गुरुवार, 11 दिसंबर 2014

सिद्धांत पर सत्ता हावी !

लोकतंत्र की अऩिवार्य आवश्यकता है राजनीति और राजनीति की अनिवार्य जरूरत है विचारधारा...अलग अलग विचारधाराओं का संयोग ही एक स्वस्थ लोकतन्त्र की बुनियाद बनता है...शायद इसीलिए लोकतन्त्र में विपक्ष की भूमिका खासी अहम मानी गई है... साथ ही एक हकीकत ये भी है कि कई बार सत्ता की जरूरतें विचारधारा पर हावी हो जाती है....और कोई भी राजनीतिक दल विपक्ष में रहते हुए जिन मुद्दों के सहारे राजनीति करता है सत्ता में आते ही उन्हें तिलांजलि दे देता है क्योंकि इससे उनके राजनीतिक हित जुड़े होते हैं... खुद को राष्ट्रवाद का सबसे बड़ा झंडाबरदार बताने वाली बीजेपी की हालत भी कुछ ऐसी ही है... जिसकी विपक्ष के तौर पर विचारधारा और सत्ता में रहते हुए सामने आ रही विचारधारा दोनों में खासा फर्क है...बांग्लादेश से जमीन अदला-बदली के मुद्दे पर बीजेपी का यू टर्न इसकी ताजा मिसाल है...
अपने राजनीतिक इतिहास में पहली बार देश की सत्ता पर पूर्ण बहुमत से काबिज होने वाली बीजेपी अब चेहरा बदलने की कवायद में जुटी है और इस कवायद में उसने ऐसे कई मुद्दों से किनारा किया है जो उसके तरकश में कभी ब्रह्मास्त्र की हैसियत रखते थे ....पिछली एनडीए की सरकार में गठबंधन की मजबूरी के नाम पर बीजेपी ने विवादित मुद्दे छोड़ दिए थे लेकिन पूर्ण बहुमत की सरकार में भी पुराने मुद्दे हाशिए पर रख दिए गए हैं....अब बीजेपी नेता कश्मीर में धारा 370 का नाम नहीं लेते...समान नागरिक संहिता और राममंदिर मुद्दे को तो छोड़ ही दीजिए...
दरअसल बीजेपी को लेकर ये सारे सवाल सिर्फ इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि सत्ता में आने से पहले बीजेपी ने इन तमाम मुद्दों को राष्ट्रवाद की चाशनी में लगाकर पेश किया था..खासकर बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे पर तो सिर्फ बीजेपी ने ही नहीं बल्कि उससे जुड़े तमाम संगठनों का बड़ा अभियान सालों से चल रहा है...लेकिन अब जबकि बांग्लादेश से जमीन की अदला-बदली के मुद्दे पर केन्द्र की दिलचस्पी बढ़ती दिख रही है तो सवाल उठने लाजिमी है क्योंकि इस मुद्दे के विरोध में बीजेपी के दिग्गज नेता विपक्ष में रहते हुए खासा हंगामा मचा चुके हैं
दरअसल बांग्लादेश से जमीन की अदला बदली का मुद्दा काफी पुराना है...साल 1974 में पहली बार इसे लेकर एक समझौता हुआ था लेकिन बात नहीं बनी...दोनों देशों के बीच उन 162 जमीन के टुकड़ों की अदला-बदली होनी है जो बंटवारे के वक्त एक दूसरे के क्षेत्र में रह गई थीं....इसे लेकर पिछली यूपीए सरकार एक प्रस्ताव लाई थी जिसका बीजेपी ने ये कहते हुए विरोध किया था कि इससे संविधान के मूल ढांचे पर चोट होगी और सुरक्षा के साथ समझौता होगा.... दरअसल इस प्रस्ताव को लेकर होने वाले 119वें संविधान संशोधन का विरोध करते हुए बीजेपी अतीत में इतने तर्क दे चुकी है कि अब उसकी बदली हुई रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं...
बीजेपी ने कांग्रेस पर हमेशा ही वोटबैंक के चक्कर में बांग्लादेशी घुसपैठियों को पनाह देने, उनका राशन कार्ड, वोटरआई कार्ड बनवाकर वोटबैंक के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है इतना हीं नहीं बांग्लादेशी घुसपैठियों को बीपीएल स्कीम के तहत फायदा मिलने पर भी बीजेपी सवाल खड़े करती रही है कि इससे मूल भारतीयों का हक मारा जाता है ...भगवा संगठनों का दावा रहा है कि पूर्वोत्तर में कांग्रेस की सरकारें बांग्लादेशी घुसपैठियों का राजनीतिक इस्तेमाल करती रही हैं...सरकारी और गैर सरकारी आंकड़े भी देश में बांग्लादेशी घुसपैठियों की तादाद 3 से 5 करोड़ तक आंकते रहे हैं...हालांकि ये कयास ही है क्योंकि लम्बे वक्त से देश में रह रहे बांग्लादेशियों की पहचान खासी मुश्किल है...पूर्वोत्तर में तो इनकी संख्या इतनी ज्यादा हो चुकी है कि अब ये राजनीतिक तौर पर भी दखल देने लगे हैं...
भगवा संगठनों का आरोप रहा है कि कांग्रेस ने जानबूझकर इन्हें घुसपैठ की छूट मुहैया कराई और तुष्टिकरण की राजनीति की...जमीन से अदला-बदली के मुद्दे को भी बीजेपी इसी से जोड़ती रही है... लेकिन अब वक्त बदल चुका है...अब बीजेपी को बांग्लादेश से जमीन की अदला-बदली पर एतराज नहीं है....खुद प्रधानमंत्री पूर्वोत्तर दौरे में ये बात कह चुके हैं...तो सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये बीजेपी का तुष्टिकरण नहीं है ?
दरअसल देश में पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने वाली बीजेपी अब अपनी छवि बदलने को बेचैन है...अब वो ना केवल पार्टी का विस्तार चाहती है बल्कि साम्प्रदायिक छवि से भी बाहर निकलना चाहती है...माहौल और मौका देखकर वो अपना रुख निर्धारित कर रही है...कश्मीर में धारा 370 से किनारा इसी रणनीति का हिस्सा है...तो पूर्वोत्तर में सीमा विवाद हल करने के नाम पर कांग्रेसी प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की कोशिश भी इसी सिलसिले की कड़ी है....लेकिन सवाल ये कि दूसरो पर वोट बैंक के लिए तुष्टिकरण का आरोप लगाने वाली बीजेपी अब खुद क्या कर रही है...क्या बीजेपी के लिए सत्ता सिद्धांत पर हावी हो रहे हैं ..

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