बुधवार, 29 जून 2016

Swaraj vs Consumerism !

रोज़गार और स्किल डेवलपमेंट के वादे के साथ सत्ता में आई बीजेपी की सरकार ने भारत में 24 घंटे तक बाज़ारों को खोले रखने से जुड़े कानून को मंजूरी दे दी है .. . सरकार की दलील है कि इससे नौकरियों में इज़ाफा होगा ... महिलाएं भी यहां काम कर सकेंगी और इससे महिलाओं का सशक्तिकरण होगा .... भारत ऐसा पहला देश नहीं है जहां इस तरह की सुविधाएं होंगी ... दुनिया के कई देश ऐसे हैं जहां पहले से ही बाज़ार 24 घंटे खुले होते हैं ... लेकिन क्या भारत का Economic, Socio Structure उन्हीं देशों के जैसा है ... और क्या सरकार का इस तरह का फैसला सचमुच बेरोज़गारी कम कर देगा और महिलाएं सशक्त हो जाएंगी ...
 
यहां एक बाद याद रखनी ज़रूरी है कि भारत देश की राजधानी जैसी जगह पर अगर देर रात महिलाओं के साथ कोई अपराध होता है तो ऐसे बयानों की बाढ़ आ जाती है कि इतनी रात को उन्हें घर पर होना चाहिए था ... अगर वो बाज़ार में घूमेंगी तो अपराध होंगे हीं ... क्या ऐसे में हम इस बात के लिए तैयार हैं कि चौबीसों घंटे खुलने वाली दुकानों में हम उस तरह की सुरक्षा दे पाएंगे ... सवाल सुरक्षा के साथ-साथ मानसिकता से भी जुड़ा हुआ है ...

दुनिया के कई देशों में 24 घंटे बाज़ार खुले रखने का चलन पहले से ही है ... युरोप, अमेरिका, एशिया के कुछ देश में पहले से ही नाइट लाइफ है ... यूरोप के देश डेनमार्क में 2012 से 24 घंटे दुकानें खुली रखने का प्रावधान शुरू हो चुका है .. हालांकि यहां भी कई छोटे कस्बों में शनिवार और रविवार दोपहर 3 बजे के बाद दुकानें बंद हो जाती हैं ... अमेरिका के लास वेगास में दुकानें 24 घंटे खुली रहती हैं, ये इसलिए क्योंकि यहां टूरिस्ट सबसे ज्यादा आते हैं.. इंग्लैंड में भी कुछ सुपरमार्केट 24 घंटे खुले रहते हैं.. स्वीडन में इस मामले को लेकर कोई खास नियम नहीं है.. फिनलैंड में सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक ही दुकानें खुली रह सकती हैं ... ये तब है जब सोशल सिक्योरिटी से लेकर HUMAN CAPITAL इंडेक्स में ये देश भारत से कहीं ऊपर हैं...यहां Per Capita Income भी भारत से कहीं ज्यादा है...यहां का लाइफ स्टाइल भारत के मुकाबले बेहतर है... लोग शॉपिंग और बाहर खाना-पीना पसंद करते हैं... इन देशों की कानून व्यवस्था भी भारत के मुकाबले काफी बेहतर है... हालांकि इन देशों मे भी अब Customer shopping behaviour बदलता जा रहा है ... जिसे लेकर Giant कंपनियां भी अपनी strategy बदल रही हैं ...
 
टेस्को, वॉलमार्ट दुनिया की टॉप मल्टीनेशनल कंपनियां हैं जो 24 घंटे खुले रहने वाले सुपरमार्केट चलाती हैं ....हालांकि भारतीय बाज़ार में अभी तक इनका सीधे तौर पर दखल नहीं हो पाया है ... कई बार FDI के जरिए इन्हें भारत में अपने पैर फैलाने की छूट देने की कोशिश की जा चुकी है लेकिन हर बार विरोध की वजह से सरकार को अपने कदम वापस खींचने पड़े हैं .... अब अगर राज्य सरकारें चाहें तो इन कंपनियों को अपने राज्य में कारोबार की इजाज़त दे सकती हैं ... हालांकि बीजेपी समेत तमाम पार्टियां इसका विरोध करती रही हैं ... अब सरकार की तरफ से "The Model Shops and Establishment (Regulation of Employment and Condition of Services) Bill 2016 को मंजूरी दे दी गई है ... ये बिल बाज़ारों को अपनी सुविधा के हिसाब से खोलने और बंद करने की सुविधा देता है ... 24 घंटे कारोबार की सुविधा देता है ... क्या ये परोक्ष रूप से उन मल्टीनेशनल कंपनियों को भारत में न्योता देना है जो सालों से 24 घंटे अपना सुपरमार्केट चलाती हैं ... और अगर ऐसा है तो फिर ग्राम स्वराज का क्या होगा ... गांधी के सपनों का क्या होगा ... दीनदयाल की फिलॉसॉफी Integrated Humanism का क्या होगा ?

ये बात सच है कि रिटेल सेक्टर में रोजगार की संभावनाएं होती हैं ... एक स्टडी के मुताबिक भारत में लगभग 4 करोड़ लोग रिटेल सेक्टर में employed हैं ऐसे में इस सेक्टर के expansion से रोजगार की संभावनाएं बढेंगी लेकिन कानून व्यवस्था के साथ-साथ इस बात का भी ख्याल रखना होगा कि क्या पूरी रात बाज़ार खोले रखने का सरकार का फैसला कामयाब होगा ... रोजगार के अवसर बढ़ जाएंगे लेकिन क्या बाज़ार में खरीदार भी होंगे ...
 
12 देशों में ऑपरेट करने वाले सुपरमार्केट Giant टेस्को ने पिछले साल ही अपने 400 में से 96 स्टोर्स को 24 घंटे खुले नहीं रखने का फैसला किया था और इसके पीछे दलील ये थी कि लोग रात को शॉपिंग नहीं करते ... टेस्को ने 20 साल पहले 24 Hours Shopping की शुरुआत की थी ... ऐसे में सवाल ये उठता है कि वेल्स, ब्रिटेन, स्कॉटलैंड जैसे देशों में अगर रात को लोग शॉपिंग नहीं करते तो क्या भारत में ऐसा होगा ...

2 टिप्‍पणियां:

  1. A nice analysis of the pros and cons of the proposed measure.It should be first started in the metro cities.At the same time workers should not be exploited.

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  2. A nice analysis of the pros and cons of the proposed measure.It should be first started in the metro cities.At the same time workers should not be exploited.

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