शनिवार, 14 मार्च 2015

मोदी की Diplomacy !

नरेंद्र मोदी भारतीय प्रधानमंत्री के तौर पर अब तक 12 देशों की यात्राएं कर चुके हैं ... ये यात्राएं पहली नज़र में विदेश नीति का हिस्सा नज़र आती हैं ... जो दो देशों की बीच के सामरिक और व्यापारिक रिश्तों को सुदृढ़ बनाने के लिए की गई हों ... लेकिन मोदी की अब तक की सारी विदेश यात्राओं पर नज़र डाले तो ये साफ हो जाता है कि ये यात्राएं महज मेज़बान देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूती देने के लिए नहीं की गई हैं ..

नरेंद्र मोदी भूटान, ब्राज़ील, नेपाल, जापान, अमेरिका, म्यांमार, ऑस्ट्रेलिया, फिजी, सेशेल्स, मॉरीशस और श्रीलंका की यात्रा कर चुके हैं ... ब्राज़ील, अमेरिका, म्यांमार और ऑस्ट्रेलिया की बात छोड़ दें तो बाकी देशों में नरेंद्र मोदी ने State Visit किया है … जिसका मकसद दोनों देशों के आपसी रिश्तों को एक दूसरे के हित में मजबूत बनाने की रणनीति रही है … लेकिन क्या सिर्फ इसी कूटनीतक मकसद से नरेंद्र मोदी ने इन देशों का दौरा किया है ?

नरेंद्र मोदी दरअसल इन यात्राओं के जरिए Pro American Agenda को आगे बढ़ा रहे हैं … चीन का बढ़ता दबदबा भारत को सोचने पर मजबूर करता रहा है लेकिन अमेरिका भी नहीं चाहता कि एशिया महाद्वीप का देश चीन और ताकतवर बनता जाए … बिजनेस के मामले में चीन अमेरिका को चुनौती देता नज़र आता है तो चीन की बढ़ती ताकत भारत को अपने कूटनीतिक रिश्तों पर बार-बार विचार करने को मजबूर करता है …


लिहाजा नरेंद्र मोदी उन देशों में जा रहे हैं जहां चीन का दबदबा बढ़ रहा है .. या फिर ऐसे देश जो चीन के पूरी तरह खिलाफ हैं ... भारत लगातार हिंद महासागर और इसके तट पर बसे देशों में चीन के बढते असर से दबाव में है और मोदी की इन यात्राओं से कोशिश उस असर को कम करने की है .. चीन की जो योजनाएं हैं फिलहाल भारत उसका मुकाबला करने के लिए सक्षम नहीं है लिहाजा कोशिश ये है कि पड़ोसियों से रिश्ते मजबूत किए जाएं ताकि चीन के बढते असर पर लगाम लग सके .. 

कांग्रेस को मिला नया एजेंडा !

दिल्ली पुलिस की हालिया कार्रवाई ने अपने राजनैतिक इतिहास में अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रही कांग्रेस को एक और मौका दे दिया है जिसे मुद्दा बनाकर कांग्रेस अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं की निराशा और हताशा को जोश में बदल सकती है ... ऐसा लगता है कि कांग्रेस पार्टी धीरे-धीरे राजीव गांधी के दौर में जा रही है ... वो दौर जब राजीव गांधी ने बाहर से समर्थऩ देकर चंद्रशेखर की सरकार बनाई थी ... कुछ ही समय बाद पीएमओ की तरफ से दो कॉन्स्टेबल राजीव गांधी के घर के बाहर घूमते दिखाई दिए थे... इस बात ने राजीव गांधी को इतना नाराज कर दिया कि उन्होंने चंद्रशेखर की सरकार से समर्थन वापस ले लिया और नतीजा ये हुआ कि सरकार गिर गई ..
हालांकि मौजूदा हालात अलग हैं ... केंद्र में इस समय बहुमत की सरकार है और कांग्रेस की नाराजगी का तात्कालिक असर केंद्र सरकार पर नहीं पड़ेगा .. लेकिन बीते दो दिनों में जिस तरह से दिल्ली पुलिस की कार्रवाई देखने को मिली है वो राजीव गांधी के दौर में हुई घटना की याद ताजा करती है ... साथ ही इस कार्रवाई ने मनमोहन सिंह की honesty और integrity को बैसाखी बनाकर आगे बढ रही कांग्रेस को एक और मुद्दा भी दे दिया है .. कांग्रेस दिल्ली पुलिस की तरफ से की गई इस कार्रवाई को मुद्दा बनाकर केंद्र सरकार और केंद्र में मौजूद सत्तारूढ दल पर हमला तेज कर सकती है ..
इसी बीच राहुल गांधी का बजट सत्र के दौरान इस तरह से मौजूद नहीं होना एक रहस्य बन गया है ... सवाल उठ रहे हैं कि राहुल गांधी संसद का सत्र छोड़कर कहां हैं और क्यो हैं .. औऱ उनकी इस यात्रा को इतना गोपनीय क्यों रखा गया है ..राहुल गांधी एसपीजी की सुरक्षा कवच में हैं और इस नाते सरकार और सुरक्षा एजेंसी को राहुल गांधी के मूवमेंट की जानकारी रखने का हक़ है .. ये बात अभी तक साफ नहीं हो पाई है कि एसपीजी की तरफ से इसकी जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह विभाग को दी गई है या नहीं … ...इस संबंध में पूछे गए सवाल को सोनिया गांधी समेत कांग्रेस के तमाम बड़े नेता टालते आ रहे हैं .. ये अपने आप में सवाल बना हुआ है कि कांग्रेस का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जो आने वाले दिनों में अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालने की तैयारी में है .. उसकी यात्रा को इतना गोपनीय रखने का कारण क्या है .. और ऐसे में अगर दिल्ली पुलिस सुरक्षा की आड़ में इसके बारे में जानकारी लेने की कोशिश कर रही है तो ये दिल्ली पुलिस के लिए भी एक चुनौती है ...