शनिवार, 18 जुलाई 2020

cuba

क्यूबा का करिश्माई नेता या तानाशाह ? 
क्यूबा के करिश्माई लीडर फिदेल कास्त्रो ने एक छोटे से आयरलैंड के नेता के तौर पर कई दशक तक दुनिया के सबसे ताकतवर माने जाने वाले देश की नाक में दम कर दिया था ... हालांकि फिदेल की नीतियों की वजह से उसके अपने देश के लोगों ने काफी बुरा वक्त देखा ..
एक समृद्ध परिवार में जन्मे फिदेल ने अपने देश में बदलाव के लिए सुविधाओं से भरी अपनी जिंदगी छोड़ दी थी ... अपनी ही सरकार की तानाशाही के खिलाफ इसने विद्रोह को जन्म दिया ... फिदेल की अगुवाई में क्यूबा में एक और तख्तापलट हुआ .. 
13 अगस्त 1926 को फिदेल कास्त्रो का जन्म एक समृद्ध गन्ना किसान के घर में हुआ था ..उसके पिता एंजेल कास्त्रो स्पेन से आकर क्यूबा में बस गए थे ... कहते हैं कि फिदेल कास्त्रो अपने पिता की नाजायज़ औलाद था .. और उसकी मां कास्त्रो परिवार की कुक थीं ... बाद में एंजेल कास्त्रो अपनी कुक से शादी कर ली ... फिदेल कास्त्रो 8 भाई बहनों में से एक था ... जिसकी शुरुआती शिक्षा कैथोलिक स्कूल में हुई थी... 
पढाई और खेलकूद में अच्छा होने की वजह से फिदेल को स्कूल और फिर कॉलेज में काफी पसंद किया जाता था .... कास्त्रो को 1944 में बेस्ट एथलीट भी चुना गया ... 1945 में कॉलेज ज्वाइन करने के बाद फिदेल कास्त्रो हवाना की युनिवर्सिटी में उस वक्त चल रहे कई राजनीतिक गुटों में से एक से जुड़ गया ... 
1950 में डिग्री हासिल करने से पहले फिदेल कास्त्रो राजनीति में एक्टिव हो चुका था ...फिदेल लॉ स्टूडेंट फेडरेशन लीड कर रहा था .. एक नए बने लिबरल रिफॉर्मिस्ट पार्टी की मेंबरशिप हासिल कर ली थी ...  कोलंबिया और जमैका में हुए दो बड़े पॉलिटिकल अपराइजिंग का हिस्सा रह चुका था ... .. लेकिन फिदेल के रिवल्यूशनरी बनने की शुरुआत जनरल बटिस्टा के मिलिट्री कूप के बाद सत्ता हथिया लेने की जबरन कोशिशों के बाद हुई
1952 में जनरल बटिस्टा ने विद्रोह कर क्यूबा की सत्ता पर जबरन कब्जा कर लिया था ... फिदेल कास्त्रो ने इसके साथ ही विद्रोह की शुरुआत कर दी ... गुरिल्ला वारफेयर से लड़ते हुए फिदेल देश में तख्तापलट की तैयारी कर रहा था .. 1953 में फिदेल कास्त्रो ने अपने भाई राउल कास्त्रो और 150 समर्थकों के साथ सैंटियागो डी कयूबा में मोंकाडा बैरक पर हमला कर दिया ... ये हमला विफल रहा .. कास्त्रो के कई समर्थक मारे गए और वो खुद गिरफ्तार हो गया... उस पर मुकदमा चलाया गया और 15 साल की कैद की सज़ा दी गई... ट्रायल के दौरान कास्त्रो ने जो कुछ कहा उनमें से कुछ पंक्तियां हमेशा याद की जाती हैं .. कास्त्रो ने कहा था कि कैद उनके लिए मुश्किल होगी लेकिन उन्हें इससे डर नहीं लगता ... ना ही उन्हें अपने 70 साथियों की जान लेने वाले तानाशाह से डर लगता है ... कास्त्रो ने इसी ट्रायल के दौरान कहा था 
“ Condemn me. It does not matter. History will absolve me.” यानि मुझे सज़ा दो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, इतिहास मुझे हर अपराध से मुक्त कर देगा” ... ये फिदेल कास्त्रो का ऐसा कथन है जिसे अभी भी याद किया जाता है ... 
कास्त्रो को जेल में डाल दिया गया .. हालांकि एक साल के बाद उसे रिहा भी कर दिया गया ... जिसके बाद मेक्सिको जाकर उसने  क्रांतिकारियों की नई सेना तैयार की जो क्यूबा का भविष्य बदलने वाली थी .... 
आखिरकार 1959 में फिदेल अपने समर्थकों के साथ तानाशाह जनरल बटिस्टा की सरकार को पलटने में कामयाब रहा ... करिश्माई व्यक्तित्व के धनी फिदेल कास्त्रो में क्यूबा की जनता को बेहतर भविष्य दिख रहा था ... फिदेल कास्त्रो ने भी लोगों से लोकतंत्र और आज़ादी का वादा किया .... इसी दौरान एक इंटरव्यू में लैटिन अमेरिकी देशों में तानाशाहों के राज पर पूछे गए सवाल के जवाब में फिदेल कास्त्रो ने कहा ... ‘क्यूबा पर अब किसी तानाशाह को राज करने की इजाज़त नहीं दी जाएगी ... और लोग निश्चिंत रहें कि जनरल बटिस्टा क्यूबा का आखिरी तानाशाह साबित होगा ...’ अपने ऐसे बयानो की वजह से फिदेल कास्त्रो लोगों में काफी लोकप्रिय होता जा रहा था 
क्यूबन रिवॉल्यूशन के नायक, क्यूबा के सशस्त्र बलों के कमांडर इन चीफ कास्त्रो ने उस वक्त प्रधानमंत्री रहे प्रोफेसर जोस मिरो कार्डोना को हटाकर खुद 16 फरवरी 1959 को क्यूबा के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ले ली ... लॉ के प्रोफेसर जोस मिरो कार्डोना को उदारवादी माना जाता था... उस वक्त क्यूबा के राष्ट्रपति रहे उदारवादी मैनुअल उर्रुटिया ने चुनाव कराने पर जोर दिया ... लेकिन कास्त्रो ने स्वतंत्र चुनाव का विरोध किया और नारा दिया ... ‘क्रांति पहले चुनाव बाद में ...’ 
प्रधानमंत्री बनते ही फिदेल ने अमेरिकी कब्जे वाली सारी संपत्तियों पर कब्जा करना शुरू कर दिया.. एक अनुमान के मुताबिक उस वक्त इनकी कीमत 1 बिलियन यूएस डॉलर थी   ... इस दौरान कई लोगों को क्रांति का दुश्मन करार दिया गया ,, उन्हें या तो जेल मे डाल दिया गया या फिर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई... मीडिया पर पूरी तरह से सरकार का कब्जा हो गया .. स्कूल का पाठ्यक्रम भी बदल दिया गया .. इससे परेशान होकर कई समृद्ध परिवार क्यूबा छोड़कर बाहर चले गए ... 
1960 में फिदेल सरकार ने सोवियत संघ के साथ तेल खरीदने को लेकर समझौता किया .... इससे अमेरिका के साथ संबंध और खराब हो गए ... परिणाम के तौर पर क्यूबा से अमेरिका ने सारे कूटनीतिक संबंध खत्म कर लिए ... परोक्ष रूप से अमेरिका ने फिदेल कास्त्रो को सत्ता से हटाने के लिए कई तरह की साजिश की .. जिसमें फिदेल की हत्या करने, आर्थिक प्रतिबंध लगाने, क्रांति के जरिए सत्ता पलटने जैसी साजिशें शामिल थीं ... 1961 में कभी फिदेल कास्त्रो के करीबी और क्यूबा के पूर्व प्रधानमंत्री प्रोफेसर जोस मिरो कार्डोना को आगे कर अमेरिका ने  बे ऑफ पिग्स इनवेजन की साजिश रची ... हालांकि अमेरिका की ये कोशिश विफल हो गई ...लगभग 1200 विद्रोही पकड़ लिए गए जिन्हें फिदेल सरकार ने 25 मिलियन यूएस डॉलर लेने के बाद वापस अमेरिका को सौंपा ... इस घटना ने लैटिन अमेरिकी देशों में फिदेल कास्त्रो की लोकप्रियता बढा दी लेकिन क्यूबा के कई मध्यमवर्गीय़ परिवार सरकार के निशाने पर आ गए ... कई लोग क्यूबा छोड़ने पर मजबूर हो गए... देश की राजनीति में भी कास्त्रो का विरोध शुरू हो गया था लेकिन बहुत जल्द विरोध करने वाले राष्ट्रपति को उनके पद से इस्तीफा देना पड़ा और कास्त्रो ने ओसवाल्डो डोर्तिकोस को नया राष्ट्रपति बना दिया ... 
1961 आते आते फिदेल ने क्यूबा को समाजवादी राष्ट्र घोषित कर दिया था ... और सरकारी तौर पर बहुदलीय चुनाव भी खत्म कर दिया... कहते है फिदेल डरने लगा था कि अगर चुनाव हुए तो उसे हार का सामना करना पड़ेगा ..... 1962 के मिसाइल संकट ने फिदेल की मुश्किलें और बढ़ा दीं ... 
अमेरिका से बढ़ते खतरे को देखते हुए फिदेल कास्त्रो ने सोवियत संघ को क्यूबा में मिसाइलें रखने की इजाज़त दे दी थी ... ये आइडिया  सोवियत संघ की तरफ से ही आया था ... सबकुछ काफी गुपचुप तरीके से किया गया लेकिन अमेरिकी टोही विमानों ने इसका पता लगा लिया था ... और उस वक्त अमेरिका के राष्ट्रपति रहे जॉन एफ कैनेडी ने Naval blockade यानि नौसैनिकों की नाकाबंद के आदेश दे दिए .. 
अमेरिका ने इसे युद्ध की तैयारी के तौर पर देखा जबकि फिदेल कास्त्रो इसे क्यूबा  की सुरक्षा के लिए ज़रूरी बता रहे थे ... हालांकि ये विवाद बढ़ता रहा .. हालात इतने खराब हो गए कि ऐसा लगने लगा कि सोवियत संघ और अमेरिका के बीच परमाणु युद्ध शुरू हो जाएगा ... कहा जाता है कि उस वक्त फिदेल ने क्यूबा पर अमेरिकी हमले की दशा में सोवियत संघ से अमेरिका के खिलाफ परमाणु युद्ध छेड़ने की गुजारिश तक कर दी थी ... हालांकि सोवियत संघ और अमेरिका ने आपसी बातचीत के बाद मामला सुलझा लिया ... सोवियत संघ ने क्यूबा पर हमला ना करने की शर्त रखी और अमेरिका ने इसका प्रचार नहीं करने को कहा ... लिहाजा सोवियत ने क्यूबा से मिसाइलें हटा लीं
फिदेल कास्त्रो अपनी मनमानिय़ों की वजह से देश को युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया था .. वहीं दूसरी तरफ देश में गरीबी बढ़ती जा रही थी .. अनिश्चितता का माहौल बनने लगा था ...  देश अपनी जरूरतों की पूर्ति के लिए दूसरे देशों की मदद पर निर्भर हो गया था .. ये लंबे वक्त तक चलता रहा .. विरोधियों को दबाते हुए फिदेल कास्त्रो एकतऱफा फैसले लेते जा रहे थे जिसका खामियाजा क्यूबा के नागरिकों को भुगतना पड़ रहा था ... जब 1991 में सोवियत संघ का विघटन हुआ तो क्यूबा को मिलने वाला आर्थिक मदद भी बंद हो गया ... लिहाजा देश में गरीबी और भुखमरी बढ़ने लगी .. लोग हजारों की संख्या में अमेरिका के दूसरे राज्यों का रुख करने लगे और उनसे शरण मांगने लगे ... अपने ही देश में फिदेल कास्त्रों की नीतिया विध्वंसकारी साबित हो रही थीं ... इसका असर लैटिन अमेरिका के उन देशों पर भी हो रहा था जो अब तक फिदेल से काफी प्रभावित रहे थे ... 
1994 आते आते क्यूबा में गैस, पानी, बिजली यहाँ तक कि भोजन की आपूर्ति पर भी संकट खड़ा हो गया था ... क्यूबा के इतिहास में इस पीरियड को विशेष अवधि कहा जाता है ... 
अपने देश में गंभीर हालात पैदा करने वाले फिदेल कास्त्रो ने अमेरिका के लिए मुश्किलें खड़ी की थीं... लिहाजा कहा जाता है कि अमेरिका लगातार फिदेल कास्त्रो के खात्मे की योजना पर काम कर रहा था ... एक आधिकारिक आंकड़े के मुताबिक फिदेल कास्त्रो को मारने की 638 बार कोशिश की गई .. कहते हैं सिगार पीने के शौकीन फिदेल कास्त्रो को एक बार विस्फोटक सिगार से मारने की कोशिश की गई थी ...फफूंद लगे ज़हरीले स्कूबा डाइविंग सूट, माफिया तरीके से शूट करने जैसे कई कोशिशों से फिदेल को मारने की साज़िश रची गई .. फिदेल की  प्रेमिका रही मारिता लॉरेन्ज ने भी CIA  के कहने पर फिदेल को ज़हर देने की कोशिश की थी ... कहते हैं कि फिदेल ने खुद ही मारिता के हाथ में पिस्तौल दे दिया था लेकिन मारिता उसे मार नहीं सकीं ... हर बार फिदेल खुद को बचाने में कामयाब रहा था... एक बार फिदेल कास्त्रो ने कहा था , ‘हत्या की कोशिशों से बचने पर अगर ओलंपिक का आयोजन किया जाता तो मैं स्वर्ण पदक जीत जाता ... ‘ फिदेल कास्त्रो की हत्या की कोशिशों पर 638 वेज़ टू किल कास्त्रो के नाम से एक डॉक्यूमेंट्री बनाई गई है जिसमें सारी साजिशों का खुलासा किया गया है... 
कहते हैं फिदेल कास्त्रो ने बचपन में ही सिगार पीना शुरू कर दिया था... लेकिन उसने कभी भी सिगार का धुंआ अंदर नहीं लिया ... और 1985 आते आते उसने सिगार छोड़ दी .. फिदेल की सेक्स लाइफ के बारे में एक बार उनके अधिकारी ने अजीबोगरीब खुलासे किए थे ... जिसके मुताबिक फिदेल रोजाना दो महिलाओं से संबंध बनाता था... और ऐसा लगभग चार दशकों तक चला .... फिदेल के बारे में ये भी मशहूर है कि वो हमेशा अपने पास एक पिस्तौल रखा करता था .. कहते हैं कि फिदेल कास्त्रो के कार्यकाल में क्यूबा आने वाले टूरिस्ट्स की संख्या बढ गई थी .. दरअसल लोग ये देखना चाहते थे कि कौन सा ऐसा देश है जिसने अमेरिका की नाक में दम कर रखा है ... 
फिदेल ने इतने लंबे समय तक क्यूबा पर शासन किया था कि उतने दिनों में अमेरिका ने आइज़ेन हावर से लेकर जॉर्ड डब्ल्यू बुश तक 10 राष्ट्रपति देखे ... सत्ता से बेदखल करने की तमाम कोशिशों के बाद आखिरकार फिदेल ने अपनी मर्जी से 2008 में सत्ता अपने भाई राउल कास्त्रो को सौंप दी थी ...
फिदेल कास्त्रो के नाम सबसे लंबा भाषण देने का भी रिकॉर्ड भी गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है…  संयुक्त राष्ट्र में 29 सितंबर 1960 को फिदेल ने चार घंटे, 29 मिनट का भाषण दिया था... इसके अलावा फिदेल ने क्यूबा के हवाना में कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस के कार्यक्रम में सात घंटे 10 मिनट का सबसे लंबा भाषण दिया था ... हालांकि अब ये रिकॉर्ड टूट चुका है ... 
90 साल की उम्र में फिदेल कास्त्रो अपनी स्वाभाविक मौत मरा ...फिदेल के भाई राउल कास्त्रो ने क्यूबा के नेशमल टेलीविजन पर उनकी मौत की खबर खुद दी ...  फिदेल की मौत पर क्यूबा में 9 दिन का राजकीय शोक भी मनाया गया ... 
फिदेल की जिंदगी से लेकर मौत हो जाने के बाद तक लोग अभी तक इसपर बहस करते हैं कि फिदेल कास्त्रो को एक क्रांतिकारी के तौर पर देखा जाए या फिर एक तानाशाह माना जाए .. फिदेल की मौत पर अमेरिकी राष्ट्रपति रहे बराक ओबामा ने कहा था कि इतिहास खुद ये तय करेगा कि फिदेल ने अपने लोगों और दुनिया पर कितना प्रभाव डाला .. वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा ‘आधुनिक विश्व इतिहास में फिदेस कास्त्रो को एक युग का प्रतीक माना जाएगा... फिदेल कास्त्रो रूस के एक ईमानदार और विश्वसनीय दोस्त थे। "

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