शुक्रवार, 23 दिसंबर 2016

Demonetization से हट जाएगी गरीबी ?

इंडिया में दूसरी बार गरीबों का नाम लेकर वोट बैंक बढाने की कोशिश हो रही है ... पहली बार 1971 में इंदिरा गांधी ने गरीबी हटाओ का नारा दिया था .. इंदिरा ने कहा,  गरीबी हटाओ देश बचाओ,  जबकि उनके विरोधी उस वक्त नारा दे रहे थे इंदिरा हटाओ देश बचाओ । इसका असर ये था कि इंदिरा अपनी हर रैली में अपने विरोधियों पर अपनी हर जनसभा में कहती थीं कि हम देश से गरीबी हटाने की बात कर रहे हैं तो वहीं विरोधी मुझे हटाने की बात कर रहे हैं । तब से लेकर आज तक देश की राजनीति गरीबी और भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर होती रही है ।

भ्रष्टाचार, विकास और governance के मुद्दे पर चुनाव जीतकर सत्ता में आए नरेंद्र मोदी भी सरकार में ढाई साल पूरे होने के बाद गरीबी हटाने की ही बात कर रहे हैं, और उनका मानना है कि गरीबों की दशा और दिशा बदलने के लिए नोटबंदी सबसे कारगर फैसला है और demonetization की कामयाबी के साथ ही देश से गरीबी समाप्त हो जाएगी ।

पहले तीन दिन, फिर 50 दिन और अब अनिश्चितकाल की मांग करने वाले नरेंद्र मोदी गरीबी मिटाने में कितना
कारगर साबित होंगे इसका आंकलन तो आने वाला समय करेगा, फिलहाल demonetization के बाद सामने आए आंकड़ों पर नज़र डालें तो देश में कैश के रूप में ब्लैक मनी रखने वालों की संख्या महज 6 फीसदी ही सामने आई है ।

अब सवाल ये उठता है कि क्या Demonetization अमीर और गरीब के बीच की बढ़ती खाई को पाटने में कारगर साबित होगा ? क्या Demonetization सही मायनों में गांधी, दीनदयाल और डॉ लोहिया द्वारा पारिभाषित अर्थव्यवस्था स्थापित करने में सहयोगी होगा ? क्या Demonetization देश में ग्राम स्वराज (Village Republic) और Integral Humanism के जीवन दर्शन को साकार कर पाएगा ?

ये सवाल इसलिए क्योंकि 2015 के युनाइटेड नेशंस के आंकड़ों के मुताबिक भारत की लगभग 1 अरब 20 करोड़ की आबादी में से करीब 24 फीसदी आबादी गरीब है ...  वर्ल्ड वेल्थ रिपोर्ट के मुताबिक भारत की 1 फीसदी सुपर रिच आबादी के पास देश के total wealth का लगभग 59 फीसदी हिस्सा है, यानि बाकी के 99 फीसदी लोग बाकी बचे चालीस फीसदी वेल्थ पर निर्भर करते हैं । भारत में भले ही 1991 के Economic liberalization के बाद गरीबों का प्रतिशत घटा है लेकिन ये भी सच है कि अमीरों के गरीबों के बीच का फासला लगातार बढ़ता जा रहा है । इसी साल आए India Human Development Survey (IHDS) की रिपोर्ट के मुताबिक आम भारतीय नागरिक गरीब है, सुपर रिच और रिच के बाद जो वेल्थ गरीबों के खाते में बचता है वो देश के total wealth का सिर्फ चार फीसदी है । Credit Suisse data के मुताबिक साल 2000 में भारत के सुपर रिच के पास total wealth का महज 36 फीसदी ही था जो 2016 में 59 फीसदी हो चुका है ।

नोटबंदी को लेकर ज्यादातर economists ने भी शंका ज़ाहिर की है नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने Demonetization को Despotic action यानि तानाशाही या स्वच्छंद कार्रवाई करार दिया है तो Black Economy in India के लेखक प्रोफेसर अरुण कुमार ने भी ये साफ कर दिया है कि Demonetization देश से ब्लैक मनी का खात्मा करने में कामयाब नहीं होगा और हो सकता है कि देश की अर्थव्यवस्था पर इससे बुरा असर पड़े । अरुण कुमार ने साफ किया है कि ब्लैक मनी पर रोक लगाने के लिए ब्लैक इनकम को रोकना जरूरी है । अरुण कुमार मानते हैं कि नोटबंदी black wealth generation को रोकने में कामयाब नहीं होगा ।

वहीं जेएनयू के प्रोफेसर रहे अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक का कहना है कि नोटबंदी ने एक तरफ अगर शॉर्ट टर्म के लिए जनता को परेशान किया है तो लॉन्ग टर्म में अर्थव्यवस्था के लिए भी नुकसानदेह है .. प्रभात पटनायक की दलील है कि demonetization के बाद बैंक में लगभग नब्बे फीसदी scrapped notes का वापस आ जाना ये साबित करता है कि नोटबंदी का ये कदम ब्लैक मनी को खत्म नहीं कर रहा...

हालांकि  Demonetization को कई लोग सही भी करार दे रहे हैं इसमें reserve bank of India के पूर्व गवर्नर सी रंगराजन और डी सुब्बाराव भी शामिल हैं । डी सुब्बाराव कहते हैं कि नोटबंदी से अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी जो कारोबारी सहूलियत को बढा देगा तो वहीं इससे कई हज़ार रुपए के बाहर आ जाने से भारत की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी । पूर्व गवर्नर सी रंगराजन मोदी सरकार के Demonetization के फैसले को black money के खिलाफ एक कामयाब कदम बता चुके हैं । वहीं ICICI बैंक की एमडी चंदा कोचर भी Demonetization को game-changer बता चुकी हैं और मानती हैं कि इससे महंगाई कम करने में मदद मिलेगी तो एक्सिस बैंक की एमडी शिखा शर्मा ने इसे सरकार का bold move करार दिया है जो ब्लैक मनी और terror funding के खिलाफ एक कारगर कदम साबित हो सकता है ।

तमाम दलीलों के बीच सवाल यही उठता है कि क्या demonetization गरीबों के लिए फायदेमंद है ? क्या सचमुच इससे black money खत्म हो जाएगी,  गरीबी खत्म हो जाएगी, terrorists को Fund मिलना बंद हो जाएगा ? इसका जवाब शायद आने वाले दिनों में मिल पाए । 

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