गुरुवार, 10 नवंबर 2016

डोनाल्ड ट्रंप कैसे बन गए राष्ट्रपति ..

लगभग एक साल से अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर चल रही सरगर्मी डोनाल्ड ट्रंप के 270 के आंकड़े को छूते ही खत्म हो गई …. जनता ने साफ कर दिया कि डेमोक्रैटिक पार्टी को लगातार तीसरी बार सत्ता देने के पक्ष में नहीं हैं । तो क्या हिलेरी क्लिंटन को ओबामा की असफल नीतियों का खामियाज़ा भुगतना पड़ा ।

अमेरिका के चुनावी कैंपेन के दौरान कई बार ट्रंप पर लग रहे आरोपों और उनकी बयानबाज़ी की वजह से ऐसा लगा कि हिलेरी की दावेदारी मजबूत होती जा रही है । हिलेरी अगर राष्ट्रपति बनतीं तो इतिहास रच डालतीं । हिलेरी ना सिर्फ अमेरिका जैसे सुपरपावर की पहली महिला राष्ट्रपति कहलातीं बल्कि लगातार तीसरी बार डेमोक्रैटिक पार्टी के हाथों में अमेरिका की कमान जाने का इतिहास भी बनता .. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो पाया …

बेरोज़गारी और आर्थिक मंदी से जूझ रही अमेरिका की अवाम को डेमोक्रेटिक पार्टी से अपने सपने पूरे होने की उम्मीद नहीं दिखी … 8 साल पहले बेरोज़गारी और आर्थिक मंदी को दूर करने के वायदे की बदौलत ही बराक ओबामा ने अमेरिका के करोड़ों वोटर्स के भरोसे को जीता था लेकिन इन दोनों ही मसलों को सुलझाने में ब्राकक ओबामा फेल रहे । अपने 8 साल के कार्यकाल के दौरान ओबामा ना तो ज़रूरत के हिसाब से रोज़गार पैदा करने में कामयाब हुए बल्कि आर्थिक मंदी भी कम नहीं हुई …इतना ही नहीं एक तरफ ओबामा के राष्ट्रपति रहते हुए अमेरिका में आतंकी गतिविधियां बढ़ने के आरोप लगे तो दूसरी तरफ फंड की कमी से अमेरिका की मिलिट्री पॉवर के कमजोर होने की बातें भी सामने आईं ।

ऐसा नहीं था कि ओबामा की विदेश नीतियां कामयाब हुई हों … इस दिशा में उठाए गए ओबामा के कई बड़े कदमों से अमेरिका कमजोर होता नज़र आया … फिर चाहे वो Russia Reset के जरिए रिश्ते सुधारने की कवायद हो या फिर ईरान और नॉर्थ कोरिया का अमेरिका की चेतावनी को नज़रअंदाज़ करते हुए अपने मिलिट्री पॉवर को बढ़ाना हो … कुल मिलाकर ओबामा के कार्यकाल में अमेरिका अपने सुपरपावर होने के status को खोता नज़र आया … अपनी नीतियों को लेकर ओबामा सरकार 8 साल में अपनी छाप छोड़ने में नाकामयाब रही … इन वजहों से Anti incumbency factor डेमोक्रेटिक पार्टी के खिलाफ चला गया …

वैसे भी आज़ाद अमेरिका के 240 साल के इतिहास में आज तक कोई महिला राष्ट्रपति नहीं बन पाई है … शायद ये देश महिला के हाथों में कमान सौंपने से डरता है । इस बार पूरे कैंम्पेन के दौरान ऐसा लगा कि अमेरिकी अवाम हिलेरी को ही कमान देगी और हिलेरी क्लिंटन इतिहास रचने में कामयाब हो जाएंगी.. वजह साफ थी क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप का कोई political background नहीं था औऱ कई बार कभी महिलाओं तो कभी minorities को लेकर अपने बयानों से डोनाल्ड ट्रंप unpopular होते जा रहे थे .. बावजूद इसके अमेरिका ने हिलेरी को नहीं चुना .. ऐसा लगता है जैसे अमेरिका अभी भी महिला को राष्ट्रपति के पद पर देखने के लिए तैयार नहीं है …
हालांकि कुछ चीजें ऐसी थीं जो हिलेरी क्लिंटन के खिलाफ गईं .. इसमें सबसे बड़ा मसला उनकी Email से जुड़े विवाद का था … मसलन हिलेरी के हज़ारों Email की पूरी controversy पर आनन-फानन में की गई FBI की जांच और हिलेरी को मिले क्लीन चिट का मसला backfire कर गया तो वहीं विकीलीक्स के बार-बार उठाए जा रहे सवालों ने हिलेरी को हमेशा शक के घेरे में बनाए रखा ...

हिलेरी को फॉरेन एजेंसीज़ का भी पूरी तरह सपोर्ट नहीं मिला .. जिस तरह ओबामा और हिलेरी की टीम ने Anti Putin Campaign चलाया था वैसे ही रूस Anti Clinton Campaign चलाता रहा... Clinton Foundation और चंदे का मामला भी हिलेरी क्लिंटन के खिलाफ जाता नज़र आया ...कैम्पेन के दौरान अमेरिका की पहली महिला राष्ट्रपति के तौर पर अपनी सशक्त उम्मीदवारी पेश करती हिलेरी खुद को Women of America बताती रहीं लेकिन लोग उनसे जुड़ी controversies को देखते हुए उन्हें Face of American women के तौर पर स्वीकार ही नहीं कर पाए …

2 टिप्‍पणियां:

  1. सर लिखते रहें बहुत कुछ सीखने और समझने को मिला

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  2. जिस गहराई से हर बार आप चिंतन मंथन किया करते है उसे से हम सब को बहुत कुछ सीखने को मिला ता है आप मेरे लिए प्रेरणा के स्त्रोत है

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