मंगलवार, 15 दिसंबर 2015

क्यों बदल गए 'सरकार' !


भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन के जरिए देश में अपनी पहचान बनाने वाले अरविंद केजरीवाल को राजनीति में महज कुछ साल बिताने के बाद आर्थिक आरोप के खिलाफ जांच एजेंसी की कार्रवाई बदले की भावना से की गई कार्रवाई नज़र आने लगी है ... फिर भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे मुलायम सिंह यादव, मायावती और वीरभद्र सिंह सरीखे नेताओं और केजरीवाल में क्या फर्क है .. भ्रष्टाचार के आरोपों के घेरे में आने पर अपने या करीबियों के खिलाफ जांच एजेंसी की कार्रवाई होने पर इन्होंने भी हमेशा इसे बदले की कार्रवाई ही बताया है ..

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि किसी मुख्यमंत्री या उसके करीबी के घर या ऑफिस पर सीबीआई ने छापेमारी की है .. इससे पहले भी देश में अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में राज्यों के मुख्यमंत्रियों या उनके करीबियों के खिलाफ कार्रवाई होती रही है ... पूछताछ होती रही है ...नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे ... उनके करीबियों के विरोध में सीबीआई ने कार्रवाई की थी .... मायावती हों, मुलायम सिंह यादव हों या फिर वीरभद्र सिंह हों इन सभी पूर्व और वर्तमान मुख्यमंत्रियों और इनके करीबियों से सीबीआई पूछताछ कर चुकी है .. इनके खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है ... और समय-समय पर अभी भी कर रही है ...

अगर भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना है .... तो आज की भी सीबीआई की कार्रवाई पर अरविंद केजरीवाल को ऐतराज़ नहीं होना चाहिए .... ये सबको याद होगा कि सत्ता में आने के पहले तक केजरीवाल का मुख्य एजेंडा भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई ही था ..  ऐसे में अगर उनके या उनके किसी करीबी के आवास या फिर उनके दफ्तर में भ्रष्टाचार के विरोध में कोई जांच एजेंसी कार्रवाई कर रही है तो इस पर इतना हो हल्ला क्यों ? ...
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को तो इस कार्रवाई का समर्थन करना चाहिए ... अगर उनके किसी करीबी पर आर्थिक भ्रष्टाचार के आरोप हैं और इस मामले में जांच एजेंसी इसकी सच्चाई परखना चाह रही है तो केजरीवाल को इस बात का समर्थन करना चाहिए .. क्योंकि वो खुद भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के हिमायती रहे हैं ... ऐसे में केजरीवाल अगर बार बार ये ट्वीट कर रहे हैं कि बदले की भावना से कार्रवाई की जा रही है .. तो उनमें और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे बाकी दलों के मुख्यमंत्रियों में क्या फर्क रह जाता है ..

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