मंगलवार, 14 जुलाई 2020

Libya

लीबिया में जिस दिन मुअम्मर गद्दाफी की सरेआम हत्या की गई थी उसके कुछ दिनों बाद तक लीबिया से लेकर दुनिया के अलग अलग जगहों पर जश्न मनाया जाता रहा ... मुअम्मर गद्दाफी ने लीबिया पर 42 साल तक राज किया था ... महज 27 साल की उम्र में बिना खून बहाए तख्ता पलट करने वाले एक attractive personality के धनी लीबियाई सेना के इस कैप्टन ने बहुत जल्द देश के लोगों के दिलों में जगह बना ली थी ... लीबिया के लोगों ने मुअम्मर गद्दाफी को अपना नायक मान लिया था .. बिंदास रहन सहन वाले मुअम्मर गद्दाफी की अगुआई में लीबिया की जनता बेहतर भविष्य के सपने संजोने लगी थी ... 
1969 में लीबिया में अल फतह क्रांति हुई थी .... कर्नल मुअम्मर गद्दाफी की अगुआई में हुई इस क्रांति ने शासक इदरीस से लीबिया का शासन छीनकर आर्मी के हाथ में दे दिया ..... गद्दाफी ने 1967 में अरब और इजरायल युद्ध में अरब की हार के बाद अपने देश लीबिया में उपजे राष्ट्रवाद को सफलता से भुना लिया ... इस हार की वजह से अरब देशों में भारी अंसोतष फैला हुआ था... लीबिया के लोग इस हार के लिए शासक इदरीस को जिम्मेदार मानते थे ... राजशाही से नाखुश लीबियाई जनता के मिजाज को कैप्टन गद्दाफी ने भांप लिया था इसीलिए तख्तापलट की पूरी स्क्रिप्ट तैयार की गई .. 
गद्दाफी ने सत्ता संभालते ही राजाशाही खत्म की, पुराना संविधान खत्म किया और लीबियन अरब रिपब्लिक की स्थापना की ... गद्दाफी ने नारा दिया .. ‘freedom, socialism and unity’ ... गद्दाफी के नेतृत्व में सत्ता संभालने वाली गद्दाफी की पार्टी लीबियन रिवॉल्य़ूशनरी कमांड काउंसिल ने राजशाही के जमा किए हुए सारे फंड को एजुकेशन, हेल्थकेयर और हाउसिंग ऑर ऑल पर खर्च करना शुरू किया.... 
पचास के दशक के आखिरी सालों में लीबिया में तेल रिज़र्व सामने आने के बाद ये देश दुनिया की नज़रों में आ गया था.. यहां की आर्थिक स्थिति बदलने वाली थी ..गद्दाफी ने लीबिया की आर्थिक दशा पर ध्यान देते हुए बाहर से आई तेल शोधक कंपनियों को चेतावनी दी कि नया करार करें या देश से बाहर निकल जाएं। इससे लीबिया की आर्थिक दशा में भारी उछाल आया। गद्दाफी के शासन की शुरुआत में लीबिया का पर कैपिटा इनकम 11 हज़ार यूएस डॉलर से ज्यादा पहुंच गया और इस लीबिया इस लिहाज से लीबिया अफ्रीकी देशो में पांचवें स्थान पर आ गया ... 
गद्दाफी ने हिटलर के रेड बुक की तर्ज पर अपनी ग्रीन बुक बनाई थी .. तीन वॉल्यूम में पब्लिश हुए इस किताब में गद्दाफी की राजनैतिक विचारधारा दर्ज है .. गद्दाफी ने लीबिया को एक जम्हूरिया घोषित किया, जिसका मतलब था ‘लोगों का राज’...  इसके पीछे तर्क दिया गया कि लीबिया अब सही मायनों में लोकतंत्र बन गया है... हालांकि ऐसा काफी दिनों तक नहीं चला ... एक नेशनल हीरो के तौर पर जिस गद्दाफी का उदय हो रहा था वही आगे चलकर सबसे क्रूर तानाशाह साबित हुआ .. 
अपने शासन के शुरुआती दिनों में गद्दाफी ने लीबिया की जनता के कई काम किए ..  लीबिया में शिक्षा और बिजली मुफ्त दी जाती थी ... स्वास्थ्य सेवाएं भी गद्दाफी के समय में बेहतर हो गईं .. गद्दाफी के इन कामों ने लीबिया में उसे काफी लोकप्रिय बना दिया ... गद्दाफी ने अपनी ग्रीन बुक में लिखा कि ‘घर हर व्‍यक्ति और परिवार के लिए मानवाधिकारों से जुड़ा मुद्दा है। ऐसे में घर पर किसी और का हक नहीं होना चाहिए..’ लेकिन गद्दाफी धीरे धीरे एक तानाशाह बनता जा रहा था ... अरब नेशनलिज्म की थ्योरी के आधार पर लीबिया की सत्ता चलाने वाले गद्दाफी ने थर्ड इंटरनेशनल थ्योरी अपना ली थी ... ये थ्योरी इस्लामी गणतंत्र से प्रभावित थी ... 
इस्लामी गणतंत्र का नारा लगाते हुए गद्दाफी ने 1973 में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पाबंदी लगा दी... 1980 में गद्दाफी ने कबाइली गुटों के खिलाफ युद्ध शुरू कर दिया.. अफ्रीका के अरब देशों के समर्थन के लिए गद्दाफी ने उत्तरी अफ्रीका के गैर अरब लोगों के समुदाय पर निशाना साधा... 1987 में गद्दाफी ने चाड में ईसाइयों के खिलाफ भी युद्ध छेड़ दिया.... नतीजा ये हुआ कि हज़ारों लोग बेमौत मारे गए ... 
गद्दाफी ने सांस्कृतिक क्रांति के दौरान सभी निजी व्यवसाय बंद करवा दिए .. किताबों को आग के हवाले करवा दिया .. गद्दाफी अपने आलोचकों को मौत के घाट उतारने लग गया ... कहते हैं कि अमेरिका, युरोप और मिडिल ईस्ट में बसे अपने आलोचकों को मारने के लिए गद्दाफी ने कॉन्ट्रैक्ट किलर तक का इस्तेमाल किया ... 
गद्दाफी बाद में आतंकी संगठनो की भी मदद करने लगा ... गद्दाफी पर आरोप थे कि उसने उत्तरी आयरलैंड के आईआरए जैसे आतंकी गुटों के साथ-साथ फिलीपीन्स में अबू सय्याफ जैसे खतरनाक आतंकी सगठन को भी समर्थन दिया... गद्दाफी पर स्कॉटलैंड के लॉकरबी में दिसंबर 1988 में पैन एम के एक विमान को बम से उड़ाने की साजिश का भी आरोप लगा ... शुरुआत में लीबिया की सरकार इससे इनकार करती रही ... इस विमान हादसे में 270 लोग मारे गए थे... अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई तरह के प्रतिबंध लगने के बाद आखिरकार 11 साल बाद गद्दाफी की सरकार ने ये माना कि उन्होंने ये विमान गिरा दिया था ... लीबिया की सरकार ने इसके ऐवज़ में तीन अरब डॉलर का मुआवजा दिया... गद्दाफी का ये तानाशाही रवैया अपने देश की जनता के लिए भी था ... 
गद्दाफी की सरकार में उसके करीबी लोग ही शामिल थे ... एक ऑयल रिच देश के तौर पर लीबिया काफी समृद्ध होता जा रहा था .. गद्दाफी अपने करीबियों के जरिए इस पर अपना पूरा कंट्रोल चाहता था ... 
गद्दाफी के शौक भी लोगों के सामने आने लग गए थे ... गद्दाफी हमेशा खूबसूरत महिला बॉडीगार्ड्स की टोली से घिरा रहता था... यूक्रेनी नर्स और गोल्डेन हेयर वाली बॉडीगार्ड्स जैसे शौक ने जल्द ही विदेशी मीडिया में गद्दाफी को सुर्खियों में ला दिया... गद्दाफी की मौत के बाद जो राज़ सामने आए उसने लोगों के मन में उसके लिए नफरत को और बढ़ा दिया... कहते हैं कि गद्दाफी को स्कूलों में जाना पसंद था ... गद्दाफी स्कूल जाकर स्टूडेंट्स से मिलने का कोई बहाना नहीं छोड़ता था ... बाद में खुलासा हुआ कि दरअसल गद्दाफी इस बहाने लड़कियों को पसंद करने जाता था ... जिस लड़की के सिर पर गद्दाफी हाथ रख देता उसके गार्ड्स उसे उठाकर गद्दाफी के हरम में ले जाते ... इसमें कम उम्र की लड़कियां भी शामिल होती थीं ... बाद में एनेक कोज़िय़ां नाम की एक रिपोर्टर ने गद्दाफी की सताई लड़कियों की कहानी लिखी ... इस किताब को नाम दिया गया Gaddafi’s Harem .. .. 
लीबिया में जो कुछ हो रहा था उस पर बाहरी देशों की नज़रें थीं ... लगातार बाहर के देशों में भी लीबिया में हो रहे मानवाधिकार हनन की बातें हेडलाइंस बना रही थीं ... लीबिया के इजिप्ट और चाड के साथ चल रहे सीमा विवाद, आईआरए और अबू सय्याफ जैसे आतंकी गुटों को दिया जाने वाला समर्थन और स्कॉटलैंड के लॉकरबी में विमान विस्फोट की साजिश करने जैसी घटनाओं ने लीबिया को दुनिया में अलग-थलग खड़ा कर दिया था ... अमेरिका, यूके और इजरायल के साथ लीबिया के संबंध खराब हो चुके थे… अमेरिका पहले से ही लीबिया के इस तानाशाह को पसंद नहीं करता था... गद्दाफी की आतंकी गुटों के समर्थन की नीतियों की वजह से अमेरिका के लीबिया के साथ संबंध पहले भी ठीक नहीं थे ... अमेरिका की लीबिया के प्रति नफरत का अंदाजा इस बात  से लगाया जा सकता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन सार्वजनिक मंच पर गद्दाफी को मैड डॉग ऑफ मिडिल ईस्ट कहा था ..  

गद्दाफी की नीतियों ने लीबिया को दुनिया के तमाम शक्तिशाली देशों की आंखों में खटकने पर मजबूर कर दिया था ... लिहाजा तानाशाह का खात्मा तो होना था लेकिन कैसे इस पर अभी सवाल थे.... अमेरिका के साफ तौर पर विरोध के बावजूद गद्दाफी एक तानाशाह के तौर पर लीबिया की सत्ता पर लंबे वक्त तक काबिज रहा ... गद्दाफी के देश में भी विरोध के सुर तेज हो चुके थे ... विरोधियों के मुताबिक गद्दाफी खुद को राजा की तरह ही सर्वेसर्वा समझने लगा था ... गद्दाफी पर भ्रष्टाचार के भी आरोप लगने लगे थे ... आरोप थे कि गद्दाफ़ी ने अकूत संपत्ति कमाई और विदेशी बैंकों में जमा किया... साल 2009 तक ऐसा ही चलता रहा .... 
लेकिन 2009 के आखिर आते आते तक अरब देशों में सरकार के खिलाफ लोग जुटने लगे थे ... ट्यूनिशिया से शुरू हुई अरब जगत की क्रांति 15 फरवरी 2011 को लीबिया पहुंच गई.... सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए... . गद्दाफी ने इसे दबाने की कोशिश की लेकिन विरोधी गुटों को अमेरिका का समर्थन मिला हुआ था ... लिहाजा गद्दाफी की सारी कोशिशें नाकाम साबित हुईं .. गद्दाफी पर यूएन की तरफ से कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए गए ...  इजिप्ट में होस्नी मुबारक के हटने के बाद लीबिया के विरोधियों को और ताकत मिल गई... गद्दाफी में देश के पूर्वी हिस्से में सक्रिय विद्रोहियों को अल कायदा का आतंकवादी बताया... पूरे देश में फैले विरोध के बीच में गद्दाफी का प्रभाव उसके गृहनगर सिर्ते तक सिमट कर रह गया... बिगड़ते हालात और लीबिया पर आए दिन हो रहे बमबारी के बीच गद्दाफी दक्षिणी लीबिया के अपने सिर्ते में छिप गया.. यही एक ऐसा इलाका था जहाँ गद्दाफी के वफादार सैनिकों का अभी तक कब्जा था .. 
इस दौरान ब्रिटेन और फ्रांस ने खुलकर लीबियाई विरोधियों को अपना समर्थन दे दिया... ये विरोधी ताकतवर होते चले गए ... आखिरकार 20 अक्टूबर 2011 को सिर्ते में इन विरोधियों ने गद्दाफी को ढूंढ निकाला... भीड़ ने गद्दाफी की जमकर पिटाई की फिर गोली मार दी ....brutal तानाशाह गद्दाफी का अंत भी काफी brutal हुआ ... और इसकी तस्वीरें पूरी दुनिया में कई महीनों तक सुर्खियां बनती रहीं ... 42 साल की तानाशाही से लीबिया को छुटकारा मिल गया था ...20 अक्टूबर 2011 वो दिन था जिस दिन लीबिया के ज्यादातर नागरिकों ने जश्न मनाया... दुनिया भर के नेताओं ने राहत की सांस ली ... लीबिया में उस वक्त की अंतरिम सरकार नेशनल ट्रांजिशनल काउंसिल के लड़ाके जीत की खुशी में डांस करने लगे ... लीबिया का ये ब्रदर लीडर गद्दाफी इस तरह इतिहास का हिस्सा बनकर रह गया...

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