गुरुवार, 16 जून 2016

पलायन या Propaganda ?


देश में चुनाव हों या फिर उत्तर प्रदेश में... समस्याओं का सबसे बड़ा केंद्र हमेशा पश्चिमी उत्तर प्रदेश बनता है ... फिर वो 2013 में मुज़फ्फरनगर के कवाल गांव में हुआ दंगा हो या फिर 2016 में सामने आ रही कैराना गांव की तस्वीर ... ये महज संयोग है कि 2014 में लोकसभा चुनाव थे और 2017 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं ... साफ है कि एक बार फिर सियासी समां बांधा जा रहा है ताकि ध्रुवीकरण के जरिए, कौम विशेष को डर दिखाकर तथाकथित रहनुमा अपनी राजनैतिक महात्वाकांक्षाएं पूरी कर सकें ...

अफसोस इस बात का है कि ना तो सियासी ताकतों को पश्चिमी यूपी की संवेदनशीलता समझ में आती है ना ही उन लोगों की पीड़ा जिनकी पूरी जिंदगी सियासी चालों का शिकार हो जाती है … यहां ये बात समझनी होगी कि हर बार चुनाव से पहले क्यों पश्चिमी यूपी से ही इस तरह की खबरें आती है दरअसल पूरे उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में है … मतलब अगर यहां ध्रुवीकरण करने में कामयाब हो गए तो शायद इसका फायदा पूरे प्रदेश में मिल जाए … वैसे भी बाबरी विध्वंस के बाद ध्रुवीकरण के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश से विस्फोटक कोई और जगह नहीं हो सकती …

पश्चिमी उत्तर प्रदेश वैसे भी संवेदनशील ही रहा है … बंटवारे के बाद पाकिस्तान से ज्यादातर हिंदू परिवार यहां आकर बस गए थे तो उस दौरान बड़ी तादाद में यहां से मुस्लिमों का पलायन हुआ था … हालांकि बंटवारे का जख्म बहुत सालों तक नहीं रह पाया और यहां दोनों ही कौमें घुलमिलकर रहने लगीं …. आज भी आपको ऐसे कई परिवार मिल जाएंगे जिनमें दोनों ही धर्मों के पालन करने वाले लोग साथ रहते हैं … एक ही परिवार में दिवाली मनाई जाती है तो रोज़े भी रखे जाते हैं ... लेकिन सियासत वो चीज़ है जो सौहार्द्र की मिसालें पेश करने वाले इस इलाके को पिछले कुछ वक्त में खोखला करता जा रहा है ... वक्त बेवक्त यहां से तनाव की खबरें आती रहती हैं … जिससे रोजमर्रा की जिंदगी जीने वाले आम आदमी को कोई मतलब नहीं होता … उसे तो बस शांतिपूर्ण वातावरण चाहिए जहां उनका कुनबा फल फूल सके … लेकिन वही नहीं मिल रहा … बीते दिनों में सुर्खियां बटोरतीं पलायन की खबरों ने एक बार फिर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की संवेदनशीलता को सबके सामने ला दिया है .. लेकिन क्या सचमुच पलायन हो रहा है … और क्या इसकी वजह सांप्रदायिक है .. ?

पिछले काफी वक्त से केंद्र और राज्य सरकार के पास समय-समय पर ये इनपुट आते रहे हैं कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आतंकी गतिविधियां बढ़ रही हैं … आईबी, एलआईयू और पुलिस की स्पेशल सेल अक्सर ऐसी रिपोर्ट्स देती रही हैं कि अलकायदा और ISIS जैसे संगठनों की नज़र पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर है और इन संगठनों ने अपने स्लीपिंग मॉड्यूल्स को सक्रिय कर दिया है … पिछले दिनों गिरफ्तार हुए ज्यादातर आतंकियों के तार पश्चिमी उत्तर प्रदेश खासकर संभल से जुड़े हैं … पिछले दो तीन साल में ऐसी कई घटनाएं भी हुई हैं जिससे ये साबित हुआ है कि आतंकी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में सक्रिय हैं .... बम बनाने की प्रैक्टिस कर रहे हैं … अपना मॉड्यूल तैयार कर रहे हैं और काफी सक्रिय हैं … फिर चाहे वो बिजनौर में आतंकी के बम बनाने की प्रक्रिया में धमाके का मामला हो या फिर रुड़की में हुए ब्लास्ट का … ये ऐसी चुनौती है जिसकी अनदेखी ना तो केंद्र सरकार को करनी चाहिए ना ही राज्य सरकार को …. इतना ही नहीं कैराना जैसे शहरों में कानून व्यवस्था पर भी नज़र होनी चाहिए …ताकि असामाजिक तत्वों को किसी विवाद को जन्म देने और बढा़वा देने का मौका ना मिले...

कैराना विवाद में पलायन की बात से स्थानीय प्रशासन ने भी इनकार नहीं किया है लेकिन इसकी वजह सांप्रदायिक ना होकर कुछ और बताई जा रही है … पहला तो कई साल पहले लोग यहां से बाहर जाने पर मजबूर हुए क्योंकि वो बेहतर जीवन शैली चाहते थे जिसकी संभावना कैराना या आसपास रहकर नहीं दिख रही थी … दूसरा कुछ लोग यहां से सिर्फ इसीलिए चले गए क्योंकि उन्हें लगातार बिगड़ी हुई कानून व्यवस्था के कारण जान-माल का नुकसान हो रहा था … प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक जो भी पलायन हुए हैं वो अचानक नहीं हुए.... पलायन हुआ ये सच है वजह भले सांप्रदायिक ना होकर लचर कानून व्यवस्था और आजीविका की कमी हो … लेकिन क्या इसे नज़र अंदाज़ किया जा सकता है … क्या यही वजह नहीं है कि असामाजिक तत्व यहां और मजबूत होकर सिर उठा रहे हैं … आतंकी गतिविधियां बढ़ रही हैं … क्या इसे रोकने के लिए दोनों सरकारों को आरोप -प्रत्यारोप के बजाय Integrated cohesive टीम की तरह काम नहीं करना चाहिए … क्या सुरक्षा एजेंसियों की तरफ से जो sensitive information मिल रही हैं उन पर गंभीरता से काम नहीं करना चाहिए … क्या उन्हें साम, दाम, दंड भेद का इस्तेमाल कर devisive ताकतों को खत्म नहीं कर देना चाहिए

अगर सचमुच पॉलिटिकल पार्टीज़ इस इलाके में पलायन को लेकर चिंतित हैं तो उन्हें चाहिए कि वो इसकी जो जड़ है उसमें मट्ठा डाले … इन इलाकों में Employment generate करे ... यहां रह रहे लोगों में sense of security पैदा करे ... लोगों को motivate करें .. गलत तरीके से हो रहे पैसे के circulation पर रोक लगाए.. तभी जाकर ये समस्या खत्म होगी ... ये तो तय है कि अगर इस तरह हंगामा खड़ा करने का मकसद सिर्फ चुनाव जीतना है तो इन सरकारों को किसी भी अनहोनी के लिए तैयार रहना होगा और कम से कम इस बात का दावा तो वो ना ही करें कि वो जनता के हिमायती हैं …
 
 

 
 
 

1 टिप्पणी:

  1. har ek vyakti ko samajhana hoga palayan aaj se nahi hamesha se ho raha hai aur karan bhi yahi hai ki ajivika aur work ki talash ya fir behatar zindagi ki ummid ....siyasat ne sachmuch me bura haal kar rakaha hai

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