शनिवार, 6 फ़रवरी 2016

2019 में नीतीश vs मोदी होगा चुनाव ?

2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारियों ने जोड़ पकड़ लिया है... और अब सबकी नज़र गठबंधन की राजनीति पर है... बिहार में महागठबंधन की ऐतिहासिक जीत के बाद ही ये सवाल उठने शुरू हो गए थे कि क्या ये गठबंधन सुचारू  ढंग से चल पाएगा ? लेकिन बिहार के बाद अब उत्तरप्रदेश में भी इसकी ही तैयारी हो रही है... उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले हो रहे महागठबंधन की तैयारियों को देखते हुए यही सियासी मतलब निकाला जा सकता है कि अगले लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के मुकाबले में नीतीश कुमार को उतारा जा सकता है...
मोदी सरकार बनने के लगभग 2 साल होने जा रहे हैं... और जैसे-जैसे वक्त आगे बढ़ रहा है... मोदी का 2014 का करिश्मा कम होता हुआ नज़र आ रहा है... 2014 में चुनाव के समय Modi wave से लोग खासे आकर्षित हुए थे और उसका एक काऱण ये भी था कि बीजेपी ने नरेन्द्र मोदी को एक बेदाग उम्मीदवार के रूप में आगे किया था... लेकिन अब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी एक बेदाग छवि वाले नेता के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर उभर रहे हैं... अगर देश के दूसरे नेताओं की बात करें तो... कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी की छवि पर भी नेशनल हेराल्ड केस के बाद दाग लग चुका है.. 
कांग्रेस के बारे में एक बात तो जगज़ाहिर है कि मौका आने पर अपने सियासी विरोधियों को निपटाने के लिए कांग्रेस पार्टी कभी भी खुद को बी टीम बनाने से नहीं हिचकती ..साथ ही ये पार्टी हमेशा छोटी पार्टियों को आगे करके अपनी लड़ाई लड़ती है... चाहे वो जनता पार्टी को हराने के लिए चौधरी चरण सिंह का इस्तेमाल करना हो या वीपी सिंह के समय में चंद्रशेखर का इस्तेमाल... और इस बार कांग्रेस को बिहार में नीतीश का जादू दिखा और यही वजह है कि कांग्रेस नीतीश को आगे कर बीजेपी से लड़ना चाह रही है ...
कांग्रेस समझ गई है कि नीतीश में मोदी को टक्कर देने की क्षमता है और कांग्रेस इसे हर हाल में भुनाना चाहती है... वहीं नीतीश को आगे लाने में कोई clash of interest भी नहीं है ... इसके साथ ही ये जानना भी ज़रूरी है कि नीतीश का कद बढ़ेगा तो लालू दबाव में आएंगे. लेकिन इससे नीतीश को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला, क्योंकि नीतीश की नज़र अब बिहार पर नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर है ।
वहीं मोदी सरकार अब Defensive Mode में नज़र आ रही है... जहां सरकार ने देश के हित में लिए गए कई फैसले से अपने कदम वापस खींच लिए हैं जिनमें Land Acquisition Bill, Land Reforming Bill शामिल है और यही कारण है कि बीजेपी का हार्डकोर वोटर अब अपनी सरकार से मायूस होता नज़र आ रहा है... साथ ही पार्टी के साथ नए वोटरों के जुड़ने की तादाद भी काफी कम हो गई है...
एक ओर जहां मोदी सरकार की विश्वसनीयता में तेज़ी से गिरावट हो रही है तो वहीं इसका फायदा उठाते हुए नीतीश कुमार बिहार चुनाव से पैदा हुए माहौल को केन्द्र स्तर पर शिफ्ट करने की पूरी तैयारी कर चुके हैं।
अगर हाल ही में हुए बिहार चुनाव की बात करें तो वहां भी महागठबंधन की शुरुआत कांग्रेस पार्टी ने ही की थी... कांग्रेस ने ही सबसे पहले जेडीयू को अपनी ओर से समर्थन का ऐलान किया था...और इतना ही नहीं यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान  ही कांग्रेस ने नीतीश के टैलेंट को पहचानना शुरू कर दिया था और इसकी मिसाल कई बार हमें  राहुल गांधी के भाषणों में देखने को मिली जब उन्होंने नीतीश कुमार की खुलकर तारीफ की थी । इससे ये भी ज़ाहिर होता है कि अलग अलग पार्टी, नीतीश कुमार पर कहीं ज्यादा भरोसा करती है।

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