रविवार, 21 सितंबर 2014

Moderate Modi !

बीते तीन चार दिनों से मुसलमानों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के कई मतलब निकाले जा रहे हैं...प्रतिक्रियाएं आ रही हैं... सियासत हो रही है .. कोई दल इसे भरोसे के लायक नहीं बता रहा तो कोई इसे सियासी बयानबाजी करार दे रहा है तो कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने तहे दिल से मोदी के इस बयान का स्वागत किया है ...

देखा जाए तो मोदी के इस बयान पर हो हल्ला क्यों .. कल तक एक कट्टरवादी नेता की छवि रखनेवाले मोदी का बदला हुआ रुप देश ने पिछले साल ही देख लिया है ..लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी हमेशा अतिवाद और हार्डलाइन से बचते रहे...यहां तक कि जिस संघ परिवार से मोदी का ताल्लुक है... मोदी उससे भी कहीं दूर ही नजर आए...कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक सबका साथ सबका विकास का नारा देकर नरेंद्र मोदी ने हिंदुस्तान का दिल और भरोसा दोनों जीता...यही वजह है कि पीएम बनने के बाद भी मोदी ने कोई ऐसी बात या तकरीर नहीं की जिसमें सांप्रदायिकता, जातिवाद या क्षेत्रियता जैसी कोई भी बात झलकती हो...यहां तक कि स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले के प्राचीर से उनके भाषण ने कई लोगों को बेहद हैरान किया...क्योंकि उसमें हिन्दूवाद पर आधारित कोई ऐसी बात नहीं थी जिसकी कई लोग उम्मीद कर रहे थे.... बल्कि मोदी का बिना कागज के देश की समस्याओं पर आधारित भाषण उन्हें एक कुशल राजनेता के रूप में दिखाने में कामयाब रहा....पीएम मोदी के इस नए अंदाज ने एक बार फिर देश के लोगों में विकास की नई उम्मीद जगाई...

प्रधानमंत्री मोदी अपने हर भाषण में 120 करोड़ की आबादी को साथ लेकर आगे बढ़ने की बात कहते आए हैं...गरीब से गरीब और समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के विकास पर जोर देते आए हैं...साथ ही मोदी ये अच्छी तरह से जानते हैं कि किसी भी देश का विकास तभी हो सकता है जब आंतरिक व्यवस्था के साथ साथ पड़ोसी मुल्कों से उसके संबंध बेहतर हों...इसलिए पीएम बनने के बाद सबसे पहले उन्होंने सार्क देशों  से संबंध मजबूत करने की पहल की ... और अपनी इस कोशिश में वो काफी हद तक सफल भी रहे...

अपने छोटे से कार्यकाल में मोदी अटलजी के बाद संघ परिवार से सक्रिय राजनीति और सरकार में आए दूसरे बड़े नेता हैं, जिनकी विदेश नीति में पंडित नेहरु और इंदिरा की झलक दिखाई देती है...वहीं आंतरिक नीति में पंडित दीनदयाल उपाध्याय का Integrated Humanism, गांधी का ग्राम स्वराज और लाल बहादुर शास्त्री के जय जवान जय किसान की छाप देखने को मिल रही है... ये नरेंद्र मोदी का बदला अंदाज और उनकी बदली छवि है जो पीएम के तौर पर उनकी लोकप्रियता को और बढ़ा रही है ...और शायद इसी नए सोच ने मोदी को Moderate मोदी बना दिया है...

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