बुधवार, 4 मई 2016

क्या कहती है ये मुलाकात ?

सियासत में हर रिश्ता नफे नुकसान के आधार पर तय होता है ... यहां तक कि बयान भी इसी तराजू में तौलकर दिया जाता है ... लालू यादव से बाबा रामदेव की मुलाकात भी इस बात का संकेत दे रहा है कि रामदेव सियासी गलियारों में नए दोस्त तलाशने की जुगत में लग गए हैं ... इसीलिए कभी लालू यादव को कंस का वंशज बताने वाले रामदेव उन्हें विश्व योग दिवस का न्यौता देने जाते हैं .. उन्हें पतंजलि की एंटी एजिंग क्रीम लगाते हैं .. चॉकलेट भी खिलाई जाती है ... एक दूसरे के खिलाफ बयानबाज़ी में मर्यादाओं की तमाम सीमाएं लांघने वाले एक दूसरे की तारीफ करते नज़र आते हैं ...

दरअसल रामदेव अब महज एक योगगुरु नहीं है ... योग की तमाम सीमाओं को लांघकर अब वो कारोबारी बन चुके हैं .. और जिस तरह से उन्हें अपना कारोबार बढ़ाया है ... उसको देखकर लगता है कि रामदेव को बीजेपी की तरफ से political संरक्षण मिलता रहा है और शायद अब उसमें कमी आई है .. औऱ शायद इसीलिए अब उन्हें गैर बीजेपी दलों से संपर्क साधने की ज़रूरत महसूस होने लगी है ..
ये बात सच है कि लालू और रामदेव एख दूसरे के आलोचक रहे हैं.... लेकिन वो दौर अलग था उस दौर में कांग्रेस के खिलाफ रामदेव मुहिम चला रहे थे... रामदेव के पीछे पूरा संघ परिवार और भारतीय जनता पार्टी थी ... रामदेव को लगता था कि अगर बीजेपी सत्ता में आ गई तो इसका उन्हें व्यवसायिक लाभ मिलेगा ... और काफी हद तक रामदेव ने इसका राजनैतिक और व्यवासियक लाभ उठाया भी ... अब उनको लग रहा है कि महज बीजेपी और बीजेपी की अगुआई में चल रही सरकारों के साथ रहने से उनका कारोबार उतना आगे नहीं जा सकता जितना आगे ले जाने की उनकी इच्छा है तो अब वो नए दोस्त, नए राजनैतिक संरक्षण की तलाश में निकले हैं ... और ये कहा जा सकता है कि इस दिशा में उनका पहला लक्ष्य लालू यादव को अपने पाले में लाने का रहा ... क्योंकि लालू के ज़रिए सोनिया गांधी और राहुल को साधने की भी कोशिश की जा सकती है ... आज जिस तरह से लालू यादव और रामदेव मिले हैं उसे देखकर तो यही लगता है कि उन्होंने एक बड़ा प्लेटफॉर्म तैयार करने की कोशिश की है और वो तभी कामयाब हो सकती है जब गैर बीजेपी नेता या दल उनके पाले में खड़े नज़र आएं ...

दरअसल रामदेव को दोनों मोर्चे पर चुनौती मिल रही है .. बतौर योगगुरु उन्हें दूसरे योगगुरु चुनौती देते नज़र आते हैं ... खासकर श्री श्री रविशंकर जिन्होंने वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल का आयोजन कर उनके सामने एक लंबी लकीर खींच दी है ... इसीलिए भी क्योंकि इस कार्यक्रम को प्रधानमंत्री ने भी लंबा वक्त दिया था ... तो रामदेव के लिए दूसरी चुनौती है हर्बल, आयुर्वेदिक और ऑर्गेनिक फूड के क्षेत्र में .. जिसमें तमाम दूसरे साधु संतों के साथ-साथ मल्टीनेशनल और भारतीय कंपनियां हैं ... बाबा रामदेव ने पतंजलि ब्रांड के तहत हर वो चीज लांच की है जो घरेलू इस्तेमाल में आती है...और इस फील्ड में पहले से ही मुकेश अंबानी, किशोर बियानी और गौतम अडानी जैसे बड़े-बड़े उद्योगपति मौजूद हैं ....

ऐसे में इस दोतरफा चुनौती से निपटने के लिए बाबा रामदेव को नए साथियों की जरूरत है ... ये ज़रूरी है कि उनके दोस्तों की संख्या में इज़ाफा हो और वो महज एक पार्टी विशेष से बंध कर ना रहें क्योंकि उस पार्टी विशेष से बाकी औद्योगिक घराने भी जुड़े हुए हैं ... शायद इसीलिए उन्होंने लालू प्रसाद के ज़रिए ये कोशिश की है अपनी acceptability उस खेमे में भी बढ़ाई जाए जो खेमा गैर बीजेपी खेमे के रूप में जाना जाता है ...
 

 

 
 

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