रविवार, 21 सितंबर 2014

गठबंधन की 'गांठ' !

महाराष्ट्र में गठबंधन की गांठे दरक रही हैं...जहां एक ओर 25 साल का रिश्ता है तो दूसरी ओर 12 साल का रिश्ता... दोनों के रंग फीके पड़ रहे हैं... ये सवाल उठने लगे हैं कि  क्या गठबंधन की सियासत का दौर खत्म होने वाला है... क्या 2014 की शानदार कामयाबी के बाद बीजेपी अकेले दम पर हर संग्राम जीतने का हौसला पा चुकी है... दरअसल हरियाणा में अपनी पुरानी सहयोगी हरियाणा जनहित कांग्रेस का हाथ झटकने के बाद अब बीजेपी का महाराष्ट्र में शिवसेना से रण होता दिख रहा है... कई दिनों से Seat Sharing के मसले पर 25 साल पुराने सहयोगियों में सहमति नहीं बन पा रही है ... यही हाल 12 साल पुराने कांग्रेस और एनसीपी का भी है ..

गठबंधन की सियासत भले ही भारतीय राजनीति का हिस्सा बन चुकी हो लेकिन हर बार ये कामयाब रहे ये मुमकिन नहीं है...यहां दोस्तों को दुश्मन बनते देर नहीं लगती और ना ही दुश्मनी ताऊम्र निभाई जाती है...और मौजूदा वक्त में देश की दोनों प्रमुख पार्टियां इसी दौर से गुजर रही हैं जिनके सहयोगी ही उनके लिए मुसीबत बने हुए हैं..बीजेपी के सामने शिवसेना तो कांग्रेस के सामने एनसीपी खड़ी है...सवाल सीटों का है सो शिकायत, मानमनौव्वल, तल्खी, और धमकी ये सबकुछ एक साथ दिख रहा है...

गठबंधन की राजनीति का प्रयोग कई बार हुआ है लेकिन इसे कामयाबी से चलाने का श्रेय सिर्फ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को है ... जिनके वक्त में एनडीए में कुल 24 सहयोगी हुआ करते थे...एनडीए की इसी कामयाबी ने कांग्रेस को भी यूपीए बनाने पर मजबूर किया था...लेकिन कांग्रेस गठबंधन की सरकार में शामिल अपने सहयोगियों के साथ उचित व्यवहार बनाकर नहीं चल पाई...और वक्त वक्त पर अपने राष्ट्रीय अधिवेशनों में एकल चलो की नीति पर आगे चलने की वकालत करती रही...लेकिन इसके लिए पूर्ण बहुमत की दरकार थी जिसे कांग्रेस हासिल नहीं कर पाई...यूपी में 2007 में बीएसपी और 2012 में एसपी को मिली कामयाबी ने इस बात के संकेत दे दिए थे कि जनता गठबंधन की राजनीति को अपनाने के मूड में नहीं है...और ये बात एक बार फिर पुख्ता तौर पर 2014 में तब साबित हो गई जब लोकसभा चुनावो में बीजेपी को अकेले दम पर बहुमत मिल गया...अब सवाल ये कि क्या महाराष्ट्र का चुनाव बदले हुए दौर का नया चैप्टर लिखने जा रहा है
महाराष्ट्र के चारों प्रमुख दल सुलह समझौते का रास्ता खोलने के दावे तो कर रहे हैं, साथ ही अपनी अपनी लिस्ट भी तैयार कर रहे हैं...जाहिर है अगर इस बार गठबंधन के तहत चुनाव नहीं हुआ तो महाराष्ट्र का महाभारत सबसे ज्यादा दिलचस्प होगा...

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