शुक्रवार, 22 अप्रैल 2016

करप्शन का एंट्री प्वाइंट

न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को लेकर तमाम तरह के आरोप लगते रहते हैं लेकिन इस मसले पर कोई बात नहीं करता और अक्सर न्यायपालिका से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों में आरोपी बरी भी हो जाते हैं .. मामला अगर higher judiciary का हो तो भारत में आज तक किसी को सज़ा नहीं मिली .. तो क्या इसका मतलब ये है कि higher judiciary में भ्रष्टाचार नहीं है .. इन्ही मसलों पर पटना हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस नागेंद्र राय के साथ बातचीत के मुख्य अंश

वासिंद्र मिश्र: नागेंद्र जी नमस्कार.. भ्रष्टाचार का पैमाना है कि Lower Judiciary में भ्रष्टाचार है तो तुरंत कार्रवाई हो जाती है judges के खिलाफ, जबकि Higher Judiciary में judges के खिलाफ भ्रष्टाचार की बात आती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती.. भ्रष्टाचार को लेकर न्यायपालिका के अंदर दोहरे मानदंड को आप किस रूप में देखते हैं..
 
जस्टिस नागेंद्र राय: इसको मैं इस रूप में लेता हूं कि higher judiciary में action लेने से पहले बंधन है कानून और संविधान में ऐसे में इसको लेकर कोई आगे बढ़ता नहीं है...लेकिन जहां तक Corruption की बात है...हमारे दो-दो चीफ जस्टिस लूथरा साहब और लोढ़ा साहब ने कहा की judiciary में corruption है....judiciary में corruption तो है ही है.....केवल इसलिए की contempt है कोई बोलता नहीं है...
वासिंद्र मिश्र: लेकिन मार्कंडेय काट्जू, बी एन खरे या यूपी के सीबी पांडे इस तरह के लोग अब फिर एक बार भ्रष्टाचार की बात कर रहे हैं...कह रहे हैं न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है और इसको ठीक किया जाना चाहिए....तो आपको नहीं लगता की higher judiciary में जो भ्रष्टाचार की बात कही जा रही है इसके विरुद्ध सख्त कानून बनना चाहिए....
जस्टिस नागेंद्र राय: पहले तो Entry point पर check होना चाहिए...गंदा पानी किसी नदी में डालिएगा तो बाद में चाहे कितना भी रोकिए पानी तो गंदा हो ही जाएगा ....ये जो entry point है,  judges बहाली का सिस्टम है...ये सबसे खराब सिस्टम higher judiciary का है....और इसी के लिए सारी problem हो रही है...हम लोगों के जमाने में देखा जाता था कि जो जजहाल किए गए उन्होंने कितने केस में बहस की...कितना डिविजन बेंच केस बहस किया....कितने फैसले दिए ...अब आप देखिए कुछ हाईकोर्ट्स ऐसे भी हैं जिनमें 50 में से 30 जजों का शायद कोई reported judgement उनके नाम से नहीं है....उन्होंने एक काम नहीं किया है....लेकिन उनकी में कई फंडे अपनाए जाते हैं .. अब कौन किस ग्राउंड पर भेजा जाता है.. detail आपसे नहीं कहूंगा...लेकिन ये जरूर कहूंगा की entry point ही सबसे गड़बड़ है....
 
वासिंद्र मिश्र: बिल्कुल सही बात उठाई आपने कि entry point को दुरुस्त करने की जरूरत है....गंगा को अगर साफ करना है तो जहां से निकलती है वहां से शुरू किया जाना चाहिए....आप भी न्यायपालिका में रहे हैं....आप पटना हाईकोर्ट में जज रहे हैं और आपके ऊपर भी आरोप लगे थे कि लालू प्रसाद यादव से मिलकर फायदा लिया....राजनैतिक प्रभाव से अपनी नियुक्तियां कराई...
जस्टिस नागेंद्र राय: अच्छी बात आपने कही किसी के बगल में डेरा हो जाए तो....मैं तो शादी छोड़कर कभी उनके यहां गया भी नहीं....उस जमाने में जो केस देखते थे...उनके यहां शादियों में चार-चार घंटा बैठते थे...मैं तो जा भी नहीं रहा था..जब आपने बात छेड़ दी है तो मैं आपको कह दूं कि देखिए उस जमाने में मुझे नाम भेजने के लिए यहां के चीफ जस्टिस लाहोटी साहब ने कहा कि नाम भेजिए....तो नाम भेजने के चलते रवि शंकर प्रसाद लॉ मिनिस्टर थे...चार कायस्थों का नाम उन्होंने दिया....पटनायक साहब यहां से गए....वी पी सिंह,,,, बी एन अग्रवाल....राम जस्वी सिन्हा का नाम लिखिए....15 नाम भेजिए....मैंने किसी का नाम नहीं भेजा....चीफ जस्टिस पटना हाईकोर्ट उस समय थे..उस समय मैं जज था लिख के चिट्ठी भेज दिया कि ये लोग आए थे...और इस साइड से हमारे यहां पैरवी की...कि आप चीफ जस्टिस से कहिए....जहां तक मेरा सवाल है कोई नाम की पैरवी नहीं करूंगा....तो ये सब जो बातें हो गई तो मैं लालू प्रसाद का आदमी हो गया........क्योंकि मैं किसी के यहां चाय पीता हूं.... किसी के यहां पानी पिया 14-16 साल में.... किसी के घर खाया...ना पान , बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू कुछ नहीं लिया
 
वासिंद्र मिश्र: मैं व्यक्तिगत बात नहीं कर रहा हूं मैं ये जानना चाह रहा हूं कि जो लोग जज की कुर्सी पर आते हुए अधिकारियों कॉरपोरेट घरानों को और नेताओं को oblige करते हैं उनके पक्ष में फैसले देते हैं...सरकारों के पक्ष में फैसले देते हैं...रिटायर होने के बाद उनकों अलग अलग ट्रिब्यूनल का...कमिशन्स का या राज्यों का राज्यपाल बना दिया जाता है...या ट्रिब्यूनल या कमिशन्स का चेयरमैन बना दिया जाता है इसको क्या आप उचित मानते हैं....क्या नैतिकता के आधार पर ऐसे पदों को लेना चाहिए...ऐसे माननीय जजों को
 
जस्टिस नागेंद्र राय: पहले तो पोस्ट मिलना ही नहीं चाहिए सबसे बड़ा बेइमानी का स्त्रोत है रिटायरमेंट के बाद ... पोस्ट अभी आपने अखबारों में पढ़ा भी होगा .. कुछ दिनों पहले किस बेंच ने किस नेता को खबर किया तो..दोनों Judges को गवर्नर और चेयरमैन बना दिया गया..दस दिन पहले की खबर है...रिटायर हुए तो भारद्वाज साहब ने कहा लॉ कमीशन के मेंबर हो जाइए...लेकिन मैंने कहा नहीं मैं वकालत करता हूं....वही करूंगा...कहीं नहीं जाऊंगा.....लेकिन सबसे बड़ी चीज है जब लेते वक्त आप गलत आदमी को लीजिएगा तो वो भी आएगा तो उसी को oblige करेगा जिसने oblige कर entry दी है
 
वासिंद्र मिश्र: आपके मुताबिक जो देश के कानून मंत्री के पदों पर रहते हैं चाहे वो रवि शंकर प्रसाद या हंसराज भारद्वाज हों ये लोग judges की नियुक्ति में influence करते हैं...या चाहते हैं कि अपने लोगों को जज बनाया जाए
 
जस्टिस नागेंद्र राय: मैं तो समझता हूं करते हैं लोग.......और काफी करते हैं और जो नहीं करेगा...बेईमान कौन जज हो जाता है जो इन लोगों का नहीं सुने...
वासिंद्र मिश्र: आपका इतना लंबा अनुभव रहा है आपकी नजर में सबसे बढिया कानून मंत्री कौन रहा देश का जिसने कम से कम हस्तक्षेप किया हो...judicial कार्यों में या जजों की नियुक्ति में......
जस्टिस नागेंद्र राय: सबसे अच्छा समय विश्वनाथ प्रताप जी के जमाने में था ...बता दूं हम लोगों का नाम उसी समय गया था...मैं एक गांव का रहने वाला आदमी हूं....42 बरस से नाम जाने लगा 5 बरस से कोई जज बनने नहीं दिया इसलिए कि मेरे पिता थे.. दादा थे कोई घर के थे.......तो नाम मेरा भेजा गया हमको इतना काम था उस वक्त कि मैं किसी से कहा भी नहीं...चीफ जस्टिस ने नाम भेज दिया....बाद में कहा कि आपका भेज दिए हैं...इसके बाद क्या हुआ कि नाम मेरा गया वहां से होकर गया....कहीं हम लोगों को जाना नहीं पडा....किसी से कहना नहीं पड़ा बल्कि एक एडवोकेट जनरल उस जमाने में थे .. उन्होंने कहा कि नाम जा रहा है चीफ मिनिस्टर से मिल लीजिए...मैंने कहा मैं 24 वर्ष में किसी नेता से मिला नहीं हूं...मैं नहीं जाऊंगा....अब तो वो मर गया सबूत क्या दूं....उससे दिक्कत कितनी होती है मुझे.... यहां पर जो एक जमात बनी हुई है...उसी के आदमी देखते हैं कि कौन जज होने वाला है....अभी जज का नाम आने वाला है कहिए मैं बता दूं कौन-कौन आने वाला है....
वासिंद्र मिश्र: बताइए आपकी जानकारी में है तो........
 
जस्टिस नागेंद्र राय: अब मैं कितनी बात बताऊं आपसे छोड़िए..कहने का ये मतलब है कि मैं यही कहता हूं कि जब दो-दो चीफ जस्टिस कह चुके हैं कि करप्शन है तो...करप्शन है इसको मान लेना है....अब सवाल है percentage का तो कोई संस्था अभी हिंदुस्तान में नहीं है जहां सिर्फ ईमानदार हों ...  चोर भी हैं बेईमान भी हैं...सबलोग हैं हर संस्थान में .वैसे judiciary में भी हैं.........
वासिंद्र मिश्र:तो इसका निराकरण क्या है.......आपकी नजर में.......क्या कॉलेजियम सिस्टम खत्म कर दिया जाए तो भ्रष्टाचार मिट जाएगा......judiciary में.........
जस्टिस नागेंद्र राय: नहीं ये तो कहना मुश्किल है...कॉलेजियम से तो वही है कि तार से गिरे खजूर पर अटके....इसके लिए सिस्टम और भी हैं......आम इम्तिहान लीजिए थोड़ा इंटरव्यू लीजिए.......उसको जज कीजिए कि आदमी योग्य है...कभी बहस किया कुछ किया..चले आए भाई बन गए राजा.........
वासिंद्र मिश्र: नागेंद्र जी lower judiciary  में जो आते हैं वो एग्जाम पास कर आते हैं....lower judiciary में भी भ्रष्टाचार का level काफी ज्यादा है........
जस्टिस नागेंद्र राय: अच्छे आदमी आने पर भी भ्रष्टाचार नहीं रुकता है मैं आपको एक किस्सा सुना दूं 1924 का हमने उस केस को 15 साल तक किया था, एक बड़े नामी जज थे उस समय अंग्रेज़ो के और उन्होंने एक राजा स्टेट के केस में 35 हजार रुपया ले लिया....गवर्नर को मालूम हुआ तो उन्होंने enquiry कराई तो जज को Resign करना पड़ा...तो उस जमाने में भी ऐसी बात थी...ऐसा नहीं है ये कोई नई खबर है...........बाद में वे इंडिया के बड़े नामी वकील हुए.........इसलिए भ्रष्टाचार कहीं भी हो सकता है
 
वासिंद्र मिश्र जजों के लिए या जजों की नियुक्ति को लेकर accountability bill का जो proposal है क्या आपकी नजर में full proof है भ्रष्टाचार रोकने के लिए......
जस्टिस नागेंद्र राय: फुल प्रुफ तो कोई चीज नहीं होती है इसमे अब दोनो बात है एक तरफ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कॉलेजियम रहेगा.....गॉवर्नमेंट कहती है ये रहेगा लेकिन national entrance test में छांट देंगे तब दोनों का कोई मतलब नहीं.... ये रहेगा ना वो रहेगा कुछ नहीं रहा समझिए तो.... national entrance का पहले भी appointment होता था....पहले discussion होता था...open discussion करके अगर किसी में कोई कमी हो तो उसको छांटिए... government का भी काम है अच्छे judges बहाल हों......सुप्रीम कोर्ट का भी होना चाहिए अच्छे जज बहाल हों...अच्छा डॉक्टर....अच्छा जज नहीं होगा तो समाज चलेगा कैसे..........
वासिंद्र मिश्र: तो कहां से लाया जाऐंगे अच्छे जज ?
जस्टिस नागेंद्र राय: अच्छा जज के लिए तरीका है उसके लिए सबको sacrifiice करना पड़ेगा...अपने को थोड़ा सपने में देखना होगा...वास्तविकता में नहीं.. तभी हो सकता है..........
वासिंद्र मिश्रजातीय आधार पर और सांप्रदायिक आधार पर जजेज की नियुक्ति की डिमांड बार-बार होती है उसको आप कितना उचित मानते हैं.............
जस्टिस नागेंद्र राय: ये तो और गलत है जो बचा खुचा है वो भी खत्म हो जाएगा..कहने का मतलब है कि caste wise लीजिएगा तो गड़बड़ है...मान लीजिए दो आलू है एक सड़ा हुआ एक कच्चा है...इसलिए मैं नहीं कहता हूं कि कोई जात का आदमी अच्छा वकील नहीं है....हर जाति में अच्छे हैं.....मैं भी था तो हरिजन का भी नाम मेरे सामने आया..लेकिन मेरिट टेस्ट होना चाहिए...जाति का representation देकर वहां लाठी तो चलाना नहीं है किसी को....
वासिंद्र मिश्र: जाति कr सबसे बड़ी प्रयोगशाला तो आपके ही राज्य से शुरू होती है.....बिहार से......
जस्टिस नागेंद्र राय: मैं रहने वाला यूपी का हूं....पहले यूपी में जाति का कोई बोलबाला नहीं था....आपको याद होगा पुराने जमाने में त्रिभान गुप्ता गुट है....कमलापति गुट है...कोई caste wise division यूपी में भी नहीं था...  1969 से जातिवाद यूपी में आया...बिहार में थोड़ा पहले से है...उसके बावजूद अभी जो मौजूदा हालत में दिखाई दे रहा है 8-10 वर्षों में थोड़ा कम हुआ है...पहले होता था इन्हीं को पोस्टिंग करते गए......बैकवार्ड फॉरवर्ड को नहीं फॉरवर्ड बैकवर्ड को नहीं......इस टाइप की चीजें 8-10 वर्षों में कम हुई है.........
वासिंद्र मिश्र: इधर कुछ वर्षों से लगातार डिमांड होती रही है कभी लालू...कभी मुलायम....कभी मायावती बोलती हैं कि न्यायपालिका में उनके समाज का प्रतिनिधित्व कम है इसलिए उनके खिलाफ एकतरफा फैसले होते हैं..तो क्या ऐसा होता है....जब आप जज की कुर्सी पर आते हैं तो जाति देखकर फैसला करते हैं...
जस्टिस नागेंद्र राय: उसमें समझ का फेर होता है....कोई कम समझा तो एक तरफ जजमेंट दे दिया...कोई नहीं समझा तो दूसरे तरफ दे दिया....लेकिन इस ग्राउंड पर इतने अपराध जो हजारों लोग सुप्रीम कोर्ट से छूट रहे हैं...हाईकोर्ट से छूट रहे हैं.....उसमें हरिजन भी हैं उसमें सारी जातियां हैं तो ये कहना कि जज ऐसा करके देखेगा तो....जो भगवान जिस रूप में देखता है कम से कम उनको तो मानता है वो कभी माफ नहीं करेगा.....कुर्सी पर बैठकर ऐसा नहीं करना चाहिए.........चाहिए वो गरीब से गरीब आदमी हो बल्कि गरीब आदमियों को तो...गरीबों पर हम लोग ध्यान देते हैं उसे उचित सुविधा मिले.......जितना की बड़े आदमियों को मिलती है....

वासिंद्र मि्श्र : बहुत-बहुत धन्यवाद आपको
 

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