची इमारतें हैं और पहली नज़र में चारों तरफ समृद्धि नज़र आती है लेकिन ऐसे कोई दस्तावेज नहीं हैं  जो ये साबित करें कि उत्तरी कोरिया में रह रहा आम आदमी समृद्ध हो और एक अच्छी जिंदगी जी रहा हो .. 
2013 में किम जोंग उन ने कहा था कि North Koreans will never have to tighten his belt again .. किम दरअसल अपने लोगों को ये संदेश देना चाहता था कि उनकी जिंदगी बेहतर होने वाली है .. इसके बाद किम अक्सर फैक्ट्रियों और दुकानों में नज़र भी आने लगा ... लेकिन इससे क्या बदलाव हुए ये कहा नहीं जा सकता ... उत्तर कोरिया किसी भी तरह का आर्थिक डेटा नहीं देता ... एक दावे के मुताबिक 1960 के दशक से लेकर अभी तक उत्तर कोरिया ने कोई आर्थिक डेटा पब्लिश नहीं किया है.... दक्षिण कोरिया का सेंट्रल बैंक सरकारी और इंटेलिजेंस से जुटाई जानकारी के आधार पर उत्तर कोरिया की जीडीपी के आंकड़े जारी करता है... जिसके मुताबित साल 2017 में उत्तर कोरिया का ग्रोथ रेट बीते 20 सालों में सबसे खराब रहा था ... शायद इसीलिए किम जोंग उन में देश पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को खत्म कराने की बेचैनी दिखने लगी थी ... 
इसीलिए कभी अमेरिका के राष्ट्रपति रहे बराक ओबामा को बंदर कहने वाले किम जोंग उन मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से नजदीकियां बढाने की कोशिश करने लगा था.. लेकिन परमाणु हथियारों के मसले पर ऐसा नहीं हो सका ...और किम जोंग उन ने डोनाल्ड ट्रंप को Depraved और stupid करार दिया.... किम जोंग उन ने साउथ कोरिया से भी रिश्ते सुधारने की कोशिश की और पहली बार नॉर्थ कोरिया के नेता के तौर पर धुर विरोधी माने जाने वाले साउथ कोरिया की जमीन पर भी गया ..
नॉर्थ कोरिया पर तमाम तरह के आर्थिक प्रतिबंधों के बीच चीन ने हमेशा उत्तरी कोरिया के लिए अपने बाज़ार खोले रखे .. इस मामले में सिर्फ चीन के साथ ही किम जोंग उन के रिश्ते सही रहे ... किम ने 2018 में अपने निजी ट्रेन से चीन की यात्रा की .. 
इन सबके बीच आम आदमी के अधिकारों के हनन को लेकर भी किम जोंग उन सुर्खियों में बना रहा 
डेमोक्रेसी इंडेक्स में आज भी नॉर्थ कोरिया सबसे निचले पायदान पर यानि 167 देशों में सबसे नीचे आता है .. कनाडा की ह्यूमन राइट्स के लिए काम करने वाली एक संस्था हान व्यॉएस के मुताबिक नॉर्थ कोरिया में 99 फीसदी लोगों के पास ना तो पर्याप्त भोजन है ना ही पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं ... इनके पास आय के भी साधन मौजूद नहीं हैं .. कहते हैं कि नॉर्थ कोरिया के कानून के मुताबिक सरकार और सेना के अधिकारियों के अलावा यहाँ किसी को भी कार रखने की इजाज़त नहीं है
उत्तरी कोरिया के लोग अंतर्राष्ट्रीय क्या अपने देश में भी यात्राएं करने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं उन्हें इसके लिए सरकार से इजाज़त लेनी होती है .... 
नॉर्थ कोरिया में रेडियो, टीवी लेकर सोशल मीडिया तक सरकार के नियंत्रण में है जिसका इस्तेमाल नॉर्थ कोरिया के नागरिकों को चुनी हुई सूचनाएं देने के लिए किया जाता है .. इतना ही नहीं विदेशी मीडिया को भी सीमित सूचनाएं ही दी जाती हैं ... पत्रकारों को कहीं भी कवरेज के लिए 10 पन्नों के सरकारी गाइडलाइंस का पालन करना पड़ता है ... इंटरनेट के इस्तेमाल पर भी सरकारी पाबंदी लगी हुई है ... कहते हैं कि उत्तरी कोरिया के लोगों को बाहर के देशों में लोगों की जानकारी नहीं होती क्योंकि वहां की मीडिया में सिर्फ उत्तरी कोरिया के बारे में ही दिखाया जाता है .. कहते हैं स्कूल में जो इतिहास पढाया जाता है उसमें किम के दादा को भगवान की तरह बताया गया है .. 
उत्तरी कोरिया के जेलों के बारे में लिखने वाले एक शख्स ने वहां के हालात हिटलर के नाजी कैंप से भी बदतर होने का दावा किया था ... 
किम जोंग उन की तानाशाही शख्सियत का अंदाजा इस बात से लगाइए कि एक बार अमेरिकी कंपनी सोनी पिक्चर्स ने दी इंटरव्यू के नाम से फिल्म बनाई थी जिसकी कहानी किम की शख्सियत से मिलते जुलते तानाशाह की हत्या की साजिश पर आधारित थी ... ये बात किम जोंग उन को पसंद नहीं आई... लिहाजा किम जोंग उन की साइबर सेना सीक्रेट युनिट 121 ने ना सिर्फ सोनी पिक्चर्स के कंप्यूटर हैक किए बल्कि कंपनी की गोपनीय और व्यक्तिगत जानकारियां निकालकर सार्वजनिक कर दीं .. इसी साइबर सेना ने सिनेमा घरों को फिल्म रिलीज करने की सूरत में आतंकी हमले की धमकी भी दी ... आखिरकार फिल्म नेट पर रिलीज की गई ..इसी फिल्म का समर्थन करने पर खिसियाए उत्तर कोरिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को बंदर कहा था ... 
इस तानाशाह की नीतियों की वजह से उत्तर कोरिया के आंतरिक हालात के बारे में ज्यादा पता नहीं चल पाता लेकिन दक्षिण कोरिया की मीडिया के हवाले से आंतरिक विद्रोह की खबरें सामने आती रहती हैं ... मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अक्सर दक्षिण कोरिया की सीमा से उत्तर कोरियाई विद्रोहियों गुब्बारे उड़ाते हैं जिन पर तानाशाह किम जोंग उन को भला बुरा कहा जाता है... कई बार गुब्बारों पर अपशब्द भी लिखे होते हैं ... इस बात के लिए किम जोंग उन और उसकी बहन किम यो जॉन्ग ने साउथ कोरिया को जिम्मेदार ठहराते हैं ... 
किम जोंग उन की निजी जिंदगी से जुड़ी सूचनाएं कभी सार्वजनिक नहीं होतीं ... मसलन अभी भी ये विवाद है कि किम जोंग उन और उनकी पत्नी री सोल जू के कितने बच्चे हैं ... कोई एक बच्चा होने की बात करता है तो कोई तीन ... ये कहां हैं और क्या करते हैं इसे रहस्य रखा गया है .. उत्तरी कोरिया में 15 अप्रैल को सालाना होने वाले कार्यक्रम डे ऑफ द सन में किम जोंग उन की गैरमौजूदगी ने उसके बीमार होने की खबरों को हवा दी थी .. लगभद 20 दिन तक किम जोंग नज़र नहीं आया लेकिन कभी भी आधिकारिक तौर पर ये नहीं बताया कि किम जोंग उन कहाँ है ...  दरअसल इस दुनिया में उत्तरी कोरिया एक मात्र ऐसा देश है जहां के राष्ट्राध्यक्ष के बारे में इतने सारे रहस्य सामने आते रहते हैं ..... इन्ही रहस्यों के बूते ये तानाशाह आज भी एक डेमोक्रैटिक कहे जाने वाले देश में सत्ता पर काबिज है ..

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