शुक्रवार, 10 जुलाई 2020

Italy

दुनिया में जब भी तानाशाहों की बात होगी तो बेनिटो मुसोलिनी का नाम सबसे क्रूर तानाशाहों में ही गिना जाएगा ... अपने तानाशाही रवैये से हिटलर को भी अपना दीवाना बना लेने वाले मुसोलिनी की जिंदगी उतार चढाव की ऐसी कहानी है जो किसी को भी उसमें दिलचस्पी पैदा कर दे ... अपने भाषणों पर लोगों को झूमने पर मजबूर कर देने वाले इस जादूगर तानाशाह की जिंदगी फसानों से भरी थी और उसकी मौत भी एक फसाना बनी .... एक ऐसा फसाना जिसके बारे में सुनकर आज भी लोगों की रूह कांप जाए ... 
लगभग सौ साल पहले 19 वीं सदी के दूसरे दशक में मुसोलिनी का भाषण देने का अंदाज इटली के लोगों को अपना दीवाना बना रहा था.... ओज़ से भरे भाषण के जरिए प्रखर राष्ट्रवाद की बातें करने वाले मुसोलिनी ने जल्द ही इटली की जनता के दिलों में अपनी जगह बना ली .... इस लोकप्रियता और अपनी कूटनीतिक चालों की बदौलत मुसोलिनी ने इटली के सबसे कम उम्र का प्रधानमंत्री बनने में कामयाबी हासिल की.. 
एक रैडिकल सोशलिस्ट के घर में पैदा हुए मुसोलिनी का बचपन काफी गरीबी में बीता था.. नशे के आदी गैरजिम्मेदार पिता के साथ बढ़ते हुए मुसोलिनी का स्वभाव भी उग्र होता चला गया ... बचपन से लिट्रेचर में मुसोलिनी को खासी दिलचस्पी थी ..... लिखना और पढ़ना पसंद था... 18 साल की कम उम्र में ही मुसोलिनी ने एक शिक्षक के तौर पर नौकरी शुरू कर दी थी ... हालांकि एक साल बाद ही गरीबी से परेशान होकर मुसोलिनी स्विट्जरलैंड भाग गया ... वहां मुसोलिनी का उठना बैठना समाजवादियों के बीच होने लगा... समाजवादी विचारधार से बचपन से जुड़े रहे मुसोलिनी ने दो साल बाद 1904 में इटली वापस लौटने पर कुछ वक्त सेना में बिताया और फिर एक सोशलिस्ट अखबार में बतौर संपादक नौकरी करने लगाय... इस अखबार का नाम था अवांती ...
अवांती में संपादकीय लिखने वाले मुसोलिनी के मन में धीरे धीरे देश के लिए तथाकथित प्रेम जग रहा था ... मुसोलिनी ने खुलकर इटली की नीतियों के बारे में लिखना शुरू किया ...पहल विश्व युद्ध में इटली के न्यूट्रल रहने के फैसले के खिलाफ लिखने वाले मुसोलिनी को अवांती के संपादक के पद से हटा दिया गया ... इसके साथ ही समाजवादी विचारधारा से मुसोलिनी अलग हो गया ... यही वो वक्त था जो मुसोलिनी की जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट बना ... यही वो वक्त था जब इटली में फासीवाद जन्म लेने वाला था ... 
1918 में वर्ल्ड वार खत्म होने के बाद इटली पूरी तरह तबाही के कगार पर था .... लोगों में बदलाव की इच्छा थी ..... युद्ध में जीतने के बाद भी आम जनता को कुछ हासिल नहीं हुआ था ... इसी दौरान नेशन फर्स्ट जैसे नारे लोगों को लुभा रहे ... मुसोलिनी ने मौके को समझा और 1919 में नेशनल फासिस्ट पार्टी के नाम से एक राजनैतिक संगठन बना लिया ... इसमें मुसोलिनी ने अपने हमखयाल लोगों की भरती की.... बहुत कम समय में मुसोलिनी को अभूतपूर्व समर्थन मिलने लगा .. महज़ कुछ महीनों में मुसोलिनी के पार्टी समर्थकों की संख्या 20 हज़ार से 2 लाख तक पहुंच गई ... इसी समर्थन के बलबूते मुसोलिनी आगे चलकर निरंकुश तानाशाह बन गया... 
मुसोलिनी एक शो मैन था .... उसके भाषण का करिश्मा ऐसा था कि लोग वही सोचने लगते थे जो मुसोलिनी की सोच थी .... मुसोलिनी अपने भाषण में कहता था .. the king is nothing than a useless citizen … यानि राजा एक आम नागरिक से ज्यादा कुछ भी नहीं है... अपने इस तरह के भाषणों की वजह से वो लोकप्रिय होता गया ...  ये मुसोलिनी की खासियत थी वो सीधा लोगों की भावनाओं पर असर डालता था ... उसने अपने समर्थकों को ब्लैक शर्ट पहनने को कहा ... बाद में फासीवादी मुसोलिनी के समर्थकों की सेना को ब्लैक शर्ट के नाम से ही जाना जाने लगा ... मुसोलिनी ने मार्च ऑन रोम का नारा दिया .. मुसोलिनी का करिश्मा ऐसा था कि 1922 में 27-28 अक्टूबर की रात को लगभग 30,000 फासिस्ट लोगों के समूह ने रोम पर चढ़ाई कर दी .. इस समर्थन की बदौलत मुसोलिनी अपने विरोधियो में खौफ पैदा करने में कामयाब रहा था...इतिहासकार मानते हैं कि इस खौफ का नतीजा था कि लोकतांत्रिक सरकार की रक्षा से सेना ने भी अपने हाथ खींच लिए.... . इस घटना का नतीजा ये हुआ कि इटली के तत्कालीन प्रधानमंत्री को सत्ता छोड़नी पड़ी ... और किंग विक्टर इमैनुअल ने सत्ता मुसोलिनी को सौंप दी.. इसके बाद लगातार 21 साल तक मुसोलिनी ने इटली पर राज किया ... 1925 आते आते इटली से सारी विरोधी पार्टियां खत्म कर दी गईं ... मुसोलिनी और उसकी ब्लैक शर्ट सेना ये मानती थी कि लोकतंत्र कमजोर करता है और कुछ पाना है उसे छीनना होगा ...
मुसोलिनी की सोच काफी हिंसक बन चुकी थी ...इस सोच का असर उसकी आर्मी पर भी था ... उस वक्त जो समाजवादी नेता मुसोलिनी के फासीवाद के खिलाफ बोल रहे थे उनकी हत्या कर दी जाती थी ... धीरे धीरे सारे विरोधी चुप हो गए और मुसोलिनी इटली का बादशाह बन गया ... 
मुसोलिनी की निजी जिंदगी भी काफी चर्चित रही... उसे महिलाओं से नजदीकियां काफी पसंद थी ...उसकी अपनी सौतेली बहन के साथ भी संबंध थे .... मुसोलिनी ने दो शादियां की थीं ... उसकी लगभग 14 गर्लफ्रेंड्स थीं और सैकड़ों महिलाओं के साथ अलग-अलग समय पर उसके संबंध रहे .....कहते हैं सौतेली बहन के साथ संबंध को लेकर जब मुसोलिनी के पिता ने उसे रोकने की कोशिश की तो उसने खुदकुशी तक की धमकी दे दी .... मुसोलिनी की निजी जिंदगी के बारे में मुसोलिनी ने खुद लिखा भी ….. सार्वजनिक जगहों पर शर्टलेस होने से भी मुसोलिनी को परहेज़ नहीं था ..... मुसोलिनी अपने नितांत निजी पलो में भी हिंसक तरीके से पेश आता था... दरअसल violence उसकी जिंदगी जीने का तरीका बन चुका था ... इस तानाशाह की पहली पत्नी की मौत पिटाई की वजह से asylum में हुई थी और अपने बेटे लिटिल बेनिटो को 26 साल की उम्र में इसने ज़हर का इंजेक्शन देकर मरवा दिया था .... 
मुसोलिनी ने अपने शासन के शुरुआती दौर में कामयाबी हासिल की ...सोशल रिफार्म और पब्लिक वर्क्स के जरिए मुसोलिनी ने अपने देश की जनता का भरोसा हासिल किया... बड़े पैमाने पर रोजगार देने और देश की अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाकर मुसोलिनी ने एक सुपरमैन की छवि बना ली ... अपने तौर तरीकों से मुसोलिनी 20 वीं सदी में पैदा होने वाले हिटलर समेत बाकी सभी तानाशाहों का रोल मॉडल बन चुका था .... लेकिन मुसोलिनी जैसा  तानाशाह यहां कहां रुकने वाला था ....
मुसोलिनी की नजर इथियोपिया पर थी.. उसने 1935 में इथियोपिया पर कब्जे के लिए आर्मी भेज दी ... बिना किसी उकसावे के इतिहास के सबसे हिंसक तौर तरीकों से उसने इथियोपिया पर कब्जा कर लिया ... ये उसके विस्तारवाद की शुरुआत  थी ... 1937 में हिटलर के बुलावे पर मुसोलिनी जर्मनी गया .. जहाँ हिटलर की आर्मी और ताकत ने उसका ध्यान खींचा.. जो मुसोलिनी कभी हिटलर का रोल मॉडल था वो अब उससे खासा प्रभावित नज़र आ रहा था... हिटलर की यहूदियों को लेकर जो नीति थी कमोबेश यही नीतियां मुसोलिनी ने अपने देश में लागू कर दीं ... जो यहूदी हमेशा से कैथोलिक के साथ मिलकर रहते आए थे अपने नए कानूनों से मुसोलिनी ने उन्हें अलग कर दिया... यहूदी इटली में भी दोयम दर्जे के नागरिक बन गए ... उनके अधिकार छीन लिए गए ...यहां से मुसोलिनी के खिलाफ माहौल गर्माने लगा था ... 
1939 में मुसोलिनी ने ग्रीस पर हमला कर दिया ... इस लड़ाई में इटली को मुंह की खानी पड़ी ..... एक अनुमान के  मुताबिक 30 हज़ार लोग फ्रंट पर मारे गए वहीं करीब 50 हज़ार लोगों ने कैप्टिविटी में अपनी जान गंवा दी ... 
इसके बाद दूसरे विश्वयुद्ध में मुसोलिनी ने जर्मन तानाशाह हिटलर का साथ दिया लेकिन 1943 के आते-आते ये फैसला डिजास्टर साबित हुआ....  इटली में मुसोलिनी के इस फैसले को लेकर असंतोष फैलने लगा.... उसके नेतृत्व पर सवाल उठने लगे..... आखिरकार 1943 की 25 जुलाई को इटली के राजा ने उसकी सरकार बर्खास्त कर दी... उसकी बर्खास्तगी में मुसोलिनी के दामाद का भी हाथ था ... मुसोलिनी को गिरफ्तार किया गया..... हालांकि वो ज़्यादा दिनों तक जेल में नहीं रहा.... सितंबर में ही उसे हिटलर ने छुड़ा लिया.... हिटलर ने इसके बदले मुसोलिनी से यहूदियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा ... 6000 यहूदी गैस चैंबर में मार दिए गए .. मुसोलिनी की सरकार गिराने में शामिल रहे लोगों को भी मौत के घाट उतारा गया जिसमें खुद उसका दामाद भी शामिल था ... लिहाजा मुसोलिनी के लिए लोगों की नफरत कई गुना बढ़ गई ... अब मुसोलिनी का अंत नजदीक आने लगा था ... 
दूसरे विश्वयुद्ध की शुरुआत में मुसोलिनी ने कहा था कि अगर मैं युद्ध से भागने लगूं तो मुझे गोली मार देना ... उस वक्त मुसोलिनी को ये अंदाजा नहीं रहा होगा कि ये बात सच होने वाली है ... 1945 में जब ये साफ़ हो गया कि जर्मनी दूसरा विश्वयुद्ध हारने वाला है  तब इटली में लोकप्रिय ‘द लीडर’ रहे मुसोलिनी ने स्विट्ज़रलैंड भागने की कोशिश की... हालांकि वो नाकामयाब रहा .... उसे उसकी प्रेमिका और कुछ भरोसेमंद लोगों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया ... तारीख थी 27 अप्रैल 1945..... दूसरे दिन 28 अप्रैल को मुसोलिनी, उसकी प्रेमिका क्लेरेटा पेतासी और उनके पंद्रह साथियों को गोली मार दी गई.... लेकिन यहीं मुसोलिनी का अंत नहीं हुआ ... 
चश्मदीदों के मुताबिक इनके शवों को एक वैन में भर कर मिलान लाया गया.... सबको एक मैदान में डंप किया गया... जहां लोगों ने उसे गोलियां मारीं ... उस पर लात घूंसे बरसाए बाद में शव को चौराहे पर टांग दिया गया जिस पर लोगों ने पत्थर बरसाए... .. ये फासिज्म से लोगों की नफरत का नमूना था... 
उसकी मौत के लगभग 75 साल के बाद अब इटली में इस तानाशाह को कोई याद नहीं करता ... उसकी उग्र नीतियों को पसंद करने वाले महज चंद लोग बचे हैं .. कोई अगर याद करता है तो सिर्फ इसीलिए कि इस शख्स की वजह से लाखों लोगों ने अपनी जानें गंवा दी

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