शुक्रवार, 14 अक्तूबर 2016

इंदिरा जी के नक्शेकदम पर अखिलेश ?

समाजवादी पार्टी के भीतर का घमासान कई बार थमता नजर आया,.....फिर कलह सतह पर आई,...लेकिन अब ऐसी निजी बातें सामने आ रही हैं, जिनसे साफ लगता है कि इस टकराव में भी कुछ न कुछ समीकरण ज़रुर साधा जा रहा है,...अखिलेश ने जिस तरह खुद को ,...अपने बचपन को,...अपने इमोशन को सामने रखा,...परिवार की लड़ाई सिमटने की बजाय और उलझती नजर आ रही है..क्या अखिलेश किसी सीक्रेट मिशन पर निकल पड़े है..क्या कई सालों बाद देश का सियासी इतिहास खुद को दोहरा रहा है...अब इसमे कोई सीक्रेट नहीं है कि उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े सियासी परिवार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है.. ऐसा लगता है कि अब अखिलेश ने तय कर लिया है कि वो अपने बनाए हुए रास्ते पर चलेंगे...
ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी ने अपनी ही पार्टी के नेताओं के खिलाफ एक Parallel Structure खड़ा कर लिया था..और एक बार पार्टी के अधिकृत राष्ट्रपति उम्मीदवार के खिलाफ अलग उम्मीदवार उतार कर पार्टी के सभी veteran leaders  को वैचारिक शिकस्त दे दी थी.. अखिलेश यादव भी अब पार्टी से इतर एकला चलो की राह पर जाते नज़र आ रहे हैं... अब अखिलेश खुद को नई तरह से स्ट्रगलर के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं..
परिवार में जारी कलह की खबरों के बीच एक अखबार को दिए इंटरव्यू में अखिलेश कहते हैं कि बचपन में उनके साथ ठीक से बर्ताव नहीं हुआ... उनकी बुआ ने उनका पालन-पोषण किया...यानि बचपन से ही स्ट्रगलर के तौर पर रहे हैं अखिलेश.. इस बात को पब्लिक लाइफ में कभी भी निजी ज़िंदगी पर बयान नहीं देने वाले मुलायम सिंह यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मान लिया है ... मुलायम सिंह यादव ने कहा है कि मां बीमार रहती थीं और वो व्यस्त रहते थे इसीलिए उनकी बहन ने अखिलेश की देखभाल की ...
मां बीमार थी और पिता पर ध्यान ना देने का आरोप और जब मेहनत कर आगे बढ़े तो चाचा और पिता पर कमजोर किए जाने का आरोप..कुल मिलाकर देखा जाए तो अखिलेश एक प्रखर राजनेता की तरह हमदर्दी और भावनाओं को एक साथ लोगों के सामने रख रहे हैं..अखबार से अखिलेश ने कहा है कि उन्हें किनारे तो किया जा सकता, हराया नहीं जा सकता...

क्या इतिहास खुद को दोहरा रहा है..इंदिरा गांधी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था..जब उनको पीएम बनाया गया तो पार्टी के Veteran Leaders चाहते थे कि उनको रिमोट की तरह चलाया जाए और जब इंदिरा जी ने इसका विरोध किया तो उनका विरोध होने लगा..इंदिरा गांधी के विरोध के बाद Open War हुआ और Young Generation इंदिरा के साथ खड़ी हो गई..पार्टी के बुजुर्ग अपनी विश्सनीयता खोते गए और इंदिरा जी  ने कामराज प्लान के तहत एक-एक करके सभी बुजुर्गों को हाशिए पर खड़ा कर दिया ...
ये सच है कि आज से 25 साल पहले एसपी को मुलायम सिंह ने बनाया और 24 घंटे मेहनत करके पार्टी को आज के मुकाम तक पहुंचाय़ा..लेकिन इधर कुछ सालों में मुलायम ने पार्टी मे ऐसे तत्वों को संरक्षण देना शुरु किया जो आज के जमाने के युवाओं को रास नहीं आया है...
डीपी यादव से शुरू हुआ ये सिलसिला गायत्री प्रसाद प्रजापति से लेकर मुख्तार अंसारी तक जाता हुआ नजर आता है..इन सब लोगों के खिलाफ अखिलेश के स्टैंड ने भी उन्हे पार्टी की भीड़ से अलग खड़ा कर दिया.. अखिलेश ये मैसेज देने में कामयाब रहे है कि वो साफ-सुथरी राजनीति के साथ हैं और उसी को लेकर चलेंगे..
खैर समाजवादी परिवार के उत्तरकांड का सभी को इंतजार है लेकिन एक बात तो तय है कि अब अखिलेश की राहें परिवार में अलग हैं और अगर ये झगड़ा और बढ़ा तो अगले चुनावों मे इसका फायदा बीएसपी को ही मिलेगा... 

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