सोमवार, 24 अक्तूबर 2016

सियासत, सबक और परिवार

राजनीति में संयम, धैर्य टाइमिंग और सही वक्त पर फैसले ही सबसे बड़ी काबिलियत होती है और एसपी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव अपने पूरे पॉलिटिकल करियर में देश के टॉप पॉलिटिशियन्स में शुमार होते हैं..अपने सटीक फैसलों से मुलायम सिंह पहले भी कई बार ये साबित कर चुके हैं कि जल्दबाजी में लिए फैसले अक्सर गलत साबित होते हैं और सियासत में आपको पीछे ले जा सकते हैं..

परिवारवाद के चश्मे से मुलायम सिंह की पॉलिटिक्स को देखने वाले तमिलनाडु और पंजाब की सियासत से निकले संदेशों की अनदेखी कर रहे हैं... तमिलनाडु में करुणानिधि और पंजाब का बादल परिवार..आज भी अपने बुजुर्गों के मार्गदर्शन और लीडरशिप में ही चल रहे हैं..

तमिलनाडु में डीएमके प्रमुख करुणानिधि 92 साल की उम्र में दक्षिण भारत  की सियासत की एक अहम धूरी है... बड़ा परिवार है..3 पत्नियां और उनके बच्चे और सब साथ-साथ हैं..बावजूद इसके करुणानिधि ने अभी तक कुर्सी नहीं छोड़ी है..किसी ने भी उनसे अब तक उत्तराधिकारी के बारे में नहीं पूछा..स्टालिन को भी उन्होंने अपना पद नहीं सौंपा और जब भी तमिलनाडु में अम्मा के जवाब में किसी नेता की बात आती है तो सबसे पहला और आखिरी जिक्र करुणानिधि का ही होता है..दिल्ली में राज करने वाले राष्ट्रीय दलों का वहां पर कोई नामलेवा तक नहीं है ... यही वजह है कि करुणानिधि आज भी तमिलनाडु की राजनीति में प्रासंगिक बने हुए हैं...जबकि करुणानिधि के बच्चे भी अखिलेश  यादव की उम्र से काफी बड़े हैं...

परिवार और सियासत का दूसरा बड़ा सबक हमें पंजाब से भी देखने को मिलता है... पिछले विधानसभा चुनाव में पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पर दबाव था कि अपने जीते जी पार्टी की कमान अपने उत्तराधिरकारी को सौंप दें... लेकिन प्रकाश सिंह बादल ने ऐसा नहीं किया..और इसका नतीजा ये है कि पंजाब की राजनीति में उलटफेर करते हुए प्रकाश सिंह बादल दोबारा पंजाब में सरकार चला रहे हैं औऱ साथ ही परिवार के सदस्यों को आने वाली जिम्मेदारियों के लिए तैयार भी कर रहे हैं..पिछले विधानसभा चुनावों में उनके ही परिवार के कुछ लोगों ने उन पर आरोप लगाया कि वो पुत्रमोह में पार्टी का बंटाधार कर रहे हैं..लेकिन बादल अड़े रहे..किसी को मनमर्जी नहीं करने दी और इसका नतीजा हुआ कि प्रकाश सिंह बादल ने पंजाब में फिर से सरकार बनाई..

साफ है कि सियासत में परिवार का सदस्य होने के साथ-साथ maturity  और discipline भी देखा जाता है...  इसीलिए सियासत के जानकारों का मानना है कि यूपी के सीएम अखिलेश यादव को तमिलनाडु और पंजाब की First Families से सबक लेना चाहिए... तमिलनाडु की सियासत में ए राजा को लेकर हुआ सियासी हड़कंप गायत्री प्रसाद प्रजापति और अमर सिंह एपिसोड से भी बड़ा था... फिर भी वहां परिवार पर कोई आंच नहीं आई... 
ऐसे वक्त में गांधी जी का वो famous quote याद आता है, पाप से घृणा करो..पापी से नहीं 

आचार्य विनोभा भावे ने अपना पूरा जीवन दुर्जनों को सज्जन बनाने में लगा दिया... चंबल में कई डकैतों का आत्मसमर्पण कराया... जाहिर है गांधी, विनोबा भावे, लोहिया जी जैसे लोगों ने सार्वजनिक जीवन में रहते हुए भी एक मिसाल कायम की है...

ये ऐसे लोग हैं जो समय-समय पर असामाजिक दागी लोगों  को अपने राजनीतिक जीवन में जोड़े रखते थे... लेकिन उनके अपने जीवन में ऐसे लोगों का कुछ प्रभाव नहीं पड़ता था... बल्कि ऐसे महान लोगों की संगत में रहकर ये लोग कुछ बेहतर इंसान भी बन जाते हैं... 

अब अगर एसपी प्रमुख मुलायम सिंह यादव इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं  तो इसमे गलत क्या है... जिस समय बहमई नरसंहार की नायिका फूलन देवी को मुलायम सिंह ने समाजवादी पार्टी में शामिल किया था तो कहा गया कि अब समाजवादी पार्टी को ठाकुरों का वोट कभी नहीं मिलेगा ... लेकिन ऐसा नही हुआ, ठाकुर आज भी एसपी और मुलायम के साथ हैं... मुलायम ने एक सियासी रिस्क लिया और सही भी साबित किया... 

साफ है कि अगर आज कुछ लोग कुछ अपरिहार्य कारणों से मुलायम के साथ हैं तो परिवार के बाकी लोगों को मुलायम की स्थिति समझनी चाहिए... और एक बड़े सियासी मकसद को समझते हुए एक साथ लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाने चाहिए...

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