गुरुवार, 6 अक्तूबर 2016

आरक्षण का लॉलीपॉप कब तक ?

महाराष्ट्र में एक बार फिर मराठा बिरादरी को आरक्षण का लॉलीपॉप पकड़ाने की कोशिश की जा रही है … 10 जिलों में फैल चुके आरक्षण के आंदोलन की आग से घिरी बीजेपी मराठा आरक्षण के समर्थन में दलीलें दे रही है... बिना नेता के लाखों लोगों की रैलियों ने देवेंद्र फडणवीस की सरकार की नींद उड़ा दी है … और अब सरकार 13 अक्टूबर को हाईकोर्ट में वकीलों के जरिए 70 दलीलें पेश करने जा रही है … मसला ये है कि ये 70 दलीलें क्या हाईकोर्ट की संविधान के आधार पर दिए गए फैसले पर भारी पड़ेंगीं …

सवाल यही है कि अगर संविधान के मुताबिक 50 फीसदी से ऊपर आरक्षण नहीं दिया जा सकता तो सरकारें किस आधार पर इससे ज्यादा आरक्षण देने के वादे कर सकती हैं …. देवेंद्र फडणवीस सरकार भी मराठा आंदोलनकारियों की 16 फीसदी आरक्षण की मांग को पूरे करने के वादे कर रही है …. हालांकि इससे पहले भी मराठा आरक्षण की मांग होती रही है … लेकिन महाराष्ट्र ऐसा राज्य है जहां पहले से ही एससी, एसटी और ओबीसी मिलाकर 52 फीसदी आरक्षण लागू है …इसी आधार पर 2014 में एनसीपी और कांग्रेस गठबंधन सरकार की तरफ से चुनाव के ठीक पहले मराठाओं को दिए गए आरक्षण पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी … ऐसे में एक बार फिर देवेंद्र फडणवीस सरकार की तरफ से की जा रही ये कोशिशें क्या सिर्फ मराठा आंदोलन को शांत करने की तरकीब है ?

ऐसा लगता है कि जब कभी भी राज्य सरकारें या केंद्र सरकार राजनैतिक मुश्किलों में घिरती हैं, उन्हें लगता है कि उनकी नीतियां आम जनता को पसंद नहीं आ रही हैं तो इस तरह के डैमेज कंट्रोल एक्सरसाइज़ किए जाते हैं .. महाराष्ट्र की सरकार पिछले कई महीनों से अपने काम काज को लेकर विवादों में है .. महाराष्ट्र में जो बीजेपी और शिवसेना का परंपरागत वोटबैंक है वही नाराज होता दिखाई दे रहा है …खासतौर से देवेंद्र फडणवीस की कार्यशैली को लेकर पूरे महाराष्ट्र में नाराजगी देखने को मिल रही है ... इसी का नतीजा है कि एक छोटी सी घटना इतने बड़े मराठवाड़ा आंदोलन का रूप ले चुकी है ... अब जब फडणवीस सरकार को लग रहा है कि उनकी कार्यशैली को लेकर पूरे महाराष्ट्र में नाराजगी बढ़ रही है तो उस नाराजगी को कम करने के लिए इस तरह के फैसले लिए जा रहे है, इस तरह के वायदे किए जा रहे हैं …

इससे पहले भी जब-जब राज्य सरकारों की तरफ से राजनैतिक संकट से उबरने के लिए 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण के वायदे किए गए हैं … अदालतों ने उसे खारिज कर दिया है .. अब अगर महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार कह रही है कि वो आरक्षण देंगे तो ये शिगूफा ही कहा जा सकता है ...ये सभी राजनीतिक दलों को पता है कि संविधान में 50 फीसदी से जयादा आरक्षण देने की इजाज़त किसी को नहीं है .. इससे पहले राजस्थान की सरकार ने गुर्जर आंदोलन को दबाने के लिए ऐसा ही वायदा किया था .. आंध्र प्रदेश या कर्नाटक सरकार ने भी इसी तरह के वायदे किए .. हरियाणा सरकार ने भी जाट आंदोलन को दबाने के लिए आरक्षण देने की बात कही थी लेकिन किसी भी सरकार ने अपने वायदे को पूरा नहीं किया .. और अगर किसी भी सरकार ने ऑर्डिनेंस के जरिए या राज्य विधानसभा में प्रस्ताव पारित करके अपने उस वायदे को पूरा करने की कोशिश की भी अदालतों के जरिए ये कोशिश खारिज कर दी गई … अदालतों ने ऐसे मौकों पर राज्य सरकार को फटकार भी लगाई … इसीलिए फडणवीस की सरकार चाहे जो वायदे करे .. सच्चाई ये है कि 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण देने का अधिकार किसी भी राज्य सरकार या केंद्र सरकार को नहीं है …

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