गुरुवार, 30 जुलाई 2020

iran

अयातुल्लाह सय्यद अली होसैनी ख़ामेनेई  .. इस नाम से ज्यादातर लोग परिचित हैं... ईरान के सर्वोच्च नेता के तौर पर खामेनेई ने पूरी दुनिया में अपनी एक पहचान बना रखी है खासकर अमेरिका से अपनी दुश्मनी निभाने को लेकर ... खामेनेई बचपन से ही अपने पिता की तरह मौलवी बनना चाहते थे और तब किसी ने नहीं सोचा था कि खामेनेई एक दिन ईरान के सर्वोच्च नेता होंगे और एक तानाशाह की तरह सरकार चलाएंगे ... 
अयातुल्लाह अली खामेनेई का जन्म 1939 में इरान के पवित्र माने जाने वाले शहर मशहद में हुआ था ...अपनी उम्र के बाकी बच्चों से अलग खामेनेई ने जब मौलवी बनने का फैसला किया था तो वैसे कपड़े भी पहनने लग गए थे ... अक्सर बाकी बच्चे खामेनेई का मज़ाक उड़ाया करते .. लेकिन इससे खामेनेई के इरादों में कोई फर्क नहीं आया .. 
खामेनेई 8 भाई बहनों में से एक हैं ... इनके दो भाई मौलवी हैं जबकि एक भाई मौलवी होने के साथ साथ एक अखबार का संपादक भी है ... खामेनेई की पढ़ाई चार साल की उम्र में शुरू हो गई थी जब इन्होंने एक मकतब में कुरान पढ़ना शुरू किया था ... मौलवी बनने के लिए आगे की पढ़ाई खामेनेई ने मशहद शहर के सेमीनरी और हवजा से की .. हालांकि धार्मिक शिक्षा के साथ साथ खामेनेई राजनीति में भी काफी सक्रिय थे ..
अयातुल्लाह अली खामेनेई को जानने वाले कहते हैं कि खामेनेई एक आम इंसान की तरह ही पले बढ़े ... उन्हें कविताओं का बहुत शौक है...  लेकिन एक चीज जो खामेनेई को उनके साथ के लोगों से अलग करती थी वो थी स्मोकिंग की आदत... अक्सर खामेनेई को सार्वजनिक जगहों पर स्मोक करते हुए देखा जा सकता था ....जबकि इस्लामिक शिक्षा से जुड़े लोगों के लिए ये आम बात नहीं है... 
खामेनेई की राजनीतिक महात्वाकांक्षा सत्तर के दशक में ही सामने आ गई थी जब ये  इस्लामिक लीडर और अपने गुरु अयातुल्‍लाह रुहोल्लाह खोमैनी की देश वापस के लिए चल रहे आंदोलन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया था ... उस वक्त देश में मोहम्मद रजा शाह पहलवी का शासन हुआ करता था... देश में कहने को लोकतंत्र था लेकिन जनता के चुने प्रधानमंत्री की कोई अहमियत नहीं थी ... पहलवी राजवंश के मोहम्मद रजा शाह पहलवी का ही परोक्ष रूप सत्ता पर नियंत्रण हुआ करता था ...जो एक तरह से अमेरिका की कठपुतली था... जनता में इसके खिलाफ बगावत जन्म ले रही थी... इस बगावत की अगुआई करने वाले अयातुल्लाह रुहोल्लाह खोमैनी को देश निकाला दे दिया गया था लेकिन ईरान में शाह के खिलाफ हमेशा प्रदर्शन होते रहते थे रुहोल्लाह खोमैनी की देश में वापसी की मांग की जाती थी ... ईरान के मौजूदा सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई भी 70 के दशक में होने वाले इस विरोध प्रदर्शनों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया करते थे ... कहते हैं इस दौरान अली खामेनेई को 6 बार गिरफ्तार भी किया गया ...
शाह के खिलाफ हुई ईरानी क्रांति का नतीजा था कि 1979 में एक जनमत संग्रह के बाद ईरान को इस्लामी गणतंत्र घोषित किया गया.. और वर्तमान सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के गुरू रहे अयातुल्लाह रुहोल्लाह खोमैनी को देश का सर्वोच्च नेता चुना गया... तभी ईरान में प्रधानमंत्री का पद खत्म कर राष्ट्रपति का पद कायम किया गया ... और एक तरह ईरान में अमेरिका की कठपुतली सरकार भी तभी से खत्म हो गई ... जो अली खामेनेई के शासन काल में भी जारी है ... 
रुहोल्लाह खोमैनी के ईरान के सर्वोच्च नेता बनने के बाद से अक्सर खामेनेई उनके साथ नज़र आया करते थे ... खोमैनी के कार्यकाल में खामेनेई को डिप्टी डिफेंस मिनिस्टर भी बनाया गया ... कहते हैं इसमें उस वक्त सांसद रहे हसन रुहानी की अहम भूमिका थी ... जो अब ईरान के राष्ट्रपति हैं ... खामेनेई के विरोधी कहते हैं कि उनके बारे में उस वक्त लोग सिर्फ इतना जानते थे कि इन्हें कई बार जेल हुई है .... 
खोमैनी ने अली खामेनेई को 1980 में तेहरान में होने वाली शुक्रवार की नमाज के लिए इमाम भी नियुक्त किया था... कहते हैं इस्लामिक देश बन चुके ईरान में सत्ता में तेजी से बढ़ते कदम की वजह से अली खामेनेई अपने विरोधियों की नज़रों में आ गए थे जिसकी वजह से अली खामेनेई के खात्मे की साजिश रची जाने लगी थी..
अली खामेनेई पर 1981 में पीपुल्स मुजाहिदीन ऑर्गनाइजेशन ऑफ इरान ने एक घातक हमला किया था ... इस हमले में खामेनेई की जान बच गई लेकिन दाहिना हाथ खराब हो गया .. कहा जाता है कि जान बच जाने पर खामेनेई ने कहा था कि खुदा ने उन्हें किसी वजह से बचाया है .. इस हादसे के कुछ ही दिनों बाद ईरान में हुए राष्ट्रपति चुनाव में खामेनेई को 97 फीसदी वोट के साथ जीत हासिल हुई... राष्ट्रपति बनने के बाद अपने पहले भाषण में खामेनेई ने deviation, liberalism और American-influenced leftists के खात्मे की बात कही थी .. और आने वाले सालों में ऐसा ही हुआ ... 
उस वक्त ईरान में एक वर्ग इस्लामिक शासन के खिलाफ था और इसका पुरजोर विरोध किया जा रहा था ... ईरान चैंबर के मुताबिक खामेनेई के राष्ट्रपति बनने के बाद ऐसे सभी विरोधों पर सरकार ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी .. हज़ारों विद्रोहियों को मौत की सजा दी गई ... हालांकि इसमें सबसे चर्चित रहा था जर्मनी के माइकोनोस रेस्टोरेंट में हुआ हत्याकांड .. 
जर्मनी की राजधानी बर्लिन के इस रेस्टोरेंट में 1992 में तीन ईरानी मूल के नेताओं और उनके ट्रांसलेटर की हत्या हुई थी ... जिसका मुकदमा जर्मनी की अदालत में चला.. अदालत ने 1997 में इसका फैसला देते हुए इसमें खामेनेई के शामिल होने की बात कही थी .. 
1989 के जून में ईरान के पहले सुप्रीम लीडर रहे रुहोल्लाह खोमैनी की मौत हो गई ... इसके बाद ईरान के असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने खामेनेई को ईरान का सुप्रीम लीडर बना दिया ... कहते हैं तब ईरान के संविधान के मुताबिक सर्वोच्च नेता बनने के लिए मरजा की उपाधि होना ज़रूरी था लेकिन खामेनेई के पास ये उपाधि नहीं थी लिहाजा संविधान में संशोधन कर दिया गया ... तब से लेकर अब तक अली खामेनेई ईरान के सर्वोच्च नेता के पद पर बने हुए हैं .. 
खामेनेई को ईरान का सर्वोच्च नेता बने हुए 30 साल हो चुके हैं ... खामेनेई को ईरान की इस्लामिक क्रांति के संरक्षण के लिए ही सुप्रीम लीडर चुना गया था ... जो पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खोमैनी के विचारों को आगे बढ़ाता ... कहते हैं खामेनेई ने खोमैनी के एक ग्रुप के समानांतर दूसरे ग्रुप को ताकतवर बनाने की पॉलिसी को काफी अच्छे तरीके से आगे बढ़ाया है .... ईरान में खामेनेई की तरह ही मौलवी रहे और अब खामेनेई की बायोग्राफी लिख रहे मेहदी खालाजी ने एक बार कहा था कि  देश के आर्मी और इंटेलीजेंस एजेंसी समेत सभी बड़े संस्थानों में खामेनेई ने एक पैरेलल स्ट्रक्चर खड़ा कर रखा है जो खामेनेई के लिए काम करता है साथ ही आर्मी और इंटेलीजेंस एजेंसी को कभी भी बहुत ताकतवर नहीं होने देता ... 
आमतौर पर विनम्र और एक आम आदमी की तरह व्यवहार करने वाले खामेनेई के लिए ये भी कहा जाता है कि इन्होंने राष्ट्रपति की शक्तियां भी अपने पास रखी हुई हैं.. राजनैतिक विरोधी तो हैं ही नहीं .... इस तरह खामेनेई अब ईरान के तानाशाह बन चुके है ...
1997 से 2005  तक ईरान के राष्ट्रपति रहे मोहम्मद खातमी ने ईरान में कई तरह के रिफ़ॉर्म्स की शुरुआत की थी .. इससे ईरान की राजनैतिक और सामाजिक व्यवस्था में बदलाव आता लेकिन खामेनेई ने इस तरह के सारे प्रस्तावों पर रोक लगा दी थी ... मोहम्मद खातमी को उदारवादी माना जाता था जिसकी पश्चिमी देशों में भी अच्छी छवि थी ...कहते हैं कि खामेनेई की कट्टरपंथी ताकतों ने मोहम्मद खातमी की नीतियों को विफल करने में अहम भूमिका निभाई थी ... 
कहते हैं सिर्फ मोहम्मद खातमी ही नहीं बल्कि खामेनेई के कार्यकाल के दौरान ईरान में राष्ट्रपति रहे अकबर हाशमी रफसंजानी और महमूद अहमदीनेजाद को भी नीतियों के सवाल पर खामेनेई से विरोध का सामना करना पड़ा ... जबकि अहमदीनेजाद को आलोचक खामेनेई का शागिर्द कहते आए हैं .... और 2009 में अहमदीनेजाद के राष्ट्रपति पद पर दोबारा चुने जाने के पीछे खामेनेई के तंत्र का हाथ बताया गया था .. चुनाव में धांधली के आरोप लगे थे जिसकी वजह से  देश ने इस्लामिक क्रांति के बाद का सबसे हिंसक आंदोलन देखा था..सौ से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए गए थे ... ईरान ने देश के साथ साथ विदेशी मीडिया के कवरेज पर भी आंशिक रोक लगा दी थी ... 
खामेनेई ने 2007 में सारे सरकारी बिजनेस कंपनियों का निजीकरण कर दिया था ...जिसमें बैंक, टेलीफोन कंपनियां यहां तक कि छोटी छोटी ऑयल कंपनियां भी शामिल थीं .... खामेनेई के तेजी से निजीकरण के ये फैसले भी ईरान की आर्थिक व्यवस्था को नहीं सुधार पाए ...इसका नतीजा था कि 2008 में ईरान की आर्थिक हालत खस्ता हो गई ... हालात खाने पीने की चीजों की कमी तक पहुंच गए थे .. यूएन ने स्टेट ऑफ इमरजेंसी डिक्लेयर कर दी थी लेकिन खामेनेई को कोई फर्क नहीं पड़ा था ...खामेनेई ने सरकारी अधिकारियों को आर्थिक दिक्कतों पर ध्यान नहीं देने की हिदायत देते हुए कहा था कि I advise you to keep in your mind that this great nation is never afraid of economic sanctions" ... हालांकि ईरान की जनता त्रस्त हो चुकी थी और आने वाले वक्त में खामेनेई जनता के विरोध का सामना करने वाले थे 
एक सुप्रीम नेता के तौर पर खामेनेई ही ईरान की विदेश नीति तय करते हैं …  कई बार खामेनेई की विदेश नीतियों पर सवाल खड़े होते रहे हैं .. ह्यूमन राइट्स की बात  करने वाली संस्थाओं ने भी खामेनेई की आलोचना की है ... 
खामेनेई एक तरफ बांग्लादेश में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ होने वाली कार्रवाई की आलोचना करते हैं और आंग सान सू की को ब्रूटल वुमन कहते हैं लेकिन दूसरी तरफ चीन में उईगर मुसलमानों की दुर्दशा पर चुप्पी साधे रहते हैं ... 
खामेनेई पर अपने विरोधियों को दबाने के आरोप भी लगते रहे हैं ... एक रिपोर्ट के मुताबिक humble नज़र आने वाले खामेनेई ने दुनिया भर में 160 से ज्यादा विरोधियों की हत्या कराई है ... देश में इस्लामिक गणतंत्र का विरोध करने वाले हज़ारों लोगों को मौत की सज़ा दी है ... 
एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक ईरान में फ्रीडम ऑफ स्पीच और फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन नहीं है ... विरोध करने वाले प्रदर्शनकारियों से सख्ती से निपटा जाता है .. विरोध में आवाज उठाने वालों की हत्या तक कर दी जाती है ... महिलाओं को समान अधिकार नहीं मिले हुए हैं और अल्पसंख्यकों के साथ अक्सर बुरा व्यवहार किया जाता है ... 
पत्रकारों के साथ भी बुरा व्यवहार किया जाता है ... सरकार के भ्रष्टाचार को उजागर करने  या विरोध प्रदर्शन के कवरेज करने को गुनाह माना जाता है ... व्यवस्था पर सवाल उठाने वालों को सुप्रीम लीडर का अपमान करने वाले के तौर पर देखा जाता है .... 
देश में स्वतंत्र चुनाव पर हमेशा सवाल खड़े होते हैं ... उम्मीदवारों का चुनाव ईरान की गार्डियन काउंसिल करती है ... जो उम्मीदवार इस्लामिक गणतंत्र की नीतियों का समर्थन नहीं करते हैं उन्हें रिजेक्ट कर दिया जाता है ... उदारवादियों और कट्टरपंथियों के बीच हमेशा जीत कट्टरपंथियों की ही होती है ... ऐसे में चुनाव बेमानी साबित होते हैं .. 
ईरान पर लंबे वक्त से आर्थिक प्रतिबंध लगे हुए हैं .. और खामेनेई की तरफ से इसे खत्म करने की कोई सार्थक पहल भी नहीं होती लिहाजा देश की अर्थव्यवस्था गर्त में जा चुकी है .. महंगाई और बेरोजगारी की वजह से गरीबी चरम पर पहुंच चुकी है ... 2018 में ईरान में एक डॉलर के मुकाबले ईरानी करेंसी रियाल की कीमत 1 लाख डॉलर तक पहुंच गई थी ... 
लिहाजा रह रह कर ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन होते रहते हैं ... 2017 के दिसंबर में तेहरान यूनिवर्सिटी में हुए प्रदर्शन में अली खामेनेई को सत्ता छोड़ने को कहा गया था .. सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों की संख्या हर दिन बढ़ती जा रही है ...2018 में देश में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन हुए ... 2019 में ईरान में तेल की कीमतें 300 फीसदी बढ़ गईं... प्रदर्शन में 200 से ज्यादा लोग मारे गए और 7 हज़ार से ज्यादा लोग गिरफ्तार कर लिए गए ...ईरान की तरफ से यूक्रेन का प्लेन गिराए जाने की खबरें कंफर्म होने के बाद फिर देश में हिंसक विरोध प्रदर्शन होने लगे ... पिछले एक साल में 1500 से ज्यादा लोग इसकी वजह से मारे जा चुके हैं ... विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए सरकार हर मुमकिन कोशिश करती है ... वहीं मरने वालों की संख्या को लेकर अलग अलग रिपोर्ट्स आती रही हैं ... 
ये विरोध प्रदर्शन चाहे किसी भी घटना से ट्रिगर होते हों इनमें खामेनेई को हटाने और इस्लामिक गणतंत्र के खात्मे का शोर भी सुनाई देता है ... लगातार प्रदर्शन के बीच खामेनेई इसे पश्चिमी देशों की साजिश करार देते हैं ...और देश की गंभीर आर्थिक समस्या को एक बीमारी कहते हैं जो वक्त आने पर खुद ठीक हो जाएगी ...

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