शनिवार, 11 जुलाई 2020

Germany

एडॉल्फ हिटलर एक ऐसा नाम है जो तानाशाह शब्द का Synonym बन चुका है ... 30 जनवरी 1933 की तारीख ने दुनिया के इतिहास में हिटलर का अध्याय हमेशा के लिए जोड़ दिया .. इसी दिन एडॉल्फ हिटलर को जर्मनी का चांसलर बनाया गया था ... तब किसी को ये अंदाज़ा नहीं रहा होगा कि ये शख्स दुनिया के लिए आतंक बन जाएगा ... किसी को ये अंदाजा नहीं रहा होगा कि इस शख्स की गिनती दुनिया के सबसे क्रूर तानाशाहों में होगी ..
हिटलर के तानाशाह बनने से पहले उसे काफी सम्मान मिला ... 1938 में टाइम्स मैगजीन ने हिटलर को द मैन ऑफ द ईयर का टाइटल दिया... हिटलर को युद्ध में बहादुरी के लिए दो बार आयरन क्रॉस से सम्मानित किया गया... यहाँ तक कि हिटलर को दूसरा विश्वयुद्ध शुरू होने से तीन महीने पहले शांति के लिए नोबेल पुरस्कार के लिए भी नामित किया गया था ..स्वीडन के सांसद एरिक गॉटफ्रिड ने हिटलर को नोबेल के लिए नामित किया... लेकिन यही शख्स बाद में दुनिया का सबसे क्रूर और बेरहम तानाशाह साबित हुआ... 
ज्यादातर तानाशाहों की तरह हिटलर का जन्म भी अभाव और गरीबी के बीच हुआ था... ऑस्ट्रिया में जन्में एडोल्फ हिटलरर के पिता ने तीन शादियाँ की थी और उनके 8 बच्चे थे .. हिटलर की माँ उनकी तीसरी पत्नी थीं ... एक बड़े परिवार में अभाव के बीच पल बढ़ रहे हिटलर के अपने पिता से अच्छे संबंध नहीं थे.. अक्सर उनके बीच बहस होती रहती थी और हिटलर को पीटा जाता था ... बचपन तनावपूर्ण तो था ही ...जवानी भी मुश्किलों भरी थी ... 14 साल की उम्र में हिटलर ने अपने पिता को खो दिया और महज 18 साल के हिटलर को छोड़कर माँ भी चल बसीं... हिटलर को बहुत कम उम्र से रोजी रोटी के लिए काम करना पड़ा... 
लाखों लोगों की मौत का जिम्मेदार हिटलर बचपन में पादरी बनना चाहता था ... 8 साल की उम्र में गायकी की शिक्षा लेकर हिटलर CHURCH CHOIR में गाने लगा था ... हिटलर जब 11 साल का हुआ तब मीज़ल्स की वजह से उसके छोटे भाई एडमंड की मौत हो गई.. इस घटना ने हिटलर को हिला कर रख दिया ....कहते हैं कि यहीं से हिटलर का स्वभाव बदलने लगा था... एक आत्मविश्वास से भरा स्टूडेंट एडॉल्फ हिटलर झगड़ालू स्वभाव का बन गया .... पिता और टीचर्स से लड़ता रहता ... इसके बाद हिटलर एक आर्टिस्ट बनना चाहता था ..जबकि पिता हिटलर को टेक्निकल स्कूल में पढाना चाहते थे .... हिटलर ने बाद में अपनी ऑटोबायोग्राफी मेन कम्फ (My Struggle) में लिखा कि उसने जानबूझ कर स्कूल में खराब प्रदर्शन किया कि पिता अपनी जिद भूल कर उसे अपने सपनों को पूरा करने दें .. पिता की मौत के बाद हिटलर ने स्कूल छोड़ दिया .. हिटलर आर्टिस्ट बनने के सपनों को पूरा करने के लिए एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स विएना में एडमिशन लेना चाहता था लेकिन 2 बार उसका एप्लीकेशन रिजेक्ट कर दिया गया ... 1907 में माँ की मौत के बात हिटलर अनाथ हो गया... अपने खर्चे चलाने के लिए हिटलर मजदूरी करने लगा और पोस्टकार्ड पर चित्र बनाकर बेचने लगा ...यही वो वक्त था जब अपने संघर्षों के दौरान rebel mindset के हिटलर के मन में साम्यवादियों और यहूदियों के लिए नफरत पैदा हो रही थी ... जो आगे चलकर एक विध्वंसकारी नीति के तौर पर दुनिया के सामने आने वाली थी ... 
एडॉल्फ हिटलर का जर्मन चांसलर और फिर तानाशाह का रूप पहले वर्ल्ड वॉर के बाद सामने आया... कहते हैं 1907 के बाद वियना में अपने जीवन के संघर्षों से जूझने के दौरान हिटलर कुछ जर्मन नेशनलिस्ट्स के संपर्क में आया ... यहीं से उसे रेसिस्ट बनने की शुरुआत हुई .... कोई साफ तौर पर ये नहीं कह सकता कि हिटलर यहूदियों से इतनी नफरत क्यों करता था लेकिन हिटलर ने अपनी आत्मकथा में जो लिखा उसके मुताबिक वियना में रहते हुए ही हिटलर में एंटी-सेमिटिज्म यानि यहूदियों के लिए नफरत का जन्म हुआ 
जब पहला विश्वयुद्ध शुरू हुआ तब हिटलर सेना में भर्ती हो गया...एक डिस्पैच रनर के तौर पर काम करते हुए हिटलर दो बार घायल हुआ .. लगभग दो महीने हिटलर ने बीलित्ज़ के अस्पताल में बिताए... वॉर को अपना ‘The greatest of all experiences’ बताने वाले हिटलर में जर्मनी के लिए देशभक्ति को और मजबूत कर दिया ... हालांकि इस युद्ध में जर्मनी की हार हुई और यहीं से हिटलर की विचारधारा कट्टर होती चली गई... 
हिटलर के मन में ये घर कर गया था कि जर्मनी को मिली हार की वजह यहूदी हैं ... और ऐसा इसीलिए था कि विश्वयुद्ध के शुरुआती दौर में लगातार जीतने के बाद भी जर्मनी हार गया ... माना जाता है कि जर्मनी के पूंजीपतियों ने सेना को मिलने वालों सामानों की आपूर्ति बाधित कर दी .... इसीलिए जर्मनी को शिकस्त का सामना करना पड़ा ...इन पूंजीपतियों में ज्यादातर यहूदी थे ... हिटलर इस घटनाक्रम को पचा नहीं पाया.... हिटलर ने अपनी आत्मकथा मेन कम्फ (My Struggle) में भी इस बात का जिक्र किया है ...  उस वक्त यहूदियों को जर्मनी में पीठ में छुरा भोंकने वाली कौम के तौर पर देखा जाने लगा था जिसे हिटलर की पार्टी ने काफी हवा दी .. हालांकि यहूदियों से नफरत के पीछे इतिहासकार एक और थ्योरी देते हैं ... इतिहासकार कहते हैं कि हिटलर के पिता एक यहूदी की नाजायज़ औलाद थे... इसीलिए हिटलर के मन में बचपन से ही यहूदियों के लिए नफरत थी .. वर्ल्ड वॉर के दौरान प्रखर राष्ट्रवाद की तरफ बढ़ते हुए ये नफरत बढ़ती रही ... जर्मनी की हार के बाद हिटलर के अंदर नफरत का ये बीज पेड़ की शक्ल ले चुका था.... 
1918 में ही हिटलर ने एक नाजी दल बना लिया.. जिसका मकसद यहूदियों से सारे अधिकार छीनना था ... 1919 में हिटलर ने सार्वजनिक तौर पर यहूदियों के खिलाफ अपना पहला नफरत भरा बयान दिया था ... हिटलर ने कहा कि the aim of the government "must unshakably be the removal of the Jews altogether". यानि सरकार का मकसद बिना हिचके यहूदियो का जड़ से खात्मा करना होना चाहिए .. उस वक्त किसी ने ये सोचा भी नहीं होगा कि हिटलर सच में ऐसा करने जा रहा है ... 
बहुत कम लोग जानते होंगे 1925 में ऑस्ट्रिया की नागरिकता छोड़ने के बाद हिटलर ने 1932 तक जर्मनी की नागरिकता नहीं ली थी और एक तरह से स्टेटलेस था .. फरवरी 1932 में हिटलर को जर्मनी की नागरिकता मिली और इसी साल हिटलर ने यहाँ राष्ट्रपति पद का चुनाव भी लड़ा ... हिटलर ने नारा दिया .... HITLER OVER GERMANY…  इस महात्वाकांक्षी नारे और हवाई जहाज़ से चुनाव प्रचार करने के बावजूद हिटलर हार गया ...हालांकि देश में कमजोर सरकार बनी और इसका नतीजा ये हुआ कि अगले साल ही अपने प्रभावशाली व्यक्तित्व की बदौलत हिटलर जर्मनी का चांसलर बना दिया गया.... यहीं से जर्मनी में नाज़ीवाद की शुरुआत हुई.... 
चांसलर बनते ही हिटलर ने विरोधी पार्टियों को दमन शुरू कर दिया... सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी बैन कर दी गई .. उनकी सारी संपत्तियां जब्त कर ली गईं ..  कुछ ही दिनों के अंदर पूरे देश में हिटलर समर्थक एसए के नाम से मशहूर स्टमाटाइलुंग संगठन के गुंडों का आतंक शुरू हो गया..... कम्युनिस्ट्स, सोशल डेमोक्रैट्स और ट्रेड यूनियनिस्ट पर अत्याचार शुरू हुए... कुछ ही दिनों बाद पहले यातना शिविर बने जहां एसए के लोग अपने विरोधियों को सताते थे..... उनके बाद यहूदियों और विरोधियों की बारी आई..... कुछ ही महीनों के अंदर हिटलर ने लोकतंत्र की कब्र खोदकर अपनी तानाशाही कायम कर ली..... 
हिटलर ने दूसरे देशों पर कब्जा करने के साथ –साथ अपने देश में यहूदियों का नरसंहार शुरू कर दिया... हिटलर यहूदियों की मिटाने की अपनी नीति फाइनल सॉल्यूशन पर भी काम कर रहा था .. हिटलर के भक्त सैनिक, यहूदियों को खास इलाकों में ठूंसने लगे ... उनसे काम करवाने, उन्हें एक जगह इकट्ठा करने और मार डालने के लिए खास कैंप बनाए गए ... जिनमें सबसे कुख्यात था ऑस्चविट्ज......  यहूदियों को इन शिविरों में लाया जाता और बंद कमरों में जहरीली गैस छोड़कर मार डाला जाता...  जिन्हें काम करने के काबिल नहीं समझा जाता, उन्हें मौत के घाट उतार दिया जाता, जबकि बाकी बचे यहूदियों में से ज्यादातर भूख और बीमारी से दम तोड़ देते... युद्ध के छह साल के दौरान नाजियों ने तकरीबन 60 लाख यहूदियों की हत्या कर दी, जिनमें 15 लाख बच्चे थे...  यहूदियों को जड़ से मिटाने के अपने मकसद को हिटलर ने इतने प्रभावी ढंग से अंजाम दिया कि दुनिया की एक तिहाई यहूदी आबादी खत्म हो गई... इसे इतिहास में होलोकॉस्ट के नाम  से जाना जाता है ... हिटलर की इस नीति ने उसे दुनिया भर में एक निरंकुश और सबसे क्रूर तानाशाह के तौर पर स्थापित कर दिया... लेकिन हिटलर सिर्फ लाखों यहूदियों के नरसंहार का ही जिम्मेदार नहीं था....  उसके दामन पर करोड़ों लोगों के खून के दाग लगे ... 
हिटलर ने पहले विश्व युद्ध के बाद आर्थिक तंगी झेल रहे जर्मनी को एक विशाल साम्राज्य बनाने का सपना दिखाया था... भूमि सुधार करने, वर्साई संधि को खत्म करने जैसे वादे किए थे ... हिटलर का मानना था कि ऐसा करने से जर्मन सुख और शांति से रह सकेंगे ... लेकिन उसकी नीतियां विध्वंसकारी थीं .. हिटलर के एक समर्थक ने एक बार कहा था,  ‘हिटलर के बयानों से लोगों को लगता था कि वो सारी समस्याओं से मुक्ति दिला देंगें... मुझे भी लगने लगा था कि हिटलर एक ऐसा आदमी है जो अपने लिए कुछ नहीं सोचता है, सिर्फ़ जर्मन लोगों की भलाई के बारे में सोचता है.'' बाद में हिटलर पर भरोसा करने वाले लाखों लोगों ने इसका बहुत बुरा परिणाम भुगता ... 
हिटलर ने 1937 आते-आते अपनी विस्तारवादी नीतियां साफ कर दी थीं ... 1937 में उसने अपनी सेना के तीनों अंगों के सैनिकों को संबोधित करते हुए हिटलर ने कहा, “साढ़े आठ करोड़ जर्मनों को अपने लिए एक बड़ा जीवनक्षेत्र पाने का अधिकार है.’’ अतः “जगह की कमी के हल” पर ही अब जर्मनी की भावी नीतियों का बल होगा... हिटलर की इस नीति की वजह से दूसरा विश्वयुद्ध शुरू हो गया...आगे चलकर ये युद्ध मानव इतिहास का सबसे विनाशकारी युद्ध साबित जिसमें करोड़ों लोगों की जानें गई...
लगभग 5 साल चले इस युद्ध का अंत 1945 में हुआ ... जर्मनी को सोवियत सेना के हाथों मुंह की खानी पड़ी ... हिटलर का शुरू किया गया सेकेंड वर्ल्ड वॉर अमेरिका की तरफ से जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहर पर परमाणु बम गिराने के बाद ही खत्म हो पाया... एक अनुमान के मुताबिक इस युद्ध में दोनों पक्षों के 5 करोड़ से ज्यादा लोग मारे गए ... लाखों लोग बेघर हो गए .. घायलों की आज तक गिनती नहीं हो पाई... युद्ध में हारने के बाद जर्मन साम्राज्य का एक बड़ा भाग छिन गया ... इनकी आर्थिक हालत और दयनीय हो गई .. ये हार हिटलर युग के अंत की शुरुआत थी ... 
पूरी दुनिया में मौत का खेल खेलने वाला हिटलर अपनी हार से बुरी तरह टूट चुका था... आखिरी दिनों में हिटलर बर्लिन में एक खुफिया बंकर में रहने लगा... ज़मीन से 50 फीट नीचे बने इस बंकर में भी हिटलर को अपनी मौत का डर सता रहा था... कहते हैं कि हिटलर इस हार के बाद तय कर चुका था कि वो खुदकुशी करेगा.. उसने 25 अप्रैल 1945 को अपने बॉडीगार्ड को बुलाकर इससे जुड़े निर्देश दे दिए .... जिसके मुताबिक खुदकुशी के बाद उसके शव को तुरंत जलाना था ... 29 अप्रैल को जब इटली के तानाशाह मुसोलिनी और उसकी प्रेमिका की उसके देश में हत्या कर दी गई तब हिटलर की खुदकुशी का इरादा पक्का हो गया... 30 अप्रैल को हिटलर ने बंकर में रहते हुए खुद को गोली मार ली ... इसके तुरंत बाद हिटलर की पत्नी इवा बरुन ने भी ज़हर खाकर जान दे दी ... उसके अंगरक्षकों ने हिटलर की इच्छा के मुताबिक उसे जला दिया ताकि सोवियत की सेना उसके शव को कब्जे मे ना ले पाए लेकिन हिटलर की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई  
कई दशक तक ये अफवाहें उड़ती रहीं कि हिटलर जिंदा है ... सोवियत का तानाशाह और हिटलर का दुश्मन योज़ेफ स्टालिन इस अफवाह को हवा देता रहा ...रूस और अमेरिका की खुफिया एजेंसियों केजीबी, सीआईए और एफबीआई को भी लंबे वक्त ऐसा लगता रहा कि हिटलर जिंदा है ... हालांकि हिटलर फिर कभी नहीं लौटा... 
दुनिया का सबसे क्रूर तानाशाह अपनी मौत के बाद भी अफवाहों की वजह से जिंदा रहा... कई लोगों ने उसे देखने के दावे किए .. आखिरकार 1956 में जर्मनी की एक अदालत ने हिटलर को मृत घोषित कर दिया ... बंकर के पास मिले हिटलर के अवशेष संभालकर रखे गए .. इस तानाशाह की खोपड़ी और जबड़े पर विशेषज्ञ लंबे वक्त तक स्टडी करते रहे ...  आखिरकार ये मान लिया गया कि हिटलर ने खुद को सिर में गोली मार ली थी.... और इस तानाशाह का अंत हो गया था ..

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