मंगलवार, 20 जून 2017

church and Roman Empire VS society

कुछ दिन पहले सोचा था की राजनीति पर आने वाले कुछ दिन तक नहीं लिखूँगा 
लेकिन आज फिर मन को रोक नहीं पाया 
आज सुबह ब्रह्म महर्रत से ही इतिहास में वर्णित रोमन एम्पायअर और चर्च की सप्रेमसी याद आ रही है 
चर्च के अत्याचारों से परेशान रोमन सॉसाययटी ने renaissance and religious reformation का आंदोलन चलाया था 
हिंदुस्तान में भी बाद में आंदोलन चला था 
आंदोलन से पहले रोमन एम्पायअर और चर्च की साँठ गाँठ से जनता को धर्म का ओपीयम खिलाकर बेसिक प्राब्लम्ज़ से अटेन्शन डिवर्ट किया जाता था
वाद में रेफ़र्मेशन मूव्मेंट चला और वहाँ की सॉसाययटी ने चर्च और रोमन एम्पायअर के ख़िलाफ़ विद्रोह कर दिया था 
परिणाम बदलाव के रूप में देखने को मिला 
आज वक वार फिर पूरी दुनिया में कमोवेश वैसी हालत  बनती  दिखायी दे रही है
ज़्यादातर मुल्कों के हुक्मरान जनता को अन्नेसेसेरी इशूज़ में  उलझा कर सत्ता का सुख भोग रहें हैं 
और बेचारी  जनता एम्प्लॉमेंट हेल्थ रोड पावर वोटर इंटर्नल सिक्यरिटी लॉ एंड ऑर्डर जैसे मसलों पर ध्यान ना देकर अपने पुनर जन्म को ठीक करने में उलझती जा रही है 
ऐसी हालत ना तो किसी सॉसाययटी के लिए अछी है और ना दुनिया के लिए 
इस पर विचार करना चाहिए 
एक तरफ़ हम global village aur universal brotherhood ki  वात करते हैं और दूसरी तरफ़ territorial boundaries and non issues par समय बर्बाद कर रहे हैं

शनिवार, 17 जून 2017

journalist VS news trader

पिछले लगभग तीस साल से जर्नलिज़म के लिए समर्पित हमारी कोशिस रही है की समाज को साँची patrakarita से रूबरू कराया जाय 
जर्नलिज़म में विचारधारा आधारित जर्नलिज़म ज़रूरी है चाहे वह कोई भी विचारधारा क्यों ना हो 
विचारधारा विहीन व्यक्ति अच्छा पत्रकार नहीं हो सकता हाँ वह न्यूज़ ट्रेडर  ज़रूर हो सकता है 
माफ़ करिएगा न्यूज़ ट्रेडर कह कर पत्रकारों को सम्बोधित करने की शुरुआत हमारे देश के एक लीडर ने की है 
मेरा मानना है की जर्नलिज़म जैसे पवित्र व्यवसाय से ज़ुरे हम सभी लोगों की ज़िम्मेदारी गुड जर्नलिस्ट तैयार करने की है 
बेस्ट जर्नलिस्ट तैयार करके हम सही मायने में समाज और देश की सेवा कर सकते हैं 
क्योंकि बेस्ट जर्नलिस्ट अपनी राइटिंग के ज़रिए जनता तक सही जानकारी पहुँचाएगा 
अपने अब्जेक्टिव राइटिंग और रिपोर्टिंग के  माध्यम से समाज को मिस्लेड होने से बचाएगा 
काम सचमुच मुश्किल है लेकिन अपने अनुभव के आधार पर यह कह सकता हूँ की हर वक़्त और दौर में भी मालिकों को कुछ प्रफ़ेशनल जर्नलिस्ट्स की रेक्वायअर्मेंट रहती है जिनकी क्रेडिबिलिटी हो 
जिनकी रिपोर्ट्स पर समाज भरोसा करताहो
इसलिए हम प्रफ़ेशनल जर्नलिस्ट्स को न्यूज़ ट्रेडर के बजाय अपनी पहचान जर्नलिस्ट्स की  ही बनाए रखने की कोशिस जारी रखनी चाहिए

गुरुवार, 15 जून 2017

योगी आदित्यनाथ सरकार के १०० दिन

क्या उत्तर प्रदेश में एकसे अधिक power centre हैं 
पिछली सरकार में तो इस तरह का नज़ारा देखने को मिलता था 
लेकिन इस सरकार में भी वही हालत क्यों है 
लखनऊ से लेकर दिल्ली तक इसकी गूँज सुनाई दे रही है 
योगी सरकार के १०० दिन पूरे होने वाले हैं लेकिन अभी तक सरकारी मशीनरी पूरी तरह सक्रिय नहीं है 
राज्य के ज़्यादातर क़द्दावर मंत्री दिल्ली में बैठे   सीन्यर नेताओं के सम्पर्क में हैं 
संघ परिवार और भाजपा के नेताओं की दखलंदाजी भी चीफ़ मिनिस्टर आदित्य नाथ के रास्ते का पथेर साबित हो रहा है 
इसके अलावा चीफ़ मिनिस्टर आदित्य नाथ की प्रशासनिक अनुभवहीनता उनकी सरकार के प्रति जनता में मायूसी पैदा कर रही है 
आगामी लोकसभा चुनाव के माद्दे नज़र भाजपा हाई कमैंड को उत्तर प्रदेश सरकार के कामकाज को गतिशील बनाने के लिए दबाव बनाना चाहिए

योगी आदित्य नाथ चीफ़ मिनिस्टर उ प

उत्तर प्रदेश के चीफ़ मिनिस्टर की कुर्सी पर बैठते ही वह व्यक्ति ख़ुद को देश के प्रधान मन्त्री बनने का ख़्वाब देखने लगता है 
आज़ादी के वाद बने चीफ़ मिनिस्टर गोविंद बल्लभ पंत तो अपने को पंडित नेहरु से सीन्यर मानते थे।

हेमावती नंदन बहुगुणा से इंदिरा जी की नाराज़गी के पीछे भी चीफ़ मिनिस्टर के रूप में बहुगुणा का  डिवेलप होता पलिटिकल प्रोफ़ायल था।

नारायण दत्त तिवारी मुलायम सिंह यादव मायावती और अखिलेश यादव भी अपने अपने ढंग से ख़ुद को नैशनल लीडर प्रोजेक्ट करने की कोशिस करते रहे हैं 
और अब बारी चीफ़ मिनिस्टर आदित्य नाथ की है।

उन्होंने भी आज बिहार में आयोजित  जनसभा को सम्बोधित करके इसकी शुरुआत कर दी है।

आदित्य नाथ के लिए उत्तर प्रदेश जैसे जटिल राज्य की समस्याएँ राक्षसी सुरसा की तरह मुँह खोले मौजूद हैं।

ऐसी हालत में इन समस्याओं  का समाधान खोजने के बजाय दूसरे राज्यों का दौरा करना राजनीतिक और अड्मिनिस्ट्रेटिव तौर पर कितना मुंसिव होगा यह तो वक़्त बताएगा।

लेकिन ऐसा ना हो की खुदा मिले ना विशाल ए सनम।

आदित्य नाथ ने बिहार की जनसभा में भाजपा को सत्ता में लाने तक बिहार में संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया है।