गुरुवार, 7 मई 2020

workers are spines of world economy

Covid 19 ने दुनिया की सर्व शक्तिमान समझने वाले पूंजीवादी व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है। महामारी के इस दौर में एक बार फिर ये साबित हुआ है कि मानवता और शाशन प्प्रशासन के लिए पब्लिक सेक्टर ही एक मात्र संकट मोचक  रहा है। चाहे दैवी आपदा हो या आर्थिक महामारी पूरी व्यवस्था गरबी मजलूम वंचित लोगो के ही कंधे पर टीकी हुए है।

कार्ल मार्क्स के दर्शन का मज़ाक उड़ाने वाले लोगो को भगवान राम के जीवन से शिक्षा लेनी चाहिए । भगवान राम ने भी राक्षशी ताकतों से कामियाबी समाज के इन्हें वर्गो के सहयोग से हाज़िल की थी । सीता को खोजने से लेकर रावण को हराने तक में इन्हें ताकतों ने भगवान राम की मदद की थी। "हे खग मृग हे मधुकर सैनी क्या तुम देखे सीता मृगनैनी " ये चौपाई तुलसी दास जी ने राम चरितमानस में राम के हवाले से लिखी है जब राम लक्ष्मण के साथ सीता की खोज में दर दर भटक रहे थे तब उन्होंने इन्हें जीव जंतु से सीता का ठिकाना पूछ रहे थे।

इस महामारी के पहले तक पूरी दुनिया निजीकरण की तरफ भाग रही थी। एक नही सैकड़ो बार इंसानियत और समाज के लिए मददगार साबित हो चुकी सार्वजनकि क्षेत्रो की कंपनियों को बेचने और बंद करने की होड़ लगी हुई थी ।

लेकिन इस ही महामारी में इन्हें कंपनियों ने मानवता और  अर्थव्यवस्था को बचाने में कारगर भूमिका निभाई है ।आज सार्वजनकि सेक्टर की एयरलाइन्स हॉस्पिटल ट्रांसपोर्ट और दवा बनाने वाली कंपनिया ही इस महामारी की चुनौती का सामना के रही है।
पूंजीवादी व्यवस्था के पोषक और उनकी कंपनिया ताला बंद कर के भगवान और उन्ही मजदूरों से जान की दुहाई मांग रहे है।

पिछले 2 दिनों से कर्नाटक के CM और भारत सरकार का श्रम मंत्रालय मजदूरों से अपनी अपनी जगह रुके रहने की अपील कर रहा है। वही श्रम मंत्रालय कल तक इन मजदूरों की अनदेखी कर रहा था । आज मजदूरों के सहयोग से देश की बर्बाद हो चुकी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है।

" मजदूर है तो अर्थव्यवस्था है।
और अर्थव्यवस्था है यो जान है।"

"जान है तो ज़हान है"
और हमें जान भी चाहिए और ज़हान भी चाहिए

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