रविवार, 10 मई 2020

poverty -kovid 19

ग़रीब हमारी देश की मेरुदंड हैं .ग़रीबी भले ही मत हटायिए लेकिन ग़रीबों को ज़रूर बचायिए.
ग़रीबों के लिए पैसा लेकर ट्रेन चलाने का फ़ैसला स्वागत योग्य है
देश के रेल मंत्री पीयूष गोइल पेशे से c a हैं 
उन्हें balance sheet तैयार करने मे महारत हासिल है
उनकी योग्यता को भाँपकर ही उन्हें रेल और commerce मंत्रालय की ज़िम्मेदारी दी गयी है
पीयूष जी भाजपा के ख़ज़ांची भी रहे हैं 
आशा है की वे party की तरह रेल को भी महामारी के बावजूद साधन सम्पन्न बनाने मे कामयाब होंगे 
पीयूष जी भी पंडित दीन दयाल जी के एकात्म मानववाद की philosophy मे भरोसा रखते है
दीन दयाल जी तो दरिद्र नारायण की सेवा और कल्याण को ख़ास महत्व देते थे 
नेहरु गंधी लोहिया से भले ही परहेज़ हो लेकिन दीन दयाल जी की philosophy तो  सभी को स्वीकार्य है
पीयूष जी ने ट्रेनचलाने की इछा ट्वीट के माध्यम से ज़ाहिर की है
उनके मुताबिक़ प्रधान मंत्री जी ने उनको निर्देशित किया है
ग़रीबों के दर्द को प्रधान मंत्री जी से बेहतर कौन समझ सकता है
जाके पाँव ना फटे बवाई
सो का जाने पीर पराई
एक बर फिर ग़रीबों की चिंता करने के लिए धन्यवाद
देर आये दुरुस्त आये।
दूसरी ख़ास वजह देश मे होने वाले कई राज्यों के चुनाव भी तो हैं
ग़रीब और ग़रीबी के सवाल पर देश मे पहले भी चुनाव होते रहे है
इन्दिरा जी ने तो इसी को मुद्दा बनाकर चुनाव जीता
उनका नारा होता था 
“हम ग़रीबी हटाना चाहते है
और वे हमको हटाना चाहते है”
ग़रीबी तो साल दर साल बड़ती रही लेकिन इंदिरा जी सट्टा मे बनी रहीं
ग़रीबी की बात तो तमाम समाजवादियों ने भी अपने ढंग से की और सत्ता का सुख भोगा
इसलिए भी ग़रीबों को बचाना ज़रूरी है
मंदिर विवाद अब सुलझ गया है
देर सबेर महामारी भी परास्त हो ही जायेगी
फिर पाकिस्तान के अलावा हमारे पास बचेगा क्या जिसको मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ा जायेगा
पाकिस्तान को सबक़ सिखाने के लिए  तो dobhal जी और विपिन रावत जी सकछम और समर्थ है 
साथ में हमारी सेना चौकस और चौकन्नी है
हमारी सेना की वीरता पराक्रम का लोहा पुरी दुनिया मानती है

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