शुक्रवार, 8 जुलाई 2016

मोदी सरकार- एक कदम आगे, दो कदम पीछे

सत्ता में आने के बाद बीजेपी की सरकार ने जो विकास के वादे को पूरा करने की दिशा में पहले कुछ कदम उठाए थे उनमें से एक था land acqusition Bill को पास कराना .. इसके पीछे ये दलील दी गई थी सरकार विकास के काम तेज़ी से तभी कर सकती है जब उसके काम में क्लीयरेंस के नाम पर रुकावट ना आए ..... लेकिन मोदी सरकार ने UPA के Land acquisition bill में जो बदलाव किए वही बदलाव सरकार की गले की हड्डी बन गई ... बिल लोकसभा में शोर शराबे के बीच पास तो हो गया क्योंकि बीजेपी के पास संख्या बल की कमी नहीं थी लेकिन राज्यसभा में सरकार ये बिल पेश भी नहीं कर पाई ... इस दौरान विपक्ष सरकार पर किसान विरोधी होने तो सरकार विपक्ष पर विकास में रोड़ा अटकाने का आरोप लगाती रही ...
दरअसल बीजेपी सरकार ने यूपीए के ज़मीन अधिग्रहण कानून में अधिग्रहण के एवज़ में प्रभावित होने वाले 80 फीसदी लोगों की मंजूरी और Social impact assesment जैसे प्रावधानों को खत्म कर दिया था ... इससे ज़मीन अधिग्रहण में तेज़ी आती लेकिन जिनकी ज़मीन का अधिग्रहण होता वो प्रभावित होते और कई लोगों को बिना मर्ज़ी के अपनी ज़मीनें तय मुआवज़े पर देनी होतीं ... सरकार के इस कानून से यूपीए में वक्त में रहा पॉलिसी पैरालिसिस तो खत्म हो जाता और काम काज में भी तेजी आती ... मोदी सरकार ने कानून में ये बदलाव भी इसी मंशा से किया था ... प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप बनाया, सिंगल विंडो क्लीयरेंस की व्यवस्था कर दी ताकि कानूनों का जाल विकास की रफ्तार को सुस्त ना कर सके ... लेकिन ये सब इतना आसान नहीं था ...
लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हार का सामना कर चुकी कांग्रेस ने मोदी सरकार के ज़मीन अधिग्रहण कानून को किसान विरोधी साबित कर दिया और इस पर इतना शोर शराबा हुआ कि सरकार को इस मसले पर कई बार अपने कदम पीछे करने पड़े ... शायद इसके बाद भी मोदी सरकार विकास के नाम पर इसे आगे बनाए रखती लेकिन बिहार के चुनाव में अपनी हालत देखकर लगता है बीजेपी उत्तर प्रदेश और पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव में यही कहानी नहीं दोहराना चाहती ... इन दोनों ही राज्यों में किसानों की बड़ी आबादी है और शायद इसीलिए बीजेपी के लिए विकास के वादों पर वोटबैंक हावी हो रहा है ... अब बीजेपी को इस बिल को वापस लेने का फायदा होगा या नहीं ये अभी से कहना जल्दबाज़ी होगी लेकिन ये तय है कि विकास की जिस रफ्तार के सपने दिखाकर बीजेपी ने सरकार बनाई थी वो रफ्तार सुस्त ज़रूर पड़ने वाली है ... ये सवाल भी ज़रूर उठ रहे हैं कि क्या अब बीजेपी के लिए विकास महत्वपूर्ण नहीं रहा ... ये भी सवाल है कि क्या बीजेपी पहले गलत कानून थोपने की कोशिश कर रही थी या अब वोट के लिए विकास से तौबा कर रही है ...

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