मंगलवार, 17 जनवरी 2017

मोदी बनाम महागठबंधन !

समाजवादी पार्टी का चुनाव निशान साइकिल अखिलेश यादव गुट को मिलने के बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का पूरा स्वरूप ही बदलता दिख रहा है। समाजवादी पार्टी में अखिलेश और मुलायम गुट के झगड़े की वजह से ऐसी परिस्थितियां बन रहीं थीं कि ये चुनाव अब तक बीजेपी के लिए walkover माना जा रहा था । इस झगड़े का सबसे ज्यादा फायदा बीजेपी को मिलता दिखाई दे रहा था । हालांकि चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद चुनावी समीकरण पूरी तरह बदलते नज़र आ रहे हैं ।

उत्तर प्रदेश का चुनाव अब त्रिकोणीय ना होकर Bipolar होता नज़र आ रहा है । यही नहीं अगर अखिलेश यादव अगर राहुल गांधी और अजित सिंह के साथ मिलकर मजबूत महागठबंधन बना लेते हैं तो संभावित गठबंधन की भूमिका उत्तर प्रदेश में ठीक वैसी ही होगी जैसी बिहार चुनाव में नीतीश के नेतृत्व में बने महागठबंधन की थी ।
साइकिल का चुनाव निशान अखिलेश यादव को मिलने का समाजवादी पार्टी पर तो असर पड़ा ही है साथ ही साथ इसका सीधा असर भारतीय जनता पार्टी पर भी पड़ने जा रहा है । समाजवादी पार्टी और यादव परिवार के झगड़े से फायदा उठाने की ताक में बैठी बीजेपी को अब पूरी रणनीति पर फिर से विचार करना होगा । माना जा रहा है कि संभावित गठबंधन का एजेंडा caste और Communal मुद्दों से अलग government और development का होगा । संभावित महागठबंधन गरीबी, बेरोज़गारी, भुखमरी, क्षेत्रीय असंतुलन और नोटबंदी से पैदा हुई दुश्वारियों को लेकर जनता के बीच जाएगा ।

राजनैतिक समीकरण के बदलने के साथ ही ये चुनाव अब किसी के लिए cakewalk नहीं रह गया है, बल्कि अब लड़ाई बराबर की है । अब प्रत्याशियों का चयन बेहद खास और महत्वपूर्ण हो गया है, चाहे बीजेपी हो या फिर संभावित महागठबंधन, किसी ने भी प्रत्याशियों के चयन में थोड़ी भी लापरवाही बरती तो इन दलों को इसका सीधा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए अब सभी दलों के लिए प्रत्याशियों का चयन सबसे बड़ी चुनौती है। अगर प्रत्याशियों के चयन की प्रतिक्रिया में आंतरिक विद्रोह बढ़ा, तो विद्रोही प्रत्याशी उन दलों के political prospects को बुरी तरह प्रभावित करेंगे। 

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