गुरुवार, 30 जून 2016

बीजेपी का मिशन UP !

दिनेश शर्मा बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं, गुजरात के प्रभारी रहे हैं ..पिछले दिनों बीजेपी का जो सदस्यता अभियान चल रहा था दिनेश उस देशव्यापी अभियान के संयोजक थे...इनके नेतृत्व में बीजेपी ने सदस्यता अभियान में गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया ... पेश है दिनेश शर्मा से की गई बातचीत के प्रमुख अंश

वासिंद्र मिश्र: सबसे पहले उत्तर प्रदेश से शुरू करते हैं..क्योंकि उत्तर प्रदेश से ही देश की राजनीति तय होती है...और पिछले लोकसभा चुनाव में भी अगर देश में बीजेपी की सरकार चल रही है तो उसमें बहुत बड़ा योगदान यूपी का है....उत्तर प्रदेश में विधानसभा का चुनाव होने वाला है ...इसके मद्देनजर क्या आपकी पार्टी में सबकुछ ठीक चल रहा है ?

दिनेश शर्मा: बीजेपी में ही ठीक चल रहा है बाकी अगर आप एसपी, बीएसपी और कांग्रेस के बारे में पूछेंगे तो मैं इतना ही कहूंगा कि भगवान उनकी सहायता करे... बीजेपी में प्रारंभ से ही ठीकठाक रहा है क्योंकि हमारे यहां नेता नहीं कार्यकर्ताओं का राज चलता है... सामूहिक निर्णय होता है..पिता पुत्र का या परिवार के अन्य परिजनों का या माता का और बेटा का साम्राज्य यहां नहीं है..यहां पर सामूहिकता का भाव है और कार्यकर्ता का भाव है, सब मिलकर आपस में बैठते हैं और निर्णय करते हैं उसके अनुसार सब काम करते हैं..हमने 73 सीटें उत्तरप्रदेश की लोकसभा में जीती..और इसका महत्वपूर्ण कारण यही है... कार्यकर्ताओं का समन्वय, मोदी जी के गुजरात वाला डेवलपमेंट के फॉर्मूले को लोगों ने accept किया और लोगों को विश्वास भी था कि जो अनाचार है भ्रष्टाचार है, गरीबी है, देश में अराजकता का वातावरण है ...आर्थिक असंतुलन है...विदेशी देशों से कटुता पूर्ण संबंध हैं...इन विसंगतियों की वजह से लोगों को परिवर्तन की ज़रूरत महसूस होने लगी थी ...

वासिंद्र मिश्र : अब हम विधानसभा चुनाव के बारे में बात करते हैं ... सामूहिकता का मतलब अमित शाह या मोदी हैं या उसके बाहर भी है कोई पार्टी में ?

दिनेश शर्मा : पूरी पार्टी है, हमारे यहां अध्यक्ष सर्वोपरि होता है और अध्यक्ष नीचे के सभी लोगों को एक टीम की तरह मिलाकर काम करता है ...जो नेतृत्व करता है, उसका नाम प्रथम श्रेणी में लिया जाता है..हमारे बहुत सारे राष्ट्रीय नेता हैं और देश के नेता हैं, सब के अलग-अलग कार्यक्रम लगे हैं... सब लोग मिलकर काम कर रहे हैं ... और जाहिर सी बात है कि माननीय श्री नरेंद्र मोदी का जो सबल नेतृत्व देश को प्राप्त हुआ है उसका लाभ उत्तर प्रदेश में भी हमें मिल रहा है... अमित शाह की जो संगठनात्मक क्षमता है... उसका बहुत लोगों ने लोहा माना है और हम लोग 13 राज्यों में इस समय सरकार में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में हैं...दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी हैं...11 करोड़ 27 लाख सदस्य, 13 राज्यों के साथ-साथ सबसे ज्यादा विधायक, सबसे ज्यादा सांसदों वाली कोई पार्टी है तो बीजेपी है और इसे बनाने वाले अमित शाह जी हैं.....

वासिंद्र मिश्र : सत्ता में आने के लिए...सत्ता में बने रहने के लिए जिस तरह का सैद्धांतिक और राजनैतिक समझौता आपकी पार्टी और आपका नेतृत्व कर रहा है.... पार्टी के जो मूल दर्शन हैं क्या ये उसके अनुरूप है...?

दिनेश शर्मा: आज तक बीजेपी ने ऐसा कोई अनैतिक समझौता नहीं किया है जिससे उसे शर्म उठानी पड़े... समय के अनुसार परिवर्तन की जो दशाएं है, उनमें बीजेपी की रीति-नीति संगठन प्राथमिकताओं को मानने वाले उसके आधार पर काम करते हैं .. और मैं समझता हूं कि बीजेपी अपने मूल मुद्दे, विकास और भ्रष्टाचार को लेकर ज़ीरो टॉलरेंस पर कहीं भी पीछे नहीं हटी है और इसका यही कारण हैं कि दो साल हो जाने के बावजूद एक भी आरोप बीजेपी सरकार के किसी भी मंत्री पर नहीं लगा है...

वासिंद्र मिश्र: लेकिन आपके एक पूर्व और एक वर्तमान आपकी सरकार और आपकी सरकार के वरिष्ठतम मंत्री अरुण जेटली के काम को लेकर संतुष्ट नहीं है... आपके पूर्व विदेश मंत्री, पूर्व वित्त मत्री यशवंत सिन्हा आपकी विदेश नीति से संतुष्ट नहीं है, नरेंद्र मोदी के कामकाज से संतुष्ट नहीं है..आपको दूसरे सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी आपके वित्त मंत्री के कामकाज से खुश नहीं है..उनका कहना है कि वित्त मंत्रालय में जो लोग हैं उनकी वफादारी भारत के प्रति नहीं है विदेशों के प्रति है...

दिनेश शर्मा: जहां पर लोकतंत्र होता है वहां पर लोग अपनी बात कहते हैं...लेकिन पार्टी के अनुशासन के अंदर रहकर लोगों को अपनी बात कहनी होती है और इस बारे माननीय प्रधानमंत्री का इशारा शब्दों के रूप में हो चुका है और इस बारे में ज्यादा मुझे नहीं बोलना है

वासिंद्र मिश्र: लेकिन वो लोग तो बाहर बोल रहे हैं यशवंत सिन्हा और सुब्रह्मणयम स्वामी

दिनेश शर्मा: मुझे लगता है कि आगे आपको इस प्रकार का असहमति का कोई कथन नहीं दिखाई पड़ेगा...लेकिन जो भी उन्होंने बोला है मैं समझता हूं वो अपनी सीमाओं के दायरे में है ... वरिष्ठ लोग है अपनी राय देते हैं और पार्टी उनकी राय को मानती है और जहां पर नहीं मानना होता वहां कह देती है कि आपकी राय सही नहीं है...

वासिंद्र मिश्र : यशवंत सिन्हा के मामले में आपको नहीं लगता है कि Conflict of interest है... उनके एक बेटे वित्त राज्य मंत्री हैं उनके दूसरे बेटे कंपनी चलाते हैं .....जब से बीजेपी आई तब से उनकी प्राइवेट कंपनी में कई गुना का इज़ाफा हुआ है और खुद यशवंत सिन्हा भारत सरकार की नीतियों की आलोचना करते हैं तो ये conflict of interest नहीं है कि एक भाई वित्त मंत्री है दूसरा भाई कारोबारी है और उनका जो पिता है वो भारत सरकार की नीतियों की आलोचना कर रहा है ...

दिनेश शर्मा: देखिए मेरे पास में गुजरात के संगठन का प्रभार है. और मैं संगठनात्मक चीजों से जुड़ा हुआ हूं, शासन व्यवस्थाओं के जो भी कार्य होते हैं उसे शासन से संबंधित मंत्री देखते हैं और मैं समझता हूं ... इसका बेहतर जवाब शासन के मंत्रालय के लोग दे सकते हैं ... यशवंत जी हमारे पुराने वरिष्ठ नेता हैं और पार्टी के प्रति उनकी वफादारी पर हम शंका नहीं कर सकते लेकिन समय-समय पर उनके विचार आते हैं तो विचारों पर वो स्वयं कहीं न कहीं खंडन या कहीं विश्लेषण अपने आप में करते हैं...मैं इस विषय में कुछ नहीं कहना चाहता...

वासिंद्र मिश्र: गुजरात के बारे में पार्टी की जो हालत है आप वहां कि स्थिति को देख रहे हैं आप को भरोसा है कि गुजरात में जो अगला विधानसभा चुनाव है ... उसमें पार्टी की नैया आनंदी बेन पटेल के मौजूदा नेतृत्व के सहारे पार हो जाएगी ?

दिनेश शर्मा: मुझे तो विश्वास ये है कि जितनी सीटें हमारी विधानसभा में पिछली बार आई थीं उससे ज्यादा सीटें इस बार आनी हैं, और उसके पीछे एक कारण हैं जो 6 नगर निगमों के चुनाव थे पूरे बहुमत से हमारे पास हैं..गांधी नगर में हमारी पार्टी के मेयर बने हैं..27 नगर पालिकाओं के चुनाव भी 20 दिन पहले हुए थे जिसमें से 18 नगरपालिकाएं हमारे पास में आईं... पहले 14 हमारे पास में थी ... दो विधानसभा सीटों, सूरत और तलाला, पर जो उपचुनाव हुए हैं .. उसमें तलाला सीट 20 साल से कांग्रेस के पास थी... माननीय मोदी जी के मुख्यमंत्री रहते हुए भी बीजेपी ने वो सीट नहीं जीती थी... ये सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती थी उस पर बीजेपी जीती है, कारण स्पष्ट है केंद्र सरकार के अच्छे काम और गुजरात सरकार के द्वारा वहां के समग्र विकास की अवधारणा ... मैं समझता हूं गुजरात में बीजेपी बहुत मजबूत है और अच्छे परिणाम विधानसभा चुनाव में आएंगे...

वासिंद्र मिश्र: इतनी कौन सी नाराज़गी हो गई थी हार्दिक पटेल से कि उनके खिलाफ पार्टी को इतनी दमनात्मक कार्रवाई करनी पड़ रही है ?

दिनेश शर्मा: मुझे तो लगता है कि पार्टी ने तो एक भी कार्रवाई नहीं की, पार्टी ने तो आंदोलन के लिए मैदान फ्री में दिया, टोल टैक्स नहीं लगाया, मैं बीजेपी सरकार की बात कर रहा हूं, उनके लिए सारी व्यवस्था की गई थी, अब वो राष्ट्र के घ्वज का अपमान कर दें ... तो ये न्यायालय और उनके बीच का काम है बीजेपी का इसमें न तो कई हाथ है और न बीजेपी का इससे कोई मतलब है, ये मामला न्यायालय और हार्दिक पटेल के बीच का है ...

वासिंद्र मिश्र : अगर न्यायालय से उनको कोई राहत मिल जाती है और वो जेल से बाहर आते हैं तो क्या पार्टी उन्हें accept करेगी अपने साथ ?

दिनेश शर्मा: निर्भर करेगा कि वो चाहते क्या हैं ... पार्टी की सामान्य प्रक्रिया है कि अगर कोई आना चाहता है तो पार्टी उस पर विश्लेषण करती है और जो सामूहिक निर्णय होता है उस पर अमल किया जाता है ... ...अभी ये कपोल कल्पित कल्पनाओं के बीच का वक्तव्य है ... बीजेपी के पास बहुत मजबूत अच्छे नेतागण हैं... हमने आर्थिक आरक्षण जो लगाया है ... वो एक मॉडल है और लोगों ने युवा स्वावलंबन योजना, आर्थिक आरक्षण को सहृदय स्वीकार किया है..

वासिंद्र मिश्र: लेकिन ये असर देश में क्यों नहीं दिखाई दिया ?

दिनेश शर्मा: देश में दिखा है तभी तो हमारा industrial growth rate चीन से ज्यादा है और 7.6 को cross कर गया है, आज अमेरिका का टाइम्स और पत्रिकाएं ये लिखने लगी है कि 2020 तक भारत एक सुपर पॉवर बन जाएगा ...

वासिंद्र मिश्र : आज दो महत्वपूर्ण खबरें छपी हैं मीडिया में.. एक में बताया गया है कि ह्यूमन कैपिटल इंडेक्स में पूरी दुनिया के मुल्कों की तुलना में भारत बहुत नीचे है ... पड़ोसी देशों में भारत के नीचे सिर्फ पाकिस्तान है ... अगर ग्रोथ इतनी ज्यादा है, रोजगार इतना ज्यादा है तो इतनी बुरी हालत क्यों देखने को मिल रही है ... दूसरा आज केंद्रीय सरकार ने निर्णय लिया है कि अब रात भर व्यवसायिक प्रतिष्ठान खुले रह सकते हैं दुकानें खुली रह सकती हैं , आप लोग जब विपक्ष में थे तो आप लोग मल्टीनेशनल कंपनियों का विरोध करते थे, अब आपकी सरकार ने FDI को 100 फीसदी कर दिया है हर क्षेत्र में तो इससे रोजगार बढ़ेगा कि घटेगा, इससे विदेशी पूंजी आने के साथ जो स्वदेशी की जो अवधारणा थी पंडित दीन दयाल उपाध्याय की , गांधी की उस अवधारणा का क्या होगा... ?

दिनेश शर्मा: मै समझता हूं कि ये दीन दयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद का दर्शन है, उसमे एक मूल वाक्य था कि जो बाहर की चीज़े हैं, अगर वो अच्छी हैं तो उन्हें देशानुकूल बनाओ... जो अपनी चीज़े हैं उन्हें युगानुकूल बनाओ... हमको स्वदेशी को पूरी तरह अपनाना है लेकिन स्वदेशी में भी अगर बाहर की अच्छी चीज मिलती है तो उसे समाहित करना है... जहां तक FDI का प्रश्न है, FDI पहले उनकी शर्तों पर हो रहा था ..अब हमने स्वदेशीकरण कर दिया है... आज जो मिसाइल लॉन्च हो रहे है उसमें हमारे यहां के लोग विदेशी टेक्नीक में अपनी टेक्नीक मिलाकर काम कर रहे हैं ... यानि अगर हम अपनी टेक्नीक को बढ़ा रहे हैं और दूसरों की अच्छी चीज़ भी रख रहे हैं ... यही काम हमने FDI में भी किया है ... हमने तमाम शर्तों को.... जैसे WTO में पिछली बार Agriculture products के लिए criteria तय किया था कि उसका मूल्य निर्धारण विदेशों की अनुमति के बगैर नहीं होगा, हमने उसका विरोध किया... तो हमने परिवर्तन करके नीतियों को देशानुकूल बनाया है, हमने उन नीतियों को लागू करने का काम किया जो दीन दयाल उपाध्याय जी की मूल अवधारणा के अनुकूल है...

वासिंद्र मिश्र : दिनेश जी, आपने बहुत अच्छे तरीके से दीनदयाल उपाध्याय की एकात्म मानववाद की philosophy को अपनी सरकार की मौजूदा कार्यशैली के हिसाब से पारिभाषित कर दिया है ... ये नई philosophy है ... आप तो Commerce, industry के Professor हैं .. आप विषय को बेहतर समझते हैं .. आपसे एक Professor की हैसियत से जानना चाहता हूं कि पिछले दो साल के दौरान विदेशी चीज को अपने अनुकूल ढालने में कितने फीसदी कामयाबी मिली है ?

दिनेश शर्मा: यूरिया कोटेड खाद को हमने नीम कोटेड कर दिया, विदेशों में नीम कोटेड करते थे तो industrialist उसका इस्तेमाल नहीं करते थे...हमारे यहां यूरिया को पाने के लिए किसानों पर लाठी चार्ज होता था जब वो यूरिया खरीदने जाते थे, आज हमारे पास यूरिया सरप्लस है.. .हमने थोड़ा सा परिवर्तन किया, विदेश की टेक्नीक को हमने अपने अनुसार adopt किया...इसी तरीके से कई चीजों का प्रॉडक्शन है, आज रॉकेट लॉन्चर हम बना रहे हैं...आज विभिन्न प्रकार के रेलों के इंजन हम बना रहे हैं,, जो विदेशी टेक्नीक से कभी हुआ करते थे...आज वो हमारी टेक्नीक से बन रहे हैं,

वासिंद्र मिश्र : Investment कितने Percent आया है India में ?

दिनेश शर्मा : हमने 37 हजार करोड़ का लोन अदा कर दिया है.... और उसके साथ-साथ उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में एक लाख 25 हजार करोड़ से ऊपर यहां पर दे चुके हैं, 33 हजार करोड़ का स्थानीय निकायों में विशेष प्रकार का अनुदान दिया है...पैसा नहीं आता तो कहां से आया, LIC का insurance का पैसा पड़ा रहता था ... हमने रेलवे में invest कर दिया .. अब रेलवे का भी भला है और उनका भी ..

वासिंद्र मिश्र : उन मजदूरों का क्या होगा जिनके EPF का पैसा आपने private sector में invest कर दिया ?

दिनेश शर्मा: ये पीपीपी मॉडल भी है बीच में , सरकार का Investment भी है, इस प्रकार की परिस्थितियां जो आती हैं, उनका समय से भुगतान होता रहता है.उसका एक time limit होता है, एक time Limit में सबको एक साथ नहीं देना होता है ...

वासिंद्र मिश्र: आपने पीएफ का रेट गिरा दिया, और पीएफ के अमाउंट को आपने इनवेस्ट कर दिया

दिनेश शर्मा: जो सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाला लाभ था अभी देखिएगा 7वां वेतन आयोग अभी कुछ दिन में आ जाएगा

वासिंद्र मिश्र : कितने लाख केंद्रीय कर्मचारी हैं ... और देश की आबादी कितनी है ?

दिनेश शर्मा : जितने भी हों अगर प्रदेश सरकारें चाहेंगी तो इन्हें फायदा होगा

वासिंद्र मिश्र : बेरोजगारी की तुलना में रोजगार कितना फीसदी है?

दिनेश शर्मा: मैं उस मिथ्या को फिर से एक बार आपके समक्ष ठीक करना चाहता हूं... रोजगारी को लोग नौकरी से जोड़ते हैं....इस बात को मोदी जी ने दिखाया कि नहीं, रोजगार मुद्रा बैंक से उन्होने लोन देना शुरू किया, साढ़े तीन करोड़ से ऊपर लोगों के लोन मिला, एक परिवार में अगर 5 लोगों को रोजगार मिला, तो 15 करोड़ तो लोग ऐसे ही पा जाएंगे, जनधन योजना के अंतर्गत आप देखो, कि जनधन योजना के तहत 21 करोड़ लोगों ने खाते खोले, सीधे पैसा बैंकों में पहुंचा

वासिंद्र मिश्र: आपकी agencies हीं मान रही हैं कि योजना फेल हो गई ...

दिनेश शर्मा: मैं समझता हूं जिसने भी प्रचार किया है वो दुष्प्रचार है, सोशल मीडिया द्वारा किसी विपक्षी दल ने इस प्रकार का प्रचार किया था, उसे ये देखना चाहिए कि कितने लाख करोड़ तो जनधन योजना में गरीबों ने बैंक में अपना पैसा जमा कर सरकार को दिया है...राजीव गांधी जी कहते थे न कि 100 रुपये दो 15 पैसे जाते हैं गरीब के खाते में, आज 100 रुपए दो तो 90 पैसे गरीब के खाते में जा रहे है .. डायरेक्ट ट्रांसफर स्कीम के तहत जा रहे हैं, लोगों ने कभी सोचा ही नहीं था कि मेरा अकाउंट खुलेगा, आज वो भी अपना अकाउंट बिना एक पैसे जमा किए पा रहे हैं .. एक और विस्तार हुआ है सड़क निर्माण के क्षेत्र में .. पहले जो एक दिन में दो किलोमीटर सड़कें बनती थीं अब गडकरी जी का मंत्रायल 18 किलोमीटर प्रतिदिन सड़क बना रहा है, और दो महीनों के भीतर 24 किलोमीटर प्रतिदिन बनने लगेगी,

वासिंद्र मिश्र: कहा तो ये जा रहा है कि उसमें जो रेट निर्धारित कर रहे हैं गडकरी जी, वो बहुत ज्यादा Inflated है

दिनेश शर्मा: किसी ने नहीं कहा इस चीज को... विपक्षी भी नहीं बोल पाए हैं, क्योंकि पिछली सरकार की समतुलना, Quality बेहतर हुई है बगैर किसी तरह के अपव्यय को बढ़ाए, कांग्रेस खोज रही है बीजेपी की गलती को, खोजना तो उनको अपने नेता को चाहिए कि वो कहां है क्योंकि आज scene से बाहर दिखाई पड़ रहे हैं, विदेश गए होंगे, अच्छा है जाएं, लेकिन आज कांग्रेस को गलती नहीं मिल रही,

वासिंद्र मिश्र: विदेश जाने में तो आपके प्रधानमंत्री ने रिकॉर्ड तोड़ दिया ...

दिनेश शर्मा: पांच दिन में गए और 6 देशों का दौरा किया है, और 6 देशों में 23 समझौते किए हैं, 23 समझौते करने के बाद जब स्वेदश लौते तो तीन कार्यक्रमों को अटेंड करने के बाद 12 बजे तक कार्यक्रम किया, प्रधानमंत्री मानव नहीं महामानव है,

वासिंद्र मिश्र: बावजूद इसके आपकी सरकार की विदेश नीति फेल क्यों है ?

दिनेश शर्मा: हमारी विदेश नीति आज दुनिया मान रही है ..

वासिंद्र मिश्र: यशवंत सिन्हा तो नहीं मान रहे

दिनेश शर्मा: सिर्फ एक व्यक्ति की राय सभी की राय नहीं हो सकती,

वासिंद्र मिश्र: मोदी जी ने भी कहा है कि अब पाकिस्तान पर भरोसा नहीं करना चाहिए..

दिनेश शर्मा: भरोसा और नीति दोनों अलग चीजे हैं, हम तो भरोसा प्राप्त करने की कोशिश कर रहे है, और भरोस न होता तो आज वो आतंकियों पर FIR क्यों करते वो लोग, आज भरोसा नहीं होता तो अमेरिका उन्हें डांट क्यों लगाता, आज भरोसा नहीं होता तो दुनिया ये मानने के लिए मजबूर न होता कि पाकिस्तान आतंकवाद का सबसे बड़ा अड्डा है, ये हमारी विदेश नीति की सफलता है

वासिंद्र मिश्र: तो मोदी जी क्यों नाराज हो गए

दिनेश शर्मा निराश शब्द उनकी डिक्शनरी में नहीं है और खोजेंगे तो उनके चेहर पर भी कभी निराशा नहीं दिखेगी. और उनके काम करने की प्रवृति में भी कभी निराशा नहीं होगी...

वासिंद्र मिश्र: ये रोजा इफ्तार की पॉलिटिक्स क्या है, ये तो कभी बीजेपी और संघ में ऐसी कार्यशैली नहीं थी, रोजा इफ्तार बाकी दल करते थे तो आप लोग तुष्टीकरण का आरोप लगाते थे.

दिनेश शर्मा : अगर कोई रोजा रखता है तो ये ईश्वर में अल्लाह में विश्वास करना है, बीजेपी ने कभी इस तरह का धार्मिक प्रतिरोध नहीं किया है...मैं कई बार गया हूं रोजा इफ्तार में, राजनाथ जी आए थे वो भी गए, हमारे अल्पसंख्यक मोर्चे ने कई बार इसका आयोजन किया है, हमारी विचारधारा से संबंधित राष्ट्रीय मुस्लिम मंच है ... अल्पसंख्यक मोर्चा है .. समय समय पर हम ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं जिसमें हमारे नेता शामिल होते हैं... हमारा विरोध धर्म से नहीं है, धर्म के प्रति गलत व्याख्या कर उसे बदनाम करने वाले लोगों का हम विरोध करते हैं ... हम लोग अशफाक उल्ला खान, अब्दुल हमीद जैसे लोगों को मानने वाले लोग हैं, हां हम लादेन को लादेन साहब और और याकुब मेनन साहब कहने वाले लोग नहीं है, इशरत जहां को बेटी बताने वाले नेताओं से दूर रहने वाले लोग हैं हम

वासिंद्र मिश्र: महबूबा मुफ्ती का परिवार राष्ट्रवादी हो गया है

दिनेश शर्मा: उन्होने आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी है, उन्होंने कश्मीरी पंडितो को आमंत्रित किया है

वासिंद्र मिश्र: आपको विधायक वहां क्यों हंगामा कर रहे हैं, विधानसभा के अंदर और बाहर ?

दिनेश शर्मा: देखिए ऐसा कहीं भी कभी भी होता है ... हर चीज में स्वीकार्यता या एकमत हो तो ये जरूरी नहीं है.. कहीं कहीं गठबंधन की सरकार होती है .. कई जगह हमने अकाली दल का समर्थन नहीं किया .. कई बार हमने शिवसेना का समर्थन नहीं किया .. कई बार शिवसेना ने भी हमारा समर्थन नहीं किया ... लेकिन हम एक हैं ...

वासिंद्र मिश्र:लोकसभा चुनाव के परिणाम के पहले तक आपके दल के तमाम शीर्ष नेता, मुसलमानों की दी गई टोपी पहनने से परहेज करते थे, और अब रो जा इफ्तार का आयोजन कर रहे हैं या करवा रहे हैं ...

दिनेश शर्मा: मैं समझता हूं कि ये टोपी प्रकरण है उसे भी गलत तरीके से पेश किया गया है, श्रद्धा होना ये व्यक्ति का व्यक्तिगत अधिकार है, श्रद्धा का प्रदर्शन और दिखावा करना इससे बीजेपी हमेशा दूर रही है,

वासिंद्र मिश्र: तो सत्ता में आने का दिखावा हो रहा है ?

दिनेश शर्मा: मैं मंदिर जाता हूं दोनो समय की पूजा करता हूं, लेकिन मैने कभी आज़ान का विरोध नहीं किया, हमारे किसी नेता ने नहीं किया, हमारे प्रधानमंत्री जी भी, सुफी संतो के कार्यक्रम में उन्हे सम्मानित किया गया, और तो और एक एमआईएम एक ज्यादा बोलने वाले नेता हैं, उनको भी इस्लामिक बैंक को प्रधानमंत्री ने अपने यहां आमंत्रित किया, कि बगैर Interest के लोन दें, तो उनको कहना पड़ा की ये तो मसीहा है, उन्होने पैगंबर से पीएम की तुलना की

वासिंद्र मिश्र: उनके बारे में तो यही कहा जाता है कि वो बीजेपी फंडेड हैं,

दिनेश शर्मा: जब विरोध करें तो दूसरे हैं, हमने उस्ताद योजना लागू की है, हम चाहते हैं कि जो मुस्लिम वर्ग है, वो भी उद्योगो से जुड़े, वो भी शिक्षा से जुड़े, मदरसों का Modernaisation हो, पांच वक्त की नमाज़ अदा करो .. पांच वक्त की अज़ान दो लेकिन समय की रफ्तार के साथ न चलना ये सही नहीं है, एसपी, बसपा, कांग्रेस ने इनका वोट बैंक बनाकर इनका दुरूपयोग किया है, बीजेपी इनकी आर्थिक उन्नति चाहती है, शैक्षिक उन्नति चाहती है, राष्ट्र की मुख्यधारा में इनका समायोजन चाहती है, एक सबका साथ सबका विकास, इस नारे को अमली जामा पहनाना यही तो एक कला है, असम में इस कला के कारण हमारे तीन मुस्लिम विधायक जीत कर आए हैं, मुस्लिम क्षेत्रों में हमने विजय प्राप्त की

वासिंद्र मिश्र: उत्तर प्रदेश में क्या हो रहा है, यूपी में आपको भरोसा नहीं है कि अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं के दम पर आप जीत पाएंगे ?

दिनेश शर्मा : उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव में आंधी आई थी औऱ 73 सीटें हमने पाई थीं ... विधानसभा चुनाव में तूफान आने वाला है .. और तीन चौथाई सीटें हम जीतेंगे

वासिंद्र मिश्र: फिर बाबू सिंह कुशवाहा और स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे लोगों को पार्टी में लाने की क्यों बेताबी है ?

दिनेश शर्मा: अभी तक तो कोई नहीं आया है जो बीजेपी की नीति-रीति में अगर विश्वास रखेगा और पार्टी की नीति पर चलने वाला व्यक्ति है उस पर कोई आरोप नहीं है तो दल में विश्वास करने वाले कोई व्यक्ति आता है तो इससे कोई आपत्ति नहीं होगी

वासिंद्र मिश्र: बाबू सिंह को बेदाग मानती है आपकी पार्टी

दिनेश शर्मा: उनका प्रकरण समाप्त हो चुका है ... उन्हे तुरंत हटा दिया गया,

वासिंद्र मिश्र: बाबू सिंह फिर अब प्रचार कर रहे हैं Indirectly घूम कर

दिनेश शर्मा: मैं नहीं समझता हूं ये बात सही है, उनकी श्रीमतीजी समाजवादी पार्टी की सदस्य हैं

वासिंद्र मिश्र: और स्वामी प्रसाद मौर्य के बारे में ?

दिनेश शर्मा: नहीं-नहीं वो अच्छे नेता हैं, लेकिन हमारा उनसे कोई संपर्क नहीं हुआ है, ये उनकी अपनी नीति है क्या करेंगे क्या नहीं करेंगे, जब पार्टी से वो कोई वार्ता करेंगे तो पार्टी उनपर विचार करेगी

वासिंद्र मिश्र: आपके संगठन के दो बड़े अधिकारी अनिल बंसल और ओम माथुर के बीच सुनते है कि काफी तनाव है और खींचतान हैं

दिनेश शर्मा: संघ के स्वयंसेवकों में तनाव नहीं होता, एक दूसरे के परस्पर पूरक की प्रवृत्ति होती है ... और इतना कुशल नेतृत्व किसी को भी मिल जाए तो सोने पर सुहागा नहीं बल्कि हीरे पर सुहागा शब्द होता तो ये शब्द मैं कहता .. श्रेष्ठ कार्यकर्ताओं का सगागम है इस समय उत्तर प्रदेश में,

वासिंद्र मिश्र: लेकिन समन्वय क्यों नहीं पा रहा है दोनों के बीच में?

दिनेश शर्मा: समन्वय की सीमा क्रॉस कर चुकी है, क्योंकि दोनों एक रूप है एक दृष्टि है, एक तरह काम करने की ललक है, और सिर्फ एक ही उद्देश्य है पार्टी संगठन को मजबूत करना और बीजेपी को 2017 में विजय दिलाना..

वासिंद्र मिश्र: बात करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद

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