बुधवार, 6 अप्रैल 2016

उत्तराखंड का 'पनामा' कनेक्शन

उत्तराखंड में जारी सियासी उथल-पुथल के बीच अपनी सत्ता गंवा चुके हरीश रावत ने माना है कि जिन्हें उन्होंने सियासत की ABCD सिखाई वही उनके लिए मुसीबत खड़ी कर रहे है.. पेश है हरीश रावत के साथ बातचीत के मुख्य अंश
 
वासिन्द्र मिश्र- कैसा लग रहा है आपको, उत्तराखंड हाईकोर्ट में केस का निर्णय आना है, और इसके बीच में जो तैयारी चल रही है आपकी तरफ से और बीजेपी की तरफ से तो आपकी तरफ से कितनी तैयारी है इस राजनीतिक चुनौती से निपटने के लिए?
हरीश रावत- देखिए हमारी तरफ से पूरी तैयारी है, हम जो फैक्ट हैं, जो तथ्य है उसको लेकर के सम्मानित उच्च न्यायालय के सम्मुख हैं और हमें पूरा भरोसा है कि हमारे साथ पूरा न्याय होगा और हम उच्च न्यायालय के सम्मुख भी हैं, देश के और जनता जनार्दन के सम्मुख भी हैं, अपने देवी देवताओं के सम्मुख भी हैं हमें सब तरीके के न्याय पर पूरा भरोसा है, क्योंकि हमारा रास्ता सही रास्ता है, संविधान सम्मत रास्ता है
 
वासिन्द्र मिश्र- आपको नहीं लगता है कि जिन-जिन के भरोसे हैं आप, अदालत के भरोसे हैं आप, देवी देवताओं के भरोसे हैं आप, इससे एक बड़ी अदालत भी है जनता जनार्दन की अदालत, तो जनता की अदालत पर आपको भरोसा नहीं है?
हरीश रावत - पूरा भरोसा है, इसीलिए मैं पदयात्रा भी कर रहा हूं, लोगों के बीच में जा रहा हूं और लोग बहुत जुड़ रहे हैं हमारी पदयात्रा के साथ बल्कि भाजपा इतनी बेचैन है कि हमारी पदयात्राओं को रोकने के लिए उन्होने मेरे पर पथराव भी किया है जगह जगह अपने कार्यकर्ताओं से कह रहे हैं कि काले झंडे दिखाओ और रोको किसी तरह से और जब इससे भी काम नहीं चल रहा है, तो राष्ट्रपति शासन का उपयोग करके, छोटे गांव में भी कहीं पदयात्रा हो रही है कांग्रेस की, तो धारा 144 लगाई जा रही है, तो ऐसा लगता है कि जनता के बीच में हम जा सकें उसे रोकने की पूरी तैयारी हो रही है
 
वासिन्द्र मिश्र - तो आप इसके लिए तैयार हैं कि अगर अदालत का फैसला चाहे जो आए, अंतिम फैसला जनता में आना है और आप और आपकी पार्टी इस बात के लिए तैयार है जनता की अदालत में जाने के लिए ?
हरीश रावत- देखिए हमने तो पहले दिन ही कहा कि जब भाजपा के लोग ये बता रहे थे कि हरीश रावत इतना बुरा है, ये गड़बड़ है, वो गड़बड़ है हमने कहा कि जब तुमने कुल्हाड़ा उठा ही लिया है, तुमने संसदीय लोकतंत्र की हत्या करते हुए राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया है सरकार को भंग कर दिया है, तो एक चोट और कर देते विधानसभा भी भंग कर देते,  इससे बढिया मौका और क्या हो सकता था कि एक मुख्यमंत्री जिससे उत्तराखंड की जनता इतनी नाराज हो चुकी है आप सीधे जनता से कहते कि महाराज ऐसा मुख्यमंत्री था, हम आपके बीच गए हैं हम को चुन दो भाजपा को ये हिम्मत है ही नहीं, उनको जनता पर विश्वास नहीं रह गया है पहले उनको मोदी जी पर भी विश्वास था, अब मोदी जी पर भी विश्वास नही है अब तो केवल सीबीआई पर और सेंट्रल एजेंसी पर विश्वास रह गया है, जिनका दुरुपयोग वो उत्तराखंड में कर रहे हैं आपको ताज्जुब होगा ये जान कर के कि यहां 9 विधायकों के घर पर सीआईएसएफ लगाई गई है जो सीआईएसएफ परमाणु घरों की सुरक्षा करती है, जो औद्योगिक संस्थानों की रक्षा करती है, बड़े- बड़े पब्लिक सेक्टर यूनिट्स हैं उनकी रक्षा करती है उनके बजाए पता नहीं क्या खजाना रखा है, 9 विधायकों के घरों में, उनकी सुरक्षा के लिए लगा रखी है सीआईएसएफ, इस समय केंद्र सरकार जो कर दे वो कम है
 
वासिन्द्र मिश्र - हरीश जी, सीबीआई और बाकी हथकंडे तो आपकी सरकार ने भी अपनाए अपने राजनीतिक विरोधियों पर, तो आपको लग रहा है वही हथकंडा बीजेपी अपना रही है आप लोगों के प्रति
 
हरीश रावत - नहीं हमारी सरकार ने कभी ऐसे हथकंडे नहीं अपनाए...कांग्रेस हमेशा एक डेमोक्रेटिक पार्टी रही और कभी चूक हुई होगी, मैं नहीं कहता, लेकिन चूक को कांग्रेस ने सुधारा और ये एकाधिकारवादी हैं, authoritarian हैं और चीजों को थोपना जानते हैं दूसरे को सहन नहीं करते, बहुत ही असहिष्णु तरीके के लोग हैं इसी लिए एक छोटे से राज्य के अंदर एक दिया हमने जलाकर रखा था, क्या जरुरत थी उसे बुझाने की  एक साल के बाद चुनाव रहे थे, जनता फैसला कर देती ...
 
वासिन्द्र मिश्र - 9 विधायकों के बारे में जो बात कर रहे हैं, कल से कि सीआईएसएफ की सिक्योरिटी क्यों दी गई है ? आपके ऊपर यही तो आरोप है कि आप उन विधायको को डरा के धमका के धन का लालच दिखा के अपने पाले में लाना चाहते थे,  तो शायद इसी डर से बीजेपी ने सीआईएसएफ लगा रखा है कि आपके लोग और आपकी पुलिस उन विधायकों तक पहुंच पाएं?
हरीश रावत- अब तो विधायक यहां है ही नहीं, घर में है ही नहीं, उनको तो बंबई के अंदर जो है, अपनी महाराष्ट्र सरकार की सुरक्षा में भेजा है, पहले हरियाणा और राजस्थान की सुरक्षा में भेजा था यहां अब तो राष्ट्रपति शासन है , हरीश रावत शासन नहीं है, क्या उनको राष्ट्रपति शासन पर भी विश्वास नही है अपने ही शासन पर विश्वास नही है, कि उनके घरों की सुरक्षा कोई और करे कुछ ऐसा लगता है कि कुछ ऐसा तारों का खजाना है वहां जिसकी रक्षा के लिए सीआईएसएफ जरुरी है कोई लगता है कि कोई राष्ट्रीय ऐसे रहस्य हैं जिनकी सीआईएसएफ को रक्षा करनी है
 
वासिन्द्र मिश्र -आप अपने विधायकों को इतनी गहरी सुरक्षा में क्यों रखे हैं ?
हरीश रावत - हमारे जो विधायक हैं वो पहले भी उत्तराखंड में थे, अब उत्तराखंड के पड़ोस में हैं एक कदम उत्तराखंड में एक कदम उत्तराखंड से बाहर है बाकी कहीं दूर नहीं है, सब यहां भी रहे हैं, जा रहे हैं, सब कर रहे हैं लेकिन साथ-साथ एक दूसरे का मनोबल बढ़ाने का काम कर रहे हैं, एक दूसरे के साथ हैं।
 
वासिन्द्र मिश्र - कहा जा रहा है कि जहां आपने विधायकों को रखा है वहां एक तरह से पर्यावरण का उल्लंघन हो रहा है, वहां noise pollution हो रहा है। हेलीकॉप्टर उतर रहे हैं, वन्य जीवों को काफी नुकसान हो रहा है?
हरीश रावत- आप जानते हैं कोई भी हेलीकॉप्टर कंपनी जहां उसका रूट नहीं होगा वहां लैंड करेंगी नहीं, सिविल एविएशन उसकी परमिशन नहीं देगा बीजेपी ये समझती है, कि कोई भी आरोप लगा दें, वो फतवा जारी करते हैं एक तरह से, लोगों से कहते हैं कि उसे सच मानकर चलो आज लोग सब समझते हैं, ऐसा कहीं कोई काम नहीं हुआ है जिसके कारण हमारे ऊपर उंगली उठे।
 
वासिन्द्र मिश्र - हरीश जी, लखनऊ से आपकी पढ़ाई हुई है और विद्यार्थी जीवन में आप काफी चर्चित रहा करते थे लखनऊ विश्वविद्यालय में, आज आपको विजयवर्गीय से इतना डर क्यों लगने लगा?
हरीश रावत - मुझे डर उनसे नहीं है, मुझे वो...जो वो छोटी हरकतें कर रहे हैं, पहले उन्होने ये कहा कि मैं तो शॉर्प शूटर हूं और आया हूं पूरी ताकत ले कर के... बल्कि मुझे तो अफसोस इस बात का है कि उन्होने आरएसएस को भी involve किया, जबकि हम आरएसएस के बारे में मानकर के चलते थे कि वो ऐसी छोटी, ओछी चीजों पर हाथ नहीं डालते, उस पर उनको भी इन्होंने involve किया...और लोगों को ऑफर किया पैसा ... हमारे विधायकों ने आकर टेलीविजन पर कहा कि हम लोगों को इतना इतना पैसा ऑफर किया गया, और ये आम चर्चा है कि पैसे का भारी, बड़ा भारी लेनदेन हुआ है...और ये भी आज के दिन चर्चा है कि...और चर्चा ही नहीं बल्कि वो खुलेआम कह रहे हैं कि कोई और नहीं कह रहा है, भारतीय जनता पार्टी के बड़े- बड़े नेता कह रह रहे हैं, विजयवर्गीय कह रहे हैं, श्याम जाजू कह रहे हैं कि हमारे सम्पर्क में विधायक हैं लोग कह रहे हैं कि बोरा लेकर भाजपा के नेता उत्तराखंड की गलियों में घूम रहे हैं कि विधायक मिल जाएं हम खरीद लें ...हमें डर इस बात का है कि उत्तराखंड के शरीर पर दल- बदल का जो घाव लगाया गया है, ये कितना गहरा होगा ये नासूर के तरीके से कहीं ऐसा तो नहीं है कि मेरे उत्तराखंड के शरीर को गला दे यदि दल-बदल से गिरने वाली मेरी आखिरी सरकार है बीजेपी इस बात की गारंटी देती है तो मुझे कोई मलाल नहीं रहेगा लेकिन यदि ये एक शुरुआत है, और इसके बाद उत्तराखंड, गोवा की तर्ज पर, झारखंड की तर्ज पर, नॉर्थ ईस्ट की तर्ज पर अस्थिरता की तरफ जाना है...तो मुझे बहुत चिन्ता है, मैं बहुत दुखी हूं
 
वासिन्द्र मिश्र- आपको लग रहा है, उत्तराखंड में जो political instability है, जो खरीद फरोख्त की राजनीति शुरू हुई है, इसका सीधा असर उत्तराखंड के विकास पर पड़ेगा?
हरीश रावत- निश्चित तौर पर पड़ेगा, इससे अस्थिरता राज्य के अंदर आएगी पहले भी मुख्यमंत्री बदले लेकिन लोगों ने पार्टी के अंदर ही इसका समाधान ढूंढने का प्रयास किया इस बार पार्टी के अंदर समाधान नहीं ढूंढा, गया बल्कि भाजपा की मदद से, भाजपा की खरीद फरोख्त की ताकत से पार्टी के बाहर समाधान ढूंढा गया, और ये एक नई शुरुआत उत्तराखंड में हुई है...ये कहां जा कर रुकेगी कोई कह नहीं सकता जब राजनीतिक अस्थिरता आएगी तो राज्य ने जो कुछ इन 15 सालों के अंदर प्राप्त किया बेकार चला जाएगा जब हम उम्मीद कर रहे थे देश के सबसे विकसित राज्य के रुप में आगे बढ़ेंगे...इस समय हम 13 पर्सेंट से ज्यादा वार्षिक दर से grow कर रहे हैं, हमारी जो पर कैपिटल इनकम है... प्रति व्यक्ति औसत आय 2014 के अंदर 88 हजार रुपया थी, वो दो साल में बढ़कर 1 लाख 73 हजार हो गई थी, जो हमारा growth path था अब सब गड़बड़ हो जाएगा इससे... बीजेपी ने केवल दल-बदल, हमारे ऊपर थोप दिया बल्कि विकास के रास्ते, जो उत्तराखंड बढ़ रहा था...वो रास्ता भी गड़बड़ हो गया है आज ...
 
वासिन्द्र मिश्र- इसके लिए आपको ज्यादा जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, आप पर दो गंभीर आरोप लग रहे हैं

पहला तो ये कि अगर आप नेतृत्व परिवर्तन के लिए तैयार हो गए होते तो शायद आपकी पार्टी के अंदर विघटन या बिखराव नहीं होता, और दूसरा आरोप ये है कि तकनीकी तौर पर भले ही विधानसभा के अंदर की कार्यवाही के लिए स्पीकर जिम्मेदार हैं और स्पीकर सुप्रीम होते हैं लेकिन माना ये जा रहा है अगर आपने अपनी तरफ से स्पीकर को सहमति दे दी होती लॉबी डिविजन कराने की मनी बिल पर...तो शायद ये विघटन टल जाता तो इसके लिए आपको ज्यादा जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, पूरे राजनीतिक उथल पुथल के लिए ?
हरीश रावत- मैं बहुत विनम्रता से एक बात कहूं, कि मैंने ये बात अपने दोस्तों, सबको और मीडिया को भी स्पष्ट तौर पर कहा कि यदि किसी चीज का कांग्रेस पार्टी के अंदर समाधान...माइनस हरीश रावत भी है, हरीश रावत के बिना भी है तो मुझे नम्रता से स्वीकार्य है जिस पार्टी ने मुझे दो साल मुख्यमंत्री बनाया है, मेरे जीवन के दस-पंद्रह साल और हैं काम करने के...मैं बिना मुख्यमंत्री के कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में भी वो काम करूंगा It was known to everybody ....दूसरा ये proposal कभी कहीं से नहीं आया कि बल्कि ये लोग भी...आखिर तक श्री विजय बहुगुणा मुझसे कहते रहे कि brother सारी बातें settle हो गई है गुलाम नबी साहब से भी बातचीत हो गई है, अंबिका जी से भी बातचीत हो गई है 21 मार्च को दिल्ली चलेंगे और एक-आध जो मसले हैं उसे सेटल कर लेंगे, बल्कि इन सारे प्रकरण से पहले दिल्ली के अंदर हमारी को-ऑर्डिनेशन कमेटी की बैठक हुई थी सभी लोग हमारे शीर्ष नेता उसमे थे, उसमें विजय बहुगुणा जी ने स्वयं सुझाव दिया कि कुछ मुद्दे थे, मंत्रिमंडल विस्तार आदि के...कि इन मामलों को बजट सत्र के बाद हल करेंगे, एक तो ये कहना कि हरीश रावत किसी settlement के रास्ते में था बिल्कुल गलत है...और ये जो है... लोगों को कौवा खाना था इसलिए तीतर बताकर के खाना चाहते हैं दूसरी बात जो आपने कही house के अंदर...जिस तरीके से proceeding चली वो सारे विधि विधान से चली, सारे grants...जिनमें हरक सिंह रावत जी के मंत्रालय के भी grants थे वो भी पारित हुए... किसी कट मोशन पर किसी तरीके का जो है विभाजन नहीं मांगा गया विभाजन मांगा जा सकता था, भाजपा मांग सकती थी, जिस तरीके से सारी grants चली उसी तरीके से विनियोग विधेयक भी चला, appropriation bill भी चला  appropriation bill माननीय स्पीकर महोदय ने कहा कि ध्वनिमत से पारित हुआ, और उन्होंने सदन स्थगित कर दिया सदन के साथ ही ये सबलोग उठकर खड़े हुए, जो कुछ लोग... जिसमें से दो चार हमारे साथी जो आज बागी हो गए वो लोग भी थे, और भाजपा के लोग भी थे हमने समझा कि वो गणेश जोशी जी को जो अरेस्ट किया गया है, उसके मामले में सदन के अंदर बवाल करना चाहते हैं और ये सारी बाते हैं...मैं इस विषय में कुछ और ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा, क्योंकि सारा मामला माननीय अदालत के सम्मुख है उच्च न्यायालय के सम्मुख है। मगर मैं इतना जरूर कहना चाहूंगा कि ये Impression देना इस तरह की बातें करना जो कही जा रही है, वो बिल्कुल गैर जरूरी है, और गैर जिम्मेदाराना है
 
वासिन्द्र मिश्र- हरीश जी, हम लोग चर्चा कर रहे थे कि कांग्रेस पार्टी और खास तौर से आलाकमान, मौजूदा हालात में पूरी तरह से आपके साथ है आप इसके लिए शुक्रगुजार हैं पार्टी नेतृत्व का, हम अपने दर्शकों को खास तौर से आपके जरिए बताना चाहते हैं कि जिस समय उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी सत्ता में आई थी तो उस समय माना गया था कि उत्तराखंड में पार्टी को सत्ता में लाने में आपकी सबसे बड़ी भूमिका रही, और सबसे ज्यादा मेहनत आपने किया था बावजूद इसके नारायण दत्त तिवारी को मुख्यमंत्री बना दिया गया और आपको मुख्यमंत्री पद से अलग रखा गया तो क्या अब जो पार्टी आलाकमान आपके साथ खड़ा है, वो एक तरह से पॉलिटिकल प्रायश्चित कर रहा है, उस अपनी पुरानी गलती का?
हरीश रावत- देखिए एक बात मैं आपको बताऊं...मैं एक मजदूर टाइप का व्यक्ति हूं, मेहनत करना मेरा स्वभाव है उस समय भी मैं पार्टी का बड़ा शुक्रगुजार था, उस समय पीसीसी अध्यक्ष बनाया, और मैंने मेहनत की जो मुझे करनी चाहिए थी सोनिया जी का नाम था और कांग्रेस चुनाव जीती, सोनिया जी का मैं बहुत आभारी हूं उन्होने मुझे बुलाकर ये सम्मान दिया...कहा कि हरीश हमको नारायण दत्त तिवारी को मुख्यमंत्री बनाना पड़ रहा है और मैने उनको धन्यवाद दिया मैंने उनको कहा ये आपका विशेषाधिकार है, मगर क्योंकि सारी लड़ाई में मैं था तो नारायण दत्त जी से कहिए कि वो मेरी बात भी सुनें और जो हमने वादे किए हैं उन वादों को पूरा करें ... कुछ चीजें नहीं हो पाईं...प्रारम्भ में ठीक रहा सब कुछ, लेकिन बाद में ठीक नहीं रह पाया लेकिन ये तथ्य है कि लगातार 22 , 24 विधायक हमारे साथ, हमारे समर्थन में थे, लेकिन हमने जो कुछ भी किया पार्टी के फ्रेमवर्क के अंदर किया, पार्टी के दायरे में किया, पार्टी के दायरे से बाहर नहीं गए हमने कहा नहीं...पार्टी ही न्याय देगी यही दलबदल विरोधी कानून जब बनाया गया, तो कानून बनाते वक्त मैं भी संसद में था, संसद में राजीव गांधी जी के नेतृत्व में, यही मंतव्य जाहिर किया गया था कि... आया राम गया राम को रोकना है, राजनीतिक अस्थिरता को रोकना है मैने कहा नहीं...राज्य के अंदर राजनीतिक स्थिरता रहे, इसकी राजनीतिक जिम्मेदारी हरीश रावत की है, और हमने वो राजनीतिक स्थिरता दी 5 साल नारायण दत्त जी की सरकार चली बाद में कालांतर में भाजपा आई, उसमें 2-3 बार मुख्यमंत्रियों का परिवर्तन आया, और दुर्भाग्य ये है कि बड़ी विषम परिस्थितियों में विजय बहुगुणा जी को जाना पड़ा जबकि उस समय भी पार्टी ने मेरे नाम पर विचार किया लेकिन किसी कारणवश मैने विजय बहुगुणा जी को समर्थन दिया और हम पूरी दृढ़ता के साथ विजय बहुगुणा जी के साथ खड़े रहे उनको बहुत...अप्रिय परिस्थिति के बावजूद आपदा के अंदर ज्वलंत विफलता दिखाई दी लोगो को उसके बावजूद भी पार्टी ने पूरा उनको अवसर दिया कि वो ठीक तरीके से स्थिति...गौरवपूर्ण तरीके से exit करें लेकिन विजय बहुगुणा जी ने उस मंतव्य का सम्मान नहीं किया जो पार्टी ने किया था और जो रास्ता मैने अपनाया था पार्टी के अंदर ही अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढने का, उसका भी अनुसरण नहीं किया इसका मुझे बहुत दुख है कि ऐसा हुआ, और मैं पहले ही कह चुका हूं कि मुझे दुख इस बात का नहीं है कि मेरी सरकार गई, दुख इस बात का है कि शैतान ने उत्तराखंड का घर देख लिया राजनीतिक अस्थिरता का दौर पता नहीं, अब कहा ले जाकर के इस राज्य को छोड़ेगा नौवां मु्खयमंत्री है आगे क्या होगा...कोई कह नहीं सकता तो इस राज्य को आज बचाने का सवाल है, ये बड़े अरमानों से बने राज्य की, जो बुनियादी धाराएं थी राज्य के निर्माण की, उनकी रक्षा का सवाल है।
 
वासिन्द्र मिश्र- इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में माना जा रहा है, कि भले ही तात्कालिक तौर पर आपकी सरकार चली गई है, लेकिन पार्टी के अंदर जो आपके विरोधी थे, वो एक झटके से साफ हो गए जिनको आप एक अरसे से हटाना चाह रहे थे अपने रास्ते से, चाहे वो विजय बहुगुणा हों, हरक सिंह रावत हों या सतपाल महाराज हों...और दूसरे आरोप ये लग रहे हैं कि आपने कभी भी विजय बहुगुणा को आराम से सरकार चलाने ही नहीं दिया आपने अपना स्पीकर बनवाया गोविंद कुंजवाल जी को और कुंजवाल जी के जरिए आपने हमेशा प्रॉब्लम क्रिएट करवाने की कोशिश की, विजय बहुगुणा की सरकार के सामने...तो ये जो 2 गंभीर बातें कही जा रही हैं आपके बारे में, इसमें कितनी सच्चाई है?
हरीश रावत - देखिए, एक बात मैं कहूं...गोविंद सिंह कुंजवाल जी को लोग एक आदर्श पुरुष के तौर पर जानते हैं,
जो सिद्धांतों की बात करते रहे हैं उनका जीवन एक ideal politician का जीवन है, और ब्लॉक प्रमुख, ग्राम प्रधान से लेकर यहां तक की लंबी यात्रा के बाद वो यहां तक आए हैं उनको मेरा आदमी कहना...शायद आप मेरा सम्मान बढ़ा रहे हों, लेकिन मैं समझता हूं ये एक ऐसे व्यक्तित्व का अपमान है...और वो एक स्वतंत्र व्यक्तित्व के व्यक्ति हैं इसलिए जो लोग मेरे खिलाफ हमेशा दुष्प्रचार करते रहे, उन्होंने शायद ये तय कर लिया है कि उत्तराखंड में कोई भला पुरुष ऐसा नहीं रहना चाहिए, जिस पर कुछ कुछ छीटे उछाल दिए जाएं, कुछ कुछ दुष्प्रचार कर दिया जाए...क्योंकि वो एक संवैधानिक प्रमुख हैं, मैं ज्यादा नहीं कहना चाहूंगा रहा सवाल विजय बहुगुणा जी को unsetteled करने का...इन 2 सालों के अंदर हमने विकास के सवालों के अलावा यदि कभी विजय बहुगुणा जी को कहीं पर numerical support की, किसी प्रकार के support की जरुरत पड़ी हो और वो support हम से हासिल हुआ हो, हमने उनकी प्रशंसा की हो, ऐसा कोई उदाहरण नहीं है हां जब इम्तिहान का वक्त आया तो विजय बहुगुणा जरुर फेल कर गए, हम फेल नहीं हुए जिस समय दैवीय आपदा आई, हमने कहा हम शत प्रतिशत अपने मुख्यमंत्री के साथ हैं, और वो ठीक कर रहे हैं, जबकि हम जानते थे कि वो ठीक नहीं कर पा रहे हैं। हम जानते थे कि अगर उनका हाथ हिलेगा तो और ज्यादा बर्बादियां होंगी, तो हमने उनके हाथ को थामने का काम किया तो इस लिए ये जो कहा जा रहा है...कि हमारे लिए... वो मैं समझता हूं, लोग उस बात को समझते हैं एक राजनीतिक कार्यकर्ता हूं, राजनीतिक कार्यकर्ता के तौर पर जो अपने राज्य के लोगों के हित में होता है, उसको कहता भर हूं, यदि वो कहना गुनाह है तो मैं गुनहगार हूं नहीं तो उत्तराखंड के अंदर मैं कह सकता हूं कि इतनी लंबी जो राजनीतिक स्थिरता रही, उसमें हरीश रावत का बहुत बड़ा योगदान रहा दुर्भाग्य की बात ये है कि राजनीतिक अस्थिरता राज्य पर उस वक्त में थोपी गई, जब मैं मुख्यमंत्री था...और मैं राज्य को एक सही रास्ते की तरफ, एक सही दिशा की तरफ, जो राज्य आंदोलन की भावना थी, उस दिशा कि तरफ ले जाने का काम कर रहा था
 
वासिन्द्र मिश्र - हरीश जी आप इस बात को लेकर तो आप खुश हैं कि आपके राजनीतिक विरोधी जो पार्टी के अंदर थे, सब बगैर निकाले अपने आप बाहर हो गए आपकी पार्टी से?
हरीश रावत - देखिए मैं उत्तर नहीं देना चाहता था आपकी बात का... क्योंकि उससे मेरा घमंड सा झलकता है, घमंड किसी को शोभा नहीं देता है हरक सिंह रावत 2002 में कांग्रेस छोड़ना चाहते थे मेरे पास आए, रोए...कहा सतपाल महाराज मुझको टिकट नहीं लेने देगा, और मैं कांग्रेस छोड़ रहा हूं, मैंने उन्हें समझाया...कहा मेरे PCC President  रहते तुम्हारे टिकट पर कोई आंच नहीं आएगी, उनको टिकट मिला वो जीते बल्कि 2004 के आस-पास किन्हीं कारणवश कोई पैनिक प्रसंग हुआ था, जब वो धरने पर बैठ रहे थे तो पार्टी उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करना चाहती थी मैंने आगे बढ़कर उनको बचाने का काम किया, विजय बहुगुणा जी को...जब ये चुनाव हार गए थे, सारा क्षेत्र विरोध कर रहा था,  मैं इनको अपने साथ ले जाता था, पहले इनके पिताजी की जिंदाबाद करता था, फिर इनका हाथ पकड़कर लोगों से कहता था विजय बहुगुणा जिंदाबाद ... लोग विरोध करते थे, कांग्रेस के लोग विरोध करते थे, कहते थे पहले ये थोपा गया... हमारे ऊपर क्यों थोप रहे हो, इस धरती से इसका कोई लेना देना नहीं लेकिन मैंने उनको सपोर्ट देकर के उस समय स्थापित करने में मदद करने का काम किया मैं ये नहीं कह रहा हूं कि वो मेरे तलबदार थे, उनका अपना बड़ा भारी नाम था, उनके पिताजी का बड़ा भारी नाम था...लेकिन राजनीतिक परिस्थितियां होती हैं, उन परिस्थितियों में मैं उनके साथ खड़ा रहा ये सारे लोग ऐसे हैं जिनके व्यक्तित्व को आगे बढ़ाने में हरीश रावत ने योगदान देने का काम किया है एक व्यक्ति को...जो आज बिखर कर मेरे खिलाफ सबसे ज्यादा बक-बक रहे हैं उसको कांग्रेस के अंदर मैं लाया था भाजपा से , एक व्यक्ति जिसको सारे कांग्रेस के लोगों के गले में हाथ रखकर मैंने सांसद के रूप में टिकट दिलवाने का काम किया, उसको सिद्ध करने का काम किया पार्टी के लिए, क्योंकि मुझे लगा कि इनको आगे करेंगे तो चुनाव जीता जा सकेगा मेरा calculation तो सही रहा लेकिन आज किन्हीं प्रलोभनों के कारण बागी बनकर के फिर रहे हैं, हमारी मुखालफत कर रहे हैं ऐसा नहीं है कि इनमे से किसी को मैं विरोधी मानकर के समझा और उनको राजनीतिक रूप से समाप्त किया आज उनके जाने का मैं ये कह सकता हूं कि मुझे तकलीफ है मगर उन्होंने एक गंदगी दी, एक घाव दिया, उत्तराखंड को दल-बदल के गर्त में धकेलने का काम किया, उसका थोड़ा सा मेरे मन में आक्रोश भी है,  जो चाहते हुए भी मेरी वाणी में जा रहा है
 
वासिन्द्र मिश्र- हरीश जी एक कहावत है कि जब बबूल का पेड़ लगाएंगे तो आम का फल कैसे निकलेगा ? तो आप कहीं कहीं अपने को भी दोषी मान रहे हैं कि इस तरह के अपात्र लोगों को पार्टी में लिया ?
हरीश रावत- हां ये बात आप ठीक कह रहे हैं...बोया पेड़ बबूल का आम कहां से खाय....कभी एकांत में मौका मिलेगा तो यही कहकर तसल्ली दूंगा, कहूंगा हरीश रावत तूने ही ऐसा किया था, ये ले फल भोग लेकिन अफसोस है हरीश रावत को ये फल देते मगर उन्होंने उत्तराखंड को घाव दे दिया ना, लोकतंत्र को घाव दे दिया।
 
वासिन्द्र मिश्र- एक और आखिरी सवाल है आपसे, हम चाहेंगे इस पर अपनी बेबाक राय बताइएगा कहा जाता था कि विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री बनाने में इंडिया बुल का बहुत बड़ा योगदान था वही इंडिया बुल जो पिछले दो दिन से सुर्खियां बन रही है, और टैक्स चोरी का मामला सामने रहा है देश में, इसमें कितनी सच्चाई है, आप उस समय सत्ता के करीब थे, पार्टी आलाकमान के करीब थे, इंडिया बुल की तरफ से क्या भूमिका रही विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री बनाने में जबकि उनके साथ एक भी विधायक नहीं था, उनके पीछे इंडिया बुल और डीएलएफ का कितना रोल था?
हरीश रावत- देखिए उस समय लोगों ने बहुत सारी बातें कही, उनको रिपीट करने से कोई फायदा नहीं है और इंडिया बुल का प्लेन उस समय देहरादून के हवाई अड्डे पर रहता था, वहीं लोगों की फेरी करवाने का काम करता था, वो भी सब लोगों ने देखने का काम किया उनके पुत्र के इंडिया बुल के साथ बिजनेस रिलेशन सब लोगों को मालूम है मगर एक सत्यता है, आप जो phenomenal rise पिछले 2012-13-14 के अंदर इंडिया बुल का हुआ है, total capital के अंदर... जरा उसको देखिए तो बहुत सारे unanswered question  के answer  अपने आप मिल जा रहा है ।इस विषय में मैं ज्यादा नहीं बोलूंगा, क्योंकि unsubstantiated किसी भी बात को नहीं कहना चाहता
 
वासिन्द्र मिश्र- आप इतना तो डिमांड करेंगे कि इस तरह की जो भी संस्थाएं हैं, जो टैक्स चोरी में शामिल रहती है, जो healthy democracy को damage करती है, जो governance में interfere करती है और policies अपने मुताबिक बनवाती है democracy...parliamentary form of government  सबको कहीं कहीं कलंकित कर रही है इनके विरुद्ध उच्चस्तरीय जांच करवाकर कार्रवाई होनी चाहिए
हरीश रावत- देखिए मोदी जी यही कहकर आए थे मगर वो तो ऐसा लग रहा है कि ठीक उल्टा करने पर तुले हुए हैं इसलिए इस विषय में सैद्धांतिक रूप से अच्छी बात है, मैं समझता हूं आपके चैनल के माध्यम से देश इसका cognizance जरूर लेगा, इतना जरूर है...मैं सारी ताकतों से प्रार्थना करना चाहूंगा कि सबको छांटों, ये मेरे छोटे राज्य को जो बॉर्डर स्टेट है, अरुणाचल बॉर्डर स्टेट है इनको क्यों छांटा तुमने, देश की सुरक्षा का सवाल भी है देश रहेगा तो हम सब रहेंगे, सरकारें आएंगी जाएंगी, व्यक्ति आएंगे जाएंगे, .मुख्यमंत्री आएंगे-जाएंगे.... मगर राष्ट्रीय सुरक्षा पर जिससे चिंता बढ़े ऐसे सवालों को करने से पहले धन की ताकतों को भी परहेज़ करना चाहिए औऱ सत्ता की ताकतों को भी परहेज़ करना चाहिए
 
वासिन्द्र मिश्र- बहुत-बहुत धन्यवाद आपको हमसे बात करने के लिए

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें