मंगलवार, 18 जुलाई 2017

maya ----Lalu

मायावती ने राज्य सभा से इस्तीफ़ा देकर देश में चल रही ग़ैर भाजपा राजनीति की कोशिस को रफ़्तार दे दी है मायावती के साथ लालू यादव भी हैं 
वैसे तो भारत में लालू और मायावती की छवि दाग़दार नेता की रही है 
बावजूद इसके इन नेताओं का अपना अपना  वोट बैंक है इसी वोट बैंक के चलते दोनों भारतीय राजनीति में relevant बने हुए हैं
बिहार इसके पहले भी भारत की राजनीति को  दिशा देता रहा है 
लोकनायक जय प्रकाश नारायण ने congress के ख़िलाफ़ संपूर्ण क्रांति का बिगुल पटना के गांधी मैदान में फूँका था 
लालू नीतीश सहित तमाम नेता संपूर्ण क्रांति की ही उपज हैं 
अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ आंदोलन भी महात्मा गांधी ने बिहार के चंपारन से शुरू किया था 
आधुनिक भारत में  l k Advani के रथ यात्रा को भी चीफ़ मिनिस्टर के रूप में लालू ने ही रोकी थी 
लेकिन बदले हालात में लालू मायावती सहित सम्पूर्ण विपछ नरेंद्र मोदी के मुक़ाबले अपनी साख खो चुका है 
नरेंद्र मोदी के बेदाग़ छवि सम्पूर्ण विपछ पर भारी  दिखायी दे रही है 
शायद यही कारण है की ३६ का  रिश्ता रखने वाली समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी बिहार में मोदी के ख़िलाफ़ लालू द्वारा आयोजित की जाने वाली रैली में एक साथ सामिल होने वाले हैं
लालू यादव इस political polarisation के ज़रिये नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ भले ही चुनौती पेश ना कर पायें लेकिन नीतीश को तो परेशानी में डाल सकते हैं 
और अखिलेश मायावती को समर्थन देकर बिहार में यादव मुस्लिम और दलित vote bank ko consolidate कर सकते हैं